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'खाने में मुस्लिम कर्मचारी तो नहीं थूकता' वाले सवाल पर मसाला मॉन्क वालों ने हौंक दिया

सार :
एक आदमी ने एक मसाला कंपनी वालों से पूछा तुम्हारे यहां कोई मुसलमान काम तो नहीं करता, जो मसाले में थूक दे. ऐसा जवाब मिला कि अगला चिंचिया गया.

बतकही :

आदमी खलिहर न हो नहीं तो छलनी के भी खोट ढूंढ दे. ये तक गिनने बैठ जाए कि छलनी में छेद 72 होते हैं या उससे ज़्यादा. ऐसे ही एक शख्स रहे, राजीव सेठी. बैठे ठाले उन्हें कुछ ऐसा सूझा कि एक मसाला कंपनी के पेज पर कहा’ ‘प्लीज डिक्लेयर कि तुम्हारे यहां कोई मुसलमान नहीं है, और प्रोडक्ट्स में किसी ने थूका नहीं है.’ बदले में Masala Monk की तरफ से कहा गया, राजीव सेठ लगता है. आपके पास नफरत फैलाने के अलावा कोई काम नहीं है. आपको शर्म आनी चाहिए.

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सेठी जी के सवाल का जवाब

रैंडम ज्ञान वाला पार्ट :

लॉकडाउन में दिमागी कसरत न होने से, ऐसे विचार आने लगते हैं. जैसे कुछ लोगों को लगने लगा है कि उनकी नज़रों के सामने जो भी मुसलमान गुजर रहा है, उसे कोरोना वायरस ही लगा है और वो उस पर थूक देगा. नतीजे में लोग लोगों को पीटने लगे, आधार कार्ड मांगने लगे. घबराने लगे, वगैरह-वगैरह. कोई बुद्धि में अक्ल वाली दवाई डालकर समझाए इतना तो इंसान के थूक भी नहीं बनता और इतने तो देश में कोरोना वायरस के केस भी नहीं हैं, जितना तुमने धर्म के लिए नफरत भर ली है.

असल मज़ा शुरू होता है अब:

तो सेठी जी को जवाब मिला. फिर उसके बाद एक बड़ा जवाब मिला. शशांक अग्रवाल जो उस पेज और कंपनी के कर्ता-धर्ता हैं. फेसबुक पर बड़ी सी पोस्ट लिखी. तगड़ा सटायर मारा. अव्वल तो बेइज्जती की, बताया हमारा थूक तो ISO9002 सर्टिफाइड है. हमारे थुकवैया स्फूर्त मौखिक प्रक्षेपण में पीएचडी हैं. जब लार ग्रंथि से थूक छोड़ते हैं तो अहमदाबाद कन्वेशन के मानकों का ख्याल रखते हैं. तभी तो तुम जैसे लार चुआते रहते हैं.

आगे ये भी बताया कि हमारे यहां कोई मुसलमान काम नहीं करता, ईवेन कोई काम ही नहीं करता. सब मज़े करते हैं. सब अपने काम को हॉबी जैसे करते हैं. चाहे तो अकबर. रफ़ी, आयशा, फ़िरदौस, मलिक, तबस्सुम से पूछ लो.

आगे ये कहकर झाड़ा कि मैं समझ रहा हूं, तुम्हारे मुंह अच्छा टेस्ट नहीं लगा है. आदमी जैसा खाता है, वैसा बन जाता है. मैं चाहूंगा आप हमारे कैटलॉग की सारी चीजें मंगा लें. बहुत जल्द मन बदल जाएगा. उन चीजों को सरहाने लगोगे जो भारत को एक करती हैं.

तब तक के लिए
खुदा हाफ़िज़
शशांक अग्रवाल

एक्जैक्टली क्या लिखा था, यहां पढ़ सकते हैं आप.

रैंट वाला पार्ट :

जवाब आया और जवाब वायरल हो गया. शशांक का ये जब ऐसे समय पर आया है जब धर्म के नाम पर बावले लोग उनके मन की डफली न बजाने पर बॉयकॉट पर उतर आते हैं. कैब्स, ऐप्स, फ़िल्में, एक्टर्स, मीडिया हाउस और एंकर्स तक इन बावलों के मारे हैं. कुछ ने घुटने भी टेक दिए हैं. रेटिंग खराब कर देना, सामान मंगाकर लौटा देना, रिव्यू बिगाड़ना आजकल नए हथियार बने हैं. सोशल मीडिया पर ये छलछंद खूब चलते हैं और कई कंपनियां इसे फेर में बुरी चीजों पर रिएक्ट भी नहीं करती. लेकिन मसाला मॉन्क ने ऐसे मौके पर भी बड़ा जिगरा दिखाया है. आगे कमेंट में बताया कि जिन कर्मचारियों के नाम लिए, वो काल्पनिक थे. ये भी साफ़ किया कि हम थूकते नहीं है. FSSAI से अप्रूव्ड हैं. इंटरनेशनल मानकों का पालन करते हैं. ये तो सेठी जी कई बार ऐसी ही नफरत मना करने पर भी फैला रहे थे तो जवाब दिया है.

उपसंहार :

शेष कुछ लोग हैं, जो इसे गिमिक बता रहे हैं. कह रहे हैं. सब स्टेज्ड था. ब्रांडिंग के चोंचले हैं हैं. शशांक अग्रवाल नाम चमकाना चाह रहे थे. अगर इन आरोपों को सही भी मानें तब भी संदेश तो अगले ने सही ही दिया है.


 

देखिए, कोरोना वायरस कहां-कितना फ़ैल गया. सतर्क रहिए.तन-मन को स्वस्थ रखिए, सेठी जी बनने से बचिए.

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