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मूवी रिव्यू: जजमेंटल है क्या

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कंगना रनौत सुर्ख़ियों की क्वीन हैं. आए दिन ख़बरों में छाई रहती हैं. इस बार भी हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार अच्छी वजह से सुर्ख़ियों में हैं. उनकी नई फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ एक फुल पैसा वसूल पिक्चर है.

‘जजमेंटल है क्या’ कहानी है बॉबी की. बॉबी, जो बचपन में हुई एक अप्रिय घटना की वजह से मेंटल इलनेस की शिकार है. एक्यूट साइकॉसिस की. इस दिमागी बीमारी में सच-झूठ का फर्क करना मुश्किल हो जाता है. कई बार इंसान अपने दिमाग में चल रही घटनाओं को ही सच मान लेता है. बॉबी एक डबिंग आर्टिस्ट है. फिल्मों की डबिंग में अलग-अलग किरदारों को अपनी आवाज़ देती है. समस्या ये है कि जिस भी किरदार को वो अपनी आवाज़ देती है, वो उसके दिमाग में भी घर करके बैठ जाता है. बॉबी को लगने लगता है कि वो वही है. फिर कभी वो इंस्पेक्टर बन जाती है, तो कभी हॉरर फिल्म की हीरोइन. अपने दिमाग में इतने झमेलों से जूझ रही बॉबी के जीवन में एंट्री होती है केशव की.

केशव, जो अपनी बीवी के साथ बॉबी के घर में रहने आया है.
केशव, जिसकी तरफ बॉबी आकर्षित हो गई है.
केशव, जिसकी हरकतें शक पैदा करने वाली हैं.

अभी बॉबी केशव का किरदार समझने की कोशिश ही कर रही होती है कि एक मर्डर हो जाता है. बॉबी को पूरा यकीन है कि ये केशव ने किया है. केशव को शक है कि इसमें बॉबी का हाथ है. पुलिस का अपना ही एक वर्जन है. तो आखिरकार क़त्ल किया किसने हैं? इस सवाल का और इस सवाल से उपजे और ढेर सारे सवालों का जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी बॉस. यकीन जानिए मज़ा आएगा.

कंगना इस फिल्म में फुल फॉर्म में नज़र आई हैं.
कंगना इस फिल्म में फुल फॉर्म में नज़र आई हैं.

कुछ फ़िल्में ऐसी होती हैं जिनमें गिने-चुने ही किरदार होने की वजह से फिल्म का तमाम भार उसके लीड किरदारों के कंधों पर ही होता है. ‘जजमेंटल है क्या’ ऐसी ही एक फिल्म है. ये फिल्म भी मोस्टली कंगना और राजकुमार राव के कंधों पर ही टिकी है. और दोनों ने ही इसे फूलों की डोली की तरह सहजता से ढोया है. दोनों ही दमदार एक्टर हैं इसमें कोई शक नहीं और दोनों ने ही इस फिल्म में जमके हाथ दिखाए हैं.

एक दिमागी तौर पर अनस्टेबल लड़की के रोल में कंगना ने ग़ज़ब की परफॉरमेंस दी है. वो करैक्टर में इतनी ज़्यादा घुस जाती हैं कि रियल और रील कंगना में भेद करना मुश्किल हो जाता है. एक डिस्टर्ब्ड, पैरानॉयड, डरी-सहमी लड़की की तमाम आशंकाएं, तमाम खौफ़ कंगना ने सहजता से परदे पर साकार किए हैं. आप उनके किरदार से, उसकी बेचैनी से जुड़ाव महसूस करते हैं. कंगना का ये बेहतरीन काम है. बल्कि फिल्म देखने के बाद तो आपको लगता है इस रोल के लिए उनसे ज़्यादा फिट और कोई हो ही नहीं सकता था.

राजकुमार राव का तो नाम बदलकर मिस्टर डिपेंडेबल रख देना चाहिए.
राजकुमार राव का तो नाम बदलकर मिस्टर डिपेंडेबल रख देना चाहिए.

ऐसा ही शानदार काम राजकुमार राव का भी है. वो हमेशा की तरफ पूरे फ्लो में हैं और कंगना से कदम दर कदम मिलाकर चलते दिखाई देते हैं. कभी डरते तो कभी डराते केशव के किरदार को उन्होंने कंविंसिंगली निभाया है. और क्लाइमैक्स सीन में तो उन्होंने कहर ही ढा दिया है. कंगना अगर इस फिल्म की बेग़म हैं तो राजकुमार यकीनन बादशाह हैं. दोनों ही जानदार, ज़बरदस्त, ज़िंदाबाद.

अगर ये दोनों बेग़म-बादशाह हैं तो फिर इक्का कौन है? इक्का है स्क्रिप्ट और प्रकाश कोवेलामुदी का डायरेक्शन. कनिका ढिल्लन की लिखी स्क्रिप्ट कसी हुई है. सेकंड हाफ में थोड़े वक्त के लिए ऐसा ज़रूर लगता है कि फिल्म खिंच रही है लेकिन फिर तुरंत ही ट्रैक पर आ जाती है. रामायण के रेफ्रेंसेस कहानी को और भी रिच बनाते हैं. बॉबी के दिमाग में बज रही आवाज़ों को शक्ल देने का आईडिया भी ज़ोरदार है. इससे दर्शकों को इसका थोड़ा बहुत अंदाज़ा होता रहता है कि जो दिमागी बीमारी से जंग लड़ रहे हैं उनकी दुनिया आखिर होती कैसी है. डायरेक्टर प्रकाश इसे थ्रिलर फिल्म का ट्रीटमेंट तो देते ही हैं, साथ ही मेंटल इलनेस के प्रति अवेयरनेस जगाने में भी काफी हद तक कामयाब रहते हैं.

फिल्म तेज़ रफ़्तार भी है और स्टाइलिश भी.
फिल्म तेज़ रफ़्तार भी है और स्टाइलिश भी.

फिल्म में ह्यूमर का तड़का भी है और पर्याप्त मात्रा में है. काफी सारे संवाद चुटीले हैं और कई जगह किरदार बिना संवादों के भी हंसी पैदा करने में कामयाब रहते हैं. कंगना के ऑन-ऑफ़ बॉयफ्रेंड के रोल में हुसैन दलाल बेहतरीन परफॉरमेंस देते हैं. हां, जिमी शेरगिल के हिस्से कुछ ख़ास नहीं आया है.

फिल्म तेज़ रफ़्तार है, स्टाइलिश है और आपकी उत्सुकता लगातार बनी रहती है. हां अगर आप क्राइम फिक्शन को फॉलो करते आए हैं तो हो सकता है आप क्लाइमैक्स में क्या होने वाला है ये भांप लें. किरदारों की कमी के चलते अंत थोड़ा प्रेडिक्टेबल तो है लेकिन इससे उसकी दर्शनीयता में कोई कमी नहीं आती. वो आपको उतनी ही संतुष्टि देता है.

कुल मिलाकर ‘जजमेंटल है क्या’ एक ऐसी फिल्म है जिसे देखकर आपके पैसे बिल्कुल भी ज़ाया नहीं होंगे. देख आइए.


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