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इनकी चोरी के बाद कन्फ्यूज रहोगे पुलिस के पास जाएं या टट्टी हटाएं

अमित गुप्ता दिल्ली में कहीं रहते होंगे. उनका शेयर किया हुआ एक वीडियो फेसबुक पर दिखता है. लाखों लोग इसे देख चुके हैं. जिसे उनने मुकरबा चौक पर अपनी कार से रिकॉर्ड किया था. 22 अक्टूबर 2016 को. इसमें ठकठक गैंग के सदस्य दिखते हैं. ठकठक गैंग आपको पता होना चाहिए. ये आते हैं, कार का दरवाजा खटखटाते हैं. आपसे कहते हैं तेल रिस रहा है, या आपका टायर पंक्चर है. आपका ध्यान बंटता है.

दूसरी तरफ से एक आदमी आपका कीमती सामान पार कर देता है. ठकठक गैंग को अगर कंपनी मानें तो इनका टर्नओवर करोड़ों में हैं. एक नए आईडिया को हमेशा कुछ नया करते रहने की जरूरत होती है. ठकठक गैंग वाले नित नए प्रयोग करते हैं. हर दिन ये कहकर कि आपकी गाड़ी का तेल चू रहा है, कोई आपके कार से सामान पार न कर पाएगा. तो ये फ्रंट फुट में बैटिंग करते हैं. आपके पास आएंगे, कहेंगे कार गलत ढंग से लगाई है. झगड़ने लगेंगे. आप कुछ समझ पाएं, इससे पहले ये सामान पार कर देते हैं.

अमित का ये वीडियो देखिए, और समझिए कैसे ये आपको लूटने की कोशिश करते हैं. कैसे आप सचेत रह सकते हैं और लुटने से बच सकते हैं.

पर ठकठक गैंग इकलौता गैंग नहीं है. जो लूट के लिए ऐसे अभिनव प्रयास करता है.

नमस्ते गैंग

ये गैंग भी दिल्ली-एनसीआर में एक्टिव है. पैटर्न समझिए, जहां-जहां कॉल सेंटर और बीपीओ ज्यादा होते हैं, बाहर से आकर लोग काम करते हैं. वहीं ऐसे गिरोह पाए जाते हैं. ऐसे शहरों में भीड़ ज्यादा होती है और जान-पहचान वाले कम. नमस्ते गैंग वाले भी कारवालों को निशाना बनाते हैं. लूटने के लिए कार वालों को ये नमस्ते करते हैं. फिर कार रोकने का इशारा करते हैं. फिर समान पार कर देते हैं. कई बार सामान ले जाना इतना आसान नहीं होता. तो ये चाकू और बंदूक अड़ाकर लूट लेते हैं.

कूलर गैंग

कूलर गैंग वाले आप पर हमला नहीं करते आपके कूलर को निशाना बनाते हैं. आमतौर पर कूलर घर के बाहर खिड़कियों पर लगे होते हैं. ये कूलर के पानी में नशीली दवाई मिला देते हैं. नशा पानी में घुलकर हवा से सारे कमरे में फैलता है. आप गहरी नींद में सो जाते हैं. कई घंटों तक नींद नहीं टूटती, आप सोते हैं और सोते ही जाते हैं. इस बीच ताला टूटता है, आलमारी चटकती है, जेवर साफ होते हैं और आप कंगले.

चड्डी बनियान गिरोह

इस गिरोह के लोग दिनभर भिखारियों, बेकारों जैसे फिरते थे. लोगों के घर पर नजर रखते और रात होते ही कपड़े उतार लूट के लिए निकल पड़ते. ये सिर्फ चड्डी बनियान में होते. इनके हाथ में हथियार होते, चाकू, कुल्हाड़ी, रॉड. इनके उन्ह पुते होते. हाथ-पैर और सारी देह में या तो कीचड लगा होता या तेल जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल होता. हाथ लगाते ही ये छिटल जाते. साथ ही ये लंबूसड़ से होते, तेल-मैल में पुते होते तो डरावने भी दिखते और इसका सायकोलॉजिकल प्रेशर पड़ता.

ये अपनी लूट के रास्ते में आने वालों को जान से मार देने में भी नहीं हिचकते थे. मेरे साथ स्कूल में एक लड़का पढ़ता था, उसके पापा के घर में ये गिरोह घुसा तो सबको मार डाला था, सिर्फ उसके पापा बच गए थे क्योंकि वो वहां थे नहीं. चड्डी-बनियान गिरोह देश के हर कोने में मिल जाया करता है. आज भी इसकी खबरें आती हैं.

सरियामार 

सरियामार गिरोह का आतंक सबसे ज्यादा बच्चों में था. उन्हें इसके नाम से खूब डराया जाता. नाम बताने की किसी शर्त पर काम किए बिना सीलमपुरिया सूत्र टिनटिन त्रिवेदी बताते हैं, ये गिरोह कुछ वैसे ही चलता था, जैसे NH-10 में आपने अनुष्का शर्मा को चलये देखा होगा. ये पैर के पास सरिया रख कर चलते और बगल में जाते किसी को भी सरिया से मार उसे लूट लेते थे. कई बार इस गिरोह के लोग घर में घुसकर लोगों को मार-लूट लेते थे.

महिला शॉल गिरोह

इस गिरोह में बेसिकली औरतें होती हैं. ये दुकानों के आगे शॉल खोलकर बैठ जातीं, उसकी आड़ में कोई शटर खोलता और पीछे से शटर के नीचे घुस जाता. बाहर से देखने पर कुछ पता नहीं चलता कि क्या हो रहा है, अंदर घुसी औरत सामान पारकर बाहर आ जाती. ऐसा ये बिना ताला तोड़े भी कर लेती थीं. किसी दुकान में कई शॉल ओढ़ी औरतें पहुंचती. दुकानदार से बातें करतीं सामान निक्ल्वातीं और इतने में कोई शॉल में सामान छुपा पार कर देती.

टट्टी गिरोह 

ये यूजुअल चोरों जैसे ही होते थे, खाली घरों के ताले तोड़ते, चोरी करते. लेकिन जाते-जाते टट्टी कर जाते. जिसके घर में चोरी हुई हो उसके सामने सवाल होता पहले पुलिस को बताए या टट्टी हटाए.


दिल्ली-NCR में आपका एक नमस्ते आपको लुटवा सकता है!

हाथ पर गुदा टैटू भी बड़ा काम आ सकता है

पसीना चाटके मर जाना, कूलर न चलाना, वरना कूलर गैंग आ जाएगा

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