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रणजी ट्रॉफी की वो 12 बातें जो आपको पता होनी ही चाहिए

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रणजी ट्रॉफी भारत का सबसे पॉपुलर घरेलु क्रिकेट टूर्नामेंट है. नेशनल टीम में एंट्री की राह में सबसे अहम मुकाम. इंडियन टीम में कितने ही खिलाड़ी बारास्ता रणजी ट्रॉफी पहुंचे हैं. हर साल बिना नागा ये टूर्नामेंट आयोजित होता है. आइए इसके बारे में कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं.

1. रणजी ट्रॉफी का पहला मैच 4 नवंबर 1934 को खेला गया. चेन्नई के चेपक स्टेडियम पर. मद्रास और मैसूर की टीम के बीच.

2. पहली गेंद मद्रास के एम. जे. गोपालन ने मैसूर के एन. कर्टिस को फेंकी.

3. रणजी की पहली सेंचुरी हैदराबाद के खिलाड़ी एस. एम. हादी के नाम है. उन्होंने पहले ही सीज़न में मुंबई के खिलाफ़ सिकंदराबाद में 132 रन बनाए थे.

4. रणजी ट्रॉफी का शुरूआती नाम ‘क्रिकेट चैंपियनशिप ऑफ़ इंडिया’ हुआ करता था.

5. बाद में इसका नाम महाराजा रणजीत सिंहजी के नाम पर रख दिया गया जो भारत की नवानगर रियासत के राजा थे. हालांकि रणजीत सिंहजी ने इंडिया के लिए कभी क्रिकेट ही नहीं खेला.

6. उनकी मौत रणजी ट्रॉफी शुरू होने से एक साल पहले ही हो गई थी.

7. रणजी ट्रॉफी खेलनेवाली ज़्यादातर टीमें भारत की राज्य टीमें हैं.

8. रेलवेज़ और सर्विसेज़ (आर्मी) की टीमें भी रणजी में खेलती हैं. 

9. आज़ादी से पहले रणजी ट्रॉफी खेलने वाली टीमें ज़्यादातर रियासतें हुआ करती थी.

10. रणजी ट्रॉफी के 83 साल के इतिहास में मुंबई सबसे ज़्यादा कामयाब टीम रही है. मुंबई ने कुल 41 बार ट्रॉफी जीती है.

11. एक दौर तो ऐसा था कि मुंबई को हराना लगभग नामुमकिन था. 1958 से 1973 तक उन्होंने लगातार 15 बार ट्रॉफी पर कब्ज़ा किया.

12. इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन वसीम जाफर के नाम हैं. उन्होंने 10,000 से ज़्यादा रन बनाए हैं. इसके अलावा मुंबई के अमोल मजूमदार भी रणजी में बल्लेबाजी के बड़े नाम हैं.

इस रणजी ट्रॉफी का विजेता हमें अगले साल मालूम चलेगा क्यूंकि फाइनल 29 दिसंबर से शुरू होने वाला है. बशर्ते मैच तीन ही दिन में ख़त्म न हो जाए. 😉


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