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MCD नतीजों की ये 20 बातें तो लोग आपको बताना ही भूल गए!

दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनावों के नतीजे सबके सामने हैं. लेकिन इसमें कुछ खास बातें ऐसी हैं जिन्हें अंडरलाइन करके पढ़ा जाना चाहिए.  पढ़िए.

1. एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी के दिग्गजों के विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन बुरा रहा. सबसे बुरी हालत स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की रही. उनकी विधानसभा के सभी वॉर्डों पर AAP हार गई. मनीष सिसोदिया के क्षेत्र के 4 वॉर्डों में से तीन पर भाजपा जीती. कपिल मिश्रा के क्षेत्र में 5 में से 3 सीटें भाजपा जीत गई.

2. बीजेपी को 2012 के एमसीडी चुनावों के मुकाबले 43 सीटें ज्यादा मिली हैं, लेकिन उनके वोट फीसदी में मामूली गिरावट आई है. 2012 में बीजेपी को 36.74 फीसदी वोट मिले थे. इस बार 36.08 फीसदी वोट मिले हैं. लेकिन त्रिकोणीय मुकाबला होने का फायदा बीजेपी को मिला.

3. कांग्रेस को एमसीडी चुनाव में 30 सीटें मिलीं, लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले उसके वोट शेयर में दोगुने से ज्यादा का इजाफा हुआ. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 9 फीसदी वोट मिले थे, इस बार कांग्रेस को 21.09 फीसदी वोट मिले.

4. AAP को पिछले विधानसभा चुनावों के मुकाबले वोट फीसदी के स्तर पर सबसे बड़ा नुकसान हुआ. 2015 विधानसभा चुनाव में उसे 53.76 फीसदी वोट मिले थे, इस बार 26.23 फीसदी ही मिले.

5. ईस्ट, साउथ और नॉर्थ- तीनों एमसीडी मिलाकर सबसे बड़ी जीत द्वारका-बी से बीजेपी प्रत्याशी कमलजीत ने दर्ज की. उनका मार्जिन 9866 वोटों का था. सबसे कम मार्जिन छतरपुर में रहा, जहां बीजेपी प्रत्याशी अनिता तंवर 2 वोटों से चुनाव जीत गईं.

6. यह दिलचस्प रहा कि हाल के विधानसभा उपचुनाव में राजौरी गार्डन की सीट जीतने के बाद भी एमसीडी चुनावों में यहां भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. यहां के चार वॉर्डों में से वह सिर्फ दो जीत पाई.

7. दरियागंज वॉर्ड से कांग्रेस की यासमीन किदवई सिर्फ 59 वोटों से चुनाव जीतीं. भजनपुरा वॉर्ड से बीजेपी की गुरजीत कौर सिर्फ 58 वोटों के अंतर से जीतीं,

8. कांग्रेस सीटों के स्तर पर 30 के आंकड़े के साथ तीसरे नंबर पर रही, लेकिन उसके छह प्रत्याशी एक हजार से भी कम वोटों से हारे.

9. नरेला वॉर्ड से चुनाव मैदान में उतरीं सविता खत्री के साथ उनकी अपनी ही पार्टी भाजपा ने धोखा किया, लेकिन फिर भी वोटरों ने उन्हें चुना. यौन शोषण के आरोपी और AAP के बर्खास्त मंत्री संदीप कुमार ने सविता खत्री के लिए प्रचार किया था, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें बीच चुनाव में पार्टी से निकाल दिया था. फिर भी कमल के निशान पर वो 5 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव जीत गईं.

10. पूर्वी दिल्ली के सुभाष मोहल्ला वॉर्ड में चुनाव अधिकारी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति बन गई. पहले वोटों की गफलत की वजह से भाजपा प्रत्याशी मिथिलेश पांडेय को 150 वोटों से विजेता घोषित कर दिया गया था. लेकिन फिर रिटर्निंग ऑफिसर ने पाया कि जोड़ में एक जगह गलती हो गई है. दोबारा वोट गिने गए और AAP प्रत्याशी 313 वोटों से चुनाव जीत गईं.

11. कुल 2516 कैंडिडेट चुनाव मैदान में थे, जिनमें से 1803 की जमानत जब्त हो गई. नोटा को जबरदस्त समर्थन मिला. कुल 49 हजार 234 लोगों ने किसी भी पार्टी को वोट देने के बजाय नोटा को चुना. कुल 19 पार्टियों में से 14 ऐसी रहीं, जिन्हें नोटा से भी कम वोट मिले. योगेंद्र यादव की पार्टी स्वराज इंडिया भी नोटा वोटों से पीछे रही.

12. एमसीडी चुनाव में इस बार जेडीयू को सिर्फ 0.65 फीसदी वोट मिले. पहली बार बड़े पैमाने पर पार्टी ने चुनाव मैदान में प्रत्याशी उतारे थे. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुराड़ी और बदरपुर में दो सभाएं की थीं.

13. पश्चिमी करावल नगर में पिछली बार निर्दलीय प्रत्याशी धर्मेंद्र सिंह पार्षद चुने गए थे. इस बार जनता ने उन्हें आठवें पायदान पर पहुंचा दिया. उन्हें 848 वोट मिले.

14. भाजपा के मयूर विहार जिलाध्यक्ष ललित जोशी ने अपनी पत्नी चंचल जोशी को पार्टी से टिकट तो दिलवा दिया, लेकिन जीत नहीं दिला सके. वो तीसरे नंबर पर सिमट गईं और मुख्य मुकाबला बसपा और कांग्रेस के बीच हुआ.

15. बीजेपी ने अपने सारे पुराने पार्षदों को टिकट नहीं दिया था. इनमें नवादा के कृष्ण गहलोत भी थे. इस बार वह अपने दम पर चुनाव लड़े और जीत गए. यहां से भाजपा के रमेश गहलोत मैदान में थे.

16. बसपा का राष्ट्रीय स्तर पर बुरा प्रदर्शन दिल्ली नगर निगम चुनावों में भी जारी रहा. 2012 में मायावती की पार्टी को 15 वॉर्डों पर जीत मिली थी. इस बार सिर्फ 3 वॉर्ड ही जीत सके.

17. इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) को पिछली बार 3 वॉर्डों पर जीत मिली थी. इस बार इनेलो को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली. वॉर्ड का नाम- ढिचाऊं कलां.

18. अकाली दल ने चार वॉर्डों पर जीत हासिल की. भाजपा गठबंधन के साथ मिलकर उन्होंने 5 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे.

19. यूपी में हार मिली, लेकिन MCD में सपा ने खाता खोल लिया. घम्मनहेड़ा वॉर्ड से दीपक मेहरा साइकिल के निशान पर चुनाव जीते. सपा ने कुल 27 उम्मीदवार खड़े किए थे, जिनमें से दो उम्मीदवारों की मौत होने से दोबारा उपचुनाव होंगे.

20. जमानत जब्त कराने वाले प्रत्याशियों के लिहाज से कांग्रेस पहले नंबर पर रही. उसके 92 प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए. AAP के 40 और बीजेपी के 5 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई.

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