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जामिया पर सेलिब्रिटीज़: ‘आर्टिकल 15’ वाले आयुष्मान ने 'आर्टिकल 19' का रेफरेंस क्यूं दिया

15 दिसंबर को अलीगढ़ और जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में हालात काफी बिगड़ गए. हिंसा हुई. आगजनी, पत्थरबाज़ी की भी वारदातें हुईं. पुलिस ने यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसकर स्टूडेंट्स को पीटा. कई स्टूडेंट्स को गंभीर चोट लगने की ख़बर है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की तरफ से बसों में आग लगाई गई. इस पूरे वाकये में जितने लोग हैं उतने पक्ष. लेकिन कुछ लोग हैं जो अब भी निष्पक्ष होकर आग बुझाने के काम में लगे हैं. प्रथम दृष्टया आयुष्मान खुराना भी ऐसे ही कुछ लोगों के बीच खड़े मिले. उन्होंने ऐसा क्या कहा, या किया इसके बारे में जानेंगे. लेकिन उससे पहले आर्टिकल 19 क्या है वो जान लेते हैं. शॉर्ट में.

# आर्टिकल 19 –

आर्टिकल 15. राज्य अपने किसी नागरिक के साथ केवल धर्म, जाति, लिंग, नस्ल और जन्म स्थान या इनमें से किसी भी आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा. इसी आर्टिकल 15 को आधार बनाकर अनुभव सिन्हा ने मूवी बनाई. आयुष्मान खुराना इसमें आईपीएस अधिकारी बने थे. उनके कैरेक्टर का नाम था अयान रंजन. एडिशनल सुपरीटेंडेंट ऑफ़ पुलिस. ‘अब फर्क लाएंगे’, टैग-लाइन वाली इस मूवी का नाम भी ‘आर्टिकल 15’ ही था.

रील लाइफ में आर्टिकल 15 का सपोर्ट करने वाले आयुष्मान खुराना रियल लाइफ में ‘आर्टिकल 19’ को सपोर्ट करते हुए दिख रहे हैं. ‘आर्टिकल 19’, भारत के नागरिकों को ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का अधिकार देता है.

हालांकि आयुष्मान ‘आर्टिकल 19’ का नाम तो नहीं लिया लेकिन उन्होंने एक ऐसा ट्वीट ज़रूर किया है जिसको पढ़कर आपको समझ में आ जाता है कि वो इसी की बात कर रहे हैं. साथ में ‘गांधी’, ‘अहिंसा’, ‘लोकतंत्र’ जैसे शब्दों का प्रयोग करके उन्होंने अपने ईमानदार भारतीय नागरिक होने का सबूत भी इस ट्वीट से दिया है.

# क्या लिखा है ट्वीट में-

छात्र जिन चीज़ों से गुज़रे, उसको लेकर अंदर तक अशांत हो गया हूं और मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं. हम सभी को अपना विरोध प्रदर्शित करने और अपने मौलिक विचारों को अभिव्यक्त करने की आज़ादी है. लेकिन, विरोध प्रदर्शन को हिंसक भी नहीं होना चाहिए और उसे सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने का कारण भी नहीं बनना चाहिए. प्यारे देशवासियों, ये महात्मा गांधी की भूमि है. अभिव्यक्ति का औजार अहिंसा है और अहिंसा ही होना भी चाहिए. लोकतंत्र में विश्वास रखें.

आयुष्मान इस ट्वीट में कुछ खूबसूरत शब्द हैं. जो भारत की एक गणतंत्र के रूप में नींव मज़बूत करते हैं. जैसे- लोकतंत्र, अहिंसा, अभिव्यक्ति…

साथ ही उनके ट्वीट में एक सरोकार है. सबके लिए. इसके अलावा इसमें एक चिंता है. एक मॉडेस्टी है, कि बेशक मैं पूरे इंसिडेंट और उसके सभी पक्षों को नहीं जानता। ये भी नहीं जानता कि दोष किसका है और कौन सही. लेकिन क्या ग़लत है और क्या सही, ये बखूबी जानता हूं.

# बाकी सेलिब्रिटीज़ क्या बोले-

जामिया में हुई हिंसा के बाद कई सेलिब्रिटीज़ सरकार, पुलिस और छात्रों के समर्थन और विरोध में खड़े हो गये हैं. ये सभी आर्टिकल 19 का सदुपयोग करते हुए अपने विचारों को ट्विटर पर अभिव्यक्त कर रहे हैं. उनके फैंस, उनको फ़ॉलो करने वाले इस बारे में क्या सोचते हैं, उनके ट्वीट पर आए कमेंट्स से इसका पता चल जाता है.

अनुराग कश्यप कहते हैं-

ये सरकार साफ़ तौर पर एक फासिस्ट सरकार है. और मुझे ये देखकर गुस्सा आता है कि जो आवाज़ें बदलाव ला सकती हैं, वो शांत हैं.

इंट्रेस्टिंग बात ये है कि केवल इंडियन या बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ ही नहीं, कुछ हॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने लगे हैं. होने को हमें अभी तक एक ऐसा ट्वीट मिला है अगर आपको और मिलें तो कमेंट बॉक्स में बताइएगा. तो वो एक ट्वीट है जॉन कसैक का-

हमारे उन मुस्लिम भाई-बहनों और छात्रों के साथ एकजुटता के साथ खड़े रहें जो मोदी की नृशंसता का शिकार हुए हैं.

उधर ‘स्त्री’,’बरेली की बर्फी’ और ‘न्यूटन’ फेम राजकुमार राव का ट्वीट उसी लाइन में है जो आयुष्मान ने पकड़ी है-

पुलिस ने छात्रों से निपटने के दौरान जो हिंसा दिखाई है, मैं उसकी कड़ी निंदा करता हूं. लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार है. साथ ही मैं सार्वजनिक संपत्तियों को नष्ट करने के किसी भी प्रयास की भी निंदा करता हूं. हिंसा किसी भी चीज का हल नहीं है!

उधर आर्टिकल 15 में आयुष्मान की को-एक्ट्रेस, सयानी गुप्ता ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे हैं. सयानी ने सेलिब्रिटीज़ की वो ग्रुप सेल्फी डाली है, जो इन लोगों ने मोदी जे साथ खिंचवाई थी. इस तस्वीर में दिखने वाले स्टार्स को संदर्भित करते हुए उन्होंने लिखा है-

जामिया और एएमयू के छात्रों की ओर से मैं अनुरोध करती हूं कि आप में से कम से कम एक व्यक्ति मोदी जी को ट्वीट या मैसेज करे. और पुलिस की बर्बरता और छात्रों के खिलाफ हिंसा के इस कृत्य की निंदा करे. दोस्तो बोलने का समय आ गया है. नहीं क्या?

इस हिसाब से सयानी गुप्ता ने जो तस्वीर ट्वीट की है, उसमें से कम से कम एक ने तो ट्वीट कर दिया है. बेशक वो ट्वीट मोदी को नहीं किया गया, लेकिन ट्वीट है जामिया के बारे में ही.

नहीं रुकिए. विकी कौशल भी तो तस्वीर में दिख रहे हैं. उन्होंने क्या ट्वीट किया है ये भी पढ़ लीजिए-

जो हो रहा है, वो सही नहीं है. जैसे हो रहा है, वो सही नहीं है. जनता के पास शांतिपूर्ण ढंग से अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है. ये हिंसा और व्यवधान दोनों ही दुखद हैं और समान देश का नागरिक होने के नाते मेरे लिए चिंताजनक हैं. लोकतंत्र पर हमारा विश्वास किसी भी परिस्थिति में नहीं डगमगाना चाहिए.

मनोज बाजपेयी ने लिखा-

बेशक ऐसा समय आ सकता है जब हम इतने शक्तिहीन हो जाएं कि अन्याय न रोक पाएं, लेकिन कभी भी वो समय नहीं आना चाहिए कि हम विरोध भी न कर पाएं.

उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए और उनके विरोध पर मैं छात्रों के साथ हूं! मैं प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हिंसा की निंदा करता हूं !!!!!

इसके अलावा जावेद अख़्तर और उनके बेटे फरहान ने कोई ट्वीट तो नहीं किया, लेकिन इन दोनों ही के ट्वीट्स पे दिए गए जवाब खूब वायरल हो रहे हैं. जाते-जाते पढ़ते जाइए-

1) जावेद अख्तर ने एक ट्वीट के उत्तर में कहा-

2) ये लास्ट में फरहान का ट्वीट ये भी स्टैंड अलोन नहीं, किसी ट्वीट की प्रतिक्रिया है-

तो जैसा हमने कहा था, जितने मुंह उतनी बातें, उतने पक्ष, उतने विपक्ष. आपको किसकी बात सबसे कन्विंसिंग लगी?


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