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1984 में एक साथ निकले 8 IPS अधिकारियों के हवाले है इस वक्त वतन

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फिलहाल देश की सुरक्षा जिन अधिकारियों के हाथों में है, उनके बारे में एक दिलचस्प चीज सामने आई है. और वो ये है कि देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों के मुखिया एक ही बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. चाहे वो रिसर्च एंड एनालिसिस विंग हो, चाहे नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी हो या फिर बीएसएफ से लेकर सिविल एविएशन सिक्योरिटिज और सीआईएसएफ सभी के मुखिया एक ही बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. और वो बैच है 1984 का. इस वक्त देश की 8 एजेंसियों के मुखिया 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं.

2014 में मोदी सरकार आने के बाद अधिकारियों की नई नियुक्ति की शुरुआत हुई थी. 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी को किसी एजेंसी का मुखिया बनाने की शुरुआत सितंबर 2017 में हुई थी. असम-मेघालय काडर के आईपीएस अधिकारी वाईसी मोदी को एनआईए का डीजी बनाया गया था. तब से लेकर अब तक कुल आठ एजेंसियों में मुखिया के तौर पर 1984 बैच के आईपीएस नियुक्त किए जा चुके हैं.

1. वाईसी मोदी

वाईसी मोदी
वाईसी मोदी (नीले सूट में) एनआईए के डायरेक्टर जनरल हैं.

वाईसी मोदी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के डायरेक्टर जनरल हैं. पूरा नाम है योगेश चंदर मोदी. योगेश चंदर मोदी असम-मेघालय कैडर के आईपीएस हैं. उनके करियर की शुरुआत सब डिवीजनल पुलिस ऑफिसर के तौर पर हुई थी. इसके बाद उनकी तैनाती जिले के एसपी के तौर पर हुई. फिर वो डीआईजी रेंज और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) के रूप में प्रमोट हुए. 1991 में उन्हें कैबिनेट सेक्रेटरिएट में भेज दिया गया, जहां 2002 तक काम करते रहे. 2002 से 2010 तक वो सीबीआई में रहे, जहां उन्होंने 2002 के गुजरात दंगे से लेकर गुलबर्गा सोसाइटी केस और नरोदा पाटिया नरसंहार जैसे केस की जांच की थी. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे के लिए 2010 में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई जिसमें गुजरात दंगे में उस वक्त के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच होनी थी. वाईसी मोदी उस एसआईटी का हिस्सा थे. गुजरात सरकार के मंत्री रहे हरेन पंड्या की हत्या के मामले की जांच भी वाईसी मोदी ने की थी. एसआईटी की जांच खत्म होने के बाद वाईसी मोदी एक बार फिर से सीबीआई में चले गए, जहां वो सितंबर 2017 तक रहे. इस दौरान उन्होंने आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच की. सितंबर, 2017 में मोदी सरकार ने उन्हें नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी का मुखिया बनाया गया. वाईसी मोदी 2001 में पुलिस मेडल और फिर 2008 में प्रेजिडेंट पुलिस मेडल से सम्मानित हो चुके हैं.

2. सुदीप लखटकिया

सुदीप लखटकिया
सुदीप लखटकिया को एनएसजी का मुखिया बनाया गया है.

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के मुखिया हैं. 19 जनवरी, 2018 को मोदी सरकार ने उन्हें एनएसजी का डीजी नियुक्त किया था. 1984 बैच के तेलंगाना कैडर के आईपीएस हैं. उनके करियर की शुरुआत आदिलाबाद के एसपी के तौर पर हुई थी. इसके अलावा वो खम्मम और वारंगल के एसपी रहे थे. आंध्र प्रदेश में पुलिस के शिकारी कुत्तों की जो टीम थी, उसके कमांडर इन चीफ भी रहे थे. वो हैदराबाद वेस्ट जोन में ट्रैफिक के डिप्टी कमिश्नर भी रहे हैं. वो विजयवाड़ा के कमिश्नर और डीआईजी सिक्योरिटी रह चुके हैं. आंध्रप्रदेश-तेलंगाना से निकालकर उन्हें स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप में भी रखा गया था, जहां वो आठ साल तक रहे थे. इसके बाद वो फिर से अपने कैडर में वापस लौट गए और तेलंगाना के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) बने. जून 2016 में उन्हें सीआरपीएफ का एडीजी बनाया गया था. जनवरी, 2018 में लखटकिया को एनएसजी का डीजी बनाया गया.
3. राजेश रंजन

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राजेश रंजन के जिम्मे सीआईएसएफ की कमान है.

1984 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस राजेश रंजन सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) के मुखिया हैं. उनके करियर की शुरुआत हुई थी पटना शहर में एएसपी की पोस्टिंग के साथ. उसके बाद देवघर के एसपी बने. फिर बेगुसराय के एसपी बने. 1995 में सीबीआई में इकनॉमिक ऑफेन्सेज के एसपी बने और मशहूर तांत्रिक चंद्रास्वामी को गिरफ्तार किया. इसके बाद सीबीआई के डीआईजी बने और चंडीगढ़ की रुचिका गिहरोत्रा केस की जांच की. फरवरी, 2002 में फ्रांस स्थित इंटरपोल में डेप्युटेशन पर भेज दिए गए. वहां पांच साल तक तैनाती रही. वहां से लौटने के बाद वो गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में चीफ विजलेंस अधिकारी भी रहे थे. अप्रैल, 2018 में सीआईएसएफ का डीजी बनने से पहले राजेश रंजन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मुख्यालय में स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर तैनात थे.
4. रजनीकांत मिश्रा

रजनीकांत इस वक्त बीएसएफ के डीजी हैं.
रजनीकांत इस वक्त बीएसएफ के डीजी हैं.

बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल रजनीकांत मिश्रा 1984 बैच के यूपी काडर के आईपीएस हैं. लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर और देहरादून जैसे शहरों में एसपी रहे हैं. कुछ दिनों तक यूपीपीएसी में भी रहे हैं. यूपी में इंटेलिजेंस से लेकर ट्रेनिंग तक में अपनी सेवाएं दी हैं. यूपी में मुरादाबाद रेंज के डीआईजी भी रहे हैं. यूपी से निकालकर उन्हें कोलकाता सीबीआई में डीआईजी बना दिया गया. इसके अलावा सीबीआई की इकनॉमिक ऑफेन्सेज में वो जॉइंट डायरेक्टर भी रहे हैं. लखनऊ और मेरठ रेंज में उन्हें एसटीएफ का आईजी भी बनाया गया था.

5. एसएस देसवाल

एसएस देसवाल
एसएस देसवाल (दाएं) के पास आईटीबीपी की कमान है.

1984 बैच के हरियाणा काडर के आईपीएस एसएस देसवाल का पूरा नाम है सुरजीत सिंह देसवाल. वो फिलहाल इंडो तिब्बत बर्मन फोर्स (आईटीबीपी) के मुखिया हैं. उनके करियर की शुरुआत हरियाणा से हुई थी. हरियाणा में वो करनाल, रोहतक, कैथल, भिवानी और फतेहाबाद में एसपी रहे हैं. इसके अलावा वो मधुबन में हरियाणा आर्म्ड फोर्स की 5वीं बटालियन के कमांडेंट भी रहे हैं. 1994 में उनकी तैनाती सीबीआई में एंटी करप्शन यूनिट के एसपी के तौर पर हुई, जहां वो 1998 तक रहे. इसके बाद उनका प्रमोशन हो गया और वो रेलवे पुलिस के आईजी हो गए. 2009 से 2011 तक वो गुडगांव पुलिस के कमिश्नर भी रहे हैं. फिर उन्हें हरियाणा आर्म्ड पुलिस का डायरेक्टर जनरल बना दिया गया. दिसंबर 2015 में वो सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में एडीजी बने और अक्टूबर, 2017 तक रहे. इसके बाद एक साल तक वो बीएसएफ में डीजी ऑपरेशन रहे. 30 सितंबर, 2018 को उन्हें एसएसबी का डीजी बनाया गया था. 31 अक्टूबर, 2018 को उन्हें आईटीबीपी का डायरेक्टर जनरल बनाया गया था.

6. राकेश अस्थाना

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ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्यॉरिटी का डायरेक्टर बनाया गया है.

राकेश अस्थाना 1984 बैच के गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी हैं और इस वक्त वो ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्यॉरिटी के डायरेक्टर जनरल हैं. गुजरात से शुरू हुआ राकेश अस्थाना का सफर बिहार में जाकर चर्चित हो गया. राकेश अस्थाना धनबाद में सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के एसपी रह चुके हैं. रांची में वह डीआईजी भी रहे हैं. 1994 में उन्होंने सनसनीखेज पुरुलिया आर्म्स ड्रॉप केस की फील्ड इंवेस्टिगेशन सुपरवाइज की थी. इसके बाद उन्हें बिहार के चर्चित चारा घोटाले की जांच सौपीं गई थी और उन्होंने लालू यादव को गिरफ्तार कर लिया था. अस्थाना ने ही धनबाद में डीजीएमएस के महानिदेशक को घूस लेते पकड़ा था. राकेश अस्थाना ने गोधरा कांड की भी जांच की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आरके राघवन की अगुआई में गठित हुई एसआईटी ने भी सही माना था. अहमदाबाद में 26 जुलाई, 2008 को हुए बम ब्लास्ट की जांच का जिम्मा राकेश को ही दिया गया था. उन्होंने 22 दिनों में ही केस को सुलझा दिया था.आसाराम बापू और उनके बेटे नारायण सांईं के मामले में भी अस्थाना ने जांच की थी. फरार चल रहे नारायण सांईं को हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर पकड़ा था. अस्थाना को सीबीआई का एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया, जिसके बाद वो सबसे ज्यादा चर्चा में रहे. सीबीआई के मुखिया रहे आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच की लड़ाई को पूरी दुनिया ने देखा, जब दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ 2 करोड़ रुपये की घूस का आरोप लगाया. बाद में उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया था. जनवरी, 2019 में विवाद बढ़ा तो राकेश अस्थाना को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्यॉरिटी का डायरेक्टर जनरल बना दिया गया.

7. सामंत गोयल

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सामंत गोयल को रॉ का मुखिया बनाया गया है.

सामंत गोयल 1984 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. फिलहाल वो रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के मुखिया हैं. सामंत गोयल पंजाब पुलिस में उस वक्त आए थे, जब पंजाब हिंसा से जूझ रहा था. इसे रोकने में सामंत गोयल की अहम भूमिका थी. सामंत गोयल को पाकिस्तानी मामलों का जानकार माना जाता है. 1984 से 2001 तक पंजाब पुलिस में रहने के बाद सामंत गोयल 2001 में दिल्ली में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग में प्रतिनियुक्ति पर आए. इससे पहले वो पंजाब के मुख्यमंत्री की सुरक्षा के मुखिया था. 2001 के बाद से वो रॉ में अलग-अलग पदों पर रह चुके हैं. पाकिस्तान के खिलाफ 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक हो या फिर 2019 की बालाकोट की एयर स्ट्राइक, दोनों में ही सामंत गोयल की अहम भूमिका थी. सीबीआई में जब आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच खींचतान चल रही थी और दोनों एक दूसरे के ऊपर 2 करोड़ रुपये की घूस लेने का आरोप लगा रहे थे. इस दौरान सीबीआई जांच में इनका नाम आया था, लेकिन एफआईआर में इनका नाम नहीं था. रॉ का मुखिया बनने से पहले सामंत गोयल के पास लंदन और दुबई में रॉ के लिए काम करने का अनुभव रहा है.

8. अरविंद कुमार

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अरविंद कुमार आईबी के मुखिया हैं.

1984 बैच के असम-मेघालय कैडर के आईपीएस अरविंद कुमार इन्टेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के मुखिया हैं. 1991 में ही अरविंद कुमार अपने कैडर से निकलकर आईबी में आ गए थे. तब से अब तक वो आईबी में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं. उन्हें बिहार की राजधानी पटना में आईबी के हेड के तौर पर नियुक्त किया जा चुका है. रूस के मास्को में भी उनकी तैनाती हो चुकी है. अरविंद कुमार को कश्मीर और नक्सल मामलों का जानकार माना जाता है. राष्ट्रपति से उन्हें सम्मान भी मिल चुका है. आईबी का मुखिया बनने से पहले वो कश्मीर डेस्क ही संभाल रहे थे.


 

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