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लॉकडाउन का ग़म ग़लत करना है, तो ये पांच मज़ेदार मराठी फ़िल्में देख डालिए

लॉकडाउन के दौरान फिल्म रेकमंडेशन देने का चलन हुआ है. मैं चला चित्रपट बघूया सीरीज में आपको हर हफ्ते एक उम्दा मराठी फिल्म के बारे में बताता था. आज पेश है पांच कॉमेडी फिल्में की लिस्ट. ज़ाहिर है कि ये फिल्में मराठी भाषा की ही हैं.


(1)

नाम – टाइमपास (2014)
डायरेक्टर – रवि जाधव
कलाकार – प्रथमेश परब, केतकी माटेगावकर, वैभव मांगले, भालचंद्र कदम
कहां देखें – ज़ी फाइव

फिल्म की हीरोइन केतकी सिंगर भी हैं, जिन्होंने काफी हिंदी-मराठी फिल्मों में गाने गाए हैं.
फिल्म की हीरोइन केतकी सिंगर भी हैं, जिन्होंने काफी हिंदी-मराठी फिल्मों में गाने गाए हैं.

कहानी है दगडू की. एक आवारा, लोफर टाइप लड़का. जिसकी कल्पनाओं में प्रेम का मतलब टाइमपास है. दसवीं में फेल होने के बाद दगडू के पिता ने उसे घर से बाहर निकाल दिया है. अब वो घर-घर अखबार पहुंचाकर दिन काट रहा है. जीवन में समय बहुत है, सो इसे पास करने के लिए उसे प्यार करना है. इसी दौरान उसकी नज़र पड़ती है प्राजक्ता पर. एक ‘सभ्य’, ‘संस्कारी’ घर की लड़की. अब दगडू के जीवन का एक ही मिशन है. प्राजक्ता को खुद पर आशिक करवाना. एक ‘सड़कछाप मजनूं’ से एक ‘कुलीन’ कन्या को इश्क होने की कितनी संभावना है! दगडू को किन-किन इम्तेहानों में पास होकर दिखाना होगा! इसी जद्दोजहद की मज़ेदार कहानी है ‘टाइमपास’.

ख़ास बात – रितेश देशमुख की ‘लय भारी’ से पहले ये सबसे ज्यादा कमाई वाली मराठी फिल्म थी.


(2)

नाम – दुनियादारी (2013)
डायरेक्टर – संजय जाधव
कलाकार – स्वप्निल जोशी, अंकुश चौधरी, सई ताम्हणकर, जितेंद्र जोशी, सुशांत शेलार, उर्मिला कानिटकर
कहां देखें – अमेज़न प्राइम

इस फिल्म का सोनू निगम का गाया गाना 'टिक टिक वाजते' बहुत पॉपुलर हुआ था.
इस फिल्म का सोनू निगम का गाया गाना ‘टिक टिक वाजते’ बहुत पॉपुलर हुआ था.

कॉलेज वाली फिल्म. दोस्ती वाली फिल्म. सेवंटीज़ के दौर का कॉलेज. एक लड़का श्रेयस किसी छोटी जगह से पुणे के मशहूर कॉलेज में पढ़ने आया है. कॉलेज में उसकी शुरुआती दोस्ती होती है डीएसपी एंड गैंग से. डीएसपी पुलिस वाला नहीं है. उसके नाम दिगंबर शंकर पाटिल का शॉर्ट फॉर्म है ये. श्रेयस के और भी दोस्त-दुश्मन बनते हैं. प्रीतम, शिरीन, सुरेखा, साईनाथ, मीनू. फिल्म में लव ट्रायंगल भी है और कॉलेज राईवलरी भी. ‘दुनियादारी’ के डायलॉग बहुत मशहूर हुए थे. ख़ास तौर से ये, ‘तेरी मेरी यारी, भाड़ में जाए दुनियादारी’.

ख़ास बात – ‘दुनियादारी’ मशहूर मराठी लेखक सुहास शिरवलकर के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है. सुहास शिरवलकर मराठी साहित्य का बहुत बड़ा नाम हैं. ख़ास तौर से उनकी डिटेक्टिव स्टोरीज़ का मुझ समेत बड़ा विशाल फैन बेस है.


(3)

नाम – तार्यांचे बेट (2011)
डायरेक्टर – किरण यज्ञोपवित
कलाकार – सचिन खेड़ेकर, विनय आपटे, अश्विनी गिरी, ईशान तांबे
कहां देखें – ज़ी फाइव

इस फिल्म पर अवॉर्ड्स की झड़ी लग गई थी.
इस फिल्म पर अवॉर्ड्स की झड़ी लग गई थी.

तार्यांचे बेट यानी सितारों का द्वीप. छोटे से किस्से को कमाल की कहानी में पिरोया गया है.  महाराष्ट्र की जन्नत कोंकण. यहां सुर्वे परिवार रहता है. पांच लोग. श्रीधर, उनकी पत्नी इंदू, बेटी मीरा, बेटा ओंकार और बूढ़ी माताजी. गरीब लेकिन संतोषी परिवार. ओंकार शैतान बच्चा है. पढ़ाई में मन नहीं लगाता. पिताजी लालच दिखाते हैं. ‘अगर तू क्लास में फर्स्ट आया तो जो मांगेगा वो दूंगा’. ओंकार तुरंत फाइव स्टार होटल में एक दिन रहना मांग लेता है. पिता हकबकाते हैं लेकिन हामी भर देते हैं. उन्हें अपने नालायक बेटे के ‘टैलेंट’ पर पूरा भरोसा है. लेकिन…..

बेटा तो ज़िद्दी निकला. उसने जमकर पढ़ाई शुरू कर दी. और गरीब बाप के होश उड़ा दिए. आगे क्या होता है, बेटा जीतता है या बाप, ये फिल्म देखकर जानिएगा.

ख़ास बात – जिन एकता कपूर पर हिंदी टेलीविज़न को बरबाद कर देने का आरोप लगता है, उन्हीं ने ये मीनिंगफुल फिल्म बनाई थी.


(4)

नाम – शिक्षणाच्या आयचा घो (2010)
डायरेक्टर – महेश मांज़रेकर
कलाकार – सचिन खेड़ेकर, भरत जाधव, सक्षम कुलकर्णी, सिद्धार्थ जाधव
कहां देखें – ज़ी फाइव

फिल्म के लीड एक्टर भरत जाधव अपनी ओवर दी टॉप कॉमेडी के लिए मशहूर हैं. इस फिल्म में उन्होंने कुछ अलग रोल किया था.
फिल्म के लीड एक्टर भरत जाधव अपनी ओवर दी टॉप कॉमेडी के लिए मशहूर हैं. इस फिल्म में उन्होंने कुछ अलग रोल किया था.

टाइटल का हिंदी ट्रांसलेशन कुछ-कुछ यूं होगा. ‘शिक्षा की मां की आंख’. एजुकेशन सिस्टम पर कायदे के सवाल पूछनेवाली फिल्म. श्रीनिवास राणे एक एवरेज स्टूडेंट है. उसका दिल क्रिकेट में ज़्यादा लगता है. उसके पिता मधुकर राणे यानी सदेह मिडल क्लास मेंटैलिटी. बेटा पढ़े, कुछ बने, बाप के सिर से कर्ज़ का बोझ हल्का करे, इतना सीधा गणित समझने वाला आदमी. बेटे का क्रिकेट-प्रेम उसकी समझ में कहां आएगा! बाप-बेटे की इसी तनातनी में एक दिन एक हादसा हो जाता है. और बाप की दुनिया उलट-पलट जाती है. पहली बार वो अपनी मिडल क्लास लाइफ से बाहर कुछ सोचने लगता है. शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर, बच्चों पर पड़ने वाले भयानक दबाव पर. फिर शुरू होता है उसका सिस्टम से संघर्ष.

ख़ास बात – महाराष्ट्र के तत्कालीन एजुकेशन मिनिस्टर बालासाहेब थोरात ने टाइटल पर आपत्ति उठाई थी. कहा कि ये टाइटल सभ्य और संस्कारी सोसायटी के योग्य नहीं. डायरेक्टर महेश मांज़रेकर का जवाब था, ‘अगर थोरात साहब को ये टाइटल पसंद नहीं है, तो उन्हें सिस्टम सुधारने की कोशिश में लग जाना चाहिए’.


(5)

नाम – अशी ही बनवा-बनवी (1988)
डायरेक्टर – सचिन पिलगावकर
कलाकार – अशोक सराफ, लक्ष्मीकांत बेर्डे, सचिन पिलगावकर, सिद्धार्थ, सुप्रिया, पिलगावकर, अश्विनी भावे, प्रिया अरुण, निवेदिता जोशी
कहां देखें – अमेज़न प्राइम, सोनी लिव, यूट्यूब

इस फिल्म के जो आठ लीड हीरो-हीरोइन थे, उनमें से छह आपसे में विवाहित रहे. सचिन-सुप्रिया, लक्ष्या-प्रिया और अशोक-निवेदिता.
इस फिल्म के जो आठ लीड हीरो-हीरोइन थे, उनमें से छह आपसे में विवाहित रहे. सचिन-सुप्रिया, लक्ष्या-प्रिया और अशोक-निवेदिता.

आखिर में एक कल्ट क्लासिक. मराठी कॉमेडी फिल्मों में एवेरस्ट सा दर्जा रखनेवाली फिल्म. ज़बरदस्त स्टारकास्ट. अशोक सराफ, लक्ष्या, सचिन, सुप्रिया, प्रिया अरुण, अश्विनी भावे. यूं समझिए जैसे शाहरुख, सलमान, आमिर, दीपिका, आलिया, कटरीना सब एक ही फिल्म में. कहानी है चार दोस्तों की, जिन्हें उनके मौजूदा मकान मालिक ने घर से निकाल दिया है. नया घर चाहिए. एक घर काबू में आता दिखता तो है लेकिन मकान मालकिन की शर्त है. सिर्फ शादीशुदा लोगों को ही मिलेगा. मजबूरन दो को औरतों का भेस धरना पड़ता है. आगे का सब मज़ेदार है. लक्ष्मीकांत बेर्डे और सचिन के निभाए स्त्री पात्र बहुत सराहे गए. एक इंटरव्यू में सचिन तेंडुलकर ने इसे अपनी सबसे फेवरेट मराठी फिल्म बताया था.

ख़ास बात – ये फिल्म मराठी स्टेज आर्टिस्ट बालगंधर्व को श्रद्धांजलि के तौर पर बनाई गई थी, जो मराठी रंगमंच पर स्त्री भूमिकाएं निभाने के लिए मशहूर थे. इन्हीं पर 2011 में ‘बालगंधर्व’ नाम की फिल्म भी बनी, जो सुपर-डुपर हिट हुई.


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