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केंद्रीय मंत्री ने केजरीवाल पर तिरंगे के अपमान का आरोप लगाया, लोग कहने लगे- बस यही सबसे बड़ा मुद्दा है

केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री हैं, प्रहलाद सिंह पटेल. इन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया है. आरोप तिरंगे के अपमान का. इसे लेकर केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल सिंह बैजल को चिट्ठी भी लिख दी. लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोगों ने केंद्रीय मंत्री की खिंचाई शुरू कर दी. कहने लगे कि बस देश में इस वक्त यही सबसे बड़ा मुद्दा रह गया है. सरकार अगर इतनी चिंता वैक्सीनेशन, कोरोना, बेरोजगारी, GDP को लेकर दिखाती तो देश कहां पहुंच जाता.

राष्ट्रीय ध्वज सजावट का हिस्सा?

केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह ने चिट्ठी में लिखा है कि हाल के दिनों में मैंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस देखीं. उनकी कुर्सी के पीछे लगे तिरंगे पर बरबस ध्यान चला जाता है. लगता है, जैसे राष्ट्रीय ध्वज को सजावट के तौर पर लगाया गया है. बीच के सफेद हिस्से को कम करके हरे हिस्से को जोड़ दिया गया लगता है. केंद्रीय मंत्री ने उपराज्यपाल को पत्र में यह भी लिखा कि ये भारतीय झंडा संहिता के भाग 1 के 1.3 के मानकों के अनुरूप नहीं है. सीएम केजरीवाल से जाने-अनजाने में ऐसे कृत्य की अपेक्षा न करते हुए इस ओर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं. केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि मैंने अरविंद केजरीवाल को भी पत्र लिखकर कहा है कि वो राष्ट्रीय ध्वज की मर्यादा का ध्यान रखें.

प्रहलाद सिंह पटेल की ओर से लगाए गए इस आरोप पर, खबर लिखे जाने तक, अरविंद केजरीवाल या आम आदमी पार्टी का कोई जबाव नहीं आया. लेकिन सोशल मीडिया पर लोग केंद्रीय मंत्री पर बरस पड़े.

सोशल मीडिया पर क्या कह रहे लोग?

ट्विटर पर एक यूजर स्तुति भटनागर ने लिखा- हां, मौजूदा वक्त में यही देश में सबसे गंभीर चिंता का विषय है.

शीतल सकपाल नाम के यूजर ने लिखा कि प्रहलाद पटेल क्या तिरंगा शिष्टाचार मंत्री हैं या कुछ और? उनका काम असल में है क्या?

कई लोगों ने लिखा कि अगर इतना ध्यान कोरोना को हराने में लगा देते तो देश की ये बुरी हालत न होती. हर दिन हज़ारों लोगों की मौत हो रही है लेकिन केंद्रीय मंत्री की प्रायोरिटी देखिए.

कुछ लोगों ने इसके साथ पीएम मोदी को भी लपेट लिया. आकर्ष धवन ने लिखा कि क्या ये प्रेस कांफ्रेंस की बात कर रहे हैं? पीएम मोदी अब प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं?

BJP नेताओं पर भी लगते रहे हैं तिरंगे के अपमान के आरोप

15 अगस्त, 2018. अमित शाह बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में ध्वजारोहण कर रहे थे. जैसे ही अमित शाह ने तिरंगा फहराने के लिए रस्सी खींची, तिरंगा नीचे आ गिरा. जमीन को छू गया. इसके बाद शाह ने रस्सी खींचकर तिरंगे को दोबारा ऊपर किया. इस घटना के बाद अमित शाह कांग्रेस के निशाने पर भी आ गए थे. कांग्रेस ने विडियो ट्वीट करते हुए कहा था कि जो देश का झंडा नहीं संभाल सकते, वो देश क्या संभालेंगे?.

15 अगस्त 2018 का ही दिन. पीएम नरेन्द्र मोदी ने लाल किले से तकरीबन 80 मिनट भाषण दिया. पीएम ने भाषण ख़त्म करने के बाद जैसे ही पानी का गिलास उठाया कि राष्ट्रगान शुरू हो गया. पीएम मोदी ने पानी का एक घूंट पीकर तुरंत गिलास रख दिया. और पूरे राष्ट्रगान के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहे. इस वाकये का वीडियो भी इंटरनेट पर मौजूद है. नीचे विडियो में 1.22.21 पर वो दृश्य देखा जा सकता है. इसे लेकर भी विपक्षी दलों ने बीजेपी को घेरने की कोशिश की थी.

तिरंगे के बारे में भी जान लीजिए

तिरंगे के बारे में पूरी जानकारी भारतीय ध्वज संहिता यानि फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 में मिलती है. इसके तीन भाग हैं. पहला भाग, झंडे के बारे में सामान्य जानकारी देता है. जैसे किस रंग का होना चाहिए, साइज क्या होना चाहिए आदि. दूसरे भाग में झंडे को आम जनता, प्राइवेट संस्थान और स्कूल आदि कैसे इस्तेमाल करेंगे, इसके बारे में जानकारी है. तीसरा भाग सरकारों और उनसे जुड़ी एजेंसियों द्वारा झंडे के इस्तेमाल के नियम कायदे बताता है.

जैसा कि आप देखते ही हैं कि हमारे तिरंगे में तीन रंग की हॉरिजॉन्टल यानी क्षैतिज पट्टियां हैं. सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है. ये तीनों एक बराबर होती हैं. झंडे की चौड़ाई का अनुपात इसकी लंबाई के साथ 2 और 3 का है. मतलब चौड़ाई 2 फुट और लंबाई 3 फुट होगी. साइज के अनुपात में यह इसी हिसाब से बढ़ता जाता है. जैसे अगर झंडा 4 फुट चौड़ा है तो उसकी लंबाई 6 फुट होगी. सफेद पट्टी के बीच में गहरे नीले रंग का एक चक्र है. यह चक्र सम्राट अशोक की राजधानी रही सारनाथ के स्तंभ पर बना हुआ है. इसमें 24 तीलियां हैं. वैसे तो अब तिरंगा हर साइज में और हर सड़क-चौराहे पर नजर आ जाएंगे, लेकिन इसे बनाने और फहराने के नियम-कायदे फिक्स हैं.

कब, कहां फहराया जा सकता है तिरंगा?

पहले झंडा सिर्फ सरकारी इमारतों पर ही फहराया जा सकता था, लेकिन 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया गया. देश के आजाद होने के 55 साल बाद देश की आम जनता को भी अपने घरों, ऑफिसों, फैक्ट्रियों और दूसरी जगहों पर इस फहराने की छूट दी गई. अब कोई भी भारतीय नागरिक राष्ट्रीय झंडे को फहरा सकता है. बशर्ते वह तिरंगे को फहराने के नियम-कायदों का पालन करे, और झंडे के सम्मान में कोई कमी न आने दे.

तिरंगे के अपमान पर सजा कितनी है?

प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टु नेशनल ऑनर ऐक्ट 1971 के तहत राष्ट्रीय झंडे और संविधान का अपमान करना दंडनीय अपराध है. ऐसा करने वाले को 3 साल तक की जेल या फिर जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है. इसी तरह, राष्ट्रगान को जानबूझकर रोकने या फिर राष्ट्रगान गाने के लिए जमा हुए लोगों के लिए बाधा खड़ी करने पर भी अधिकतम 3 साल की सजा दी जा सकती है. इसके साथ जुर्माना भरने का भी आदेश दिया जा सकता है.


विडियो- किसान बलविंदर सिंह को तिरंगे में लपेट अंतिम संस्कार हुआ तो मामला दर्ज!

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