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2020 की ये 20 मस्ट वॉच रीजनल फिल्में नहीं देखीं, तो बहुत कुछ मिस कर रहे हैं आप

2020 जाने को है. हम 2021 की दहलीज़ पर खड़े हैं. जाते हुए साल को याद करेंगे. इस साल आईं कुछ कमाल की रीजनल फिल्मों के बारे में आपको बताएंगे. कुछ थिएटर्स पर आईं, तो कुछ ओटीटी पर. तो चलिए, शुरू करते हैं.

Bharat Talkies


1.

फिल्म का नाम: अंजाम पथिरा
भाषा: मलयालम
डायरेक्टर: मिदून मैनुएल थॉमस
कलाकार: कुंचको बोबन, जिनु जोसेफ, श्रीनाथ बसी, हरीकृष्णन

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ये सस्पेन्स थ्रिलर आपको बेचैन करके रख देगी. फोटो – ट्रेलर

कहानी – एक सस्पेंस थ्रिलर. जहां सीरियल किलर खुला घूम रहा है. पुलिस को कोई हिंट नहीं. इतना सुनके इसे अगर बाकी थ्रिलर्स की कैटेगरी में डाल रहे हैं, तो गलती है. क्यूंकि ये फिल्म उससे कहीं ज़्यादा ट्विस्टेड है. एक सीरियल किलर जिसे बस पुलिसवालों से मतलब है. इतना कि उन्हे ट्रैक करता है और मारकर आंखें निकाल लेता है. पुलिस बेचारी अपने लोगों को ही नहीं बचा पा रही. मदद के लिए अनवर को बुलाती है. जो पेशे से क्रिमिनोलॉजिस्ट है. अब पुलिस के साथ मिलकर अनवर कोई पैटर्न ढूंढता है. पर सारी कोशिश बेकार. ये किलर है कौन? और ऐसे मर्डर्स के पीछे कोई मोटिव है या निरा पागलपन? इन सवालों के जवाब पाने में दर्शकों को अनवर से ज़्यादा बेचैनी होती है.

हाल ही में फिल्म का हिंदी रीमेक भी अनाउन्स किया गया.


2.

फिल्म का नाम: कलर फोटो
भाषा: तेलुगु
डायरेक्टर: संदीप राज
कलाकार: सुहास, चांदिनी चौधरी, विवा हर्ष, सुनील वर्मा

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मुद्दतों से चले आ रहे रंगभेद पर एक तमाचा है ये फिल्म. फोटो – पोस्टर

कहानी – ‘राधा क्यूं गोरी, मैं क्यूं काला’. हम सभी के कानों में कभी ना कभी इस गाने के बोल पड़े ही हैं. कृष्ण के इसी सवाल को कन्टिन्यू रखा है इस फिल्म के हीरो ने. सांवले रंग वाला जयकृष्णा. एक कॉलेज स्टूडेंट, जिसे एक दिन दीप्ति से पहली नज़र का प्यार हो जाता है. दीप्ति एक फेयर कॉम्पलेक्शन वाली लड़की है. इसी कारण जयकृष्णा को खुद को दीप्ति के साथ इमेजिन करना भर भी असंभव सा लगता है. बिना दिल की बात बोले, अपने आप को रिजेक्ट कर लेता है. शायद अब तक अनुभव ही ऐसा रहा हो. दीप्ति तक भी ये बात पहुंचती है. क्या वो दुनिया की तरह ही रियेक्ट करेगी? या हिम्मत दिखाएगी सोसाइटी को आईना दिखाने की? यही आगे की कहानी है.


3.

फिल्म का नाम: सूराराई पोट्रू
भाषा: तमिल
डायरेक्टर: सुधा कोंगरा
कलाकार: सूर्या, अपर्णा बालामुरली, परेश रावल, कविता रंजिनी

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सूर्या की परफॉरमेंस पर तालियां पीटने का मन कर जाएगा. फोटो – ट्रेलर

कहानी – छोटे से गांव से उठे लड़के की कहानी. प्यार से दोस्त और घरवाले मारा बुलाते हैं. मारा का एक सपना है. जो उसकी हालत देखते हुए असंभव सा लगता है. कि एक दिन खुद की एयरलाइंस कंपनी हो. जहां कम बजट में भी लोग ट्रेवल कर सकें. गरीब बस गरीबी में मरे, ऐसी सोच से उसकी लड़ाई है. लेकिन इतने बड़े बिजनेस में घुसना आसान नहीं. और कहते हैं ना, ‘नोबडी लाइक्स एन आउटसाइडर’. यही बात मारा के केस में फिट बैठती है. वो अपने हालात बदल पाता है या नहीं? सपने सिर्फ सपने रह जाते हैं, या हकीकत में बदलते हैं? यही मारा की आगे की जर्नी है. फिल्म में मारा के सपने चाहे आपको उसकी सच्चाई से दूर लगें, पर एक बात तय है. उसकी पूरी जर्नी में आप खुद को उसके लिए चीयर करते पाएंगे.

फिल्म एयर डेक्कन के फाउंडर कैप्टन जी. आर. गोपीनाथ की बुक ‘सिंप्ली फ्लाई’ पर बेस्ड है.


4.

फिल्म का नाम: मिडल क्लास मेलडीज़
भाषा: तेलुगु
डायरेक्टर: विनोद अनंतोजू
कलाकार: आनंद देवरकोंडा, वर्षा बोलम्मा, चाणक्य तेजस, दिव्या श्रीपद

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एकदम मिडल क्लास लाइफ का अर्क निकाल के रख दिया. फोटो – ट्रेलर

कहानी – मिडल क्लास लाइफ भी क्या ग़ज़ब है. ज़्यादा बड़ी-बड़ी चीजें नहीं घटती. ना ही उनके घटने के इंतज़ार में बैठा जाता है. बस रोज होने वाली छोटी-छोटी चीजों से लाइफ के मायने निकाले जाते है. ऐसी चीजें जिनपर आज शायद आपका ध्यान भी ना जाए. पर आगे जाके इंसान सोचने पर लगता है, ‘यार, वो दिन भी क्या दिन थे’. कुछ ऐसी ही है मिडल क्लास मेलडीज़ की कहानी. राघव अपने घरवालों के साथ गांव में रहता है. पिता के रेस्टोरेंट में हेल्प करता है. पर इतने से खुश नहीं. चाहता है कि शहर जाकर अपना रेस्टोरेंट खोले. फिर वही होता है, जिसकी शिकायत हर सपने देखने वाला लड़का करता है. पड़ोसी और पिता बात मज़ाक में उड़ा देते हैं. पर राघव भी जिद्दी है. कुछ ना कुछ करके रेस्टोरेंट खोल ही लेता है. अपनी पहचान बना पाता है या नहीं? या पिता के हिसाब से लूज़र ही रह जाता है? यही फिल्म की कहानी है.

फिल्म के एंड से शायद आपको इतना फर्क ना पड़े. पर राघव की इस जर्नी से जरूर पड़ेगा. गिरकर उठते रहने की जर्नी से. फिल्म के इन्ही मोमेंट्स को आप समेटेंगे. और खुद की लाइफ से कनेक्ट करते पाएंगे.


5.

फिल्म का नाम: का पे रानासिंगम
भाषा: तमिल
डायरेक्टर: पी. विरुमंडी
कलाकार: ऐश्वर्या राजेश, विजय सेतुपति, रंगराज पांडे, शनूर सना

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एक अकेली औरत और सामने पूरा सिस्टम. फोटो – ट्रेलर

कहानी – तमिलनाडु का जिला रामनाथपुरम. उसी के एक गांव की कहानी. रानासिंगम एक लोकल एक्टिविस्ट है. जहां ग़लत होते देखता है, चुप नहीं रहता. बराबर आवाज़ उठाता है. इसीलिए गांव के लोग उसे पसंद भी करते हैं. आगे काम के सिलसिले में रानासिंगम का दुबई जाना होता है. पर कुछ टाइम बाद खबर आती है कि वहां एक्सीडेंट में डेथ हो गई. अब शुरू होती है असली जद्दोजहद. उसकी पत्नी अरियंची की. जो अपने पति की डेड बॉडी को इंडिया लाना चाहती है. ताकि अंतिम विदाई दे सके. इसी चक्कर में सरकारी ऑफिसेज़ जाती है. दफ़्तर से दफ़्तर अपनी चप्पल घिसती है. पर कोई फायदा नहीं. अरियंची की मजबूरी के ज़रिए हमारे सिस्टम पर कमेंट किया गया है. कि कैसे हम सब बस कहने के लिए एक हैं. मानने के लिए नहीं. जैसे एक सीन है. जहां अरियंची न्यूज़ देखती है कि एक्ट्रेस श्रीदेवी की बॉडी को दुबई से इंडिया लाया जा रहा है. और यहां उसकी कोई सुन तक नहीं रहा.

अरियंची के भी इरादे पक्के हैं. लाखों ना के बीच एक हां ढूंढने निकली है. पर क्या अपनी बात सही कानों तक पहुंचा पाएगी? या सिस्टम उसे निराशा के सिवा कुछ नहीं देगा, ये जानने के लिए फिल्म देख डालिए.


6.

फिल्म का नाम: दिया
भाषा: कन्नड़
डायरेक्टर: के. एस. अशोक
कलाकार: खुशी, पृथ्वी अंबार, दीक्षित शेट्टी, पवित्र लोकेश

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लाइफ में सेकंड चांस की कहानी है ‘दिया’. फोटो – ट्रेलर

कहानी – दिया. एक इन्ट्रोवर्ट लड़की. खुद से बातें करने वाली. क्या पसंद है और क्या नहीं, सब दिल में दबा के रखने वाली. रोहित से मिलती है. उसे चाहने लगती है. रोहित भी उसे पसंद करता है. दोनों का प्यार शब्दों से ज़्यादा इमोशंस से झलकता है. यही कारण है कि दिया को अपने दिल की बात कहने में तीन साल लग जाते है. पर एक दिन कुछ घट जाता है. जिसकी वजह से रोहित उससे दूर हो जाता है. अपना पास्ट भुलाने के लिए दिया शहर बदल लेती है. यहां उसे मिलता है आदी. लाइफ के मैजिक में विश्वास रखने वाला. धीरे-धीरे दोस्ती शुरू होती है. दिया भी पुराने दिनों से उभरने लगती है. पर तभी कहानी में ट्विस्ट आता है. दिया को कुछ पता चलता है. रोहित के बारे में. ऐसा जो उसकी पूरी दुनिया बदलकर रख देगा. क्या है वो सच और दिया उससे कैसे डील करती है? इसका जवाब आपको फिल्म देगी.


7.

फिल्म का नाम: पाव कदैगल
भाषा: तमिल
डायरेक्टर: सुधा कोंगरा, गौतम मेनन, वेट्रीमारन, विग्नेश शिवन
कलाकार: कालिदास जयराम, शांतनु भाग्यराज, साई पल्लवी, प्रकाश राज, कल्कि केकलां, गौतम मेनन, अंजलि

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कालिदास जयराम की परफॉरमेंस देख आंखें भर जाएंगी. फोटो – ट्रेलर

कहानी – चार कहानियों में बंटी फिल्म. पहली शुरू होती है सत्तार से. जो एक ट्रांसजेंडर है. दुनिया मज़ाक बनाती है और घरवाले बस ताने. सिर्फ एक इंसान उसे समझता है. उसका दोस्त सर्वनन. इसी कारण सत्तार उसे चाहने भी लगता है. अपने दिल की बात बोलने की सोचता है. पर उसी दिन कुछ ग़ज़ब घट जाता है.
दूसरी कहानी शुरू होती है वीरसिमन से. जात-पात को आंख बंद करके माननेवाला. दो बेटियां हैं जो शहर में रहती हैं. उनमें से एक घर आती है. किसी को पसंद करती है और पिता का अप्रूवल चाहती है.

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कल्कि ने भी दूसरी कहानी में अहम रोल प्ले किया है. फोटो – ट्रेलर

तीसरी कहानी है एक पिता और बेटी की. बेटी ने अपनी मर्जी से भागकर शादी की थी. जिसके बाद परिवार की बदनामी हुई. हालांकि, अब उसे घर बुला लिया. पिता उसे अपनाना चाहता है. पर लोगों की ‘समाज क्या कहेगा’ जैसी बातें भी बराबर कानों में पड़ रही हैं.

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प्रकाश राज का ऐसा अवतार किसी बॉलीवुड फिल्म में ना देखा होगा. फोटो – ट्रेलर

चौथी है एक मिडल क्लास फैमिली की. पति-पत्नी, उनकी दो छोटी बेटियां और एक बेटा. पिता बेटियों को लेकर पूरी तरह सपोर्टिव है. बस मां है, जो मर्यादा में रहने की बात करती है. एक दिन अचानक ऐसा हो जाता है जो इमेजिन कर पाना भी किसी के लिए मुश्किल हो. किसी टाइम साथ हंसने-खेलने वाला ये परिवार अब एक दूसरे से नज़रें भी नहीं मिला पाता.

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अंदर तक झकझोर के रख देगी ये कहानी. फोटो – ट्रेलर

चारों कहानियों को पिरोने वाला सूत्र एक ही है. समाज और उसमें पनपने वाली सोच कि ‘लोग क्या कहेंगे’.


8.

फिल्म का नाम: एक्ट 1978
भाषा: कन्नड़
डायरेक्टर: मंसोर
कलाकार: यगना शेट्टी, रवि भट्ट, समराग्नी राजन, सुधा बेलवाड़ी

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एक औरत, एक गन, एक बॉम्ब और एक सरकारी दफ्तर. फोटो – ट्रेलर

कहानी –  शुरू होती है एक गवर्मेंट ऑफिस से. रोज़ ही की तरह काम हो रहा है. एक कोने में गॉसिप चल रही है. तो दूसरी ओर चाय की सुड़कियों के साथ फाइलें इधर से उधर. पर ये दिन रोज़ जैसा नहीं. क्यूंकि तभी ऑफिस में आती है गीता. एक बुज़ुर्ग इंसान के साथ. अपने फोन से हर तरफ फोटोज़ खींचने लगती है. सिक्योरिटी गार्ड रोकने आता है. पर जो पाता है, उसे देख सकपका जाता है. गीता की कमर पर बॉम्ब बंधा है. और हाथ में गन. ऑफिस वर्कर्स के लिए सारे दरवाज़े बंद हो जाते हैं. वो अब होस्टेजेस हैं. तब तक रहेंगे जब तक गीता की शर्तें नहीं मान ली जाती. सवाल है कि ये कोई बैंक नहीं, जहां बंदूक की नोंक पर लूट मचाई जाए. यहां अलमारियों में सालों से धूल खा रही फाइलों के अलावा कुछ नहीं. तो फिर गीता चाहती क्या है? क्या हुआ कि ऐसा स्टेप लिया? और अपने साथ एक बुज़ुर्ग को भी शामिल कर किया. बस एक ही बात कह सकते हैं. तस्वीर जितनी दिख रही है, उससे कहीं ज़्यादा गहरी है.


9.

फिल्म का नाम: कन्नम कन्नम कोलैयाडीधाल
भाषा: तमिल
डायरेक्टर: डेसिंह पेरिसामी
कलाकार: दुलकर सलमान, रितु वर्मा, रक्षन, गौतम वासुदेव मेनन

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दोनों ऐसे कांड में फंस जाते हैं जो शायद इन्होंने किया ही ना हो. फोटो – ट्रेलर

कहानी – सिद्धार्थ और कालिस. दोनों पक्के यार. आईटी फर्म में काम करते हैं. पर ये दुनिया को दिखाने के लिए. रियलिटी में दोनों एक नंबर के फ्रॉड हैं. ऑनलाइन स्कैम्स करते हैं और ऐश में रहते हैं. फिर मुलाकात होती है मीरा और उसकी दोस्त श्रेया से. सिद्धार्थ को मीरा पसंद आ जाती है, कालिस को श्रेया. अगर अभी से ये मान बैठे हैं कि ये टिपिकल ‘बॉय मीट्स गर्ल’ वाली स्टोरी है, तो ग़लत जा रहे हैं. नए-नए प्यार में पड़े दोनों लड़के लाइफ को ट्रैक पर लाना चाहते हैं. सब कुछ रीस्टार्ट करना चाहते हैं. तभी इनके पुराने दिनों का भूत सामने आता है. इंस्पेक्टर प्रताप के रूप में. प्रताप इन्हें हर हाल में पकड़ना चाहता है. ऐसे क्राइम के लिए जो शायद इन्होंने किया ही ना हो. बचते हैं या पकड़े जाते हैं, बस यही फिल्म की कहानी है.


10.

फिल्म का नाम: लव मॉकटेल
भाषा: कन्नड़
डायरेक्टर: डार्लिंग कृष्णा
कलाकार: डार्लिंग कृष्णा, मिलाना नागराज, धनुष प्रणव, अमृता अय्यंगर

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प्यार की अलग-अलग स्टेज को एक्सप्लोर करती है फिल्म. फोटो – ट्रेलर

कहानी – कहते हैं सच्चा प्यार सिर्फ एक बार होता है. कितनी ही फिल्में बनी जो ये बोल-बोल थक गई. पर यहां कहानी अलग है. यहां हीरो को कई बार प्यार हुआ. अलग अलग उम्र के पड़ाव पर. फिल्म ज़्यादातर समय फ्लैशबैक में चलती है. जहां आदी अपने प्यार के साथ हुए अनुभवों को याद कर रहा है. पहला होता है स्कूल में. पहला नशा, पहला खुमार वाला प्यार. रीमा नाम की लड़की से. जिसे वो टाइटैनिक वाली रोज़ की उपमा दे डालता है. पर यहां बात नहीं बन पाती. कारण बनती है आदी की टूटी-फूटी अंग्रेज़ी. फिर पहुंचता है कॉलेज. जहां मिलती है जो. पर अपने और जो के लिविंग स्टैंडर्ड का फर्क बात बिगाड़ देता है. फिर लाइफ में एंट्री होती है निधि की. दोनों जल्द शादी भी कर लेते है. काश ऐसा बोल पाते कि इसके बाद वो खुशी-खुशी रहे. कुछ ऐसा होता है, जो इस कपल की लाइफ घुमाके रख देता है. ऐसा, जो आदी को प्यार की असली परिभाषा जानने पर मजबूर कर देता है. क्या है वो इंसीडेंट और क्या आदी को सच्चा प्यार मिल पाता है, यही फिल्म बताती है.


11.

फिल्म का नाम: ड्रैकुला सर
भाषा: बंगाली
डायरेक्टर: देबलोय भट्टाचार्य
कलाकार: अनिर्बन भट्टाचार्य, बिदिप्ता चक्रबर्ती, मिमी चक्रबर्ती, रुद्रनील घोष

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ड्रैकुला की कहानियों से हम सभी का कभी ना कभी तो वास्ता पड़ा ही है. फोटो – ट्रेलर

कहानी – ‘ड्रैकुला सर’ दो टाइमलाइन में बंटी है. पहली शुरू होती है 1970 के दशक के नक्सल मूवमेंट से. अमोल एक क्रांतिकारी है. जो अब पुलिस से भागता फिर रहा है. छुपने के लिए अपनी एक्स लवर मंजरी के घर पहुंच जाता है. अब बारी आती है दूसरे हिस्से की. यानि प्रेजेंट दिन की कहानी. रक्तिम एक स्कूल टीचर है. अकेला रहता है. बात करते वक्त मुंह को रुमाल से छुपाता है. कारण है उसके दो पैने दांत. जिन्होंने उसे स्टूडेंट्स के बीच ड्रैकुला सर की संज्ञा दी. पर लोग उसके दांतो से भय नहीं खाते. उससे दूर नहीं भागते. बल्कि उसका मज़ाक उड़ाते हैं. यहीं रक्तिम की कहानी में ट्विस्ट आता है. उसे लगने लगता है कि वो अमोल का पुनर्जन्म है. और अब वो अपना बदला लेना चाहता है. अमोल के साथ हुई नाइंसाफी का बदला. और कैसे लेगा? अपने इन्हीं दो दांतों से. पर क्या वो सच में अमोल का पुनर्जन्म है या किसी छलावे में जी रहा है. या ये छलावा बस दर्शकों के लिए है. असली कहानी कुछ और ही है. फिल्म ही आपकी गुत्थी सुलझाएगी.


12.

फिल्म का नाम: सुफ़ना
भाषा: पंजाबी
डायरेक्टर: जगदीप सिद्धू
कलाकार: तानिया, एमी विर्क, जगजीत संधु, रबाब कौर

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प्यार में एक दूसरे को अप्लिफ्ट करने की कहानी. फोटो – ट्रेलर

कहानी – तेग और जीत की लव स्टोरी का नाम है ‘सुफ़ना’. सिंपल पर आम नहीं. शुरू होती है तेग से. जो अपनी ताई की फैमिली के साथ रहती है. मां बाप नहीं हैं. इसलिए घर में सौतेला बर्ताव होता है. इनकी फैमिली का गांव-गांव जाकर मजदूरी करने का काम है. इसी चक्कर में पड़ोसी गांव जाते हैं. कपास के खेतों पर काम करने. वहीं इसे मिलता है जीत. नज़रें मिलती हैं और प्यार हो जाता है. क्यूंकि इश्क अगर सोचकर किया, तो क्या किया. जीत एक स्टूडेंट है. पर पढ़ाई से जी चुराता है. तेग को ये खटकता है. चाहती है कि जीत पढ़े. अपने लिए कुछ करे. तेग के समझाने पर जीत भी खुद को लेकर सीरियस होने लगता है. पर सब इतना आसान होता तो क्या बात थी. दोनों के एक होने में क्या मुश्किलें आती है? और इनका प्यार मुकम्मल हो पाता है या नहीं? इसके लिए आपको ये खूबसूरत फिल्म देखनी होगी.


13.

फिल्म का नाम: सी यू सून
भाषा: मलयालम
डायरेक्टर: महेश नारायणन
कलाकार: फहाद फ़ासिल, रौशन मैथ्यूज़, दर्शना राजेन्द्रन, वैष्णवी वेणुगोपाल

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इंडिया की पहली कंप्युटर स्क्रीन फिल्म. फोटो – ट्रेलर

कहानी – जिमी एक बैंकर है. दुबई में रहता है. एक दिन डेटिंग एप पर अनु से मुलाकात होती है. बातें शुरू हो जाती हैं. और जिमी के पता लगने से पहले उसका ज्यादातर टाइम अनु से बात करने में जाने लगता है. जल्द ही प्यार में पड़ जाता है. पर तभी अचानक अनु गायब हो जाती है. जिमी को कुछ समझ नहीं आता. अपने कज़िन केविन की हेल्प लेता है. केविन अपनी इन्वेस्टिगेशन शुरू करता है. अनु के बारे में पता करने की कोशिश करता है. पर किसी को कुछ नहीं पता. अनु की मिस्ट्री डिकोड करने में केविन के सामने क्या क्या आता है, वही फिल्म का प्लॉट है.

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मतलब फहाद फ़ासिल का तो जन्म ही तारीफ़ें बटोरने के लिए हुआ है. फोटो – ट्रेलर

इस फिल्म को इंडिया की पहली कंप्यूटर स्क्रीन फिल्म कहना ग़लत नहीं होगा. यानि पूरी फिल्म ऐसे शूट की है, जैसे कंप्यूटर या फोन के कैमरा से बनी हो. और तो और, इसकी राइटिंग से लेकर शूटिंग तक का सारा काम पैन्डेमिक के दौरान हुआ.


14.

फिल्म का नाम: प्रवास
भाषा: मराठी
डायरेक्टर: शशांक उदपुरकर
कलाकार: अशोक सराफ़, पद्मिनी कोल्हापुरे, रजित कपूर, विक्रम गोखले

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अशोक सराफ़ के नाम और काम से भला कौन वाकिफ़ नहीं. फोटो – ट्रेलर

कहानी –  एक टिपिकल कॉमन मैन. नाम है अभिजात ईमानदार. छोटे गांव से उठा. आंखों में सपने समेटे शहर आया. शादी की. ज़िम्मेदारियां बढ़ी. दिन रात उन्ही को पूरा करने में लगा रहा. पर लाइफ की इस रेस में भागते-भागते एक दिन थमना पड़ा. पता चलता है कि दोनों किडनियां खराब होने लगी हैं. पर ये हालात अभिजात को एक मौका देते हैं. बाहर दुनिया में नहीं, बल्कि खुद के अंदर झांकने का. जो है, जितना है, उसी से बहुत कुछ करने का. अपने और अपनों के लिए तो जी लिया, अब दूसरों के लिए कुछ करना चाहता है. यहीं से सफर शुरू होता है उस आदमी का, जो ज़िंदगी का एक-एक पल जीना चाहता है. इसी सोच के साथ कि इतने साल काट लिए, अब जीने का वक्त है.


15.

फिल्म का नाम: बारम
भाषा: तमिल
डायरेक्टर: प्रिया कृष्णास्वामी
कलाकार: सुगुमार शनमुगम, आर. राजू, अतुल्य आनंद, स्टेला गोबी

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फिल्म ‘थलैकूथल’ की प्रैक्टिस पर बेस्ड है. फोटो – ट्रेलर

कहानी – फिल्म थलैकूथल पर बेस्ड है. यानी तमिलनाडु के कल्चर में जगह पाने वाली मर्सी किलिंग की प्रैक्टिस. कहानी के मेन किरदार हैं करीब 60 साल के करुपासामी. नाइट वॉचमैन हैं. अपनी बहन और भांजो के साथ रहते हैं. ज़िंदगी जैसी भी चल रही है, उससे खुश हैं. अचानक एक दिन एक्सीडेंट हो जाता है. जिसकी बदौलत बेड रेस्ट पे आना पड़ता है. इस पॉइंट पर आता है उनका बेटा. अपने साथ पिता को घर ले जाता है. पर इस घटनाक्रम के कुछ दिन बाद करूपासमी की डेथ की न्यूज़ आती है. शक उठने लगता है. क्यूंकि हालत ऐसी नहीं थी कि मौत हो जाए. इसी जांच पड़ताल के साथ फिल्म आगे बढ़ती है.

फिल्म थलैकूथल पर बात करती है. किस तरह इसे कल्चर का एक हिस्सा बना दिया गया है. इस पॉइंट के साथ फिल्म एक और चीज़ पर बात करती है. कि कैसे हम अपने घर के बुजुर्गों को बोझ समझने लगते हैं. कैसे वो जब तक प्रोडक्टिव हैं, तभी तक हमारे काम के हैं. उसके बाद ‘यूज़ एंड थ्रो’ वाला हिसाब. इसलिए फिल्म का टाइटल ‘बारम’ है. बारम यानि बोझ.


16.

फिल्म का नाम: कपेला
भाषा: मलयालम
डायरेक्टर: मुहम्मद मुस्तफा
कलाकार: एना बेन, श्रीनाथ बसी, रौशन मैथ्यूज़, तन्वी राम

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सच और झूठ की लाइन को ब्लर कर देगी ये फिल्म. फोटो – ट्रेलर

कहानी – छोटे से गांव में रहने वाली जेसी की कहानी. जेसी एक सिंपल सी लड़की है. पढ़ाई में कमजोर पर छोटी-छोटी चीज़ों में खुशियां ढूंढने वाली. खुद की छोटी आंखें और टेढ़े-मेढ़े दांतो का मज़ाक उड़ाने वाली. मां टेलरिंग का काम करती हैं. एक दिन जेसी को फोन मिलाने को कहती हैं. एक डिजिट के फेर से रोंग नंबर लग जाता है. फोन उठाता है विष्णु. शहर में रहने वाला ऑटो ड्राइवर. दोनों में बातें शुरू हो जाती हैं. धीरे-धीरे प्यार बढ़ने लगता है. इसी चक्कर में जेसी शहर आ जाती है. विष्णु से मिलने. यहां आता है ट्विस्ट. और एंट्री होती है रॉय की. सनकी और गुस्सैल किस्म का आदमी. उसके इरादे किसी को नहीं पता. पर एक बात तय है. वो इन दोनों की ज़िंदगी ऊपर नीचे करके रख देगा. क्या कनेक्शन है इन दोनों का उससे और क्यूं इनके पीछे पड़ा है? ये सस्पेन्स फिल्म को ही खोलने दीजिए.


17.

फिल्म का नाम: निरोंतोर
भाषा: बंगाली
डायरेक्टर: चंद्रसिश रे
कलाकार: प्रोसेनजीत चैटर्जी, अंकिता माझी, सत्यम भट्टाचार्य, पूनम गुरुंग

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बिप्लब का रोल किया है सदाबहार प्रोसेनजीत चैटर्जी ने. फोटो – ट्रेलर

कहानी – कहानी है बिप्लब की. सीनियर इंजीनियर जिसे पहाड़ों में भेजा गया है. रेजॉर्ट के लिए लोकेशन ढूंढने. साथ में है उसका असिस्टेंट भास्कर. दोनों में उम्र के साथ-साथ नज़रिए का भी फर्क है. जैसे जहां गए हैं, वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं. बिप्लब के लिए ये ठीक है. पर भास्कर परेशान हो जाता है. लाइफ से दोनों की उम्मीदें अलग. पर धीरे-धीरे चीज़ें बदलने लगती हैं. मानो नेचर की गोद में पड़ते ही दोनों ने खुद पर से सारे फिल्टर्स हटा दिए. अपने डर, अपनी इंसिक्योरिटी को बिना किसी झिझक, एक दूसरे के सामने रखने लगते हैं. पाते हैं कि जीने का तरीका अलग, पर तजुर्बे दोनों के सेम से ही रहे हैं. इसी कारण कॉन्ट्रास्ट होने के बावजूद दोनों में एक अलग किस्म की दोस्ती की शुरुआत होती है. इनके इसी एक्सपीरियंस को कलेक्ट करती हुई फिल्म आगे बढ़ती है.


18.

फिल्म का नाम: वर्ने अवश्यमुन्डा
भाषा: मलयालम
डायरेक्टर: अनूप सत्यन
कलाकार: दुलकर सलमान, कल्याणी प्रियदर्शन, सुरेश गोपी, शोबना पिल्लई

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सिंपल सी कहानी पर रिश्तों का असरदार टेस्ट. फोटो – ट्रेलर

कहानी – कहानी का केंद्र बिंदु है एक मां और बेटी. नीना और उनकी बेटी निक्की. नीना का तलाक हो चुका है. दोनों मां बेटी एकदम उत्तर दक्षिण. किसी ज़माने में नीना के कई अफेयर्स रह चुके. यहां तक कि भागकर ही शादी की थी. वहीं निक्की एकदम अलग. अरेंज मैरिज में भरोसा रखती है. इसी वजह से मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स पर खुद के लिए सूटेबल बॉय ढूंढ रही है. ये दोनों जहां रहती हैं, वहां का माहौल भी फुल फैमिली टाइप है. यानि पड़ोसी आपस में ऐसे रहते हैं, जैसे एक फैमिली ही हों. फिर आता है मां बेटी के रिश्ते का टेस्ट. जब एंट्री होती है मेजर उनिकृष्णन की. एक एक्स आर्मी ऑफिसर. जिनकी गर्दन हमेशा गर्व से ऊपर ही रहती है. मानते हैं कि एक फौजी भगवान समान है. पर मेजर साहब पर एक बोझ है. अकेलेपन का. इससे निजात पाना चाहते हैं. जिसके नतीजन नीना और इनके बीच प्यार शुरू हो जाता है. निक्की इस बात से अनजान है. पता चलेगा तो कैसे रिएक्ट करेगी. और इससे मां-बेटी के रीलेशन पर क्या असर पड़ेगा, यही फिल्म की कहानी है.


19.

फिल्म का नाम: बोनस
भाषा: मराठी
डायरेक्टर: सौरभ भावे
कलाकार: गशमीर महाजनी, पूजा सावंत, मोहन अगाशे, जयवंत वाड़कर

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मराठी सिनेमा के दिग्गज मोहन अगाशे ने यहां दादा का रोल प्ले किया है. फोटो – ट्रेलर

कहानी – आदित्य अपना फैमिली बिज़नेस संभालता है. और ऐसे कि बिज़नेस से ऊपर उसके लिए कुछ नहीं. साल का वो वक्त आता है, जब वर्कर्स को बोनस दिया जाना है. पर कंपनी कुछ खास प्रॉफिट में नहीं रही. जिस कारण आदित्य बोनस रोक देता है. जब प्रॉफिट होगा, तब दिया जाएगा. उसके दादाजी को ये पसंद नहीं आता. कहते हैं कि बतौर कंपनी, ये हमारी ड्यूटी है. आदित्य फिर भी नहीं मानता. यहां दोनों दादा पोते में शर्त लग जाती है. दादाजी कहते हैं कि जिनका बोनस रोका है, उनकी तरह एक दिन रह के दिखाओ. आदित्य भी ज़िद्दी. कहता है एक दिन नहीं, एक महीना रहूंगा. यही बोलके अपना सब कुछ पीछे छोड़ देता है. किसी चॉल की खोली में शिफ्ट हो जाता है. ऐसी जगह, जहां खुला आसमान हो या बंद छत, पानी कहीं से भी बिन बुलाए आने लगता है. ऐसी ही तकलीफें बढ़ने लगती हैं. आदित्य को कम्फर्ट और एडजस्टमेंट का फर्क समझ आने लगता है. ‘थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है’ वाली ज़िंदगी को करीब से देखता है. ऐसे ही अनुभव उसके आगे का फलसफा बनाते हैं.

एंड तक आने पर आपको कोई शॉक नहीं लगेगा. क्यूंकि ये इस फिल्म का इरादा नहीं. बस एक स्माइल रह जाएगी. उन लोगों को याद करेंगे, जो घर से बाहर आपकी फैमिली हैं.


20.

फिल्म का नाम: अला वैकुंठपुरमलो
भाषा: तेलुगु
डायरेक्टर: त्रिविक्रम श्रीनिवास
कलाकार: अल्लू अर्जुन, पूजा हेगड़े, तबू, मुरली शर्मा

telugu movie
3 कारणों से ये फिल्म चली – अल्लू अर्जुन, अल्लू अर्जुन और अल्लू अर्जुन. फोटो – ट्रेलर

कहानी – बोले तो कंप्लीट मसाला फिल्म. वाल्मीकि अपने मालिक रामचंद्र के यहां काम करता है. उसकी लाइफस्टाइल देखकर जलता है. चाहता है कि अपने बेटे को भी ऐसी राजा वाली ज़िंदगी दे. इसी वजह से अपने और रामचंद्र के बच्चे को बदल लेता है. जानते हैं कि आप क्या पूछेंगे. इसमें नया क्या है. ये तो शंकर दादा 40 साल पहले कर चुके. धरम करम में. पर यहां ये बेटा बने हैं अल्लू अर्जुन. जिनका फिल्म में होना भर पूरे एंटरटेनमेंट की गैरंटी है. इनके किरदार का नाम है बंटू. बंटू अब तक अंधेरे में जी रहा है. क्या होगा जब सच्चाई सामने आएगी.

एक्टिंग के अलावा जनता अल्लू अर्जुन के डांस की भी मुरीद है. इसी फिल्म का एक गाना है. ‘बूटा बम्मा’. जिसके अब तक यूट्यूब पर 488 मिलियन व्यूज़ हो चुके हैं. कुछ समय पहले ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर डेविड वॉर्नर का एक वीडियो वायरल हुआ था. जहां वो बाउंड्री पे खड़े कुछ डांस स्टेप्स कर रहे थे. वो इसी गाने के स्टेप्स थे. कुछ ऐसा है अल्लू अर्जुन की फिल्मों का क्रेज़.


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