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मिस्टर इंडिया के डायरेक्टर की बेटी ने पूछा, आपने उस बच्ची को क्यों मरने दिया पापा?

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मिस्टर इंडिया फिल्म को रिलीज हुए इकतीस साल से ज़्यादा हो चुके हैं. इकतीस साल का वक्त समझते हैं न, ये बहुत लंबा टाइम है. इतने टाइम में एक पूरी जनरेशन पैदा होकर बाल बच्चे वाली हो जाती है. इकतीस सालों में अगर कुछ नहीं बदला है तो वो हैं अनिल कपूर, वो अब भी उतने ही जवान हैं जितने तब थे. 40-50 की एज वालों का नॉस्टैल्जिया इस फिल्म से जुड़ा है और जिसने एक भी बार ये फिल्म देखी है उसके दिमाग में फिल्म के ये कैरेक्टर्स चिपक के रह गए हैं.

1. मोगैम्बो

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मोगैम्बो खुश हुआ..ये डायलॉग इतना पॉपुलर है कि लोगों की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा है. आधा रसगुल्ला ज्यादा मिल जाए तो लोग कहते हैं मोगैम्बो खुश हुआ. डायरेक्टर शेखर कपूर मोगैम्बो के रोल में अनुपम खेर को लेना चाहते थे लेकिन उनकी हिम्मत नहीं पड़ी कहने की, उनको लगा था अमरीश पुरी मना कर देंगे. फिर प्रोड्यूसर बोनी कपूर ने कहा कि हटो हम कहते हैं. उन्होंने कहा और मोगैम्बो खुश हो गया.

मिस्टर इंडिया के बारे में छह धांसूं बातें जानने के लिए देखें वीडियोः

 

2. मिस्टर इंडिया

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मोगैम्बो की तरह मिस्टर इंडिया के लिए भी फर्स्ट च्वाइस अनिल कपूर नहीं थे. सलीम जावेद ने इसकी स्टोरी बच्चन अन्ताब को दिमाग में भर के लिखी थी. बच्चन कहिन कि इसमें हीरो आधे से ज्यादा टाइम तो गायब रहिता है, जब हम दिखेंगे नहीं तो बिकेंगे कइसे. इत्ता कह के मना कर दिया. राजेश खन्ना से बात हुई तो सेम जवाब आया. अनिल कपूर उस जमाने में अक्षय कुमार थे, हर पिच्चर साइन करते थे, तो इसको भी कर लिया और बन गए मिस्टर इंडिया.

3. सीमा साहनी

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पिच्चर देखी है तो हवा हवाई यानी सीमा साहनी यानी श्रीदेवी का चार्ली चैपलिन स्टाइल जरूर पसंद आया होगा. लेकिन एक और चीज आपने नोटिस की होगी ऐसी उम्मीद हम करते हैं. ऐसा था कि पूरी फिल्म में सिर्फ श्रीदेवी ने ही सबसे ज्यादा बार कपड़े बदले हैं, हवा हवाई गाना ही देख लो अंदाजा लग जाएगा. बाकी के सब गरीब गुरबा टाइप के लोग थे मिस्टर इंडिया भले एकाध बार बदले हों लेकिन मोगैम्बो एक ही ड्रेस पहन के पूरी पिच्चर निपटा दिए फिर भी कहते रहे मोगैम्बो खुश हुआ.

4. मिस्टर वॉलकॉट

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उस दौर की सारी हिंदी फिल्मों में अंग्रेज विलेन दिखाना होता था तो बॉब क्रिस्टो को पकड़ लेते थे. असल में ये ऑस्ट्रेलियाई सिविल इंजीनियर थे फिलिम लाइन में आ गए. और आ गए तो भई छा गए. मिस्टर वॉलकॉट का सबसे मस्त सीन फिल्म में लगा था जब मूर्ति उनको दनादन मारती है और वो जय बजरंगबली जयकारा लगाते हैं.

5. टीना

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वो सबसे छोटी और प्यारी बच्ची टीना, जिसको साइकिल पर बिठाकर मिस्टर इंडिया गुब्बारे दिलाने जाता है. अब वो बच्ची बहुत बड़ी हो चुकी है, उसका नाम है हुज़ान खुदई जी. टीना की फिल्म में बम ब्लास्ट में मौत हो जाती है, सारी भयानक सेंटीमेंटल हो रहे होते हैं. टीना का जो लास्ट सीन है यानी उसके अंतिम संस्कार का, वो बड़ी मुश्किल से शूट हुआ क्योंकि जैसे ही उस पर फूल रखे जाते वो हंसने लगती, गुदी गुदी लगती होगी न उसको. लास्ट में डायरेक्टर ने उनकी मम्मी से कहा इनको सुलाओ नहीं तो ये शूट नहीं होगा, फिर वो मम्मी की गोद में सोई और शूट हुआ. ये टीना से जुड़ा यादगार सीन था. डायरेक्टर शेखर कपूर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी बार बार पूछती थी “पापा आपने उसे मरने क्यों दिया? आप डायरेक्टर थे.” तो पापा कहते थे कि ये जावेद अंकल से पूछो, कहानी उन्होंने लिखी है.

6. कैलेंडर

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गानों की पैरोडी जो फिल्म में लगी थी वो सबसे जबरदस्त था. उसमें कैलेंडर यानी सतीश कौशिक का वही सीन सबसे बेस्ट था जिसमें वो गाते हैं मेरा नाम है कैलेंडर..मैं तो चला किचन के अंदर.. खास बात ये है कि सतीश कौशिक इस फिल्म के असिस्टेंट डायरेक्टर भी थे. इस फिल्म के खत्म होते ही अनिल कपूर की अगली फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ बननी शुरू हो गई थी और शुरू में इसको शेखर कपूर ही डायरेक्ट कर रहे थे. लेकिन उन्होंने बीच में फिल्म छोड़ दी और सतीश उसके लीड डायरेक्टर बन गए.

7. मिस्टर गायतोंडे

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ये फिल्म उस दौर में आई थी जब हाथ में मोबाइल नहीं होते थे. टच स्क्रीन तो छोड़ो चुटपुटिया बटन वाले भी नहीं. उस दौर में चोंगा वाले फोन चलते थे. लेकिन उनके साथ भी आदमी वैसे ही माथा मारता था जैसे आज लेटेस्ट स्मार्टफोन के साथ मारता है. और ये दिखाया था न्यूज एडीटर गायतोंडे ने. ये वही अन्नू कपूर थे जो रिएलिटी शो के जज बनते हैं तो कहते हैं इस चीज के ऊपर कुछ नहीं बोलने का.


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