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'नवरस': क्या हैं ये नौ कहानियां, जो कभी आपको हंसाएगी तो किसी को देख घिन आएगी!

फिल्ममेकिंग मेहनत वाला काम है. कई साल लोग जब एक विज़न के साथ जुटकर काम करते हैं, तब जाकर एक फिल्म बन पाती है. फिल्म बनने के बाद उसे थिएटर पर रिलीज़ करना होता है. थिएटर इंडस्ट्री, जिससे कितने ही लोगों के घर चलते हैं. पिछले साल कोरोना महामारी ने फिल्म और थिएटर इंडस्ट्री को ठप कर दिया. फिल्मों की शूटिंग बंद हो गई. ऐसे में स्टार्स का काम फिर भी चल जाता है. लेकिन असली आफत आती है फिल्म के तकनीकी विभाग में काम करने वालों पर. असंख्य लाइटमैन, साउंड रिकॉर्डिस्टस, स्पॉट बॉयज़ बेरोजगार हो गए.

ऐसे माहौल में सिनेमा जगत की दो बड़ी हस्तियों ने कुछ सोचा. ऐसा जिससे सिनेमा भी समृद्ध हो सके और उसे चलाने वाले लोगों का भी भला हो जाए. ये दो लोग थे, मणि रत्नम और जयेन्द्र. दोनों ने साथ मिलकर फैसला लिया एक एंथोलॉजी सीरीज़ बनाने का. सीरीज़ का स्केल बड़ा होगा. जिसके चलते उसकी रीच बड़ी होगी. तमिल फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज डायरेक्टर्स और एक्टर्स उसका हिस्सा होंगे. और पूरे प्रोजेक्ट से जो भी मुनाफा होगा, वो जाएगा सीधा Film Employees Federation of South India के मेंबर्स के खाते में. ताकि उन्हें कोरोना महामारी से हुए नुकसान से उबरने में मदद की जा सके. प्रोजेक्ट से सिने वर्कर्स मदद होगी. लेकिन सिनेमा कैसे समृद्ध होगा? इसके कई जवाब हैं. पहला है सीरीज़ की थीम. काव्य रचना के नौ रसों यानी शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, वीभत्स, अदभुत, भय और शांति को इसका आधार बनाया है. कहा जाता है कि हर इंसान अपनी ज़िंदगी में एक न एक बार इन रसों को जरुर अनुभव करता ही है. दूसरा है इन भावों को स्क्रीन पर जीवंत करने वाले कलाकार. जिनमें सूर्या, सिद्धार्थ, प्रकाश राज, योगी बाबू, रेवती, विजय सेतुपति, पार्वती जैसे नाम शामिल हैं. ऐसे उम्दा कलाकारों को डायरेक्ट करेंगे प्रियदर्शन, बेजॉय नाम्बियार, गौतम वासुदेव मेनन और कार्तिक सुब्बाराज जैसे डायरेक्टर्स. मणि रत्नम और जयेन्द्र पहले ही तय कर चुके थे कि वो सीरीज़ के किसी भी हिस्से को डायरेक्ट नहीं करेंगे. बस उसे प्रड्यूस करेंगे.

ये सीरीज़ आ कहां रही है. इसका जवाब है नेटफ्लिक्स. अब बात रही उन नौ रसों की. कौनसा रस किस डायरेक्टर और कलाकार के हिस्से आया. और उन्होंने अपनी कहानी को खास कैसे बनाया. अब बात करेंगे ऐसे ही पैमानों की. जानेंगे कि क्यों इस सीरीज़ को लेकर इतना हाइप है.

Bharat Talkies


#1. गिटार कम्बी मेले निंद्रे
रस: शृंगार
डायरेक्टर: गौतम वासुदेव मेनन

कहानी का आधार है शृंगार रस. कुछ दिन पहले इसकी एक फोटो सोशल मीडिया पर घूम रही थी. जहां सूर्या बाइक चला रहे हैं. उनके माथे पर हेड बैंड बंधा है. पीछे वाली सीट पर एक लड़की बैठी है. बाइक पर सूर्या को देखकर ‘आयुदा इड़त्तु’ याद आती है. जिसे मणि रत्नम ने डायरेक्ट किया था. हिंदी में उसे ‘युवा’ के टाइटल से भी बनाया गया था. खैर, ‘आयुदा इड़त्तु’ में सूर्या की बाइक पर जो लड़की बैठी थी, वो उससे प्यार करते थे. यहां भी मामला कुछ ऐसा ही है. सूर्या ने कहानी में कमल का किरदार निभाया है. जो एक म्यूज़िशियन है. वहीं उनके पीछे वाली सीट पर बैठी हैं प्रयागा मार्टिन. जो कहानी में उनका लव इंटरेस्ट नेत्रा बनी हैं.

Kamal
फंकी किस्म के लुक में दिखाई देंगे सूर्या

सीरीज़ के सेगमेंट को डायरेक्ट किया है गौतम वासुदेव मेनन ने. नाइंटीज़ के हिंदी सिनेमा दर्शकों को ‘मैडी’ जैसा किरदार देने का श्रेय उन्हीं को जाता है. ‘गिटार कम्बी मेले निंद्रे’ की शूटिंग पिछले साल नवंबर में शुरु हुई थी. जिसे महज पांच दिनों में पूरा कर लिया गया था.


#2. इदिरी
रस: करुण
डायरेक्टर: बेजॉय नाम्बियार

एक शख्स धम से दरवाज़ा खोलता है. दरवाज़े के पीछे खड़ी औरत उसे देखकर चौंक जाती है. उसके चेहरे का रंग हवा हो जाता है. उसके सामने खड़े शख्स का हाल भी कुछ अलग नहीं. वो भी औरत को देखकर उतनी ही हैरानी में है. अपने इस वाकये को याद कर किसी से कहता है,

“उसने मेरा चेहरा देख लिया. लेकिन मैं नहीं जानता कि क्या वो सच में मुझे देख पाई.”

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मतलब विजय सेतुपति, रेवती और प्रकाश राज एक साथ, और क्या बहाना चाहिए देखने के लिए?

27 जुलाई को रिलीज़ हुए ‘नवरस’ के ट्रेलर में ये सीन देखने को मिलता है. जो ‘इदिरी’ से लिया गया है. घर में घुसने वाले शख्स हैं विजय सेतुपति. जो किसी परिचय के मोहताज नहीं. उनके सामने खड़ी हैं रेवती. ‘साथिया ये तूने क्या किया’ वाली रेवती. कहानी में इन दोनों किरदारों के बीच क्या कनेक्शन है, ये देखने लायक होगा. कहानी का तीसरा बड़ा पहलू हैं प्रकाश राज. जो ट्रेलर में एक जगह कहते हुए सुनाई देते हैं,

“तुमने उस इंसान को मार डाला. क्या तुमने उसके परिवार के बारे में सोचा?”

डायरेक्टर बेजॉय नाम्बियार ने करुण रस को ऐसी मिस्ट्री में कहां फिट किया है, ये कहानी देखकर पता चलेगा.


#3. समर ऑफ 92
रस: हास्य
डायरेक्टर: प्रियदर्शन

नौ रसों में से प्रियदर्शन ने वो रस चुना, जिसमें उन्हें महारत हासिल है. ‘हास्य’ रस. बाकी उनकी डायरेक्ट की हुई ‘हेरा फेरी’, ‘हंगामा’, ‘हलचल’ और ‘भागम भाग’ को मिला रिस्पॉन्स यही दर्शाता है कि कॉमेडी में उनका हाथ पकड़ना आसान नहीं. ‘नवरस’ में प्रियदर्शन वाले सेगमेंट का नाम है समर ऑफ 92. नाम सुनकर लगता है कि कहानी नाइंटीज़ में सेट है. ट्रेलर में कहानी के जितने भी विज़ुअल्स हैं, उन्हें देखकर भी ये बात प्रूव होती है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है.

Yogi Babu
योगी बाबू इस कॉमेडी स्टोरी के सेंटर में हैं.

एक तो ‘बेस्ड ऑन रियल ईवेंट’ वाली लाइन और ऊपर से लीड रोल में योगी बाबू. अपने आप एक जिज्ञासा बन जाती है कहानी को देखने की. अगर आपने योगी बाबू के काम को ठीक से एक्सप्लोर नहीं किया है तो इसी साल आई फिल्म ‘मंडेला’ देख लीजिए. फिल्म नेटफ्लिक्स पर है. देखकर जान जाएंगे कि वो किस श्रेणी के कलाकार हैं.


#4. इनमै
रस: भय
डायरेक्टर: रतिन्द्रन प्रसाद

‘इनमै’. ऐसा शब्द जिसका अपना कोई अर्थ नहीं. इनमै का मतलब है रहित. खुद कहानी के डायरेक्टर रतिन्द्रन प्रसाद ने अपने एक इंटरव्यू में ये बताया. साथ ही बताया कि ‘भय’ रस पर बेस्ड उनकी कहानी किसी टिपिकल हॉरर या थ्रिलर कहानी से कोसों दूर है. उनकी माने तो ‘इनमै’ एक शेक्सपियर किस्म की ट्रैजडी है. कहानी के लीड में हैं सिद्धार्थ और पार्वती. पार्वती के किरदार वहीदा को सेंटर स्टेज बनाकर रची गई कहानी में उसकी पूरी दुनिया बदल जाती है. वो भी सिर्फ एक ही दिन में. अब तक जो कुछ समझती थी, अपना मानती थी, उनपर सब पर सवाल उठाने को मजबूर कर देता है.

Siddharth
सिद्धार्थ और पार्वती वाले सेगमेंट को लेकर सबसे ज्यादा बज़ है.

उनके साथ हैं ‘रंग दे बसंती’ वाले सिद्धार्थ. जो इस सेगमेंट के प्रड्यूसर भी हैं. रस चुनने के दौरान सिद्धार्थ नहीं चाहते थे कि उन्हें ‘शृंगार’ और ‘भय’ रस मिलें. लेकिन उनकी किस्मत से उन्हें ‘भय’ ही मिला. मेकर्स की माने तो कहानी देखने के बाद ऑडियंस का दिमाग घूम जाएगा. उन्हें डराने के लिए किसी अलमारी से भूत नहीं निकलेगा. बल्कि प्रत्यक्ष आंखों के सामने जो घट रहा होगा, वही उन्हें बेचैन करने के लिए काफी होगा. सिद्धार्थ और पार्वती के अलावा विशाल भारद्वाज भी इस कहानी से जुड़े हुए हैं. एक एक्टर या डायरेक्टर के तौर पर नहीं. बल्कि एक म्यूज़िक कम्पोज़र के तौर पर.


#5. प्रोजेक्ट अग्नि
रस: अदभुत
डायरेक्टर: कार्तिक नरेन

‘नवरस’ पर शुरुआती काम पूरा होने के बाद मणि रत्नम ने डायरेक्टर्स को अप्रोच करना शुरू किया. उन्हें प्रोजेक्ट पर ब्रीफ करने के लिए. साथ ही जानने के लिए कि वो कौनसा रस चुनना चाहते थे. जब डायरेक्टर कार्तिक नरेन को प्रोजेक्ट पर ब्रीफ किया गया तो उनका एक ही सवाल था. क्या ‘अदभुत’ रस किसी और ने ले लिया? मणि रत्नम का न में जवाब मिलने पर उन्होंने झट से मौके को लपक लिया. वो लंबे समय से एक स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे. उसी को ‘नवरस’ के हिसाब से ढाला और रिज़ल्ट आया ‘प्रोजेक्ट अग्नि’ के रूप में. कहानी का जॉनर साइंस फिक्शन है. इंडियन सिनेमा में अब तक साइंस फिक्शन को लेकर काफी गिना चुना काम किया गया है. ओटीटी के आने के बाद ऑडियंस का सिनेमा के प्रति एक्सपोज़र भी बढ़ा है. यही वजह है कि कार्तिक अपनी कहानी को लेकर कॉन्फिडेंट हैं. उन्हें लगता है कि ओटीटी बूम के लिए जिम्मेदार ऑडियंस से उनकी कहानी को सराहना मिलेगी.

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साइंस फिक्शन पर हमारे यहां ज्यादा एक्सपेरिमेंट्स नहीं हुए.

‘प्रोजेक्ट अग्नि’ एक डायलॉग ड्रिवन कहानी है. यहां लीड में नज़र आएंगे ‘बॉम्बे’ और ‘ध्रुवा’ वाले अरविंद स्वामी.


#6. तुनिन्द पिन
रस: वीर
डायरेक्टर: सरजुन

कहानी के टाइटल का मतलब है साहस से बढ़कर. यहां मुख्य किरदार है एक स्पेशल टास्क ऑफिसर. जो साहस को गले लगाकर अपने डर पर विजय पाता है. उसकी इसी जर्नी को ट्रेस करती है ये कहानी. ऑफिसर के रोल में दिखेंगे अथर्व. और उनकी को-एक्टर हैं अंजली. वही अंजली, जो 2020 में आई एंथोलॉजी सीरीज़ ‘पावा कदैगल’ में कल्कि केकलां के साथ थीं. कहानी के डायरेक्टर सरजुन इससे पहले ‘मां’ और ‘लक्ष्मी’ जैसी शॉर्ट फिल्म्स बना चुके हैं. जहां देखने वालों ने उनके काम की तारीफ की. अब सरजुन ‘तुनिन्द पिन’ लेकर आ रहे हैं.

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‘वीर’ रस पर आधारित कहानी.

मणि रत्नम ने सिर्फ ‘नवरस’ को प्रड्यूस ही नहीं किया. बल्कि, उसकी कुछ कहानियां भी खुद ही लिखी हैं. उन्हीं की लिखी कहानियों में से एक है ‘तुनिन्द पिन’.


#7. पीस
रस: शांत
डायरेक्टर: कार्तिक सुब्बाराज

कार्तिक सुब्बाराज. तमिल सिनेमा के सबसे स्टाइलिश फिल्ममेकर्स में से एक. उनके पास वो है जो हर डायरेक्टर के पास नहीं होता. अपनी यूनिक आवाज़. हालांकि, वेस्टर्न सिनेमा का प्रभाव उनके काम पर नज़र आता है. लेकिन वो सिर्फ प्रभाव भर तक सीमित रहता है. नकल नहीं लगता. शॉर्ट फिल्म्स से शुरू हुई कार्तिक की जर्नी ने उन्हें बड़े-बड़े एक्टर्स के साथ काम करने का मौका दिया. फिर चाहे वो सिद्धार्थ हों, रजनीकान्त हों या फिर धनुष. अपनी आखिरी फिल्म ‘जगमे थंदीरम’ में बूम-बैम टाइप एक्शन दिखा चुके कार्तिक अब अहिंसा परमो धर्म के मार्ग पर निकले हैं. ‘नवरस’ से उनकी कहानी का नाम ‘पीस’. यानी शांति. बताया जा रहा है कि कहानी लिट्टे के इर्द-गिर्द बुनी गई है. लिट्टे के मूवमेंट से सब वाकिफ हैं. देखना होगा कि शब्द ‘पीस’ को यहां प्रतीकात्मक तौर पर रखा गया है या उसके कुछ और मायने हैं.

Gautam Vasudev Menon
ट्रेलर से एक शॉट में गौतम वासुदेव मेनन.

डायरेक्टर गौतम वासुदेव मेनन यहां एक्टिंग करते नज़र आएंगे.


#8. रौद्रम
रस: रौद्र
डायरेक्टर: अरविंद स्वामी

नो पॉइंट्स फॉर गैसिंग कि टाइटल सुनते ही रस का पता चल जाता है. कहानी की मुख्य किरदार एक आईपीएस ऑफिसर है. उसके साथ जो घटता है, उसे देखकर गुस्से का भाव पैदा होगा, या वो जो करती है उसे देखकर रोष आएगा, ऐसे सवालों के जवाब कहानी देखने के बाद ही मिलेंगे. ‘रौद्रम’ के जरिए अरविंद स्वामी अपने फिल्मी करियर की दूसरी पारी शुरू कर रहे हैं. कैमरे के सामने एक्शन करने की जगह उन्होंने कैमरे के पीछे रहकर एक्शन बोला है. सिद्धार्थ ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि नौ कहानियों में से वो ‘रौद्रम’ देखने के लिए सबसे ज्यादा उत्साहित हैं. वजह हैं फर्स्ट टाइम डायरेक्टर अरविंद स्वामी. सिद्धार्थ ने बताया कि अरविंद एक गहरे विचारक हैं. और उनकी सोच की यही गहराई उनकी कहानी में भी नज़र आएगी.

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बतौर डायरेक्टर, अरविंद स्वामी इस कहानी से डेब्यू करने जा रहे हैं.

#9. पायसम
रस: वीभत्स
डायरेक्टर: वसंत साई

मेकर्स डायरेक्टर्स को अप्रोच कर रहे थे. उन्हें नौ रसों के बारे में बता रहे थे. नौ में से उनकी पसंद पूछ रहे थे. किसी ने बोला भय तो किसी ने चुनना चाहा रौद्र. ऐसा करते-करते सभी रसों का नंबर आ ही गया था. लेकिन नौ में से एक था जिसका नाम किसी ने नहीं लिया. वो किसी की भी पहली पसंद नहीं था. वो रस था ‘वीभत्स’. यानी घिन. बाद में मणि रत्नम ने वसंत साई को वीभत्स पर कहानी डायरेक्ट करने का मौका दिया. स्क्रीन पर घिन पैदा करना कोई मुश्किल काम नहीं. खून, मांस, निर्मम नरसंहार, ऐसा कुछ भी दिखा दो. किसी पॉइंट पर तो जनता कमजोर पड़ेगी. लेकिन ‘पायसम’ में ऐसा कुछ भी नहीं है. वसंत ने खुद कहानी को अपने लिए चैलेंजिंग बनाया है.

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‘वीभत्स’ रस, जिसे कोई नहीं चुनना चाहता था.

हमारे घर की रोजमर्रा की सुकूनभरी ज़िंदगी से घिन जैसे भाव का उदय कैसे हो सकता है, यही दिखाना उनका सबसे बड़ा चैलेंज था. घिन जैसे भाव को उन्होंने जीवंत रूप कैसे दिया, ये सीरीज़ देखकर पता चलेगा.

Navarasa 06 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी. बताया जा रहा है कि हर कहानी की लेंथ करीब 30 से 40 मिनट तक की होगी. सीरीज़ को लेकर इतना बज़ क्यों बना हैं, ये हमने आपको बता दिया. अब क्या ये पूरी तरह जस्टिफाइड है, इसका फैसला आप सीरीज़ देखकर कर लीजिएगा.


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