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देश में चुनाव लड़ रही हीरोइनों के क्या हाल हैं?

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साल 2019. लोकसभा चुनाव. 5 साल पहले ही मोदी की लहर में सब बह गए थे. उस लहर को काटने की बातें हो रही थीं. लहर को और बढ़ाने की बातें हो रही थीं. कुल मिलाके इतना तय था कि 2019 के लोक सभा चुनाव पूरी तरह से पैसा वसूल होने वाले थे. इतने कि मायावती और मुलायम सिंह यादव मंच साझा करते हुए देख लिए गए. महागठबंधन बन गया. चुनाव चालू हुए, चुनाव आयोग कठघरे में खड़ा हो गया. क्लीन चिट बांटी, प्रचार को कट शॉर्ट कर दिया गया, आयोग में फूट तक कि खबरें आ गईं. लेकिन अंत में आना तो एक ही को था. वो कोई भी आये.  और उसके आने का फ़ैसला गणना से होना था. मतगणना. इस मतगणना में उनकी भी गिनती हुई जिनकी पहचान बनी हुई थी. इलेक्शन, भाषण, रैली और राजनीति से इतर. वो जो कैमरे पर दिखती थीं. जो हिरोइन थीं और राजनीति में आ गईं. चुनाव लड़ा. देखते हैं कुछ मेजर ऐसे नाम और 2019 के लोकसभा चुनाव में उनका ऊंट किस करवट बैठा.

1. हेमा मालिनी

hema malini mathura

 

पार्टी – भारतीय जनता पार्टी
सीट – मथुरा
रुझान/नतीजा – पहले नंबर पर. 2,90,000 वोटों से आगे. 

हेमा मालिनी शोले (1975) में दिखीं. फिर धर्मेन्द्र से शादी हो गई (1979). ड्रीम गर्ल का नाम मिल चुका था. इसी नाम की फ़िल्म (1977) के बाद से. 2019 के लोकसभा चुनावों में हेमा मालिनी शुरुआत से बनी हुई थीं. सबसे पहले तो उन्होंने एक पत्रकार से कहा कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र के लिए बहुत सारा काम किया. लेकिन काम इतना किया कि ऐन मौके पर उन्हें याद नहीं था इसलिए वो कुछ गिना नहीं पाईं. इसके बाद वो मथुरा में किसान महिलाओं के साथ खेत में फ़सल काटती दिखीं और साथ ही उन्हें ट्रैक्टर चलाते भी देखा गया. हर कोई इसको एक अच्छी पीआर एक्सरसाइज़ के नज़रिये से देख रहा था.

2. जयाप्रदा

पार्टी – भारतीय जनता पार्टी
सीट – रामपुर
रुझान/नतीजा – लगभग 1,10,000 वोटों से हार रही हैं. 

जयाप्रदा भी लोकसभा चुनावों में ख़बरों में रहीं. वजह थी उनपर की गई भद्दी टिप्पणी. टिप्पणीकार थे रामपुर से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आज़म खान. इस टिप्पणी के बाद काफ़ी बवाल हुआ और चुनाव आयोग ने उनपर चुनाव प्रचार करने से 72 घंटों का बैन लगा दिया था. बात यहीं तक नहीं रुकी थी. इसके बाद आज़म खान के बेटे ने उन्हें अनारकली कह दिया. जया प्रदा इससे पहले समाजवादी पार्टी से ही जुड़ी हुई थीं और आज़म खान को अपना मेंटर तक कहती थीं. वो 2004 से लेकर 2014 तक सांसद रहीं. 2004 में पहली बार समाजवादी पार्टी ने रामपुर की सीट जीती और कांग्रेस की सिटिंग सांसद बेग़म नूर बानो को 85 हज़ार वोटों से हराया. लेकिन फिर 2009 आते-आते आज़म खान को जयाप्रदा की अमर सिंह से राजनीतिक नज़दीकियां खटकने लगीं और आज़म ने जया का पत्ता काटने कि जुगत भिड़ानी शुरू कर दी. बदले में आज़म खान को ही पार्टी से निकाल दिया गया. आज़म खान ने जयाप्रदा को हराने का ज़िम्मा उठा लिया और नतीजतन जयाप्रदा मात्र 31 हज़ार वोटों से जीत सकीं. साल भर में आज़म खान पार्टी में वापस आ गए. 2014 में आज़म खान के कहे अनुसार जयाप्रदा को रामपुर से टिकट नहीं दिया गया और जया बिजनौर से रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ीं.

3. उर्मिला मातोंडकर

Urmila

पार्टी – इंडियन नेशनल कांग्रेस
सीट – मुंबई नॉर्थ
रुझान/नतीजा – 4 लाख, 65 हजार वोट से हार चुकी हैं. जीतने वाले हैं गोपाल शेट्टी. 

उर्मिला मातोंडकर ने मार्च 2019 में ही कांग्रेस पार्टी जॉइन की. और कांग्रेस में आते ही उन्होंने भाजपा पर धावा बोल दिया. उन्होंने धार्मिक कट्टरपंथ पर सधी हुई बातें तो बोली हीं, साथ ही देश में फैल रही साम्प्रदायिकता पर भी सत्ताधारी पार्टी को तान दिया. उर्मिला ने कहा कि नरेंद्र मोदी जवानों और किसानों के नाम पर ‘रोंदू पॉलिटिक्स’ कर रहे हैं. अपनी ऐसी ही आलोचनाओं की वजह से उर्मिला मातोंडकर राइट-विंग ट्रोल्स के निशाने पर भी रही थीं. जिस सीट से उर्मिला चुनाव लड़ रही हैं, एक वक़्त पर इसी सीट से गोविंदा ने चुनाव लड़ा था. साल 2004 में उन्होंने यूनियन मिनिस्टर और भाजपा के कैंडिडेट राम नाइक को हराया. इसी के बाद से गोविंदा को Giant-Killer कहा जाने लगा.

4. मिमी चक्रवर्ती

mimi chakraborty

पार्टी – तृणमूल कांग्रेस
सीट – जादवपुर
रुझान/नतीजा – लगभग 2,95,000 वोटों से जीत चुकी हैं. 

मिमी चक्रबर्ती जिस सीट से लड़ रही हैं वहां से एक वक़्त पर ममता बनर्जी ने जीत दर्ज़ की थी. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद साल 1984 में कांग्रेस की उम्मीदवार ममता बनर्जी ने CPI(M) के सोमनाथ चटर्जी को हरा दिया था. उस वक़्त तक जादवपुर की सीट कम्युनिस्ट पार्टी का किला थी. अब, जब 2019 में चुनाव हुए हैं तो ममता बनर्जी अपनी कैंडिडेट मिमी से ऐसी सीट पर पॉज़िटिव रिज़ल्ट चाह रही होंगी जहां कोई भी पार्टी लगातार 3 बार जीत नहीं दर्ज़ कर पाई है.

मिमी चक्रबर्ती चुनाव के डैन भी खबर में बनी हुई थीं. वो इसलिए क्यूंकि जब वोट पड़ रहे थे, वो अपने घर में बैठी हुई थीं. बाहर ही नहीं निकलीं. वो टीवी पर ख़बरें देख रही थीं और फ़ोन से हालात का जायज़ा ले रही थीं. उनसे इसकी वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहती थीं कि वोटरों का और बाकी हालातों को संभालने वालों का ध्यान न भटके. अगर वो बाहर निकलतीं तो वर्करों को उनके वार्ड का खयाल रखने की बजाय उनके भीड़ में न अटकने की ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ती.

5. नुसरत जहां

Nusrat Jahan TMC Candidate

पार्टी – तृणमूल कांग्रेस
सीट – बशीरहाट
रुझान/नतीजा – लगभग साढ़े तीन लाख वोटों से जीत रही हैं. 

नुसरत जहां को ममता बनर्जी ने बशीरहाट से टिकट दिया है. साल 1980 से 2009 तक ये सीट कम्युनिस्ट पार्टी के ही कब्जे में रही लेकिन फिर तृणमूल ने यहां तम्बू गाडा. 2009 में हाजी नुरुल इस्लाम और 2014 में इदरीस अली ने यहां जीत दर्ज़ की. नुसरत का नाम एक रेप कांड में आता है. 6 फ़रवरी 2012 में पार्क स्ट्रीट पर एक चलती कार में एक एंग्लो-इंडियन महिला के साथ रेप किया गया था. इसके आरोप में कादर खान नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया गया था. नुसरत जहां कादर खान की गर्लफ्रेंड थीं. दोनों का निकाह होने ही वाला था. उनका नाम चार्जशीट में नहीं दायर हुआ. उन्होंने पुलिस से पूछताछ के दौरान बताया था कि घटना के बाद वो कादर खान से नहीं मिली थीं जबकि जांच में मालूम पड़ा था कि दोनों ने मुंबई में एक कमरा बुक किया था. इसके बाद नुसरत कोलकाता लौट आई थीं और कादर खान पटना चले गए थे. इस खुलासे के बाद से ये मांग चल रही थी कि नुसरत को दोषी को पनाह देने के एवज में गिरफ्तार किया जाए.

6. मुनमुन सेन

moon moon sen TMC election

पार्टी – तृणमूल कांग्रेस
सीट – आसनसोल
रुझान/नतीजा – 1 लाख 97 हजार वोटों से हार गईं हैं.

इस सीट पर दो कलाकारों की लड़ाई है. बाबुल सुप्रियो भाजपा से और मुनमुन सेन तृणमूल कांग्रेस से. बाबुल सुप्रियो ने टीएमसी की डोला सेन को 70 हज़ार वोटों से हराया था. 29 अप्रैल को जब आसनसोल में हिंसा हो रही थी. पत्रकार सड़कों पर पीटे जा रहे थे. और इस बारे में मुनमुन से पूछा गया तो उनका वाहियात सा बयान आया. कहा “बेड टी देर से मिलने के कारण वो देर से सो कर उठी हैं. इसलिए आसनसोल की हिंसा के बारे में कुछ पता नहीं.” मुनमुन सेन राइमा और रिया सेन की मम्मी हैं. सुचित्रा सेन की बेटी हैं. खुद भी ऐक्ट्रेस थीं. बंगाली, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और हिन्दी-मराठी की कई फ़िल्में भी की थीं. शादी जिस खानदान में हुई वो त्रिपुरा का राजघराना था. रेफरेंस के लिए ये जानिये कि उनकी सास जयपुर की मशहूर महारानी गायत्री देवी की बहन थीं. पॉलिटिकल करियर 2014 में शुरू हुआ. बंगाल के बांकुरा से चुनाव जीतीं. बासुदेब आचार्य को हराया. जो 1980 से वहां लगातार नौ बार सांसद थे. इसलिए इन्हें giant killer कहा जाने लगा. 

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