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उस गुजराती फिल्म का ट्रेलर जिसकी 13 एक्ट्रेस नेशनल अवॉर्ड्स में जीती हैं

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फिल्म ‘हेल्लारो’ का ट्रेलर आ चुका है. ये गुजराती भाषा में बनी फिल्म है, जो गुजरात के कच्छ जिले पर बेस्ड है. ये फिल्म कई मुद्दों पर बात करती है. मसलन पर्यावरण असुंतलन, महिलाओं और पुरुषों के लिए असमान सामाजिक ढांचा और नारी सशक्तिकरण. फिल्म का ट्रेलर 2 मिनट 38 सेकेंड का है, जो मंदिरों में पूजी जाने वाली देवियों से लेकर घरों में मौजूद आम औरतों तक की स्थिति साफ कर देता है. ट्रेलर में और भी बहुत कुछ खास है. उसके बारे में जानते हैं.

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# नेशनल अवॉर्ड विनर

‘हेल्लारो’ फिल्म रिलीज से पहले ही तारीफें और अवॉर्ड बटोर चुकी है. 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘हेल्लारो’ को बेस्ट फीचर फिल्म घोषित किया गया. इसके अलावा फिल्म को स्पेशल जूरी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया. जिसे फिल्म में काम करने वाली 13 एक्ट्रेसेस ने शेयर किया है.

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# कहानी क्या लग रही है?

कहानी 1975 की है. कच्छ में लगातार तीसरे साल बारिश नहीं हुई है. पानी की दिक्कत है. लेकिन समस्या सिर्फ इतनी सी नहीं. उससे बड़ी दिक्कत है उन्मुक्त हवा की. जहां गांव की महिलाएं खुलकर सांस ले सकें. इस गांव में सिर्फ पुरुष ही गरबा कर सकते हैं. महिलाओं को इसकी इजाजत नहीं है. लेकिन एक दिन ये सब बदल जाता है. जब गांव की औरतों को एक शख्स बेहोश मिलता है. वो ढोल वाला होता है. ये औरतें उस ढोल वाले को पानी पिलाती हैं और उसे ढोल बजाने को कहती हैं. जिसकी थाप पर महिलाएं गरबा करने लगती हैं. फिर धीरे-धीरे ये रोज का क्रम बन जाता है. ये औरतें मीलों दूर पानी भरने जाती है. रास्ते में रुकती हैं. उस ढोल वाले को घर से लाया खाना-पानी देती हैं. और ढोल बजवाकर खूब नाचती हैं. लेकिन ये सब ज्यादा दिन तक नहीं चलता और उन्हें गांव के लोग नाचते हुए देख लेते हैं. पूरा गांव इनके विरोध में खड़ा हो जाता है. लेकिन ये औरतें गुलामी में रहने की बजाय आजाद होकर मरने का विकल्प चुनती हैं. ये फिल्म समाज में मर्दों के बनाए नियमों के खिलाफ महिलाओं की लड़ाई को दिखाती है.

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# ट्रेलर की खास बातें

1. डायलॉग्स बढ़िया हैं. जैसे कि एक औरत कहती है, ‘मेरा वश चले तो मैं गरबा के लिए अपना महल भी छोड़ सकती हूं. लेकिन अफसोस कि मेरे पास कोई महल नहीं है.’ या नाचते हुए पकड़े जाने के बाद औरतें कहती हैं कि ‘गरबा करते हुए कुछ पलों के लिए हम जिंदा महसूस करती हैं, मारे जाने के खौफ से अब हम जीना नहीं छोड़ सकतीं.’ या फिर वो डायलॉग जिसमें एक औरत कहती है, ‘खेल भी मर्दों का है और नियम भी. अब हमें इस खेल का हिस्सा बनने की कोई जरूरत नहीं.’

2. ट्रेलर देखते हुए आप कच्छ के उस गांव तक पहुंच जाते हैं. मतलब पहनावा और गांव का सेट एकदम असली लगता है.

3. एक ही फ्रेम में देवी को पूजते गांव के मर्द और उन मर्दों को गरबा करते हुए खिड़की से देखती गांव की एक महिला. ये एक सीन पूरे ट्रेलर के लिए बेस सेट कर देता है.

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# किसने बनाई है

‘हेल्लारो’ का निर्देशन अभिषेक शाह ने किया है. उनके साथ प्रतीक गुप्ता और सौम्या जोशी ने इस फिल्म को लिखा भी है. अभिषेक ने इससे पहले थियेटर आर्टिस्ट के तौर पर काम किया है. बतौर एक्टर उनकी पहली फिल्म ‘बे यार’ (Bey Yaar) थी. ये 2014 में आई एक गुजराती फिल्म है, जो सुपरहिट रही थी. इसके अलावा उन्होंने ‘छेल्लो दिवस’ (Chhello Divas) और ‘रॉन्ग साइड राजू’ (Wrong Side Raju) जैसी फिल्मों में भी काम किया है. ‘हेल्लारो’ का निर्माण ‘हरफनमौला फिल्म्स’ नाम के प्रोडक्शन हाउस ने किया है.

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‘हेल्लारो’ के डायरेक्टर अभिषेक शाह.

# कब रिलीज होगी

‘हेल्लारो’ 8 नवंबर 2019 को रिलीज होगी. तब तक आप नीचे फिल्म का ट्रेलर देख सकते हैं:


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