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अल्लामा इक़बाल की कही इन 10 बातों में अनिल कपूर का वो फ़ेमस डायलॉग भी है!

मुहम्मद इक़बाल. जिन्हें लोग अल्लामा इकबाल के नाम से ज़्यादा जानते हैं. बंटवारे से पहले भारत के मशहूर शायर, नेता और दार्शनिक. ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा …’ लिखने वाले अल्लामा इक़बाल की आज बरसी है. अल्लामा का मतलब होता है ‘महाज्ञानी’. तो ऐसे महाज्ञानी इक़बाल के लिखे से 10 बेहतरीन चीज़ें ये रहीं. पढ़ने-सुनने-समझने में बिल्कुल आसान, लेकिन असर भरपूर और गहरा.

#1

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले,

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

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#2

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं,

अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

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#3

तिरे सीने में दम है दिल नहीं है

तिरा दम गर्मी-ए-महफ़िल नहीं है

गुज़र जा अक़्ल से आगे कि ये नूर

चराग़-ए-राह है मंज़िल नहीं है!

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#4

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा

हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा

Iqbal 04

#5

वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है

तिरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में

Iqbal 05

#6

तिरे आज़ाद बंदों की न ये दुनिया न वो दुनिया

यहाँ मरने की पाबंदी वहाँ जीने की पाबंदी

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#7

सौ सौ उमीदें बंधती है इक इक निगाह पर

मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई

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#8

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

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#9

मन की दौलत हाथ आती है तो फिर जाती नहीं

तन की दौलत छाँव है, आता है धन जाता है धन

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#10

जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में

बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते

Iqbal 10

अल्लामा इक़बाल ने ‘सारे जहां से अच्छा’ गीत बच्चों के लिए लिखा था. सबसे पहले ये 16 अगस्त, 1904 को ‘इत्तेहाद’ नामक साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशित हुई. बाद में इक़बाल ने इसे अपने ‘बांग-ए-दरा’ नामक संग्रह में ‘तराना-ए-हिन्दी’ शीर्षक से शामिल किया.


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