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किस्से उस कॉमेडियन के जिसका नाम गुरु दत्त ने अपने फेवरेट स्कॉच ब्रांड के ऊपर रखा था

इंडियन सिनेमा आज एक बड़े मुकाम पर है. और उसको इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत सारे लोगों का हाथ है. जिसमें कुछ आज भी हमारे साथ हैं तो कुछ लोग छोड़कर जा चुके हैं. ऐसा ही एक नाम है बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी. 11 नवम्बर, 1920 को जन्मे और 29 जुलाई, 2003 को हमारा साथ छोड़ जाने वाले इन्हीं काज़ी को हम जॉनी वॉकर के नाम से जानते हैं. वो भारत के सबसे मंझे हुए कलाकारों में से थे. तक़रीबन 300 से भी ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले जॉनी आमतौर पर कॉमिक रोल्स करते थे. एक पूरी पीढ़ी को उन्हीं ने सिखाया कि कॉमेडी क्या होती है.

एक दौर था जब उनके नाम पर लोग फ़िल्में देखने जाते थे. उनके बिना कोई भी फिल्म पूरी ही नहीं होती थी. आइए जानते हैं जॉनी की फिल्मों और ज़िंदगी से जुड़े कुछ खास किस्से:

# जॉनी वॉकर का जन्म इंदौर के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था. इनके पिता एक मिल में काम करते थे. लेकिन किसी वजह से वो मिल बंद हो गई और भूखे सोने की नौबत आ गई. ऐसे में अपने 10 भाई बहनों में दूसरे जमालुद्दीन ने परिवार के लिए कमाने की ज़िम्मेदारी उठाई और पूरी फैमिली के साथ बंबई आ गए. यहां आने के बाद वो BEST (बृहनमुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) की बसों में कंडक्टर की नौकरी करने लगे. लेकिन 12 लोगों के परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्हें अपनी ड्यूटी के बाद आइसक्रीम, सब्ज़ी या फल बेचना पड़ता था. इतने मुश्किल हालात होने के बावजूद वो अपनी बस के सवारियों का मनोरंजन करते थे.

BEST की बस.
BEST की बस.

# एक बार जॉनी की बस में ही मशहूर फिल्म लेखक और एक्टर बलराज साहनी सफ़र कर रहे थे. उन्होंने बस में जॉनी का परफॉरमेंस देखा और उन्हें गुरु दत्त के पास लेकर गए. गुरु दत्त उस वक़्त ‘बाज़ी’ फिल्म डायरेक्ट कर रहे थे. बहुत सारे घटनाक्रमों के बाद बलराज ने उन्हें गुरु दत्त से मिलवाया. गुरु दत्त उनकी एक्टिंग देखकर खुश हो गए और उन्हें अपनी फिल्म में साइन कर लिया. उन्हें बदरू की एक्टिंग इतनी पसंद आ गई कि उन्होंने उनका नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी से बदलकर अपने पसंदीदा स्कॉच ब्रांड के ऊपर ‘जॉनी वॉकर’ रख दिया. गुरु दत्त फिल्मों में उनके लिए अलग से रोल लिखवाते थे. जॉनी को हम गुरु दत्त की तक़रीबन सभी फिल्मों में देख सकते हैं.

गुरु दत्त की पसंदीदा स्कॉच ब्रांड थी जॉनी वॉकर जिसके ऊपर उन्होंने बदरू का नाम रखा था.
गुरु दत्त की पसंदीदा स्कॉच ब्रांड थी जॉनी वॉकर जिस पर उन्होंने बदरू का नाम रखा था.

# गुरु दत्त से उनकी इतनी अच्छी बनती थी कि गुरु दत्त उन्हें उनके कैरैक्टर के डायलॉग पहले ही लिख कर दे देते थे. उसके बाद उनसे वो रिहर्सल करने को कहते थे. गुरु दत्त को पता था की रिहर्सल के दौरान बदरू कुछ इम्प्रोवाईजेशन ज़रूर करेगा. और जब जॉनी के नई-नई तिकड़म से सेट पर मौजूद सभी लोग हंसने लगते तो गुरु दत्त साहब इस इम्प्रोवाईजेशन को फिल्म में जॉनी के किरदार में भी जोड़ देते थे. इससे जॉनी का किरदार और भी मजेदार बन पड़ता था.

फिल्म प्यासा के एक सीन में गुरु दत्त के साथ जॉनी वॉकर.
फिल्म प्यासा के एक सीन में गुरु दत्त के साथ जॉनी वॉकर.

# अपने करियर में लगातार फ़िल्में करने वाले जॉनी वॉकर ने 1983 के बाद फिल्मों में काम करना बंद कर दिया था. क्योंकि उन्हें लगता था की कॉमेडी का लेवल गिरता जा रहा है और लोग उनसे डबल मीनिंग डायलॉग वाले किरदार करवाना चाहते थे. लेकिन जॉनी उसूलों वाले आदमी थे, उन्होंने वो करना कभी मंज़ूर नहीं किया. लेकिन साल 1997 में वो एक बार फिर कमल हासन की ‘चाची 420’ में नज़र आए. और ये उनकी आखिरी स्क्रीन प्रेज़ेंस साबित हुई. ये फिल्म उन्होंने अपने खास दोस्त गुलज़ार और कमल हासन के बहुत ज़िद करने पर की थी. इस फिल्म में उन्होंने एक शराबी मेक-अप आर्टिस्ट का रोल किया था.

फिल्म चची 420 के एक सीन में कमल हासन के साथ जॉनी वॉकर.
फिल्म ‘चाची 420’ के एक सीन में कमल हासन के साथ जॉनी वॉकर.

# जॉनी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि इस फिल्म को करने का उन्हें बहुत फायदा हुआ क्योंकि लंबे समय से कोई फिल्म नहीं करने के कारण लोग उन्हें मरा हुआ समझकर भूल गए थे. लेकिन इस फिल्म की रिलीज़ के बाद उन्हें ढेरों मैसेज, टेलीफोन कॉल्स, टेलीग्राम और लेटर आए. हर चीज़ में एक ही बात पूछी जा रही थी कि ‘आप अभी तक जिंदा हैं?’ जिस पर जॉनी मुस्कुरा कर हां बोल देते थे.

लेकिन 29 जुलाई, 2003 को वो दिन आ ही गया जब जॉनी अपने पीछे एक लंबी-चौड़ी जमात छोड़कर चले गए जिसने हमेशा उनके जैसी कॉमेडी और एक्टिंग करना चाहा. अपनी फिल्मों और किरदारों से जॉनी हमेशा हमारे जेहन में ज़िन्दा रहेंगे.  


वीडियो देखें: कैसे जिमी शेरगिल को बॉलीवुड छोड़ घर लौटने से एक्टिंग गुरू रोशन तनेजा ने रोक लिया था

 

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