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अमित शाहः गांधीवादी मां के लाल की लाइफ के 11 अनजाने फैक्ट्स

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‘नई भाजपा’ या कहें ‘नरेंद्र मोदी’ की भाजपा के सिरमौर अमित शाह को फैन्स उन्हें इस दौर का चाणक्य कहते हैं. ये बात दीगर है कि उन्हें बीजेपी के बुजुर्गों का साथ नहीं मिला. 

जानिए, अमित शाह के बारे में कुछ तथ्य और सत्य. 

1: अमित शाह की जड़ें कतई पॉलिटिकल नहीं हैं. एक बहुत बड़े और पैसे वाले बिजनेसमैन अनिलचंद्र शाह के घर पैदा हुए 22 अक्टूबर 1964 में. बर्थप्लेस थी मुंबई महानगरी. पापा का PVC पाइप का बिजनेस था. पढ़ाई के साथ उसमें भी हेल्प की. बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई की. बैचलर्स डिग्री ली.

2: स्टॉकब्रोकर का काम किया है. बैंक और पैसे के खाता बही का तगड़ा एक्सपीरिएंस था ही. उनको पता था कि स्टेट की कमाई में कोऑपरेटिव बैंक का दखल अच्छा खासा है. तो गुजरात स्टेट में बीजेपी की सरकार बनने के बाद 1999 में अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष चुने गए.

3: बचपन में ही RSS से जुड़ कर बन गए थे स्वयंसेवक. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता बने. 1986 में बीजेपी ज्वाइन कर ली. भारतीय युवा मोर्चा के एक्टिविस्ट बन गए. फिर तो धड़ाधड़ तरक्की होने लगी. नरेंद्र मोदी और इनके बीजेपी में आने का टाइम लगभग एक ही है. इसीलिए कर्री दोस्ती है दोनों में.

4: 1991 में गांधीनगर की सीट से लालकृष्ण आडवाणी इलेक्शन लड़ रहे थे. उसका चुनाव प्रचार जी-तोड़ किया. 1996 में अटल बिहारी बाजपेई के लिए जान लड़ा दी. तब से इनके इलेक्शन का सूरमा समझा जाता है.

5: अब जहां पॉलिटिक्स है वहां बदनामी भी होगी लफड़ा भी होगा. 2009 में बेंगलुरू की किसी लड़की की जासूसी के केस में नाम आया. आरोप लगा कि इनके ऑर्डर्स से वो काम किया गया किसी ‘साहेब’ के लिए. 2010 में सोहराबुद्दीन फर्जी इनकाउंटर केस ने तो भद्द ही मचा दी. प्रेशर पड़ा कि राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दैं. गिरफ्तारी भी हो गई. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुजरात में घुसने पर रोक लग गई. बाद में कोई सुबूत न मिलने पर मामला साफ हो गया.

और अब अमित शाह के 11 सच, जो कम लोगों को पता हैं. 

1. अमित शाह का पैतृक घर अहमदाबाद के मानसा इलाके में है. यह हेरिटेज बिल्डिंग में शुमार है.

2. अमित शाह की मां कुसुम बा गांधीवादी थीं. बेटे को विरासत में लाइब्रेरी दे गईं. जिसमें कुरान, बाइबिल समेत हजारों किताबें हैं.

3. उन्होंने ही अमित को खादी पहनने के लिए प्रेरित किया. शाह ने यह आदत अभी तक नहीं छोड़ी.

4. शाह ने राजनीति की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद से की. तभी रोजाना डायरी लिखने की आदत पड़ी जो आज तक कायम है. डायरी का असर. शाह डॉक्युमेंटेशन में बहुत यकीन करते हैं. उनकी योजना है कि बीजेपी के हर बड़े नेता के जीवन से जुड़े किस्सों और विचारों को सुरक्षित किया जाए.

5.  शाह मीडिया को नापसंद करते हैं. खासतौर पर टीवी मीडिया. फोन भी कम ही लेते हैं पत्रकारों के. जबकि कार्यकर्ताओं से सीधे बात को तत्पर रहते हैं. शाह अध्यक्ष बनने से पहले फोन खुद उठाते थे. पहला स्वर होता था. हां, अमित.

6.  गुजरात के गलियारों की मानें तो शाह ने मोदी के पीएम बनने की भविष्यवाणी 1990 में ही कर दी थी. तब दोनों अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के पास एक रेस्तरां में बैठे थे.

7. फर्जी मुठभेड़ कांड में जेल में बंद होने के दौरान शाह ने गीता का जमकर अध्ययन किया. वह दूसरे कैदियों को भी पढ़कर सुनाते थे गीता.

8. ज्योतिष में बहुत यकीन करते हैं बीजेपी अध्यक्ष.

9.  अमित शाह और उनकी पत्नी सोनल भगवान सोमनाथ (शिव का एक रूप) के भक्त हैं. शाह सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट में शामिल होने को बड़ी उपलब्धि मानते हैं.

10. उनकी छवि कट्टर है. फेक एनकाउंटर की पूरी सीरीज के छींटे उनके दामन पर लगे. मगर हकीकत में शाह के कई करीबी दोस्त मुस्लिम हैं. एक प्रभावशाली मौलाना से भी उनका बड़ा याराना है. दोनों अकसर वेजीटेरियन दावत उड़ाते हैं

11. शाह की एक ही सलाह है बीजेपी कार्यकर्ताओं को. कि उन्हें मार्क्स, समाजवाद, इस्लाम और ईसाइयत के बारे में जमकर पढ़ना चाहिए. अमित को लगता है कि कार्यकर्ता जमकर पढ़ेगा, तभी बहस में टिकेगा.


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