Submit your post

Follow Us

मूवी रिव्यू: जयेशभाई जोरदार

पिछले कुछ समय से गैर हिंदी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर भौकाल काट रही हैं. फिर चाहे वो ‘पुष्पा’ हो, एसएस राजामौली की ‘RRR’ या फिर ‘KGF चैप्टर 2’. ऐसे में इंतज़ार था हिंदी मेनस्ट्रीम सिनेमा से, कि कब तेरा खून खौलेगा रे. जब रणवीर सिंह की ‘जयेशभाई जोरदार’ की रिलीज़ डेट अनाउंस हुई, तब लगा कि लार्जर दैन लाइफ हीरोज़ के बीच एक ग्राउंडेड हीरो एंट्री करने वाला है. जो लाउड होने की कोशिश नहीं करता.

इस हीरो और उसकी कहानी कैसी है, ‘जयेशभाई जोरदार’ के रिव्यू में उसी पर बात करेंगे. कहानी सेट है गुजरात के एक गांव में. रणवीर का किरदार जयेश वहीं रहता है. जयेश के पिता गांव के सरपंच हैं. सदियों से, अपने पूर्वजों से जो परंपरा, प्रतिष्ठा के नाम पर सुना, बस उसी को दोहरा रहे हैं. चाहते हैं कि उनके घर एक पोता पैदा हो, ताकि वंश आगे बढ़ सके. जयेश उनसे बिल्कुल अलग है, लेकिन पिता के सामने कुछ नहीं कर सकता. उसकी पत्नी प्रेग्नेंट है. घरवाले चाहते हैं कि सिर्फ बेटा ही हो, बेटी हुई तो भ्रूण हत्या कर दी जाएगी. ऐसे हालात में जयेश को पता चलता है कि उसकी वाइफ एक बेटी के साथ प्रेग्नेंट है. वो चाहता है कि उसकी बेटी इस दुनिया में आए. वो अपने घरवालों और समाज से कैसे लड़ेगा, यही फिल्म का मेन प्लॉट है.

Ranveer Singh Jayeshbhai Jordaar
फ़िल्म में दो जयेश हैं. एक जिसे सिर्फ उसकी बीवी और बेटी जानती हैं, दूसरा जिसे बाकी दुनिया जानती है.

हम बचपन से जैसे भी होते हैं, उसमें दो फैक्टर्स का बड़ा हाथ होता है. पहला तो हमारी परवरिश. हमारे बड़े जो सीखते आए हैं, वो हमें सिखाते हैं. हमारी मानसिकता का कुछ हिस्सा उसी सीख की देन होता है. दूसरा फैक्टर होता है हमारी सोसाइटल कंडिशनिंग. घर से बाहर जाकर हम क्या सीखते हैं. हमारा समाज हम पर क्या पूर्वाग्रह थोपता है, ये उस कंडिशनिंग का पार्ट होता है. मतलब आज हम जैसा सोचते हैं, उसमें इन दोनों बातों का मेजर इम्पैक्ट रहता है. जयेश पर समाज और परिवार ने एक ही बात थोपी है, कि औरतें आदमियों से कमतर हैं. उन्हें फलां-फलां तरीके से रहना चाहिए. कहानी में दो जयेश हैं. एक जो उस तरीके से पेश आता है, जिसकी उम्मीद उसके घरवाले करते हैं, समाज करता है. जिस व्यवहार पर उसकी मर्दानगी निर्भर करती है.

फिर आता है वो जयेश, जिसे उसकी बेटी और पत्नी के अलावा कोई नहीं जानता. जो अपनी मैस्क्युलेनिटी को लेकर इनसिक्योर नहीं. अपने पिता और अपनी सोच के फ़र्क को भली-भांति पहचानता है. अपने मां या पिता को दोष नहीं देता, बल्कि उस मानसिकता को गलत मानता है, जिसने उसके घरवालों और अनेकों घरवालों को ऐसा बनाया है. जयेश इतना मैच्योर कैसे है, वो हमें ठीक से कभी पता नहीं चलता. बाकी इस कहानी को देखकर काफी लोगों को शिकायत हो सकती है कि यहां नया क्या है. फिर से महिलाओं से जुड़ा सोशल मैसेज, और फिर से एक पुरुष जो उनका तारणहार बनकर आया है. बस इसी पार्ट पर आपका सोचना गलत हो सकता है.

Jayeshbhai Jordaar Ranveer Singh
कुछ मामलों में ये बाकी सोशल मैसेजिंग वाली फिल्मों जैसी ही है.

जयेश किसी भी पॉइंट पर टिपिकल हीरो की तरह पेश नहीं आता, कि वैसे तो सीधा-सादा हो पर परिवार पर मुसीबत आते ही एक्शन मोड में आ जाए. ये वैसी कहानी नहीं. जयेश बस एक नॉर्मल इंसान है, जो एक सिचुएशन में फंस गया है, और किसी भी तरह अपनी फैमिली को उससे बाहर निकालना चाहता है. उसके पास हर सवाल का जवाब नहीं, न ही उसकी प्लैनिंग अभेद है. वो अपने साथ कोई स्वैग कैरी नहीं करता. अपने परिवार को बचाने की कोशिश भले ही करता है, लेकिन तारणहार नहीं बनता. जयेश की हर कदम पर मदद करने वाली, उसे प्रेरणा देने वाली भी उसकी लाइफ की महिलायें ही हैं. फिर चाहे वो उसकी छोटी बेटी हो या उसकी बहन.

सोशल मैसेज वाली फिल्मों में एक चीज़ बड़ी कॉमन रहती है, कि वहां मैसेज ह्यूमर की आड़ में दिया जाता है. ‘जयेशभाई जोरदार’ भी उस लिहाज़ से कुछ अलग नहीं. फर्स्ट हाफ में लगभग हर दूसरे सीन से ह्यूमर क्रिएट करने की कोशिश की गई है. कभी वो लैंड करता है, तो कभी नहीं. सेकंड हाफ अपने साथ इमोशनल सीन्स लेकर आता है. उन सभी में से यादगार है एक सीन, जहां जयेश महिलाओं के झुंड के बीच है और बस रो रहा है. इस सीन के पीछे की कहानी आप फिल्म देखकर जानिए. बाकी रणवीर की अदाकारी पर बात करना कोई स्पॉइलर नहीं होगा. रणवीर सिंह की एक इमेज है, कि वो हिंदी मेनस्ट्रीम सिनेमा के गिरगिट हैं, हर फिल्म में अलग लगते हैं. ‘जयेशभाई जोरदार’ में भी उनको देखकर यही लगेगा. जयेश का भोलापन, उसकी विडंबनाएं, रणवीर अपने किरदार के हर पार्ट को समझकर उसे आत्मसात करते दिखते हैं.

जयेश को अपने एलिमेंट में देखकर खुशी सी होती है, उसे रोता देखकर बुरा फ़ील होता है, ऐसा काम किया है रणवीर ने. रत्ना पाठक शाह ने उनकी मां का रोल निभाया, ऐसी औरत जिन्होंने पितृसत्तात्मकता को अपनी लाइफ के फैसले लेने दिए, और अब उससे बाहर नहीं आना चाहतीं. बमन ईरानी गांव के सरपंच यानी जयेश के पिता बने हैं. उनका किरदार उस घोड़े की तरह है जिसकी आंखों के बगल में ब्लाइंड्स लगे होते हैं, और उसे कुछ और नहीं दिखता. जो करते हैं, अपनी हठ के चलते करते हैं. आंखें बंद कर अपनी ज़िद पूरी करने में लगे रहते हैं.

उसी ज़िद के चलते बहुत सारी इललॉजिकल लगने वाली चीज़ें भी करते हैं. जिन्हें देखकर लगता है कि यार ऐसा भी कैसे हो सकता है. लेकिन फिर याद आता है कि अंधश्रद्धा के नाम पर लोग वास्तविकता में उससे भी अज़ीब-अज़ीब हरकतें करते हैं. गुजराती फिल्मों के एक्टर दिव्यांग ठक्कर ही वो शख्स हैं, जिन्होंने ग्राउंड पर हो रही ऐसी दकियानूसी चीज़ों को इस कहानी का हिस्सा बनाया. दिव्यांग ने ‘जयेशभाई जोरदार’ को लिखा और डायरेक्ट किया है. कहानी को गुजरात के लोकल लोगों में सेट करने की बड़ी वजह हो सकती है कि दिव्यांग उस सेटअप से वाकिफ हैं. फिल्म देखकर लगता है कि वो अपने कैरेक्टर्स और जहां से वो आते हैं, इन दोनों बातों को लेकर अवेयर हैं.

सोशल मैसेजिंग वाली फिल्में लगभग एक खाके पर चलती हैं. ह्यूमर होगा, फिर इमोशनल मोमेंट्स होंगे, और कहानी अपने कनक्लूज़न पर पहुंच जाएगी. लंबे समय से ऐसी फिल्में एक प्रॉब्लम से जूझ रही हैं, अपना क्लाइमैक्स जल्दी-जल्दी रैप अप करने की प्रॉब्लम से. यही बात ‘जयेशभाई जोरदार’ में भी खटकती है, कि दो घंटे की लेंथ को बढ़ाकर क्लाइमैक्स को प्रॉपर स्पेस दी जा सकती थी.


वीडियो: कैसी है अनिल कपूर स्टारर ‘थार’?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

10 नंबरी

हनुमान चालीसा केस में जेल गईं नवनीत राणा की फिल्में कहां देख सकते हैं?

नवनीत ने तेलुगु के साथ, कन्नड़ और पंजाबी फिल्मों में भी हाथ आज़माया था.

हिंदी वालों की इन्सल्ट के बाद महेश बाबू का एक और बयान

उन्होंने कहा था कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री उन्हें अफोर्ड नहीं कर सकती.

KGF 2 से पहले आई वो भारतीय फिल्में, जिन्हें सबसे ज़्यादा लोगों ने देखा

पैसों का अंबार लगाने वाली KGF 2 सलमान, आमिर और सनी के आसपास भी नहीं पहुंच पाई है.

शाहरुख के साथ अपने झगड़े पर क्या बोले अजय देवगन?

अजय देवगन और शाहरुख खान के संबंध लंबे समय से खटारभरे बताए जाते रहे हैं, अब असलियत सुनिए.

सलमान खान के साथ ईद पार्टी से निकलीं शहनाज़ गिल ट्रोल क्यों होने लगीं?

लोगों का कहना है कि शहनाज़ को सलमान के साथ वैसे पेश नहीं आना चाहिए!

'अनेक' ट्रेलर के ये 10 सेकंड हिंदी थोपने वाले तमाम लोगों के लिए ही बने हैं

फिल्म सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर नहीं लगती, इसके पास कहने के लिए और भी कुछ है.

'हीरोपंती 2' की कमाई ने टाइगर की सारी हीरोपंती झाड़ दी

'हीरोपंती 2' का रंग कहीं फीका सा पड़ता दिख रहा है.

ओटीटी का 'KGF' बनने के लिए क्या करने जा रहा है अमेज़न?

अमेज़न आपके तमाम फेवरेट शोज़ वापस ला रहा है.

'KGF 2' ने एक और कीर्तिमान स्थापित कर दिया

फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धड़ल्ले से पैसे छाप रही है.

प्रेमीजनों के लिए खुशखबरी! शानदार लव स्टोरीज़ वाली सीरीज़ मॉडर्न लव का देसी संस्करण आ रहा

एक से से बढ़कर एक कलाकार चुने गए हैं. उम्मीद है धमाल होगा.