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लेस्बियन सेक्स, लेकिन किसके देखने के लिए?

सिंगर और एक्टर अनुष्का मनचंदा और एक्टर मोनिका डोगरा कुछ दिनों पहले एक म्यूजिक वीडियो में दिखाई दीं. और इसकी चर्चा खूब है. क्योंकि वीडियो में दो लेस्बियन लड़कियों के बीच इरॉटिक सीन दिखाए गए हैं. लड़कियां एक दूसरे को चाटती हैं, चूमती हैं. स्क्रीन पर हम वो सब देखते हैं जो अगर किसी फिल्म में आ जाएं, तो शायद सेंसर बोर्ड इन सभी सीन्स को काट दे.

समलैंगिकता मेनस्ट्रीम बॉलीवुड में मजाक का मुद्दा रही है. अगर किसी फिल्म में जबरन ह्यूमर ठूंसना हो, तो उसमें किसी गे को दिखा दो. वो जो मटककर चले, बातचीत में नर्म हो. इससे फिल्म के हीरो की मर्दानगी और बुलंद हो जाती है. वो हिरोइन के और काबिल हो जाता है. मेनस्ट्रीम बॉलीवुड में लेस्बियन किरदारों को कम ही देखा गया है. ‘गर्लफ्रेंड’ जैसी सेंसेशनल फिल्म या फिर ‘डेढ़ इश्किया’ में क्लाइमेक्स में आए एक रेफरेंस को छोड़कर शायद ही बॉलीवुड में लेस्बियन रोमैंस दिखाया गया हो.

ये वीडियो लेस्बियन सेक्स के परे भी बहुत कुछ कहता है. वीडियो में जब दोनों लड़कियां गले लगती हैं या फिर जिस सीन में मोनिका अनुष्का के कंधे पर सर टिका देती है, हमें समलैंगिकता के एक बहुत बड़े पहलू से परिचित कराया जाता है. जो है प्रेम.

‘अलीगढ़’ फिल्म में जब दीपू प्रोफेसर सिरास से उनके ‘गे’ होने के बारे में पूछता है, प्रोफेसर सिरास का जवाब आता है, ‘मैं अपनी सारी भावनाओं, संवेदनाओं को तीन अक्षरों में कैसे कैद कर दूं?’ जब हम समलैंगिकता के बारे में सोचते हैं, दिमाग में आने वाली पहली चीज सेक्शुअल ओरिएंटेशन होती है. और मात्र किसी की इस पर्सनल चॉइस की वजह से कि वो किसके साथ सेक्स करना पसंद करता है, हम उस व्यक्ति की सारी सामजिक मेधाओं को छीन लेते हैं. फिर हमारे लिए इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो व्यक्ति गाने, नाचने, पढ़ने या किसी भी चीज में कितना अच्छा या बुरा है. हम किसी व्यक्ति को समलैंगिक कहकर खुद से अलग मानते हैं, हम उसकी पर्सनालिटी को सीधे एक पूरे इंसान से मात्र उसके लिंग पर उतार देते हैं.

इस वीडियो में लड़कियों के बीच जो संबंध हैं, वो महज सेक्शुअल नहीं हैं. वो ठीक उसी तरह एक दूसरे में सुकून पाती हैं जिस तरह कोई हेट्रोसेक्शुअल कपल करता है. समलैंगिकता केवल सेक्स नहीं, प्रेम है. उसमें भी किसी आम रिश्ते की तरह संवेदनाएं हैं.

लड़कियां एक इरॉटिक डांस करती हैं. जैसे दो स्त्रियों के बीच पैशनेट सेक्स हो रहा हो. एक पल के लिए दोनों उत्साह में झूमती हैं. फिर चरम पर पहुंचती हैं. अगले सीन में हम दोनों को साथ में लेटा हुआ देखते हैं. लेकिन सिर्फ इतना ही नहीं, एक की आंख में आंसू हैं. जब दोनों कपड़े पहनकर फिर से तैयार हो जाती हैं, दोनों एक दूसरे से कुछ दूर बैठती हैं. जैसे पिछले कुछ मिनटों में जो भी हुआ, उसके बारे में सोच रही हों. जैसे किसी डर से भर गई हों. क्योंकि अब वो वक़्त आ गया है जब अपने कमरे से निकलकर उन्हें दुनिया का सामना करना होगा. वो दुनिया, जहां उन्हें अपनाया नहीं जाएगा.

ये लव-मेकिंग अभी ख़त्म नहीं हुई है. फिर से होगी. लड़कियां बार-बार मिलेंगी सबसे छिपकर. और फिर रोएंगी. किसी अपराधबोध में नहीं, बल्कि इस दुःख में कि जो वो कर रही हैं, वो समाज में स्वीकारा नहीं जाएगा.

वीडियो में रोमैंस है, सेक्स है, प्रेम है, दुख है. और ऐसा वीडियो बनाना अपने आप में एक बोल्ड ही नहीं, सराहनीय कदम है. लेकिन हमने अब तक बनाने वालों की बात की है, वीडियो को देखने वालों की नहीं.

मेल गेज़, यानी पुरुष की निगाहें. पुरुष का देखना. पुरुष के देखने का अर्थ यहां पुरुषों का इस वीडियो को देखने से न लगाया जाए. मैं जिस मेल गेज़ की बात कर रही हूं वो एक पुरुषवादी नजरिया है, औरतों के शरीर को देखने का. जिसमें औरत सिर्फ शरीर होती है. ये ‘परफेक्ट’ औरत मोटी, काली, नाटी नहीं होती. इस वीडियो में दिखने वाली लड़कियां ‘परफेक्ट’ हैं. जब इस तरह का लेस्बियन इरॉटिका मार्केट में आता है, पुरुष उसे देखने में असहज नहीं होते.

कोई भी पॉर्न वेबसाइट खोलिए, लेस्बियन पॉर्न बहुतायत में मिलेगा. और ये पॉर्न केवल लेस्बियन यूजर्स के लिए नहीं होता, बल्कि स्ट्रेट लोगों के लिए होता है. क्योंकि औरत का शरीर अपने आप में ही भोग करने की ऐसी वस्तु बन जाता है, कि लेस्बियन पॉर्न लोगों को असहज करने के बजाय खुश कर देता है. क्योंकि अब उनके पास सिर्फ एक नहीं, दो शरीर होते हैं देखने के लिए. इसी वीडियो में अगर दो पुरुष सेक्स कर रहे होते, तो देखने वाले असहज हो जाते. क्योंकि औरत का औरत से प्रेम करना उसके औरत होने को नहीं घटाता. लेकिन पुरुष का पुरुष से प्रेम करना उसके पौरुष को कम करता देता है. आम भाषा में, उसकी मर्दानगी को कम कर देता है.

इस वीडियो की मंशा पर मुझे शक नहीं है. पर सवाल पूछने पर ही हम बेहतर होते हैं. इसलिए इस वीडियो पर मेरा भी एक सवाल है. कि जिन औरतों को हम वीडियो में देख रहे हैं, उनके शरीर में एक भी ‘कमी’ क्यों नहीं है? वीडियो में दिखने वाली औरतें आम नहीं हैं. और इसीलिए ये वीडियो कहीं न कहीं मुझे निराश करता है.

इन हिंदी तस्वीरों से समझ लो ‘गे’ और ‘लेस्बियन’ कौन होते हैं

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