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किस्से अमित त्रिवेदी के, जिनको ढूंढने के लिए इनके मम्मी-पापा को टीवी में एड देना पड़ा

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आज कल बॉलीवुड का ऐसा क्रेज़ है कि सिनेमा से जुड़े हर विभाग में काम करने वालों की लाइन लगी हुई. अपने-अपने टैलेंट के अनुसार सबको काम मिल रहा है. ऐसा ही एक टैलेंटेड नाम हैं अमित त्रिवेदी. पेशे से म्यूज़िक डायरेक्टर हैं. लेकिन म्यूज़िक से जुड़े सभी डिपार्टमेंट में बढ़िया धाक रखते हैं. म्यूज़िक बनाने, लिखने से लेकर गाने तक. राजकुमार गुप्ता की फिल्म ‘आमिर’ से शुरुआत करने के बाद अब तक ‘उड़ान’, ‘इशकज़ादे’, ‘इंग्लिश विंग्लिश’, ‘क्वीन’, ‘उड़ता पंजाब’, ‘पैडमैन’, ‘मनमर्ज़ियां’, ‘अंधाधुन’ और ‘रेड’ समेत कई फिल्मों के लिए म्यूज़िक दे चुके हैं. अपनी दूसरी ही फिल्म 2009 में आई ‘देव डी’ (जो कि पहली होने वाली थी) के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता. आज उन्हें इंडस्ट्री में बतौर मुक्कमल म्यूज़िक डायरेक्टर जाना जाता है.

अमित वैसे तो मुंबई में ही पैदा हुए और पले बढ़े, लेकिन खुद को ‘पक्का गुज्जू’ यानी पक्का गुजराती कहते हैं. पैदा हुए थे साल 1979 में. तारीख थी अप्रैल की 8. फिल्मों में भले ही लेट से मौका मिला हो लेकिन संगीत में दिलचस्पी बचपन से थी. बिना टाइम खराब किए कॉ़लेज के दिनों से इसी में लग भी गए थे. अमित के करियर और लाइफ से जुड़े कुछ इंट्रेस्टिंग किस्से हैं, जो हमने ढ़ूंढें हैं आपके लिए :

# जब अमित के मम्मी-पापा को उन्हें ढ़ूंढने के लिए लोकल केबल पर नाम चलवाना पड़ा

अमित पैदा हुए और पले-बढ़े तो मुंबई में ही हैं, लेकिन गुजराती फैमिली से हैं. इसलिए गुजरात से खास कनेक्शन है. बचपन में जैसे हम लोग नानी के घर जाते हैं, अमित दादी के घर जाते थे. महमदाबाद. अहमदाबाद से कोई डेढ़ घंटे दूर है. अपने एक इंटरव्यू में अमित ने वहां से जुड़ा बचपन का एक किस्सा बताया. किस्सा कुछ ऐसा है कि वो बहुत शैतान हुआ करते थे. एक बार एक दोस्त के साथ लुका-छिपी खेलते हुए एक अलमारी के ऊपर चढ़ गए और खुद को पर्दे से ढंक लिया. ये बात दोपहर 11 बजे की थी.

जब नीचे आए तो रात के पौने बारह बज रहे थे. आकर देखा तो मां बेहोश पड़ी हैं. आस-पास के सारे लोग उनके घर में जमा हैं और मां को होश में लाने की कोशिश कर रहे हैं. घर के बाहर जनता मोमबत्तियां जलाए इनके लिए प्रार्थना कर रही है. अमित को कुछ समझ नहीं आया कि ये क्या हो रहा है. पापा के बारे में पूछा तो पता लगा कि वो उनकी एक फोटो लेकर रेलवे स्टेशन पर अनाउंसमेंट करवाने गए हैं. अमित की तस्वीर लोकल केबल टीवी पर आ रही थी. गुमनाम बच्चे की तलाश टाइप फ्रेम में. बात पुलिस वगैरह तक पहुंचने वाली थी कि लोगों ने देखा कि वो यहीं हैं. बात ऐसी थी कि सबको लगा कि वो कहीं गायब हो गए हैं, या शायद किडनैप. लेकिन जब जागकर उठे तो घरवालों को सारा किस्सा सुनाया कि वो कहीं नहीं गए थे. बस थोड़ी आंख लग गई थी.

# जो फिल्म पहले मिली, वो बाद में दूसरी हो गई

सिनेमा वालो लोगों से पूछा जाता है न, कि वो फिल्मों में कैसे आए? वैसा इनके साथ भी हुआ था. जहां इन्होंने बताया कि इनकी एक दोस्त हैं, शिल्पा राव. आप भी जानते होंगे. सिंगर हैं. ‘जब तक है जान’ में इश्क शावा, ‘धूम 3’ में मलंग, ‘बैंग-बैंग’ में मेहरबान और भी कई गाने गाए हैं, सारे जानकर क्या करेंगे. हां, तो ये अमित को भी जानती थीं और अनुराग कश्यप को भी. एक बार मुंबई फिल्म फेस्टिवल में शिल्पा से मिले तो उन्होंने बताया कि अनुराग कश्यप एक नए म्यूज़िक डायरेक्टर की तलाश में हैं. अनुराग से मिले. फिल्म बन रही थी ‘देव डी’. अनुराग ने कहा कुछ बनाइए बढ़िया. अलग टाइप का.

अमित त्रिवेदी और शिल्पा राव.
अमित त्रिवेदी और शिल्पा राव.

कुछ टाइम बाद अनुराग से मिले तो सात गाने तैयार थे. लेकिन तब तक किसी वजह से वो फिल्म ही रुक गई. अनुराग को इनके बनाए गाने पसंद आए थे. इसलिए अपने एक दोस्त, जो कि फिल्म बनाने जा रहे थे, उनको अमित से म्यूज़िक करवाने का सलाह दी. वो दोस्त थे राजकुमार गुप्ता. राजकुमार ने अनुराग को फिल्म ‘नो स्मोकिंग’ में असिस्ट किया था. वो नई फिल्म बनाने जा रहे थे ‘आमिर’. इसके लिए अमित ने म्यूज़िक किया. इस फिल्म के म्यूज़िक को बहुत लोगों ने तो नहीं सुना, लेकिन जितनों ने सुना पसंद किया. क्रिटिक्स को भी फिल्म का म्यूज़िक अच्छा लगा. और इस तरह से अमित त्रिवेदी बॉलीवुड में अमित की रेलगाड़ी चल निकली.

फिल्म 'आमिर' का पोस्टर और उसके डायरेक्टर राजकुमार गुप्ता.
फिल्म ‘आमिर’ का पोस्टर और उसके डायरेक्टर राजकुमार गुप्ता.

# सिंगर को जबरन लिरिसिस्ट बना दिया

अमित अपने कॉलेज के दिनों में ओम नाम के एक बैंड का हिस्सा था. वो वहां म्यूज़िक अरेंजर थे. इसी बैंड में अमिताभ भट्टाचार्य भी थे. वो इसके गाने लिखते थे. अमिताभ से अमित की जान-पहचान पुरानी थी. अमित अनुराग कश्यप की फिल्म पर काम कर रहे थे. उन्हें एक लिरिसिस्ट की जरूरत थी, जो उनके लिए गाने लिख सके. बैंड के गाने अमित ने सुन रखे थे और उन्हें पता था कि अमिताभ अच्छा लिखते हैं. अमित ने अमिताभ को बुलाया और कहा कि उन्हें अनुराग कश्यप की फिल्म में काम मिल गया है और उन्हें कुछ गाने बनाने हैं. आप गाना लिख दीजिए. लेकिन अमिताभ के साथ एक दिक्कत थी. अमिताभ मुंबई सिंगर बनने आए थे और गाना चाहते थे. बतौर सिंगर काम की कमी की वजह से गाने लिखते थे. लेकिन कभी भी क्रेडिट में अपना नाम नहीं लिखवाते थे. उन्हें डर था कि लोग उन्हें राइटर मानने के बाद बतौर सिंगर सीरियसली नहीं लेंगे. उन्होंने अमित से कहा – ‘तू मुझे फंसा रहा है.’ लेकिन गाने लिख दिए. ‘देव डी’ 2009 में रिलीज़ हुई और उसके गाने बहुत पसंद किए गए. फिल्म में टोटल 15 गाने थे और सारे अलग-अलग मिजाज़ के. उस एल्बम के लिए अमित त्रिवेदी को बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला.

फिल्म 'देव डी' का पोस्टर और फिल्म के म्यूज़िक डायरेक्टर अमित त्रिवेदी.
फिल्म ‘देव डी’ का पोस्टर और फिल्म के म्यूज़िक डायरेक्टर अमित त्रिवेदी.

# ‘इमोशनल अत्याचार’ से पहले ही अनुराग कश्यप को इम्प्रेस कर चुके थे

अमित को सबसे ज़्यादा याद किया जाता है उनके गाने ‘इमोशनल अत्याचार’ (देव डी) के लिए. इस गाने के बारे में फिल्म के डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वो अमित से पहली मुलाकात के आठ महीने बाद मिले, तो उनके पास फिल्म के लिए सात गाने तैयार थे. शायद यही वजह रही कि ‘देव डी’ म्यूज़िकल फिल्म बन गई. अमित के लिखे गाने को अपनी फिल्म में फिट करने के लिए अनुराग को कई बार अपनी स्क्रिप्ट में बदलाव करने पड़े. अनुराग को सबसे ज़्यादा पसंद आया था गाना ‘परदेसी’. इस गाने की एक लाइन पर वो अटक गए. वो लाइन थी ‘इब के होवेगा रे अग्गे यार’. जब अनुराग ने ये पहली बार सुना तो उन्हें ‘अग्गे यार’, ‘अत्याचार’ लगा. उन्हें ये बहुत पसंद आ गया. लेकिन दूसरी बार सुनने पर सब कुछ क्लीयर हो गया. इस बात से वो बहुत निराश हो गए. तय किया कि अमित से कह कर इसे ‘अत्याचार’ करवाएंगे. ठीक इसी समय उनके दिमाग में फिल्म ‘ओम दरबदर’ का एक गाना कौंधा. वहां से एक शब्द निकलकर आया ‘इमोशनल’. ‘अत्याचार’ तो पहले से ही था. वो इसी लाइन पर एक गाना चाहते थे.

अमित त्रिवेदी (बाएं) और अमिताभ भट्टाचार्य.
अमित त्रिवेदी (बाएं) और अमिताभ भट्टाचार्य.

इस बारे में उन्होंने अमित त्रिवेदी से बात की. लेकिन अमित अभी कंफ्यूज़ थे. इसके बाद अनुराग ने उन्हें ‘ओम दरबदर’ का वो गाना दिखाया. अब अमित समझ गए थे कि अनुराग क्या चाहते हैं. वो सीधे अमिताभ भट्टाचार्य के पास गए और बात की. इसके बाद एक रफ गाना रिकॉर्ड किया गया. इसे अनुराग को सुनाया गया और उन्हें बहुत पसंद आया. इसके बाद बात होने लगी कि गाना गवाया किससे जाए. इस बात से अनुराग गुस्सा हो गए. उन्होंने कहा कि इसमें क्या दिक्कत है. अमित ने बताया कि ये तो ऐसे ही ट्रायल के लिए रिकॉर्ड किया गया था. अनुराग ने कहा लेकिन फिल्म में तो यही जाएगा. लेकिन जब गाना रिलीज़ हुआ तो गायकों के नाम बैंड मास्टर रंगीला और रसीला बताया गया. अमिताभ की दिक्कत की वजह से. जिस गाने के बारे में  इतनी बात हो रही है, वो गाना देखना तो बनता है. तो देखिए:


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