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ये चीज ना सीख पाए तो नोवाक जोकोविच के मैच देखना ही बेकार है!

‘अगर आप एक बार हार मान लेते हैं तो यह आदत बन जाती है. कभी हार मत मानिए.’

बास्केटबॉल लेजेंड माइकल जॉर्डन की कही ये बात कुछ ही लोग अपने जीवन में उतार पाए हैं. और टेनिस दिग्गज नोवाक जोकोविच इन लोगों की किसी भी लिस्ट में Walk In करने वाले दिग्गजों में हर बार शामिल रहेंगे. रॉजर फेडरर और रफाएल नडाल जैसे दिग्गजों के बीच इस सर्बियन ने अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है.

ऑस्ट्रेलियन ओपन में 8-0 का परफेक्ट रिकॉर्ड रखने वाले जोकोविच ने रविवार, 13 जून को फ्रेंच ओपन के फाइनल में ग्रीस के स्टेफानोस सितसिपास को हराकर अपना दूसरा फ्रेंच ओपन खिताब जीत लिया. जोकोविच की इस जीत के खूब चर्चे हैं. कैसे उन्होंने लगातार दो सेट हारने के बाद वापसी की. पांच सेट तक खिंचे मैच को अपने नाम किया.

लोग उनके खेल और फिटनेस की खूब तारीफ कर रहे हैं. लेकिन हमें इन दोनों के साथ उनके धैर्य ने भी चकित किया है. फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहले दो सेट लगातार हारने के बाद जोकोविच ने कमाल का धैर्य दिखाया. और अगले तीन सेट लगातार जीतते हुए अपना 19वां ग्रैंड स्लैम जीत लिया. लेकिन यह पहली बार नहीं था जब जोकोविच ने ऐसा धैर्य और साहस दिखाया हो. चलिए आपको बताते हैं ऐसे ही पांच क़िस्से.

# 2012 ATP World Tour Finals

लंदन में हुआ यह मैच भी जोकोविच के धैर्य का बड़ा उदाहरण है. जोकोविच उस वक्त सिर्फ 25 साल के थे. इस मैच में जोकोविच के सामने थे ऑलरेडी लेजेंड हो चुके रॉजर फेडरर. इस बड़े मैच में उतरने से पहले जोकोविच अपने व्यक्तिगत जीवन में एक बड़े संकट से गुजर रहे थे. सर्बिया में मौजूद उनके पिता गंभीर रूप से बीमार थे. जोकोविच ने दो घंटे और 15 मिनट तक चले इस मैच में फेडरर को 7-6(6), 7-5 से मात की.

पहले आठ मिनट में 0-3 से पीछे रहकर वापसी करने वाले जोकोविच ने मैच के बाद जोकोविच ने इस जीत को ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे अपने पिता को समर्पित किया. उन्होंने फेडरर को हराने के बाद कहा,

‘मैं कल उनसे मिलने जाऊंगा. साथ में अपनी ट्रॉफी भी ले जाऊंगा और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करूंगा.’

# 2016 French Open

जोकोविच चार में से तीन ग्रैंड स्लैम जीत चुके थे. ऑस्ट्रेलियन ओपन, विम्बलडन और अमेरिकी ओपन. लेकिन फ्रेंच ओपन का खिताब अब भी उनकी झोली में नहीं आया था. इसी बीच आया साल 2016 का फ्रेंच ओपन. जोकोविच एक बार फिर से अपना करियर स्लैम पूरा करने के लिए बेताब हुए. लेकिन उनकी कुहनी में लगी चोट के चलते यह आसान नहीं था. जोकोविच इस चोट से बहुत परेशान थे. इस बारे में  जोकोविच के छोटे भाई मार्को ने एक इंटरव्यू में बताया था,

‘साल 2016 में नोवाक की कुहनी में चोट लगी थी. उस वक्त मैं कुछ हफ्ते तक उसके साथ ही यात्राएं कर रहा था और मुझे याद है कि ट्रेनिंग के वक्त हर सर्व पर वह दर्द से चिल्ला रहा था. लेकिन इसके बाद भी उसने रोलां गैरो पर खुद को झोंक दिया और जीतकर लौटा. भले ही उसके बाद वह बुरी तरह पस्त हो गया.’

दरअसल इस चोट ने जोकोविच को काफी परेशान किया था. उन्होंने इसके चलते कई टूर्नामेंट्स से अपना नाम वापस ले लिया था. बाद में जनवरी 2018 में जोकोविच को इस समस्या से उबरने के लिए सर्जरी भी करानी पड़ी थी.

# 2018 Wimbledon Semi-Final

साल 2018 के इस सेमीफाइनल को विम्बलडन के इतिहास के महानतम मैचों में से एक माना जाता है. सवा पांच घंटे तक खिंचे इस मैच में वो सारी चीजें थीं जो किसी एपिक मैच में होती हैं. रफाएल नडाल और नोवाक जोकोविच के बीच हुआ यह कमाल का मैच दो दिन तक चला था.

शुक्रवार को देरी से शुरू हुआ मैच रात 11 बजे रोका गया तब स्कोर 6-4, 3-6, 7-6 (9) से जोकोविच की ओर था. दरअसल इस मैच से पहले जॉन इसनर और केविन एंडरसन के बीच हुआ पहला सेमीफाइनल छह घंटे और 36 मिनट तक चला था. इसके चलते नडाल और जोकोविच का मैच रात आठ बजे के बाद शुरू हुआ.

इस मैच को 6-4, 3-6, 7-6, 3-6 और 10-8 से जीतकर जोकोविच पूरे 22 महीने के बाद किसी फाइनल में पहुंचे थे. इस फाइनल से पहले 12 ग्रैंडस्लैम जीत चुके जोकोविच ने इस जीत के साथ ही अपने आलोचकों को भी संदेश दे दिया. उन्हें चुका हुआ मान रहे लोगों ने इस मैच के बाद अपनी सोच बदल ही ली. और इस बदलाव में जोकोविच के धैर्य का बड़ा रोल था. इसी धैर्य के साथ उन्होंने फाइनल में केविन एंडरसन को भी हराया. इस जीत के बाद उन्होंने अब तक छह और ग्रैंड स्लैम अपने नाम किए हैं.

# 2019 Wimbledon Final

रॉजर फेडरर. सर्वकालिक महान टेनिस प्लेयर्स में से एक. ग्रासकोर्ट पर फेडरर कमाल का खेल दिखाते हैं. ग्रासकोर्ट पर होने वाले इकलौते ग्रैंडस्लैम विम्बलडन में फेडरर के रिकॉर्ड्स से साफ है कि वह इस तरह के कोर्ट पर कितना कमाल खेलते हैं. फेडरर ने आठ बार विम्बलडन का खिताब जीता है. यह आंकड़ा नौ भी हो सकता था लेकिन हो नहीं पाया. साल 2014 और फिर 2015 के विम्बलडन फाइनल में फेडरर को हराने वाले जोकोविच इस बार एक कदम और आगे निकल गए.

साल 2019 के विम्बलडन फाइनल में जोकोविच ने इतना कमाल का धैर्य दिखाया कि फेडरर का सारा अनुभव धरा का धरा रह गया. लगभग पांच घंटे तक चले इस फाइनल को जोकोविच ने 7-6, 1-6, 7-6, 4-6 और 13-12 से अपने नाम किया. इस पूरे मैच में फेडरर हावी थे. लेकिन जोकोविच ने पूरे धैर्य के साथ उनका सामना किया और अंत में उन्होंने फेडरर के सर्व पर दो मैच पॉइंट बचाने के बाद पांचवें सेट के टाईब्रेकर में 12-12 से स्कोर से उबरकर मैच अपने नाम किया. विम्बलडन के लंबे इतिहास में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. इस मैच के बाद जोकोविच ने कहा था,

‘मैं सोचता हूं कि मैच के ज्यादातर वक्त तक मैं बैकफुट पर था. मैं डिफेंड कर रहा था. रॉजर गेम को अपने हिसाब से चला रहे थे. मैंने बस लड़ने और जरूरत के वक्त कोई रास्ता निकालने की कोशिश की, अंत में यही हुआ.’

जोकोविच के मैचों को देखें या पढ़ें, इनसे हमें एक चीज तो समझ आती ही है. विजय के लिए धैर्य बेहद जरूरी है. धैर्य के साथ आप बड़ी से बड़ी चुनौती से भी पार पा सकते हैं.


जोकोविच बने फ्रेंच ओपन चैंपियन और टूट गया नडाल का अभिशाप

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