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हिंदुस्तान यूनिलिवर ने कुंभ पर ट्वीट किया और होने लगी बायकॉट की मांग

भोरे भोरे लोग सूरज बाबा को नमस्ते करते हैं और फिर ट्विटर देखते हैं. 7 मार्च को ट्विटर पर कुछ नया दिखा. #BoycottHindustanUnilever टॉप पर ट्रेंड कर रहा है. दो चार साल पहले इस ट्रेंड वेंड को सीरियसली नहीं लिया जाता था लेकिन अब हालात बदल गए हैं. अब लोग ट्विटर पर ट्विटर को ही बायकॉट कर देते हैं तो हमारी आपकी क्या औकात. फिलहाल हिंदुस्तान यूनिलिवर को बायकॉट किया जा रहा है. पतंजलि ब्रांड के मालिक रामदेव से लेकर तमाम जनता तक इस कंपनी को बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं. रामदेव ने तो यहां तक लिख दिया कि ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर हिंदुस्तान लीवर तक सबका एक ही मकसद है. रामदेव वैसे भी स्वदेशी के अघोषित ब्रांड अंबेसडर हैं इसलिए उनकी बात सीरियसली सुननी चाहिए.

गलती हिंदुस्तान यूनिलिवर के ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट दिख रहा है. ये ऐड है रेडलेबल चाय का. इसमें संदेश लिखा है कि आओ उनका हाथ पकड़ें, जिन्होंने हमें वो बनाया जो हम अब हैं. यानी मम्मी पापा को.

अब कहोगे इसमें क्या गलती है. तो भैया गलती पर इन्होंने इरेजर चला दिया है. वो ट्वीट डिलीट कर दिया है जिस पर बवाल चल रहा है. लेकिन कहते हैं कि जबान से निकली बात, कमान से निकला तीर और कीपैड से निकला ट्वीट कभी लौटकर नहीं आते. लौटकर आते हैं तो ट्वीट के स्क्रीनशॉट. उन्हीं स्क्रीनशॉट्स से पता चला कि कितनी बकवास बात लिखी गई थी. ट्वीट में लिखा था कि ‘कुंभ मेला वो जगह है जहां लोग बुजुर्ग छोड़ दिए जाते हैं. क्या ये बुरा नहीं है कि हम बुजुर्गों का खयाल नहीं रखते?’ फिर आगे वही लाइन कि आओ हाथ बढ़ाएं.

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हिंदुस्तान यूनिलिवर कौन

ये कोई छोटी मोटी कंपनी नहीं है. मुंबई में इसका ऑफिस है. ब्रिटिश और डच कंपनी यूनिलिवर इसकी पैरेंट कंपनी है. यूनिलिवर 1933 में लिवर ब्रदर्स ने बनाई थी. 1956 में यहां हिंदुस्तान वनस्पति कंपनी से गठबंधन हो गया तो बन गई हिंदुस्तान यूनिलिवर. खाने से लेकर सफाई तक, पर्सनल यूज की चीजों से लेकर मेकप का सामान तक सब बनाती है. ब्रू की कॉफी, रिन या सर्फ एक्सेल का साबुन, ब्रुक बॉन्ड या लिप्टन की चाय, लाइफबॉय, पियर्स, लक्स या डव का साबुन, क्लीनिक प्लस या संसिल्क का शैंपू, पेप्सोडेंट या क्लोजप का टूथपेस्ट सब कुछ इसी कंपनी का है.

गलत बात, बहुत गलत बात

हिंदुस्तान यूनिलिवर वालों ने शायद कही सुनी बातें ज्यादा सीरियसली ले लीं. कुंभ में लोग बहुत कुछ करने जाते हैं. नहाने, पाप धोने, घूमने, एडवेंचर करने, करोड़ों लोगों को एक जगह इकट्ठा होते देखने, फोटोग्राफी करने, नागा साधुओं को देखने, तमाम तरह के अखाड़ों को समझने. वहां अपने मां बाप को गुम करने कौन जाता है यार. ऐसा दो चार लोगों ने किया भी हो तो उनकी चिरकुटई को आप पूरे कुंभ से थोड़ी जोड़ दोगे. अगर इतना जनरलाइज करके देखोगे तो भैया यही होगा. और फायदा किसका होगा, ये भी बताने की जरूरत है क्या?

हिंदुस्तान यूनिलिवर पहला नहीं है जिसका बायकॉट हो रहा है. इससे पहले बहुत सारे ब्रांड्स, शोज और लोग बायकॉट किए जा चुके हैं. बायकॉट कपिल शर्मा शो, बायकॉट सिद्धू से लेकर अनइंस्टाल स्नैपडील तक लंबी लिस्ट है. और मानो या न मानो, इससे कारोबार पर फर्क पड़ता है.


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