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वो राज्य, जहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री एकदूसरे से खार खाए बैठे हैं

राज्यपाल और मुख्यमंत्री. वैसे तो दोनों संवैधानिक पद हैं. लेकिन दोनों के बीच के झगड़े अक्सर ज्यादा सुर्खियां बटोरते हैं. अभी भी कई राज्य हैं, जहां इस तरह की रस्साकशी और खींचतान जारी है. सबसे तीखा मसला पश्चिम बंगाल में दिख रहा है. यहां की ममता बनर्जी सरकार पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ जासूसी का आरोप तक लगा चुके हैं, जबकि ममता बनर्जी की ओर से आरोप है कि राज्यपाल रोजमर्रा के कामकाज में बेवजह अड़ंगे लगाते हैं. ऐसे में आज जानेंगे उन राज्यों के बारे में, जहां ऐसे झगड़े चल रहे हैं या हाल-फिलहाल में हुए हैं. पहले एक किस्सा सुन लीजिए.

जब सर्जरी कराने गए सीएम का हो गया ‘तख्तापलट’

साल 1983. वही, जब भारत ने पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था. उस समय आंध्र प्रदेश के राज्यपाल थे हिमाचल प्रदेश के रहने वाले ठाकुर रामलाल. तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार रहे एनटी रामाराव की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई थी. उस दौरान कई कांग्रेसी नेता टीडीपी में शामिल हो गए. ऐसे ही एक नेता थे एन विजय भास्कर राव. वह टीडीपी में आए और रामाराव सरकार में वित्त मंत्री बन गए. कुछ महीनों बाद एनटी रामाराव हार्ट सर्जरी के लिए अमेरिका गए. पीछे से एन भास्कर राव ने बगावत कर दी. उन्होंने कुछ विधायकों को तोड़ा और राज्यपाल रामलाल के सामने सरकार का दावा कर दिया. ऐसे आरोप लगे थे कि रामलाल ने बस कागजों पर विधायकों के नंबर देखकर भास्कर राव को सीएम पद की शपथ दिला दी. रामाराव को पता चला तो वह जल्दी से इलाज कराकर वापस आए. उन्होंने इस तरह सरकार बनाने का विरोध किया. लेकिन राज्यपाल ठाकुर रामलाल टस से मस नहीं हुए.

(बांयी तरफ) ठाकुर रामलाल और (दांयी तरफ) एनटी रामाराव.
(बांयी तरफ) ठाकुर रामलाल और (दांयी तरफ) एनटी रामाराव.

बात न बनती देख एनटी रामाराव अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली चले गए. उन्होंने राष्ट्रपति भवन के सामने विधायकों की परेड करा दी. परेड का नेतृत्व व्हील चेयर पर बैठे रामाराव ने किया. इसके बाद वे रामलीला मैदान गए. वहां उन्होंने रैली को संबोधित किया. इंदिरा गांधी सरकार पर खूब गरजे. चारों तरफ से घिरने के बाद एमपी कांग्रेस के नेता शंकर दयाल शर्मा को आंध्र का नया गवर्नर बनाया गया. शर्मा ने पद संभालते ही भास्कर से बहुमत साबित करने को कहा. लेकिन उनके पास बहुमत था नहीं, तो उन्होंने सीएम पद छोड़ दिया. एनटी रामाराव को फिर से शपथ दिलाई गई. इस मामले ने इंदिरा सरकार और ठाकुर रामलाल की खूब किरकिरी हुई. इसके बाद से ठाकुर रामलाल राजनीति में आगे नहीं बढ़ पाए. इस मामले को कथित ‘दादागिरी’ का एपिक केस कहा जाता है. भास्कर राव ने जुलाई 2019 में भाजपा जॉइन कर ली.

अब बात करते हैं, उन राज्यों की जहां पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री का झगड़ा चल रहा है.

राजस्थान

राज्यपाल- कलराज मिश्र
मुख्यमंत्री- अशोक गहलोत

कलराज मिश्र और अशोक गहलोत.
कलराज मिश्र और अशोक गहलोत.

वैसे तो दोनों के रिश्ते ठीक ही थे. लेकिन पिछले दिनों विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर दोनों में जमकर तकरार हुई. सचिन पायलट की बगावत के चलते सीएम गहलोत जल्द से जल्द विधानसभा सत्र बुलाना चाहते थे. उन्होंने इसके लिए कई चिट्ठियां लिखीं. हालांकि गहलोत एक तरह से बहुमत साबित करना चाहते थे. लेकिन उन्होंने इसका जिक्र नहीं किया. जवाब में राज्यपाल कलराज मिश्र ने सत्र बुलाने की वजह पूछी. साथ ही कोरोना का जिक्र करते हुए विधायकों की बैठने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल दाग दिया. सरकार की ओर से कहा गया कि कोरोना पर चर्चा करेंगे. राज्यपाल ने कहा कि इसके लिए तो पहले 21 दिन का नोटिस देना होगा. गहलोत नाराज हो गए. राजभवन घेरने की धमकी दे डाली. कांग्रेस विधायकों के साथ राजभवन में धरना भी दिया. राज्यपाल भी अड़े रहे, बोले- नियम तो नियम है. बाद में मामली सुलझ गया. कलराज मिश्र ने पहली चिट्ठी लिखने की तारीख से 21 दिन गिनकर 14 अगस्त से विधानसभा बुलाने को मंजूरी दे दी. गहलोत ने बहुमत साबित कर दिया.

पश्चिम बंगाल

राज्यपाल- जगदीप धनखड़
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

ममता बनर्जी और जगदीप धनखड़.
ममता बनर्जी और जगदीप धनखड़.

केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद से बंगाल में राज्यपाल और मुख्यमंत्री की तकरार बढ़ी है. धनखड़ से पहले केशरीनाथ त्रिपाठी राज्यपाल थे. उनके समय में भी बंगाल राज्यपाल-मुख्यमंत्री के झगड़े के चलते खबरों में ज्यादा रहता था. साल 2017 में एक फेसबुक पोस्ट के बाद बदुरिया में भड़की हिंसा के बाद बात काफी बढ़ गई थी. इस मामले पर राज्यपाल ने ममता सरकारी की काफी खिंचाई की थी. उन्होंने बंगाल सरकार पर तुष्टीकरण के आरोप लगाए. ममता सरकार की ओर से भी पलटवार हुआ. ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राजभवन को ‘बीजेपी-आरएसएस का अड्डा’ कह दिया. साथ ही त्रिपाठी को ‘बीजेपी का तोता’ बता दिया था. ममता ने भी आरोप लगाया था कि राज्यपाल ने उन्हें धमकाया था. त्रिपाठी का कार्यकाल पूरा होने तक इस तरह के विवाद जारी रहे.

साल 2019 में त्रिपाठी का कार्यकाल पूरा हो गया. फिर आए जगदीप धनखड़. लेकिन सीएम और राज्यपाल का झगड़ा खत्म होने के बजाय बढ़ गया. पिछले दिनों ही राज्यपाल धनखड़ ने आरोप लगाया कि राजभवन की जासूसी कराई जा रही है. उन्होंने बंगाल की पुलिस, शिक्षा व्यवस्था को पॉलिटिकली मोटिवेटेड बताकर ममता सरकार को घेरा. कोरोना वायरस के मसले पर सरकार के कदमों की लगातार आलोचना की. विश्वभारती यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ को लेकर भी सरकार और राज्यपाल में खूब जुबानी जंग हुई. ममता की ओर से भी राज्यपाल पर पूरी ताकत से पलटवार किए गए. राज्यपाल के आरोपों को बेमतलब बताया गया. मामला अभी सुलटता दिख नहीं रहा है

केरल

राज्यपाल- आरिफ मोहम्मद खान
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन

आरिफ मोहम्मद खान और पिनराई विजयन.
आरिफ मोहम्मद खान और पिनराई विजयन.

1985 में शाहबानो केस को लेकर राजीव गांधी सरकार से इस्तीफा देने वाले आरिफ मोहम्मद खान अभी केरल के राज्यपाल हैं. उनसे पहले पूर्व चीफ जस्टिस पी सतशिवम केरल के राज्यपाल थे. उस समय दोनों तरफ के रिश्ते सामान्य थे. कुछ मसलों पर तनातनी हुई थी लेकिन ज्यादा गंभीर कुछ नहीं हुआ. खान के आने के बाद सरकार और राज्यपाल के बीच खूब टकराव हुआ. यह सिलसिला जारी है. केंद्र सरकार के संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर केरल में सरकार और राज्यपाल में जमकर तकरार हुई. राज्यपाल खान ने बिल को सही बताया, जबकि विजयन के नेतृत्व वाली लेफ्ट सरकार ने इसका विरोध किया. इस मुद्दे पर विपक्षी दल कांग्रेस ने भी राज्यपाल को घेरा. आरिफ मोहम्मद खान को काले झंडे दिखाए गए. समर्थन के बावजूद राज्यपाल खान ने विधानसभा में अपने अभिभाषण में सीएए के खिलाफ बयान पढ़ा, लेकिन उससे पहले कह दिया कि मैं ये सीएम के कहने पर पढ़ रहा हूँ, मैं इससे सहमत नहीं हूँ. सीएए को लेकर केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केस कर दिया तो इस पर राज्यपाल ने लेफ्ट सरकार से जवाब मांग लिया था.

दिल्ली

उपराज्यपाल- अनिल बैजल
मुख्यमंत्री- अरविंद केजरीवाल

अनिल बैजल और अरविंद केजरीवाल.
अनिल बैजल और अरविंद केजरीवाल.

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार उपराज्यपाल से टकराव को लेकर सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही है. पहले नजीब जंग से लगभग रोजाना ही किसी न किसी मसले पर झगड़े सामने आते थे. इनमें अधिकारियों पर अधिकार और उनके तबादलों से लेकर नए नियम कानून जैसे मसले प्रमुख थे. नजीब जंग के कार्यकाल पूरा करने के बाद अनिल बैजल आए. लेकिन विवाद पहले की तरह ही रहे. केजरीवाल सरकार का लगातार आरोप रहा कि एलजी चुनी हुई सरकार के काम में दखल देते हैं. जनहित के कानूनों को अटका देते हैं. हाल फिलहाल लॉकडाउन के दौरान ऐसा ही विवाद हुआ था. केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के अस्पतालों में दिल्लीवालों के लिए बिस्तर रिजर्व रखने का आदेश दिया था. बैजल ने इसे पलट दिया. इसी तरह दिल्ली दंगों की सुनवाई को लेकर केजरीवाल सरकार ने वकीलों का पैनल बनाया था. उपराज्यपाल ने इसे भी बदल दिया.

पुडुचेरी

उपराज्यपाल- किरण बेदी
मुख्यमंत्री वी नारायणसामी

किरण बेदी और वी नारायणसामी.
किरण बेदी और वी नारायणसामी.

किरण बेदी की आईपीएस अधिकारी की दबंग छवि रही है. पुडुचेरी में उपराज्यपाल की भूमिका में भी वह इसी अंदाज में दिख रही हैं. इस वजह से उनका लगातार वी नारायणसामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार से टकराव हो रहा है. सीएम ने कई बार आरोप लगाया है कि बेदी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रही हैं. सरकार के काम में दखल दे रही हैं. साल 2019 में हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर दोनों में झगड़ा काफी आगे तक चला गया था. बेदी ने दोपहिया पर हेलमेट जरूरी कर दिया था. सरकार ने इसे अपने काम में दखल माना. इसके बाद सीएम वी नारायणसामी ने राजभवन में धरना भी दिया था. जनवरी 2020 में फिर दोनों में टकराव हुआ. दोनों ने एक दूसरे पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया. और फिर माफी मांगने को कहा.

गोवा

राज्यपाल- सत्यपाल मलिक
मुख्यमंत्री- प्रमोद सावंत

सत्यपाल मलिक और प्रमोद सावंत.
सत्यपाल मलिक और प्रमोद सावंत.

गोवा का मामला अनूठा है. यहां पर सीएम और राज्यपाल दोनों बीजेपी से ही आते हैं. लेकिन फिर भी मन नहीं मिले. नतीजा यह रहा कि सत्यपाल मलिक को मेघालय जाना पड़ा. यह दो साल में उनका तीसरा तबादला है. गोवा से पहले वे जम्मू कश्मीर और बिहार के राज्यपाल रह चुके हैं. गोवा में प्रमोद सावंत की बीजेपी सरकार से उनका टकराव कोरोना से लड़ने के उपायों, पर्यावरण व महादयी नदी जल विवाद को लेकर काफी हुआ. सावंत सरकार को कई मौकों पर सफाई देनी पड़ी. बताया जाता है कि उन्होंने इस बारे में दिल्ली में शिकायत की थी. इसके बाद मलिक का ट्रांसफर हो गया. इससे पहले जम्मू कश्मीर में मलिक के कुछ बेबाक बयानों के बाद उन्हें गोवा भेजा गया था. अब महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को गोवा का अतिरिक्त जिम्मा दिया गया है.

मध्य प्रदेश

राज्यपाल- लालजी टंडन
मुख्यमंत्री- कमलनाथ

कमलनाथ और लालजी टंडन.
कमलनाथ और लालजी टंडन.

एमपी में कमलनाथ सरकार गिर चुकी है. और शिवराज सिंह चौहान सीएम बन चुके हैं. वहीं लालजी टंडन गुजर चुके हैं. लेकिन इस घटनाक्रम से पहले कमलनाथ और टंडन के बीच काफी रस्साकशी हुई थी. यह सब हुआ था कमलनाथ सरकार के विश्वासमत को लेकर. दरअसल कांग्रेस के कई विधायक कमलनाथ के खिलाफ चले गए थे. वे बीजेपी के साथ मिल गए. कमलनाथ सरकार के समर्थन में विधायक कम हो गए. ऐसे में राज्यपाल लालजी टंडन ने पत्र लिखा और कमलनाथ से फ्लोर टेस्ट के लिए कहा. जवाब में कमलनाथ ने कहा कि इसका फैसला स्पीकर करेंगे. साथ ही कहा कि उनके ‘अगवा’ विधायकों को रिहा कराया जाए. इस मसले पर दोनों के बीच ईमेल के दौर में भी खूब पत्र लिखे गए. काफी दिनों की खींचतान के बाद आखिरकार कमलनाथ सरकार गिर गई.


Video: क्या राज्यपाल एक झटके में CM के फैसले पर पानी फेर सकता है?

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