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2021 की 17 दमदार नॉन-हिंदी फिल्में, जिन्हें देखकर लोगों ने हिंदी वालों से कहा- 'ऐसी फ़िल्में बनाओ'

2022 आ चुका है. कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बावजूद 2021 सिनेमा के लिहाज़ से अच्छा साबित हुआ. ऐसा हम सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों को ध्यान में रखकर नहीं कह रहे. बीते साल गैर-हिंदी सिनेमा में कमाल की फिल्में बनी हैं. इनमें से कौन सी मस्ट वॉच हैं, आइए जानते हैं.


#1. जय भीम (तमिल)
डायरेक्टर – राइटर: टी जे न्यानवेल

Jai Bhim Movie
फिल्म का सबसे पावरफुल शॉट, जो बहुत कुछ कह जाता है.

कहानी – तमिलनाडु में कहीं पुलिस एक दिन अचानक कुछ आदिवासी लोगों को उठाकर ले जाती है. उन्हें बुरी तरह टॉर्चर करती है. उसके बाद बोलती है कि वे लोग भाग गए हैं. लेकिन परिवार वालों को लगता है कि कुछ गड़बड़ है. एक आदिवासी की पत्नी जगह-जगह जाती है. कोई सुनवाई नहीं होती. फिर एंट्री होती है कमज़ोरों के लिए लड़ने वाले वकील चंद्रू की. वो न्यायपालिका की मदद से उन गायब आदिवासियों को खोजने की कोशिश करता है. अंत में जो सामने आता है, वो हिला देने वाला होता है.

क्या ख़ास – ये फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है. इसके कुछ सीन्स आपको आतंकित करते हैं. पुलिस ब्रूटैलिटी का नया ही पक्ष आपको देखने को मिलता है. तमिल सुपरस्टार सूर्या ने इसमें वकील चंद्रू का रोल किया है.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#2. द ग्रेट इंडियन किचन (मलयालम)
डायरेक्टर – राइटर: जियो बेबी

The Great Indian Kitchen Movie 1
पैट्रीयार्की पर चोट करती एक और फिल्म.

कहानी – एक लड़की की शादी होती है. उसके बाद सब सामान्य लग रहा होता है. सुबह से रात तक वो पति और परिवार की सेवा में जुटी रहती है. लेकिन इस सबकुछ सामान्य में उसे कुछ ऐसा नजर आता है. जो आतंकित करने वाला होता है. अंत में वो कुछ ऐसा करती है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होती.

क्या खास – फ़िल्म में रसोई को जैसे पेट्रीयार्की का रूपक बनाया गया है, वो देखने लायक है.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#3. मंडेला (तमिल)
डायरेक्टर – राइटर: मडोन अश्विन

Mandela Movie 23
जिस बाल काटने वाले से किसी को सरोकार नहीं था, वो अचानक से सेंटर ऑफ अटेंशन बन जाता है.

कहानी – एक छोटा सा गांव, जहां चुनाव सिर पर हैं. आमने-सामने दो पार्टियां हैं जो जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ रही. वोट खरीदे जा रहे हैं, भड़काने की कोशिशें ज़ारी हैं लेकिन सारी चालाकी उलट हो जाती है. जब पता चलता है कि जीत निर्धारित करने वाला वोट एक बाल काटने वाले के हाथ में है. अब तक उसे खुद से नीचा देखते थे, अचानक से सारा गांव उसके इर्द-गिर्द घुमने लगता है. आगे जो घटता है, उसे देखकर हंसी भी आती है और दुख भी होता है.

क्या खास – फिल्म अपने कटाक्ष से जिस तरह जातिवाद और करप्ट पॉलिटिक्स जैसे मुद्दों पर चोट करती है, वो देखने लायक है.

कहां देखें – नेटफ्लिक्स


#4. मास्टर (तमिल)
डायरेक्टर – राइटर: लोकेश कनगराज

Master 6
फिल्म के पोस्टर में थलपति विजय और विजय सेतुपति.

कहानी – जेडी एक शराबी कॉलेज प्रोफेसर है, जिसकी ड्यूटी बाल सुधार गृह में लगा दी जाती है. वहां पहुंचकर उसे पता चलता है एक रैकेट के बारे में, जिसे लोकल गुंडा भवानी चला रहा है. जेडी मूक दर्शक बनने की जगह क्या करता है, वही फिल्म की कहानी है.

क्या खास – क्रिटिकली अक्लेम्ड एक्टर विजय सेतुपति और मास एंटरटेनर थलपति विजय पहली बार आमने-सामने थे.

कहां देखें – अमेज़न प्राइम वीडियो


#5. सारपट्टा परमबरै (तमिल)
डायरेक्टर: पा रंजीत
राइटर: तमिल प्रभा, पा रंजीत

Sarpatta Parambarai
फिल्म की कहानी सिर्फ बॉक्सिंग रिंग तक सीमित नहीं.

कहानी –कबीलन ने कभी बॉक्सिंग रिंग में कदम नहीं रखा, लेकिन फिर अपने सारपट्टा समुदाय के लिए उसे बॉक्सिंग ग्लव्स पहनने ही पड़ते हैं. उसे बॉक्सिंग करता देख, रिंग के अंदर और बाहर वाले दोनों ही लोग खुश नहीं होते. उसके लिए कैसी मुसीबतें खड़ी करते हैं, ये ‘सारपट्टा परमबरै’ की कहानी है.

क्या खास – बॉक्सिंग रिंग के अंदर चलने वाला एक-एक मुक्का आपको अपनी सीट पर से उठाने का काम करता है. रिंग के बाहर हीरो की लाइफ में जो कुछ घटता है, उससे आप अछूते नहीं रह पाते.

कहां देखें – अमेज़न प्राइम वीडियो


#6. द डिसाइपल (मराठी)
डायरेक्टर – राइटर: चैतन्य तम्हाणे

कहानी: शरद ने अपनी पूरी ज़िंदगी संगीत को समर्पित कर दी. लेकिन अब मन में सवाल उठने लगे हैं, कि क्या वो कभी संगीत में महानता हासिल कर पाएगा, और क्या वो उसका सही हकदार भी है. एक कलाकार के मन में उठने वाले ऐसे ही सवालों का जवाब ढूंढती है ये फिल्म.

क्या खास – अपनी पहली फीचर फिल्म ‘कोर्ट’ के लिए नैशनल अवॉर्ड जीत चुके चैतन्य तम्हाणे ने ही ‘द डिसाइपल’ को लिखा और डायरेक्ट किया है.

कहां देखें: –  नेटफ्लिक्स


#7. पुष्पा: द राइज़ (तेलुगु)
डायरेक्टर – राइटर: सुकुमार

Pushpa Movie
अल्लु अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा’ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा पैसा पीट रही है.

कहानी –  कहानी है पुष्पाराज की, एक मजदूर जो आगे चलकर लाल चंदन की लकड़ी का स्मगलर बन जाता है. छोटा-मोटा स्मगलर नहीं, ऐसा. जिसके एरिया में आने से पहले पुलिस वाले दो बार सोचें. उसके राइज़ की कहानी बताती है ये फिल्म.

क्या खास – ‘आर्या’ वाले अल्लू अर्जुन की ये फिल्म सीटीमार डायलॉगबाज़ी और एक्शन से लबरेज़ है. आपको एंड तक एंटरटेन करती है.


#8. जाति रतनालू (तेलुगु)
डायरेक्टर – राइटर: अनुदीप केवी

कहानी – तीन दोस्त, जो किसी भी तरह बस अपने होमटाउन से निकलना चाहते हैं. ताकि हैदराबाद जाकर नौकरी कर सकें. नौकरी लेने का प्लान क्या है, और हैदराबाद पहुंचकर क्या करेंगे, ऐसे बेतुकों सवालों से तो उन्हें कोई मतलब नहीं. नौकरी लेने के चक्कर में क्या-क्या कांड होते हैं, वही ‘जाति रतनालू’ की कहानी है.

क्या खास – फिल्म आपको इतना हंसाती है कि एक पॉइंट के बाद आप भूल जाते हैं कि जोक क्या था.

कहां देखें – अमेज़न प्राइम वीडियो


#9. कालिरा अतीता (उड़िया)
डायरेक्टर – राइटर: नील माधव पांडा

Kalira Atita
फिल्म से एक स्टिल.

कहानी – एक आदमी अपने गांव लौटता है, ताकि अपने परिवार से मिल सके. पहुंचने पर पाता है कि पूरा गांव पानी के अंदर समा चुका. एक चक्रवात ने ये तबाही मचाई, लेकिन अब एक और चक्रवात आ रहा है. क्या वो खुद उससे बच पाएगा, ये आपको फिल्म देखकर पता चलेगा.

क्या खास – क्लाइमेट चेंज आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को कैसे 360 डिग्री घुमा सकता है, वो समझने के लिए ये फिल्म देखिए.

कहां देखें – एमएक्स प्लेयर


#10. जोजी (मलयालम)
डायरेक्टर: दिलीश पोथन
राइटर: श्याम पुष्करण

Fahadh Faasil Joji
लीड रोल में हैं फहद फ़ाज़िल.

कहानी – कहानी को कोरोना पैंडेमिक के दौरान सेट किया गया है. तीन भाइयों में सबसे छोटा है जोजी. एक सुस्त-सा आदमी, जिसके सपने खुद से बड़े हैं. ऐसे ढीले-ढाले बंदे से वो शातिर खूनी में कैसे तब्दील होता है, इस ट्रांसफॉर्मेशन की कहानी है ‘जोजी’.

क्या खास – मलयालम सिनेमा के उम्दा एक्टर फहद फ़ाज़िल ने यहां जो आला दर्ज़े का काम किया है, उसके लिए फिल्म देखी जानी चाहिए.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#11. तुनका तुनका (पंजाबी)
डायरेक्टर: गैरी खटराव
राइटर: जे दविन

कहानी – किसान परिवार का एक लड़का, जो प्रोफेशनल साइकलिस्ट बनना चाहता है. किसी तरह अपनी मंज़िल तक पहुंच भी जाता है, लेकिन फिर दुनिया बदल जाती है, जब पता चलता है कि वो कैंसर से पीड़ित है. ऐसी बीमारी के सामने अपने कंधे ऊंचे कैसे करता है, यही फिल्म की कहानी है.

क्या खास – लीड एक्टर हरदीप ग्रेवाल का फिट साइकलिस्ट से कैंसर पेशेंट वाला ट्रांसफॉर्मेशन भयावह लगता है. जिसे देख ‘द मशीनिस्ट’ के क्रिश्चियन बेल की याद आती है.


#12. गरुड़ा गमना ऋषभा वाहना (कन्नडा)
डायरेक्टर – राइटर: राज बी शेट्टी

Garuda Gamana Vrishabha Vamana
फिल्म इसी जनवरी में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने वाली है.

कहानी – दो गैंगस्टर्स हैं, शिवा और हरि. दोनों पक्के दोस्त, लेकिन एक दूसरे से विपरीत. अहंकार, ईर्ष्या और महत्वाकांक्षाओं के चलते ये दोनों कैसे एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं, वही फिल्म का प्लॉट है. शिवा और हरि की इस कहानी में ब्रह्मा का क्या रोल है, वो भी आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा.

क्या खास – डार्क और वायलेंट फिल्में बनाने वाले अनुराग कश्यप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा था कि इस फिल्म को मिस मत करना. साथ ही इसकी तुलना ‘अंगामाली डायरीज़’ और ‘वाड़ा चेन्नई’ से की.


#13. नायट्टू  (मलयालम)
डायरेक्टर: मार्टिन प्राक्कट
राइटर: शाही कबीर

कहानी – ‘नायट्टू’ यानी शिकार, कहानी बताती है उस सिस्टम की जो उन लोगों को ही निगलने से नहीं हिचकिचाता, जिन्होंने उसे बनाया है. यहां भ्रष्ट सिस्टम का शिकार होते हैं तीन पुलिसवाले, जिनके खिलाफ फ़र्ज़ी कारवाई कर उन्हें अरेस्ट करने का प्लान है. उन्हें क्यों अरेस्ट किया जा रहा है, वो इससे कैसे बचते हैं, इन्हीं सब सवालों पर फिल्म खड़ी दिखती है.

क्या खास –‘नायट्टू’ की कहानी जितनी सिम्पल दिखती है, उतनी है नहीं. इस थ्रिलर को आप खुद देखिए, और अपने इंटरप्रीटेशन लेकर इसकी दुनिया से बाहर आइए.

कहां देखें – नेटफ्लिक्स


#14. फोटो प्रेम (मराठी)
डायरेक्टर – राइटर: आदित्य राठी

Photo Prem
बीफोर एंड आफ्टर.

कहानी – मुख्य किरदार हैं एक बुजुर्ग औरत, जिन्हें एहसास होता है कि उनके पास अपनी कोई फोटो ही नहीं, फिर मरने के बाद ये दुनिया उन्हें कैसे याद रखेगी. अब वो बस अपनी एक सुंदर सी फोटो खींचवाना चाहती हैं. इस दौरान उनके साथ क्या-क्या घटता है, यही आगे की कहानी है.

क्या खास – एक फील गुड फिल्म, जो आपके मन में मीठी-सी महक छोड़ जाती है.  

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#15. कुरुति (मलयालम)
डायरेक्टर: मनु वरियर
राइटर: अनीश पलयल

Kuruthi Movie
करेंट पॉलिटिकल सिनेरियो में एकदम फिट बैठती है ये फिल्म.

कहानी – इब्राहिम शहर से दूर पहाड़ों के बीच रहता है. एक रात उसके दरवाज़े पर पुलिसवाला आता है, जिसके साथ एक लड़का है. धार्मिक कट्टरता के नाम पर वो शख्स एक मुस्लिम की हत्या कर चुका होता है. उनके पीछे एक वहशी भीड़ पड़ी है, जो उस लड़के को मारना चाहती है. इसलिए छुपने के लिए पुलिसवाला उसे लेकर इब्राहिम के घर पहुंच जाता है. आगे जो कुछ घटता है, वो आपको अपनी सीट के एज पर रखता है.

क्या खास – फिल्म दर्शाती है कि ‘हम वर्सेज़ वो’ जैसी दकियानूसी लड़ाई का अंत कितना भयावह हो सकता है.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#16. #होम (मलयालम)
डायरेक्टर – राइटर: रोजिन थॉमस

Home Movie
बस अपने बच्चों से कनेक्ट करना चाहते हैं.

कहानी – एक पिता, जो समय के हाथों पिछड़ चुके हैं. ज़ेन ज़ी की भाषा में कहें तो ‘टेक सैवी’ नहीं रहे. उनके बच्चे उनके साथ समय बिताने की जगह अपने फोन में बिज़ी रहते हैं. ऐसे में वो बस किसी भी तरह अपने बच्चों के साथ कनेक्शन जोड़ना चाहते हैं.

क्या खास – ये फिल्म एक ऐसी किताब की तरह महसूस होती है जिसके एंड तक आप कभी नहीं पहुंचना चाहते.  

कहां देखें – अमेज़न प्राइम वीडियो


#17. कर्णन  (तमिल)
डायरेक्टर – राइटर: मारी सेल्वाराज

Dhanush Karnan
‘परियेरम पेरुमाल’ वाले मारी सेल्वाराज ने ‘कर्णन’ बनाई है.

कहानी – पोड़ियंकुलम नाम का एक गांव है. जहां के निवासियों को पड़ोसी गांव वाले परेशान करते हैं, खुद पर आश्रित होने को मजबूर करते हैं. लेकिन पोड़ियंकुलम में रहने वाले कर्णन को ये मंज़ूर नहीं. वो किसी भी तरह इस फर्क को मिटाना चाहता है.

क्या खास – फिल्म आपको विचलित कर के रख देती है, अपने प्रिविलेज पर सवाल उठाने पर मजबूर करती है.

कहां देखें – अमेज़न प्राइम वीडियो


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