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इंडिया-ऑस्ट्रेलिया के मैच में खिलाड़ी कट्टे लेकर उतरेंगे क्या?

साल 1962. अगर सटीक दिन जानना है तो इसी साल के तीसरे महीने के सोलहवें दिन का वाकया है. बारबेडस में एक टेस्ट मैच खेला जा रहा था. भारतीय कप्तान ने सीरीज़ के पहले दो मैचों यानी 4 इनिंग्स में मात्र 26 रन बनाए थे. इंडिया ने दोनों ही टेस्ट मैच बहुत ही भारी अंतर से गंवाए थे. अगला मैच बारबेडस से एक टूर मैच था जिसमें भारतीय कप्तान आराम करने वाले थे. जब सभी को मालूम पड़ा कि सामने वाली टीम में चार्ली ग्रिफ़िथ नाम का एक विध्वंसक बॉलर खेलने वाला है तो अचानक ही कई प्लेयर्स ने खुद को ‘अनफ़िट’ घोषित कर दिया. कप्तान नारी कांट्रेक्टर को खेलने उतरना पड़ा. चार्ली ने अपनी ग्यारहवीं गेंद पर नारी कांट्रेक्टर को नीचे गिरा दिया. एक तेज़, पटकी गई गेंद जाकर कांट्रेक्टर के सर पर लग गई थी. नारी कांट्रेक्टर की नाक और कान से खून निकल रहा था. वो सीधे खड़े नहीं हो पा रहे थे. उन्हें तुरंत अस्पताल रवाना किया गया.

मैदान पर मैच चालू था. वहां ग्रिफ़िथ का अगला शिकार विजय मांजरेकर बने जिन्हें नाक पर गेंद लगी और वो भी रिटायर्ड हर्ट आउट हुए. अस्पताल में कांट्रेक्टर की हालत खराब होती जा रही थी. वहां लोगों को समझ में आया कि अंदरूनी चोट काफ़ी गड़बड़ी वाली है. वो लगातार उल्टियां कर रहे थे और उनके शरीर का एक हिस्सा बार बार काम करना बंद कर रहा था. आनन-फानन में सर्जरी की तैयारियां की गईं. वहां मौजूद डॉक्टर कोई स्पेशलिस्ट नहीं था लेकिन उसने अपनी पूरी बुद्धि लगाकर इतना ज़रूर किया कि कांट्रेक्टर को कुछ राहत मिल सके. सर्जरी के दौरान काफ़ी खून बहा. चंदू बोर्डे, बापू नादकर्णी और पॉली उमरीगार के अलावा वेस्ट इंडीज़ के कप्तान वॉरेल ने भी कांट्रेक्टर को खून दिया. वॉरेल के इस कदम को बहुत सराहा गया.

शाम को ग्रिफ़िथ खुद अस्पताल पहुंचे लेकिन वो नारी कांट्रेक्टर से नहीं मिल पाए. उन्हें होश नहीं आया था. नारी की पत्नी को इंडिया से बुला लिया गया था. ये साफ़ हो चुका था कि भारत को किसी और की ही कप्तानी में बाकी सीरीज़ खेलनी होगी. 21 साल के टाइगर पटौदी जो खुद एक आंख से देख सकते थे, इंडिया के नए कप्तान बन चुके थे. नारी को पूरी तरह से 6 दिनों बाद होश आया. इसके बाद कुछ दिनों तक वो अस्पताल में ही रहे जहां उनकी पत्नी पूरे वक़्त उनके साथ मौजूद थीं. अपने देश वापस जाने लायक हो जाने पर जब उन्होंने पैकिंग शुरू की तो चार्ली ग्रिफ़िथ नारी से मिलने अस्पताल आये. वो कमरे में दाख़िल हुए तो एक अजीब सन्नाटा छा गया. कांट्रेक्टर की पत्नी काफ़ी असहज महसूस कर रही थीं. वो असल में चार्ली का चेहरा भी नहीं देखना चाहती थीं. लेकिन नारी ने अपनी पत्नी से कहा, “चार्ली को कोसने की कोई ज़रुरत नहीं है. असल में गलती मेरी ही थी.”

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इंडिया और ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज़ शुरू होने को है. टी-20 में बारिश ने टांग दे दी और सीरीज़ टाई रही. हा र्कोई इस बात से इत्तेफ़ाक रखेगा कि ये सीरीज़ एक अच्छी सीरीज़ होगी और कुछ ही महीने में ऑस्ट्रेलिया में खेले जाने वाले वर्ल्ड कप से पहले ये दोनों ही मज़बूत टीमें अपना-अपन झंडा गाड़ने को आतुर होंगी. इस लिहाज़ से ये और भी मज़ेदार सीरीज़ बन पड़ी है. ऐसे में ये भी साफ़ है कि टीवी को भी एक बहुत बड़ी व्यूवरशिप मिलेगी. लगभग ढाई महीने पूरे देश में कितने ही टीवी सेट्स पर एक समय एक ही चैनल देखा जा रहा होगा. किसी भी चैनल के लिए ये एकदम कार्निवल वाला टाइम होता है. इन्हीं मौकों के लिए कितने ही हज़ारों करोड़ की बोली लगाई जाती है और राइट्स ख़रीदे जाते हैं. और फिर मौका आने पर विज्ञापनों के ज़रिये क्रिकेट का उपभोग करने वालों को आमंत्रित भी किया जाता है. इस पूरी बात का मुद्दा वो आमंत्रण ही है जिसके लिए इतनी बड़ी भूमिका बनानी पड़ी और 1962 की उस सीरीज़ का ज़िक्र किया जिसके दौरान एक भरा-पूरा क्रिकेट करियर एक झटके में ख़त्म हो गया.

सोनी नेटवर्क ने एक हैशटैग के साथ इंडिया ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ का प्रोमो बनाया. हैशटैग है – छोड़ना मत. इस प्रोमो में जिन शब्दों का इस्तेमाल हुआ है उनकी लिस्ट देखते हैं – बवाल, गोंडोगोल, भाई सीन हो गया, भसड़, रांणा. ये सब कुछ क्रिकेट की एक सीरीज़ को परिभाषित करते हुए कहा गया है. सीरीज़ का नाम है इंडिया वर्सेज़ ऑस्ट्रेलिया. और अंत में आवाज़ आती है – छोड़ना मत!

ये क्या है? ये खेल है? लगता तो कतई नहीं. ऐसा मालूम देता है कि इस सीरीज़ में प्लेयर्स हाथ में कट्टे लेकर उतरेंगे. मैदान में उतरेंगे 13 खिलाड़ी और अपने पैरों पर वापस चलते हुए इक्के-दुक्के ही जाएंगे. एक प्रोमो ने खेल को जंगलीपन का मेन कोर्स बना दिया है. एक बेहद शानदार खिलाडी ने कुछ 22-23 साल के अनुभव के बाद कहा था कि जब आप पर पत्थर फ़ेंके जाएं तो ये आप का काम है कि उन्हें मील के पत्थरों में बदल के रख दें. टीवी चैनल ने क्रिकेट के खेल को पत्थरबाज़ी का खेल ही बना कर रख दिया.

एक प्रोमो ये भी था. चैनल नाइन का. यानी ऑस्ट्रेलिया में बना है.

सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ की बल्लेबाज़ी की तारीफ़ की है. गावस्कर को शक्तिशाली बताया है. शायद इसलिए बता सके क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में कोई अमिताभ बच्चन नहीं पैदा हुआ और उसके ट्वीट को रीट्वीट करने वाला पूर्व भारतीय कप्तान भी नहीं. खैर, 80 के दशक में ट्विटर भी नहीं ही था. विशी के 5 फ़ुट 4 इंच कद के बारे में बात करते हुए कहा गया कि जब वो क्रीज़ पर खड़े होते हैं तो दैत्य की माफ़िक बैटिंग करते हैं. कपिल देव, वेंगसरकर और किरमानी का नाम लेने के बाद ये भी कहा जाता है कि बाकी खिलाड़ियों का नाम लेना उनके लिए पॉसिबल नहीं है और इसी के साथ इंडियन टीम का स्कोरबोर्ड दिखा दिया जाता है जहां सारी टीम ‘टंगी’ मिलती है. मेज़बानी यही होता है, शायद.

प्रोमो का अंत होता है – “कम ऑन ऑज़ीज़, कम ऑन! कम ऑन!” कुछ 35 सालों में टीवी के स्मार्ट होने और हैशटैग के जन्म लेने के बाद ये ‘छोड़ना मत’ में बदल चुका है.

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