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इस आदमी पर से भरोसा उसी दिन उठ गया था, जब इसने सनी देओल का जीजा बनकर उन्हें धोखा दिया था

एक पुलिस ऑफिसर था. बहुत भला लगता था. सूट-बूट में देखो तो शराफत चेहरे से टप-टप टपकती थी. शराफत का इससे बड़ा सबूत क्या होता कि फिल्म के हीरो ने अपनी बहन की उससे शादी करा दी थी. लेकिन वो वैसा बिलकुल नहीं था, जैसा दिखता था. जिस हीरो ने उसपर इतना भरोसा किया, उसी के साथ उसने तगड़ा वाला विश्वासघात किया था. गुंडों के साथ मिलकर उसी के भाई को मरवा दिया. उस दिन से उस आदमी से ऐसा विश्वास उठा कि दोबारा कभी नहीं हुआ. अब तक आपको समझ आ ही गया होगा कि हम ‘जिद्दी’ फिल्म की बात कर रहे हैं. सनी देओल स्टारर ये फिल्म 1997 में रिलीज़ हुई थी. और जिस आदमी की बात हो रही है, उसका नाम है आशीष विद्यार्थी.

“नो आशीष, नो…” 

19 जून, 1962 को आशीष का जन्म दिल्ली में हुआ था. मलयाली पिता और बंगाली मां की कोख से. मां रेबा विद्यार्थी मशहूर कत्थक डांसर थी और पिता गोविंद विद्यार्थी केरल के जाने-माने थिएटर आर्टिस्ट थे. आशीष को कला विरासत में मिली थी. बचपन में बड़े शैतान हुआ करते थे, इसलिए मम्मी बहुत कड़ाई से रखती थीं. कुछ भी करने जाते मां कहतीं- ‘नो आशीष’. मजाक-मजाक में बताते हैं, उन्हें ऐसा लगने लगा कि उनका नाम आशीष नहीं ‘नो आशीष’ है. सिनेमा से पहले थिएटर में काफी काम किया, आज भी करते हैं. इनका एक बहुत मशहूर नाटक है ‘दयाशंकर की डायरी’. बंबई फिल्म इंडस्ट्री में काम की तलाश में गए एक आदमी की कहानी. इस नाटक में फिल्मों में काम नहीं मिलने के बाद किसी व्यक्ति की मेंटल कंडीशन कैसी हो जाती है, वो दिखाया गया है.

इस नाटक में फिल्मों में काम नहीं मिलने के बाद किसी व्यक्ति की मेंटल कंडीशन कैसी हो जाती है, वो दिखाया गया है.
इस नाटक में फिल्मों में काम नहीं मिलने के बाद किसी व्यक्ति की मेंटल कंडीशन कैसी हो जाती है, वो दिखाया गया है.

फिल्मी करियर शुरू हुआ 1986 में. कन्नड़ फिल्म ‘आनंद’ से. करियर के शुरुआती दौर (छठी फिल्म) में ही नेशनल अवॉर्ड मिल गया. फिल्म थी गोविंद निहलानी डायरेक्टेड ‘द्रोहकाल’ (1994). तब से लेकर अब तक 12 भाषाओं की 200 से ज़्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं. अधिकतर फिल्मों में इनका किरदार निगेटिव ही रहा है. इनके सरनेम को लेकर कई बार सवाल किए जाते रहें, लेकिन इसके पीछे का किस्सा बहुत इंस्पायरिंग है.

1.) कैसे मिला सरनेम?

अपने एक इंटरव्यू में आशीष ने बताया कि उनके पापा का नाम गोविंद विद्यार्थी है और वो एक थिएटर पर्सनालिटी हैं. उनके जीवन का एक ही मंत्र है कि हमेशा सीखते रहो. इसलिए उन्होंने अपने नाम के आगे विद्यार्थी सरनेम लगा लिया. और पापा वाला सरनेम बेटे को भी मिला. इस सरनेम वाली बला के पीछे एक और किस्सा है. वो किस्सा ये है कि आशीष के पापा अपनी जवानी के दिनों में स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, कांग्रेस नेता और असहयोग आंदोलन में इंपॉर्टेंट रोल प्ले करने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी के बहुत बड़े फैन थे. इसलिए उनके जैसा बनने की इच्छा लिए उनका सरनेम इस्तेमाल करने लगे.

गणेश को हिन्दी अखबार 'प्रताप' के संपादक के तौर पर भी जाना जाता है.
गणेश को हिन्दी अखबार ‘प्रताप’ के संपादक के तौर पर भी जाना जाता है.

2.) जब सिगरेट पी और जीवन में पहली बार किसी ने टोका नहीं 

आशीष का बचपन बहुत स्ट्रिक्ट पैरेंट्स के साथ गुज़रा है. लेकिन जैसे ही उनकी कॉलेज लाइफ शुरू हुई, वो थोड़े फ्री हो गए. आशीष बताते हैं कि अपने कॉलेज के पहले दिन उन्हें सड़क पर एक सिगरेट की दुकान दिखी. उनके अंदर का बागी जाग गया. उन्होंने उस दुकानदार से जाकर पूछा कि क्या वो यहां से सिगरेट ले सकते हैं. दुकानदार ने कहा- हां भाई ले सकते हो. इन्होंने वहां से सिगरेट खरीद ली. पहले कभी पी नहीं थी, इसलिए धुएं से खांसी आने लगी. लेकिन कॉलेज में सिगरेट के साथ ही घुसे. यहा एक बड़ी कमाल की बात हुई, उन्हें किसी ने नहीं कहा- ‘नो आशीष’. आशीष ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से हिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया है.

कॉलेज के दिनों में आशीष.
कॉलेज के दिनों में आशीष.

3.) डायरेक्टर की तारीफ़ ताना क्यों लगी?

आशीष कुछ ही समय में हिंदी फिल्मों में जाने माने नाम बन गए. उनकी भाषा में कहें तो ‘नो आशीष’ से ‘आशीष जी’ बन गए. उस दौर के सभी बड़े स्टार्स के साथ काम कर रहे थे. एक बार वो किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. एक बड़ा ही अजीब सा सीन करने के बाद उन्होंने कुछ टाइम का ब्रेक लिया. इस ब्रेक के दौरान फिल्म का डायरेक्टर उनके पास आया और कहा- ‘तुम कमाल के कॉमर्शियल फिल्म एक्टर हो’. ये बात सुनकर आशीष एकदम दुखी हो गए. वो मुंबई कभी मसाला फिल्म एक्टर बनने नहीं आए थे. इसलिए उन्हें ये बात चुभ गई. इस बात की शिकायत लेकर वो अमरीश पुरी के पास गए. अमरीश पुरी ने कहा कोई बात नहीं आदत हो जाएगी. इसी दिन के बाद हर हफ्ते चेन्नई जाने लगे. वो वहां जाकर लोगों से मिलते और कहते कि अगर उनके पास कोई ढंग का रोल हो तो वो करेंगे.

वहां उन्होंने तीन फिल्में साइन की लेकिन तीन महीने तक उनका कुछ नहीं हुआ. यहां वो ‘आशीष जी’ से ‘वो मुंबई वाला एक्टर’ हो गए. एक दिन उनके पास साउथ इंडिया के मशहूर फिल्ममेकर टी.रामा राव का फोन आया. उन्होंने आशीष से कहा- ‘ये पागल डायरेक्टर तुम्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता है. लेकिन ये तुम्हें पैसे नहीं दे पाएगा.’ आशीष ने फिल्म के लिए हां कर दी. एक हीरो था, जिसका काम ठीक नहीं चल रहा था और डायरेक्टर भी नया था. एक छोटे बजट की फिल्म प्लान हुई और अगले तीन-चार महीनों तक इसकी शूटिंग चली. फिल्म रिलीज़ हुई और ब्लॉकबस्टर साबित हुई. फिल्म का नाम था ‘ढिल’ और ये हीरो थे विक्रम. वही विक्रम साउथ इंडिया में आज जिनके नामभर से फिल्में सुपरहिट हो जाती हैं. यहां से आशीष का तमिल फिल्म करियर शुरू हो गया.

इसी फिल्म से आशीष का तमिल फिल्म करियर शुरू हो गया.
इसी फिल्म से आशीष का तमिल फिल्म करियर शुरू हो गया.

4.) कितनी बार मरे हैं हीरो के हाथों?

आशीष ने बहुत सारी फिल्मों में निगेटिव रोल किया है. और विलेन को तो हर फिल्म में हीरो के हाथों मरना ही पड़ता है. इस चक्कर में आशीष परदे पर तकरीबन 182 बार मर चुके हैं. हर फिल्म में थोड़े नए तरह का विलेन रोल करवाने वाले डायरेक्टर उन्हें मारने को लेकर बहुत परेशान रहते थे. शूटिंग के दौरान वो हमेशा आशीष को मारने के नए तरीके सोचते रहते थे. हालांकि आशीष का इस बारे में मानना है कि निगेटिव रोल से उन्हें जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिला.

बीच में ऐसी खबरें भी उड़ी थीं कि आंख मारने वाली लड़की प्रिया प्रकाश वरियर के पिता आशीष हैं लेकेिन ये गलत खबर थी.
बीच में ऐसी खबरें भी उड़ी थीं कि आंख मारने वाली प्रिया प्रकाश वरियर के पिता आशीष हैं. लेकेिन ये खबर महज़ एक अफवाह थी.

5.) जब एक्टिंग की धुन में मरते-मरते बचे 

फिल्म में अपने रोल को ऑथेंटिक बनाने के लिए आशीष किसी भी सीमा तक चले जाते हैं. वो छत्तीसगढ़ में महमरा एनीकट नाम की एक जगह पर फिल्म ‘बॉलीवुड डायरी’ की शूटिंग कर रहे थे. उस सीन के लिए उन्हें पानी में उतरना था. एक्टिंग की धुन में वो कुछ ज़्यादा ही गहरे पानी में चले गए. फिल्म की कास्ट-क्रू को लगा तगड़े एक्टर हैं, परफॉर्म कर रहे हैं. लेकिन आशीष तो बेचारे सच में पानी में डूब रहे थे. उनके साथ एक और एक्टर था. वो तो भला वो उस पुलिसवाले का जो उस समय वहीं ड्यूटी कर रहा था. उसने बिना कुछ कहे पानी में छलांग लगा दी और आशीष और दूसरे एक्टर को बचाकर बाहर निकाला. बाद में पूरी टीम ने उस पुलिसवाले का थैंक यू कहा और आगे की शूटिंग शुरू हुई.


विडियो- इस शख्स ने सनी देओल का जीजा बनकर उन्हें धोखा दिया था!

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