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रफाल तो अब आया, इससे पहले भारत किन-किन फाइटर प्लेन से दुश्मनों का दिल दहलाता था

यह छोटा-मोटा, चुन्नू-मुन्नू एयरफोर्स नहीं है. जितना भी स्ट्रेंथ है अभी, काफी है. लेकिन इससे ज्यादा बढ़नी चाहिए.

यह बयान 11 साल पहले यानी साल 2009 का है. एयरफोर्स में फाइटर जेट की कमी के सवाल पर तत्कालीन एयर चीफ मार्शल पीवी नाइक ने यह जवाब दिया था. तब फ्रांस से रफाल विमान खरीदने की बातें चल रही थी. अब रफाल भारत आ चुका है. पांच रफाल फाइटर जेट 29 जुलाई को भारत आ गए. 27 जुलाई को इन्होंने फ्रांस से उड़ान भरी थी. रफाल को फ्रांसिसी कंपनी दसौ बनाती है.

रफाल की गिनती दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट में होती है.
रफाल की गिनती दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट में होती है.

भारत ने साल 2016 में फ्रांस से 58 हजार करोड़ रुपये में 36 रफाल लड़ाकू विमान का सौदा किया है. अभी जो पांच रफाल आए हैं, उनमें से तीन सिंगल सीटर और दो डबल सीटर हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि रफाल से भारतीय वायुसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा. लेकिन रफाल से पहले इंडियन एयरफोर्स के पास कौन-से लड़ाकू विमान थे? आइए जानते हैं-

मिराज 2000

मिराज 2000 फाइटर जेट भी रफाल वाली कंपनी ही बनाती है.
मिराज 2000 फाइटर जेट भी रफाल वाली कंपनी ही बनाती है.

कौन बनाता है

दसौ एविएशन. यही कंपनी रफाल फाइटर जेट भी बनाती है. मिराज 2000 को भारतीय वायुसेना में ‘वज्र’ भी कहा जाता है.

कीमत

एक मिराज 2000 लड़ाकू विमान की कीमत करीब 230 करोड़ रुपये के आसपास है.

खासियत

इसकी अधिकतम स्पीड 2495 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यह सिंगल सीटर और सिंगल इंजन विमान है. . यह विमान नौ तरह के अस्त्र ले जा सकता है. इसमें हाई फायरिंग रेंज की दो 30 एमएम बंदूकें लगी हैं. मिराज 2000 में 60 किलोमीटर दूर तक निशाना साधने वाली माइका मिसाइलें काम आती हैं. इससे 1000 किलो तक के लेजर गाइडेड बम गिराए जा सकते हैं. पुराना होने के बाद भी इसका वजन आधुनिक विमानों की तुलना में कम है. इससे युद्ध के मौकों पर मिराज 2000 को एडवांटेज मिलता है.

ट्रिविया

1999 में कारगिल की जंग में भारत की कामयाबी में मिराज 2000 का बड़ा योगदान था. इसके अलावा पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमले के बाद मिराज 2000 से ही बालाकोट एयरस्ट्राइक की गई थी.

कब कमीशन हुआ

भारतीय वायुसेना में यह 1985 में पहली बार शामिल हुआ. पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के जवाब में भारत ने 1982 में 40 मिराज 2000 फाइटर जेट खरीदे थे. साल 2004 में 10 और मिराज 2000 विमान खरीदे गए थे.

जैगुआर

जगुआर विमान.
जगुआर विमान.

कौन बनाता है

इसे SEPECAT  नाम की कंपनी ने बनाया था. ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स और फ्रांस की एयरफोर्स के लिए. बाद में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसे बनाने का लाइसेंस ले लिया. इसे ‘शमशेर’ नाम से भी जाना जाता है.

कीमत

साल 2008 में एक जगुआर विमान की कीमत करीब 60 करोड़ रुपये थी.

खासियत

यह लंबी दूरी तक भारी बम ले जाने में सक्षम है. साथ ही तेज रफ्तार से नीचे भी उड़ान भर सकता है. यह सिंगल सीटर और टि्वन इंजन वाला विमान है. इसकी अधिकतम स्पीड 1350 किलोमीटर प्रतिघंटा है.

ट्रिविया

शुरू में भारत को जो जगुआर विमान मिले थे, वे पहले से ही ब्रिटिश एयरफोर्स में काम आ रहे थे. यह विमान परमाणु बम ले जाने की क्षमता रखता था. इस वजह से अमेरिका ने ब्रिटेन और भारत की डील को रोकने की खूब कोशिश की थी.

कब कमीशन हुआ

साल 1979 में यह इंडियन एयरफोर्स में शामिल हुआ. तब से अब तक इसमें कई बदलाव हुए. वर्तमान में भारत ही इस लड़ाकू विमान का इस्तेमाल करता है. अब इसे रिटायर किया जा रहा है.

मिग 29

मिग 29 विमान.
मिग 29 विमान.

कौन बनाता है

रूस के मिकोयान एविएशन साइंटिफिक इंडस्ट्रियल कॉम्प्लैक्स में इसका निर्माण होता है. इसे वायुसेना में ‘बाज’ भी कहा जाता है.

कीमत

साल 2019 में इस विमान की कीमत 300 करोड़ रुपये के आसपास थी. खबरों के अनुसार, रूस ने साल 2019 में 200 करोड़ में मिग 29 भारत को बेचने का ऑफर दिया था.

खासियत

यह टू इंजन विमान है. यह सिंगल औ ट्विन सीटर – दोनों वेरिएंट में आता है. 2445 किलोमीटर इसकी अधिकतम स्पीड है. बाकी मिग विमानों की तुलना में मिग 29 काफी कामयाब रहा है. यह अभी भी ऑपरेशनल है. इससे एंटी शिप मिसाइल भी छोड़ी जा सकती है. साथ 500-500 किलो के दो बम एक साथ गिराए जा सकते हैं.

ट्रिविया

कारगिल युद्ध में मिग-29 ने बखूबी अपने काम को अंजाम दिया था. इन विमानों ने मिराज-2000 को एस्कॉर्ट यानी पहरा किया था. सुखोई विमानों के बाद यह भारत की दूसरी डिफेंस लाइन है.

कब कमीशन हुआ

इसे 1985 में भारतीय वायुसेना में जगह मिली. यह लड़ाकू विमान अमेरिका के F-15 और F-16 फाइटर जेट के जवाब में तैयार किया गया था. रूस ने मिग 29 को 20 से ज्यादा देशों को बेचा. इसे सबसे पहले और सबसे ज्यादा बार भारत ने ही खरीदा. अभी इंडियन एयरफोर्स अपग्रेडेड मिग 29 इस्तेमाल करती है. भारत के पास अभी मिग 29 की तीन स्कवाड्रन हैं. सरकार ने जुलाई, 2020 की शुरुआत में 21 नए मिग 29 विमान खरीदने का ऑर्डर दिया है.

सुखोई SU-30MKI

सुखोई विमान को तैयार रूस ने किया लेकिन अब यह भारत में ही बनता है.
सुखोई विमान को तैयार रूस ने किया लेकिन अब यह भारत में ही बनता है.

कौन बनाता है

इन विमानों को रूस की सुखोई कंपनी ने तैयार किया. अब इसे भारतीय कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड बनाती है. इसे ‘फ्लैंकर’ (किला) भी कहा जाता है.

कीमत

साल 2014 में इसकी कीमत 358 करोड़ रुपये के पास थी.

खासियत

यह फाइटर जेट हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम है. इसकी अधिकतम स्पीड 2500 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यह टू सीटर और टू इंजन विमान है. इस विमान में ब्रह्मोस मिसाइल भी लगाई गई है, जिससे इसकी मारक क्षमता बढ़ी है.

ट्रिविया

सुखोई SU-30MKI विमान विशेष रूप से भारतीय वायुसेना ही इस्तेमाल करती है. 8 जून 2006 को एपीजे अब्दुल कलाम ने इसी लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी. उस समय उनकी उम्र 74 साल थी और वे देश के राष्ट्रपति थे. इसके साथ ही वे देश के पहले राष्ट्रपति बन गए थे, जिन्होंने लड़ाकू विमान में उड़ान भरी. बता दें कि कलाम एक समय एयरफॉर्स में पायलट ही बनना चाहते थे.

कब कमीशन हुआ

साल 1997 में रूस ने भारत को पहला सुखोई विमान दिया. अभी तक एयरफोर्स में 290 सुखोई विमान इस्तेमाल किए जाने का अनुमान है. सरकार ने जुलाई, 2020 में 12 नए सुखोई 30MKI का ऑर्डर दिया है.

तेजस

तेजस को भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान कहा जाता है.
तेजस को भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान कहा जाता है.

कौन बनाता है

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड.

कीमत
एक तेजस मार्क 1 की कीमत 350 करोड़ रुपये है.

खासियत

इसे भारत का पहला स्वदेशी फाइटर जेट कहा जाता है. वर्तमान में तेजस मिग 21 वाली भूमिका में ही है. अभी इसके दूध के दांत ही हैं, यानी तेजस का लड़ाई में इस्तेमाल नहीं हुआ है.

ट्रिविया

तेजस पर काम इंदिरा गांधी के समय शुरू हुआ था. पहले इसका नाम लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट था. इसे तेजस नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था.

कब कमीशन हुआ

साल 2016 में यह भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ. इसकी पहली स्क्वाड्रन का नाम फ्लाइंग डैगर्स है. यह अभी तमिलनाडु के सुलुर में तैनात है. वायुसेना ने पहले चरण में 40 विमानों का ऑर्डर दिया है.

मिग 21 बाइसन

मिग 21 दुनिया का सबसे मशहूर लड़ाकू विमान है.
मिग 21 दुनिया का सबसे मशहूर लड़ाकू विमान है.

कौन बनाता है

रूस के मिकोयान एविएशन साइंटिफिक इंडस्ट्रियल कॉम्प्लैक्स में इसका निर्माण होता है.

कीमत

साल 1974 में इस विमान की कीमत 14 करोड़ रुपये के करीब थी.

खासियत

यह दुनिया का पहला सुपरसोनिक यानी ध्वनि की गति से तेज उड़ने वाला लड़ाकू विमान है. इसे भारतीय वायुसेना की रीढ़ भी कहा जाता था. यह सिंगल सीटर, सिंगल इंजन विमान है. 2230 किलोमीटर प्रतिघंटा इसकी अधिकतम स्पीड है. यह विमान क्रैश होने के चलते भी काफी बदनाम हुए.

ट्रिविया 

यह दुनिया का सबसे मशहूर लड़ाकू विमान है. पिछले 60 साल में 60 से ज्यादा देशों की सेनाओं में मिग 21 बाइसन शामिल हुआ. 1971 में भारत-पाकिस्तान की जंग में इन लड़ाकू विमानों ने निर्णायक भूमिका निभाई थी. साल 2019 में मिग-21 विमान से ही विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था. भारतीय वायुसेना अब तेजस से मिग-21 को रिप्लेस कर रही है. इसके अलावा कारगिल युद्ध में शहीद हुए स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा यही विमान उड़ा रहे थे.

कब कमीशन हुआ

भारत ने साल 1961 में मिग 21 को पहली बार खरीदा था. 1964 में यह वायुसेना में शामिल हुआ. तब से करीब 250 मिग 21 विमान रूस से खरीदे गए. अब यह विमान केवल निगरानी के लिए काम में लिए जाते हैं.

मिग 27

रूस से खरीदा गया मिग 27 रिटायर हो चुका है.
रूस से खरीदा गया मिग 27 रिटायर हो चुका है.

कौन बनाता है

इसे भी रूस के मिकोयान एविएशन साइंटिफिक इंडस्ट्रियल कॉम्प्लैक्स में बनाया जाता है. बाद में हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड ने भी लाइसेंस लेकर इस विमान को बनाना शुरू कर दिया. इसे ‘बहादुर’ भी कहा जाता था.

कीमत

इन विमानों की कीमत 16 करोड़ रुपये के आसपास बताई जाती है.

खासियत

यह सिंगल इंजन, सिंगल सीटर विमान है. 1700 किलोमीटर प्रतिघंटा इसकी अधिकतम स्पीड है. इस लड़ाकी विमान से हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला किया जा सकता था. इससे 500 किलो तक के बम गिराए जा सकते थे. यह लेजर गाइडेड बम भी गिरा सकता था.

ट्रिविया

कारगिल की जंग में मिग 27 ने दुश्मन के ठिकानों पर काफी सटीकता से रॉकेट और बम गिराए थे. इस जंग से मिग 27 ने काफी नाम कमाया था.

कब कमीशन हुआ

इन विमानों को 1980 के आसपास भारत ने रूस से खरीदा था. अब इन विमानों को रिटायर किया जा चुका है.

भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना कहा जाता है.
भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना कहा जाता है.

अब कुछ बातें जीके वाली-

# इंडियन एयरफॉर्स की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी. तब इसका नाम रॉयल इंडियन एयरफॉर्स हुआ करता था. उस समय यह ब्रिटेन की रॉयल ब्रिटिश एयरफॉर्स का हिस्सा हुआ करती थी. 1947 में आजादी के बाद भारतीय वायुसेना को अलग पहचान मिली. साल 1950 में नाम से रॉयल की छुट्टी कर दी गई. रह गया- इंडियन एयर फॉर्स.

# वापिती IIA भारतीय एयरफॉर्स का पहला विमान था. इसे ब्रिटिश कंपनी वेस्टलैंड बनाती थी. ब्रिटिश एयरफॉर्स में भी यही थे तो भारत को भी यही मिले.

# एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी भारतीय वायुसेना के पहले भारतीय चीफ थे. उनसे पहले तीन चीफ रह चुके थे लेकिन वे सभी ब्रिटिश थे.

# फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों पहले और इकलौते एयरफॉर्स ऑफिसर हैं, जिन्हें परमवीर चक्र मिला है. 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग में वीरता के लिए सेखों को मरणोपरांत यह सम्मान मिला. परमवीर चक्र भारत में सबसे बड़ा वीरता सम्मान है.

# एयर मार्शल पद्मावती बंदोपाध्याय पहली महिला हैं जो वायुसेना में थ्री स्टार रैंक तक पहुंचीं. इससे ठीक ऊपर ही एयर चीफ मार्शल का पद होता है, जो वायुसेना प्रमुख भी कहलाता है. भारतीय सशस्त्र सेना में भी थ्री स्टार रैंक तक पहुंचने वाली वह दूसरी ही महिला हैं. साल 2004 में वह इस पद पर पहुंची थीं. उनसे पहले लेफ्टिनेंट जनरल पुनीता अरोड़ा को यह प्रमोशन मिला था. अरोड़ा को थलसेना और नौसेना दोनों में थ्री स्टार रैंक मिली है.

# इंडियन एयरफॉर्स का मोटो है- नभ:स्पृशं दीप्तम्. यह गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है. इसका मतलब है आकाश को स्पर्श करने वाली प्रकाशमान.

बॉर्डर के जैकी श्रॉफ मिशन पूरा करने के बाद. ह फिल्म 1971 में लोंगेवाला की लड़ाई पर बनी बनी है. पता है इस लड़ाई में एयरफॉर्स ने कौनसा फाइटर जेट इस्तेमाल किए थे? उत्तर- HAL मारुत और हॉकर हंटर.
बॉर्डर के जैकी श्रॉफ मिशन पूरा करने के बाद. यह फिल्म 1971 में लोंगेवाला की लड़ाई पर बनी है. पता है इस लड़ाई में एयरफॉर्स ने कौनसा फाइटर जेट इस्तेमाल किए थे? उत्तर- HAL मारुत और हॉकर हंटर.

Video: ‘एयर बबल’ के तहत विदेश यात्रा के नए नियम क्या हैं?

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