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कश्मीर में हिंदू पंडितों पर हुए अत्याचारों और उनके विस्थापन को करीब से दिखाएंगी ये दो फ़िल्में

आने वाले टाइम में आपको कश्मीरी पंडितों पर बनी दो फिल्में देखने को मिल सकती हैं. एक तो उनकी, जो हाल ही में ‘ताशकंद फाइल्स’ बनाकर फ़ारिग हुए हैं. दूसरी उनकी, जिन्होंने ‘थ्री इडियट्स’ और ‘पीके’ जैसी फिल्में बनाईं. पहले बात विवेक अग्निहोत्री के प्लान्स की.

12 अप्रैल, 2019 को ‘ताशकंद फाइल्स’ रिलीज़ हुई. एक महीने से ऊपर हो गया और फिल्म कई जगहों पर अब भी लगी हुई है. इसकी कहानी है भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की. जो 1965 की भारत-पाकिस्तान जंग के बाद समझौते के लिए ताशकंद गए. तब ये जगह सोवियत संघ का हिस्सा थी. वहां जिस दिन समझौते पर दस्तखत हुए, उसी दिन शास्त्री की मौत हो गई. वजह बताई गई दिल का दौरा. मगर और भी कई नैरेटिव चलते हैं इसके. ‘ताशकंद फाइल्स’ इसी मौत के पीछे की वजह खोज रही थी. पार्लियामेंट हाउस में इसकी स्पेशल स्क्रीनिंग भी करवाई गई थी. अपनी इस फिल्म की सफलता के बाद डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री अब अगली फिल्म ला रहे हैं. नाम है- कश्मीर फाइल्स. थोड़ा इस फिल्म का बैकग्राउंड जान लीजिए.

# प्लॉट क्या है?

‘कश्मीर फाइल्स’ की कहानी कश्मीरी पंडितों के बारे में होगी. इस फिल्म के बारे में बात करते हुए डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने कहा-

मैं हमेशा से कश्मीर के मुद्दों पर फिल्म बनाना चाहता था. जहां छोटे बच्चों को गोली मार दी गई, औरतों का रेप कर दिया गया और लोगों को बीच रात उनके घर से बेघर कर दिया. ये फिल्म सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक की सच्ची जांच पड़ताल को दिखाएगी.

# फिल्म बनाई कैसे जाएगी?

विवेक और उनकी टीम ने ‘ताशकंद फाइल्स’ को बनाने से पहले तीन साल रिसर्च का काम किया था. बाद में उन्होंने ट्विटर पर लोगों से शास्त्री जी से जुड़ी जानकारी मांगी. इसे क्राउड सोर्सिंग कहते हैं.

‘कश्मीर फाइल्स’ में विवेक का प्लान कुछ और है. विवेक उन सभी जगहों पर जाना चाहते हैं, जहां कश्मीरी पंडित जाकर बसे हैं. ताकि वो उनकी देखी और अनुभव की गई चीज़ें उन्हीं से जान सकें. इनमें जम्मू से लेकर दिल्ली, मुंबई के अलावा बाहर के देश में भी शामिल हैं.

# पहले ये फिल्म नहीं, बुक लिखी जानी थी

डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने मुंबई मिरर से बात करते हुए बताया कि वो इस फिल्म को लेकर लगातार कश्मीर के टॉप राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहे हैं. पहले विवेक ने कश्मीर पर एक किताब लिखने की सोची थी. मगर अब वो इसपर फिल्म बना रहे हैं. इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा-

जितनी भी फिल्में आज तक कश्मीर पर बनी हैं, उनमें से ज़्यादातर में आर्मी को नेगेटिव लाइट में दिखाकर आतंकवाद को जस्टिफाई किया है. जो कि प्रोपेगेंडा पर आधारित गलत नैरेटिव है. मगर मैं अपनी फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ से इस मिथक को तोड़ना चाहता हूं.

# कश्मीरी पंडितों पर ये दूसरी फिल्म होगी

साल 2004 में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन पर एक फिल्म आई थी, नाम था- शीन. इसे फिल्ममेकर और इंडियन फिल्म ऐंड टेलिविज़न डायरेक्टर्स असोसिएशन (IFTDA) के अध्यक्ष अशोक पंडित ने बनाया था. फिल्म की कहानी पंडित अमरनाथ नाम के एक ऐसे पंडित बारे में थी, जो श्रीनगर को छोड़ने को तैयार नहीं होता. मगर मुस्लिम जिहादी उसके बेटे को मार देते हैं और मजबूरन उसे श्रीनगर छोड़ना पड़ता है.

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#’3 इडियट्स’ के मेकर की अगली फ़िल्म भी कश्मीरी पंडितों पर है

सुना है कि डायरेक्टर-प्रड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा 90 के दशक में कश्मीर में फैले आतंकवाद और उसकी वजह से वहां से विस्थापित हुए लाखों कश्मीरी पंडितों की कहानी पर फिल्म बना रहे हैं. हो सकता है ये फिल्म राहुल पंडित की 2013 में प्रकाशित किताब ‘आर मून हैज़ ब्लड क्लॉट्स’ पर आधारित हो. ये किताब कश्मीरी पंडितों के बारे में थी.

चरमपंथ के हावी होने से पहले वो कश्मीर में कैसे रहते थे. कश्मीरियों के बीच आपसी ताल्लुकात कैसे थे. फिर हालात कैसे बिगड़े. कश्मीरी पंडितों को कैसे अपना घर छोड़ना पड़ा. उनके मुस्लिम पड़ोसियों ने कैसा सलूक किया उनके साथ. कश्मीर से बाहर आकर पंडितों की ज़िंदगी कैसी रही. कैसा संघर्ष आया उनके हिस्से.

राहुल पंडित की लिखी ये किताब किसी फर्स्ट-हैंड अकाउंट की तरह है. उनके भी परिवार को श्रीनगर का अपना घर छोड़ना पड़ता है.

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सालों बाद एक बार राहुल अपने घर जाते हैं. बहुत हिम्मत करके. घर का गेट, वो कैंपस, वहां उनके पिता का लगाया सेब का पेड़, सब ज्यों के त्यों हैं. बस घर का मालिक बदल गया है. हालांकि विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म इसी किताब पर बनी है कि नहीं, ये पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता अभी. हम तो वही बता रहे हैं, जैसी बातें चल रही हैं. वैसे इस फिल्म की मेकिंग के बारे में और बातें जानने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं. हां, एक बात बतानी रह गई. विधु विनोद चोपड़ा खुद भी कश्मीरी पंडित हैं. अपनी फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ की शुरुआत में वो फिल्म अपने बच्चों के नाम भी करते हैं, जिन्होंने हालात की वजह से अपने पुरखों का घर, अपना कश्मीर नहीं देखा.

चलते-चलते ‘ताशकंद फाइल्स’ की कमाई जान लीजिए. 50 दिन बॉक्स ऑफिस पर डटे रहने के बाद फिल्म ने करीब 18 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है. फिल्म के बनने की लागत कब की निकल गई. इस लिहाज से फिल्म हो गई है हिट. शायद इसी वजह से डायरेक्टर को अगली फिल्म अनाउंस करने का कॉन्फिडेंस आया हो.


Film Review: The Tashkent Files

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