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क्या मोदी से पहले भारतीय प्रधानमंत्रियों की दुनिया में कोई औकात नहीं थी?

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नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर खूब छाये रहते हैं. खुद तो वो हैं ही ऐक्टिव, उनको पसंद करने वाले उनसे भी आगे हैं. सुपर ऐक्टिव. सोशल मीडिया पर सैकड़ों ऐसी प्रोफाइल्स मिल जाएंगी. इन्हें बस मोदी जी से मुहब्बत जताने के लिए बनाया और चलाया जाता है. ऐसा नहीं कि इन प्रोफाइल्स पर शेयर होने वाली सारी चीजें फर्जी ही होती हों. कुछ सही भी होता है. मगर बहुत सारी चीजें झूठी होती हैं. निरा फर्जीवाड़ा. इन दिनों एक तस्वीर शेयर हो रही है. इसमें मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की तुलना की जा रही है. बतौर प्रधानमंत्री. ये करामात करने वाले मोदी समर्थक हैं. ऐसा मैं नहीं कह रही. तस्वीर पर छोड़ी गई उनकी छाप कह रही है. तस्वीर में ऊपर की ओर, कोने में लिखा है: मोदी फॉलोअर्स. ये एक तस्वीर असल में दो तस्वीरों का मेल है. एक में हैं मनमोहन. दूसरे में हैं मोदी. मनमोहन वाली फोटो को ‘पुराना भारत’ बताया है. मोदी वाली फोटो के कैप्शन में ‘नया भारत’ लिखा है. ओल्ड इंडिया बनाम न्यू इंडिया, यू सी. हम इसी तस्वीर का पोस्टमॉर्टम करने जा रहे हैं.

वैसे खुद बीजेपी भी मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाने में पीछे नहीं रहती. खुद अमित शाह कह चुके हैं कि जब मनमोहन विदेश यात्राओं पर जाते थे, तब कोई ध्यान नहीं देता था. मगर अब मोदी की विदेश यात्राओं पर दुनिया की नजर होती है.
वैसे खुद बीजेपी भी मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाने में पीछे नहीं रहती. खुद अमित शाह कह चुके हैं कि जब मनमोहन विदेश यात्राओं पर जाते थे, तब कोई ध्यान नहीं देता था. मगर अब मोदी की विदेश यात्राओं पर दुनिया की नजर होती है.

सोशल मीडिया पर खूब मजाक उड़ाया जाता है मनमोहन का
सोशल मीडिया पर जिन लोगों का सबसे ज्यादा मजाक उड़ाया जाता है, उसमें मनमोहन सिंह बहुत ऊपर हैं. मौनी बाबा. मौन मौहन. बहुत सारे नामकरण होते हैं उनके. ये वाली जो तस्वीर है, उसमें मनमोहन सिर झुकाकर खड़े हैं. उनके पास बराक ओबामा और एंजेला मर्केल जैसी बड़ी हस्तियां हैं. अलग-अलग देशों के सर्वेसर्वा. सब हंस-बोल रहे हैं आपस में. मनमोहन अलग एक किनारे सिर झुकाकर खड़े हैं. जो पोस्ट शेयर हो रहा है, उसके मुताबिक पहले भारत के प्रधानमंत्री की ये ‘औकात’ होती थी. उसको कोई नहीं पूछता था. दुनिया में कोई उसका नामलेवा नहीं था. अब इसके बाद चेपी गई है मोदी जी की एक फोटो. इसमें मोदी कुछ बोल रहे हैं. उनके पास शिंजो आबे और डॉनल्ड ट्रंप जैसे राष्ट्राध्यक्ष खड़े हैं. मोदी बोल रहे हैं और बाकी सब सुन रहे हैं. बड़े ध्यान से. पोस्ट के मुताबिक, ये नया भारत है. मोदी का भारत. जिसे पूरी दुनिया सिर-आंखों पर बिठाती है. उसे तवज्जो देती है.

आगे की तस्वीरें देखिए, मुगालते दूर हो जाएंगे
गजब के कलाकार हैं सोशल मीडिया के ये शेर. कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा. ले आते हैं और भानुमति का पिटारा बना लेते हैं. फोटो क्या होता है? एक पल का रेकॉर्ड. एक सेकंड का लेखा-जोखा. उसके पहले का नहीं, उसके बाद का नहीं. बस उस एक पल का सारांश. कई बार तस्वीर में जो नजर आता है, वो पूरा सच नहीं होता. मसलन, मुझे आपके गाल पर एक कीड़ा रेंगता दिखा. मैंने उसे हटाने के लिए हाथ बढ़ाया. किसी ने ठीक उसी पल तस्वीर ले ली. देखने वाले को लगेगा कि मैं थप्पड़ मारने को हाथ बढ़ा रही हूं. मगर ये तो सच नहीं है. तो यहां इस वायरल पोस्ट में एक पल की ही करामात है. मनमोहन का एक पल. मोदी का एक पल. मनमोहन 10 साल प्रधानमंत्री रहे. कई विदेश यात्राओं पर गए. उन सारे दौरों का सच बस ये एक तस्वीर नहीं है. न ही, मोदी की अभी तक की विदेश यात्राओं का सार उनकी ये वाली तस्वीर है. तस्वीरों से ही फैसला करना है, तो कुछ और तस्वीरें भी देख लीजिए. मुगालता दूर हो जाएगा.

ये भी एक तस्वीर है. मनमोहन सिंह बोल रहे हैं और ओबामा उन्हें सुन रहे हैं. ओबामा ने एक बार कहा था. कि जब मनमोहन बोलते हैं, तो दुनिया सुनती है.
ये भी एक तस्वीर है. मनमोहन सिंह बोल रहे हैं और ओबामा उन्हें सुन रहे हैं. ओबामा ने एक बार कहा था. कि जब मनमोहन बोलते हैं, तो दुनिया सुनती है.

 

ये भी एक तस्वीर है. मनमोहन बोल रहे हैं, बाकी सब सुन रहे हैं.
ये भी एक तस्वीर है. मनमोहन बोल रहे हैं, बाकी सब सुन रहे हैं.

 

इससे ज्यादा बराबरी और क्या होगी. क्या इसमें मनमोहन सिंह को देखकर कहीं भी 'कमजोर भारत' की झलक मिलती है?
इससे ज्यादा बराबरी और क्या होगी. क्या इसमें मनमोहन सिंह को देखकर कहीं भी ‘कमजोर भारत’ की झलक मिलती है?

 

बराक ओबामा तो मनमोहन सिंह को बहुत ज्यादा पसंद करते थे. उनकी बहुत इज्जत भी करते थे. एकबार जब मनमोहन ओबामा से मुलाकात के लिए वाइट हाउस गए, तो मुलाकात खत्म होने के बाद खुद ओबामा बाहर उन्हें विदा करने आए. अमेरिकी राष्ट्रपति अमूमन ऐसा नहीं करते हैं.
बराक ओबामा तो मनमोहन सिंह को बहुत ज्यादा पसंद करते थे. एकबार जब मनमोहन ओबामा से मुलाकात के लिए वाइट हाउस गए, तो मुलाकात खत्म होने के बाद खुद ओबामा बाहर उन्हें विदा करने आए. अमेरिकी राष्ट्रपति अमूमन ऐसा नहीं करते हैं.

 

मनमोहन को निशाने बनाने वाले भले ही मुगालते में रहें, लेकिन सच ये है कि विदेशों में मनमोहन सिंह की बहुत इज्जत थी. अब भी है.
मनमोहन को निशाने बनाने वाले भले ही मुगालते में रहें, लेकिन सच ये है कि विदेशों में मनमोहन सिंह की बहुत इज्जत थी. अब भी है.

 

अगर मोदी और मनमोहन की तुलना की ही बात है, तो उसका एक नमूना ये भी है. सच्चाई ये है कि ये तस्वीरें एक पल का हाल बताती हैं. कई बार तस्वीरें गुमराह भी करती हैं. उनमें दिख रहा सच पूरा नहीं होता.
अगर मोदी और मनमोहन की तुलना की ही बात है, तो उसका एक नमूना ये भी है. सच्चाई ये है कि ये तस्वीरें एक पल का हाल बताती हैं. कई बार तस्वीरें गुमराह भी करती हैं. उनमें दिख रहा सच पूरा नहीं होता.

 

ये एक तस्वीर है. सच्ची तस्वीर. इसमें मनमोहन की मुद्रा देखिए. सामने हाथ जोड़े जो नजर आ रहे हैं, वो हैं मुकेश अंबानी. तो क्या ये मान लिया जाए कि मनमोहन के सामने अंबानी दंडवत हो गए थे?
ये एक तस्वीर है. सच्ची तस्वीर. इसमें मनमोहन की मुद्रा देखिए. सामने हाथ जोड़े जो नजर आ रहे हैं, वो हैं मुकेश अंबानी. तो क्या ये मान लिया जाए कि मनमोहन के सामने अंबानी दंडवत हो गए थे?

 

जिस तर्क से मोदी और मनमोहन की वो तुलना वाली ओल्ड बनाम न्यू इंडिया शेयर की जा रही है, उसके मुताबिक इस तस्वीर पर क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए? जो अंबानी मनमोहन के आगे इतने विनम्र थे, वो PM मोदी के कंधे पर हाथ रखकर खड़े हैं.
जिस तर्क से मोदी और मनमोहन की वो तुलना वाली फोटो शेयर हो रही है, उसके मुताबिक इस तस्वीर पर क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए? जो अंबानी मनमोहन के आगे इतने विनम्र थे, वो PM मोदी के कंधे पर हाथ रखकर खड़े हैं. क्या ये PM का अपमान है?

 

अच्छा, और ये तस्वीर क्या कहती है फिर? मनमोहन बोल रहे हैं और मोदी उनकी ओर देखकर सुन रहे हैं. क्या ये दोनों में से किसी एक को कमजोर और दूसरे को ताकतवर साबित करता है?
अच्छा, और ये तस्वीर क्या कहती है फिर? मनमोहन बोल रहे हैं और मोदी उनकी ओर देखकर सुन रहे हैं. क्या ये दोनों में से किसी एक को कमजोर और दूसरे को ताकतवर साबित करता है?

आलोचना में भी फर्जीवाड़ा, ऐसे कैसे चलेगा भाइयों-बहनों?
तस्वीरें आखिरी सच नहीं होतीं. एक पल का हाल देखकर किसी की उपलब्धियां कैसे तय की जा सकती हैं? मनमोहन सिंह का भी बहुत सम्मान था दुनिया में. वैसे भी, जब भारत का कोई राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री कहीं किसी देश में जाता है, तो वो बस एक इंसान नहीं रह जाता. पूरे देश की नुमाइंदगी करता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की अहमियत और ताकत का घटना-बढ़ना अलग बात है. मगर जो ये तस्वीर है, वो पूरा फर्जीवाड़ा है. आलोचना में भी चिंदीचोरी, ये तो हद ही है.


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