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मेरी मूवी लिस्ट: वो पांच फिल्में जो आपके दिमाग की गजब कसरत करा देंगी

कहते हैं कि दिमाग का जितना इस्तेमाल करो, उसकी धार उतनी ही तेज होती है. खाली छोड़ दो, तो शैतान का डेरा बन जाता उसमें. अब लॉकडाउन के दौरान अगर आपको भी लगता है, कि शरीर की वर्जिश के साथ दिमाग की भी वर्जिश हो, तो एक आसान उपाय है. इसमें आपको आर डी शर्मा की मैथ्स की बुक नहीं खोजनी पड़ेगी. पहेलियां नहीं बुझानी पड़ेंगी. तो करना क्या होगा? बस कुछ फिल्में देखनी हैं. इनको देखने के बाद ऐसा लगेगा जैसे दिमाग को हाफ मैराथन में गोल्ड मेडल मिल गया है.

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तो पढ़िए उन फिल्मों की लिस्ट, जो आपके दिमाग के घोड़े दौड़ा देंगी:

(1) प्रीडेस्टिनेशन (Predestination)

डायरेक्टर: माइकल और पीटर स्पैरिग

कास्ट: ईथन हॉक, सेरा स्नूक

कहां देखें: एमेजॉन प्राइम 

कहानी है एक टाइम ट्रेवलिंग एजेंट की. जो अलग-अलग साल में जाकर अलग-अलग लोगों से मिलता है. इसी टाइम ट्रेवल के दौरान उसे एक लड़का मिलता है, जो एक औरत के नाम से कहानियां लिखता है. वो एजेंट को एक कहानी सुनाता है. बताता है कि जब वो पैदा हुआ, तो लड़की था. इस कहानी के ज़रिए एजेंट को पता चलता है, कि वो एक समय में इस लड़की का प्रेमी रह चुका है. और इसके साथ उसका बच्चा भी है. अब इस जानकारी का वो क्या करता है, और टाइम ट्रेवल करके आगे (या पीछे?) कहां जाता है, ये हम आपको नहीं बताएंगे. लेकिन इतना ज़रूर बताएंगे, कि फिल्म ख़त्म करने के बाद आपके दिमाग का डेढ़ घंटे कार्डियो हो चुका होगा. और आप कम से कम एक बार और ये फिल्म ज़रूर देखेंगे.

(2) द अदर्स (The others)

डायरेक्टर: अलेहांद्रो अमेनाबार

कास्ट: निकोल किडमैन, क्रिस्टोफ़र एकलस्टन

कहां देखें:  एमेजॉन प्राइम

कहानी है ग्रेस की. जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद एक पुराने बंगले में अपने दो बच्चों के साथ रहती है. दोनों बच्चों को रौशनी से दिक्कत है. इसलिए उनके घर में मोटे-मोटे परदे लगे हुए हैं. ग्रेस अपने घर के लिए तीन लोगों को हायर करती है. जो पूरे घर का काम-काज देखते हैं, और बच्चों को संभालते हैं. तभी घर में अजीबोगरीब हरकतें होनी शुरू हो जाती हैं. क़दमों की आवाज़, चीज़ें इधर उधर होना. ग्रेस की छोटी बेटी बताती है कि उसने घर में दूसरे लोगों को देखा है. ग्रेस को लगता है कि ये मर चुके लोगों के भूत हैं. तो वो आदेश देती है कि आस-पास जांच की जाए. कि कहीं कोई कब्र तो नहीं ऐसे परिवार की. जब सच निकल कर सामने आता है, तो देखने वाला धक् से रह जाता है. फिल्म को देखते समय सावधानी ये बरतें, कि अंतिम सीन्स के दौरान ध्यान न भटकने दें. बहुत जरूरी है.

(3) जेकब्स लैडर (Jacob’s Ladder)

डायरेक्टर: एड्रियन लिन

कास्ट: टिम रॉबिंस, एलिज़ाबेथ पेन्या

कहां देखें: एमेजॉन प्राइम

कहानी है जेकब सिंगर की. जो वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका की तरफ से सैनिक था. 1971 में उस पर हुए अटैक के बाद वो अपना होश खो बैठता है. इसके बाद उसकी नींद खुलती है साल 1975 में. वो अब एक क्लर्क है. अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रहता है. अपनी पुरानी ज़िन्दगी उसे याद आती है, जब उसकी पत्नी उसके साथ थी. उसका बेटा ज़िंदा था. अब उसे बार-बार ऐसा लगता है कि उसका पीछा किया जा रहा है. वो कोशिश करता है इस मामले की तह तक जाने की, लेकिन उसपर बार -बार अटैक होते रहते हैं. ऐसे ही एक अटैक के बाद वो जब दुबारा उठता है, तो पाता है कि वो अपनी बीवी और बच्चे के साथ है. फिल्म पूरी तरह से जैकब के नज़रिए से है. और इसका राज फिल्म के अंत में खुलता है कि आखिर जैकब को ये सारी चीज़ें क्यों दिखाई दे रही थीं.

(4) द यूजुअल सस्पेक्ट्स (The Usual Suspects)

डायरेक्टर: ब्रायन सिंगर

कास्ट: स्टीफेन बाल्डविन, केविन स्पेसी, केविन पोलक, गेब्रियल बायर्न

कहां देखें: जियो सिनेमा पर

कहानी है रॉजर किंट की. ये एक छुटभैया टाइप गुंडा है. उससे एक मामले को लेकर पूछताछ चल रही होती है. मामला था एक नाव में हुए धमाके और कुछ लोगों की हत्याओं का. पूछताछ में रॉजर डिटेक्टिव को बताता है कि किस तरह से एक तुर्की के क्राइम लॉर्ड काइज़र सोज़ ने उन लोगों को ये सब करने पर मजबूर किया. वो बताता है कि काइज़र इतना भयंकर माफिया था, कि उससे लोग थर-थर कांपते थे. रॉजर उसके अत्याचारों की कहानी सुनाता है. उसे सुन रहा डिटेक्टिव दिए गए सुरागों से ये फैसला करता है कि काइज़र कौन था. जब उसे लगता है कि रॉजर से उसे पूरी जानकारी मिल गई है, तो वो उसे जाने देता है. लेकिन जैसे ही रॉजर उसके ऑफिस से निकलता है, कहानी पूरी तरह पलट जाती है. डिटेक्टिव के पास एक फैक्स आता है, और उसके पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है.

(5) पैन्स लेबरिंथ (Pan’s Laybyrinth)

डायरेक्टर: गुएर्मो डेल टोरो

कास्ट: इवाना बाक्वेरो, सर्जी लोपेज़

कहां देखें: नेटफ्लिक्स पर

कहानी है एक छोटी बच्ची ओफीलिया की. स्पेन में हुए गृह युद्ध के बाद के समय में स्थित. ओफीलिया का सौतेला पिता विडाल स्पेन की सरकार के लिए काम करता था. वहां के गुरिल्ला योद्धाओं के खिलाफ. ओफीलिया अपनी मां के साथ उससे मिलने आती है. वहीं उसे एक जादुई जानवर मिलता है. जो उसे बताता है कि वो पूर्व जन्म में राजकुमारी थी. औए उसे तीन टास्क देता है. जिन्हें पूरा करने के बाद ओफीलिया वापस राजकुमारी बन जाएगी, और अमर हो जाएगी. किस तरह वो ये तीन टास्क पूरे करती है, और किस तरह स्पेन में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल इस कहानी के साथ-साथ चलती है, ये देखने लायक है. फिल्म का अंत आपको रुलाएगा. भीतर से थोड़ा सा खुश कर देगा. और हो सकता है कि इस फिल्म को देखने के बाद स्पेन की कहानियों में आपकी रुचि बढ़ जाए.

तो ये पांच फिल्में देखिए. और देखने बाद कुछ कहने-सुनने को रह जाए, तो यहां पहुंचिए – lallantopprerna@gmail.com


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