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मीरा नायर के ‘अ सूटेबल बॉय’ की 7 बातें: नॉवेल जितना ही बोल्ड है इसका तब्बू, ईशान स्टारर अडैप्टेशन

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तब्बू और ईशान खट्टर ने अपने-अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट से एक तस्वीर शेयर की है. इसमें दोनों एक पुराने से झूले में आराम फरमा रहे हैं… खैर हम अब तस्वीर को एक्सप्लेन क्या ही करें. आप लोग दोनों ही पोस्ट्स नीचे देख लीजिए-


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First look #ASuitableBoy @bbcone #MiraNair

को Tabu (@tabutiful) द्वारा साझा की गई पोस्ट

 

 

 

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A Suitable Boy.. first look को Ishaan (@ishaankhatter) द्वारा साझा की गई पोस्ट

ये तस्वीर, जो इन दोनों एक्टर्स ने शेयर की है वो ‘अ सूटेबल बॉय’ का फर्स्ट लुक है. ‘अ सूटेबल बॉय’ के बारे में हम ढेर सारी मज़ेदार जानकारियां जुटा चुके हैं. और अब सारी की सारी आपके साथ शेयर करने वाले हैं.

#1) वेब सीरीज़ या टीवी सीरियल-

हालांकि अब वेब सीरीज़ और टीवी सीरियल के बीच की लाइन्स धुंधली पड़ गई है. जैसे गेम ऑफ़ थ्रोंस को ही ले लीजिए. जो यूएस के दर्शकों के लिए तो एक टीवी सीरियल था, लेकिन हम भारतीयों के लिए हॉटस्टार में आने वाली वेब सीरीज़.

ज़ी 5 और सोनी लिव जैसे कई ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स हैं जिसके अपने सेटेलाइट टीवी चैनल्स भी हैं. ये नेटवर्क्स जो प्रोगाम टीवी में दिखाते हैं, वही प्रोग्राम, ठीक उसी समय अपने-अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी पैरलली स्ट्रीम करते हैं. तो इन प्रोग्राम्स को आप क्या कहेंगे? वेब सीरीज़ या टीवी सीरियल?

यही दिक्कत ‘अ सूटेबल बॉय’ को लेकर भी है. ये ‘बीबीसी वन’ पर आएगा. जो बीबीसी नेटवर्क का यूके बेस्ड टीवी चैनल है. वहीं दूसरी तरफ उम्मीद है कि ये सोनी लिव जैसे किसी प्लेटफ़ॉर्म पर भी स्ट्रीम हो. क्यूंकि सोनी लिव के बुके में ‘बीबीसी अर्थ’ जैसे कई इंटरनेशनल चैनल्स भी है. तो चलिए ‘अ सूटेबल बॉय’ को अभी के लिए 6 एपिसोड का सीरियल कह देते हैं.

#2) कलाकार–

# दिग्गज ईरानी डायरेक्टर माजिद माज़िदी की फिल्म ‘बियॉन्ड दी क्लाउड्स’ (2017) से अपना करियर शुरू करने वाले ईशान खट्टर. ‘धड़क’ फेम ईशान खट्टर.

# अपनी लेटेस्ट मूवी ‘अंधाधुन’ के चलते क्रिटिक्स की आंखों का फिर से तारा बनीं तब्बू. फिर से, मतलब ऐसा पहली बार नहीं था जब उन्होंने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया हो. विशाल भारद्वाज की ‘आर्ट’ और ‘कॉमर्स’ दोनों को एक साथ साधती मूवीज़ हों या ‘तक्षक’ (जिसे कोइंसिडेंटली 03 दिसंबर को ही 20 साल हुए हैं) जैसी प्योर आर्टिस्टिक मूवीज़, या फिर ‘हम साथ-साथ हैं’ जैसा विशुद्ध कॉमर्स सिनेमा. सब में उनकी एक्सपर्टीज़ एक बराबर हैं.

तब्बू और ईशान में कितना पोटेंशियल है, ये जानना है तो उनकी 'मकबूल' और 'बियॉन्ड दी क्लाउड्स' जैसी मूवीज़ देखी जनि चाहिए.
तब्बू और ईशान में कितना पोटेंशियल है, ये जानना है तो उनकी ‘मकबूल’ और ‘बियॉन्ड दी क्लाउड्स’ जैसी मूवीज़ देखी जानी चाहिए.

 

इन दोनों एक्टर्स के अलावा मीरा नायर के इस सीरियल में आपको रसिका दुग्गल (‘मिर्ज़ापुर’, ‘आउट ऑफ़ लव’), नमित दास (‘आंखों देखी’, ‘सुई धागा’, ‘पटाखा’) और विजय वर्मा (‘सुपर 30‘, ‘गली बॉय’) जैसे एक्टर्स भी महत्वपूर्ण रोल्स में  दिखेंगे.

तान्या मणिकताला (‘फ्लेम्स’) इसमें लता का किरदार निभाएंगी. लता ही वो किरदार है जिसके इर्द गिर्द पूरी कहानी घूमती है. कहानी की बात हम आगे अलग सेक्शन में करेंगे.

ईशान खट्टर ने इसमें ‘मान’ का कैरेक्टर प्ले किया है. ये एक मस्तमौला लड़का है. जिसे अपने राजनेता पिता की चिंताओं से कोई लेना देना नहीं है. वो एक वेश्या के प्रेम में पड़ा है. इस वेश्या का किरदार निभाया है तब्बू ने. तब्बू के किरदार का नाम है सौतन बाई.

#3) स्क्रिप्ट राइटर (एंड्रयू डेविस)-

एंड्रयू डेविस ने विक्रम सेठ ने नॉवेल को स्क्रिप्ट में बदला है. एंड्रयू डेविस का सबसे आसान परिचय ये हो सकता है कि उन्होंने ‘हाउस ऑफ़ कार्ड्स’ जैसी ग्लोबली फेमस वेब सीरीज़ लिखी है. लेकिन उनके और भी बेहतरीन काम हैं. जैसे 1995 में आई टीवी सीरीज़ ‘प्राइड एंड प्रिज्युडिस’ या उनकी लेटेस्ट मिनीसीरीज़ ‘लेस मिज़रेबल्स’ जो बीबीसी ने ही बनाई थी. और जो ‘अ सूटेबल बॉय’ की तरह ही एक क्लासिक नॉवेल (विक्टर ह्यूगो की ‘लेज़ मिज़राब्ला’) का टीवी अडैप्टेशन थी.

#4) मीरा नायर-

‘अ सूटेबल बॉय’ को डायरेक्ट किया है मीरा नायर ने. ‘सलाम बॉम्बे’, ‘मॉनसून वेडिंग’ और ‘दी नेमसेक’ वाली इंटरनेशनली फेमस, भारतीय मूल की अमेरिकी डायरेक्टर. ‘सलाम बॉम्बे’, ‘बेस्ट फॉरन लैंग्वेज फिल्म’ कैटेगरी में एकेडमी अवॉर्ड जीतने से सिर्फ एक कदम पीछे रह गई थी. नॉमिनेशन तक पहुंच ही गई थी.

मीरा नायर की दो बेहतरीन फ़िल्में- सलाम बॉम्बे और मानसून वेडिंग.
मीरा नायर की दो बेहतरीन फ़िल्में- सलाम बॉम्बे और मानसून वेडिंग.

वैसे ये भी इंट्रेस्टिंग फैक्ट है कि मीरा नायर ने आज तक किसी भी ‘ब्रिटिश’ (यूके बेस्ड) प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया था.

#5) नॉवेल-

दुनिया के सबसे लंबे नॉवेल ‘अ सूटेबल बॉय’ में लगभग डेढ़ हज़ार पन्ने हैं. 19 चेप्टर्स हैं. चार परिवार हैं. सैकड़ों कैरेक्टर्स हैं. दसियों सब प्लॉट्स हैं.

बेस्टसेलर की कैटेगरी में आने वाली इस नॉवेल की दुनिया भर में अब तक 30 लाख से ज़्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं. ये नॉवेल न केवल चर्चित है, बल्कि कुछ समीक्षकों ने तो इसकी तुलना लियो टॉल्स्टॉय के क्लासिक ‘वॉर एंड पीस’ से कर डाली थी. अपनी विशालता, रियलिज्म और बड़े स्पेक्ट्रम के चलते.

इस नॉवेल के बारे में ये भी फेमस है कि लोग इसे अपने दराज में सजाने के लिए खरीद तो लेते हैं, लेकिन इसे पूरा पढ़ पाने की हिम्मत नहीं कर पाते. एंड्रयू डेविस ने तभी तो कहा-

अब लोग इसे टीवी में देख सकते हैं और, इससे उनको नॉवेल पढ़ने का भी मोटिवेशन मिलेगा.

वैसे ऐसा होता है. हैरी पॉटर की मूवीज़ से किताबों की बिक्री में भी बढ़त आई. ‘दी सॉन्ग ऑफ़ आइस एंड फायर’ के साथ भी यही हो रहा है. ‘गेम ऑफ़ थ्रोंस’ के खत्म हो चुकने के बाद लोग अब ‘दी सॉन्ग ऑफ़ आइस एंड फायर’ के अगले पार्ट का इंतज़ार करने लगे हैं.

गेम ऑफ़ थ्रोंस का लास्ट, यानी आठवां सीज़न, लोगों को खास पसंद नहीं आया था. ततो अब लोग आईस एंड फायर किताब के सिक्वल का इंतज़ार करने लगे हैं. कि शायद उसमें एंडिंग अच्छी हो. यानी किताब लिखी जाने से पहले ही हिट है बॉस.
‘गेम ऑफ़ थ्रोंस’ का लास्ट, यानी आठवां सीज़न, लोगों को खास पसंद नहीं आया था. तो अब लोग ‘आईस एंड फायर’ किताब के सिक्वल का इंतज़ार करने लगे हैं. कि शायद उसमें एंडिंग अच्छी हो. यानी किताब लिखी जाने से पहले ही हिट है बॉस.

#6) कहानी-

1993 में रिलीज़ हुए इस नॉवेल की कहानी 1951 से शुरू होती है. 18 महीनों के समय में अपना विस्तार पाती है. जिसमें 1952 के लोकसभा चुनाव है. हिंदू-मुस्लिम तनाव है. लोवर कास्ट का संघर्ष है. और वो सब कुछ है जो आज़ादी के बाद के भारतीय समाज का फेब्रिक बनाता है. और इन सब को जोड़ता है नॉवेल का मेन प्लॉट. एक लड़की लता की ‘कमिंग ऑफ़ ऐज’ दास्तां. जिसका परिवार उसके लिए एक ‘उचित वर’ (अ सूटेबल बॉय) ढूंढ रहा है.

आपको लता का परिवार, ख़ासकर उसकी मां और भाई-भाभी के बारे में पढ़कर लगेगा जैसे ये सब आपके जीवन के चेहरे हों. एकदम देखे-जाने, अनुभव किए किरदार. मां को अपनी बेटी के हाथ पीले करने की इतनी चिंता है कि जीवन में इससे बड़ा कुछ नहीं. वो परफेक्ट मैच खोजने में दिक होती रहती है. दूसरी तरफ लता, एकदम असली जीवन की कोई आम सी लड़की. दोस्तों और कॉलेज के जीवन में खपती हुई. मगर उसे भरपूर एन्जॉय करती हुई.

फिर उसे मुहब्बत हो जाती है किसी से. छुप-छुपकर मिलना. मिलने पर सिहरन, जैसे उस जमाने की लड़कियों को होती होंगी. फिर लता का दिल टूटना. दिल टूटने के बाद आए टेम्पररी किरदार. जो दोस्त से कुछ ज़्यादा हो जाते हैं, मगर मुहब्बत से काफी कम पर छूट जाते हैं. वैसे कुछ, जैसा ‘तनु वेड्स मनु’ का वो ‘कंधा.’

इसमें आपको नए आज़ाद हुए भारत के कई गहरे-पैने टुकड़े मिलेंगे. कांग्रेस की राजनीति. पॉलिटिकल खेमेबाजी. सोसाइटी में संभ्रांत होने का दिखावा, मसलन- लता का भाई कभी इंग्लैंड नहीं गया. मगर उसने जगहों, बड़े पॉश बाज़ारों के नाम याद किये हुए हैं. जिनका ज़िक्र करके वो सामने वाले पर रौब जताता है. यूं कि उसका इंग्लैंड जाना आम बात हो. मगर एक बार जब उसका झूठ पकड़ा जाता है, तब उसकी झेंप आप भी महसूस करते हैं.

‘अ सूटेबल बॉय’ की कास्ट और क्रू के लोग (ईशान, तब्बू, मीरा, एंड्रयू, विक्रम)
‘अ सूटेबल बॉय’ की कास्ट और क्रू के लोग (ईशान, तब्बू, मीरा, एंड्रयू, विक्रम)

महसूस तो आप कानपुर की वो बदबूदार गंदी गलियां भी करते हैं, जहां विदेश से जूते के डिजाइन बनाने की पढ़ाई करके आया लता का भावी जीवनसाथी चमड़े की तलाश में जाया करता है.

इन पन्नों में जो लिखा है, उस सब को 6 एपिसोड में मीरा नायर कैसे दिखाएंगी, या दिखा पाएंगी, ये सोचकर ही मन रोमांचित हो जाता है.

#7) विक्रम सेठ-

‘साहित्य अकादमी’,’पद्म श्री’,’प्रवासी भारतीय सम्मान’ जैसे इंडियन अवॉर्ड्स और ‘कॉमनवेल्थ पोएट्री प्राइज़’, ‘ऑर्डर ऑफ़ दी ब्रिटिश एंपायर’, ‘डब्लूएच स्मिथ’ जैसे इंटरनेशनल अवॉर्ड्स से सम्मानित विक्रम सेठ के बारे में कहा जाता है कि जब एक बार बीबीसी बंद करने की सोची जा रही थी तो विक्रम क्वीन एलिज़ाबेथ के पास गए. ये बताने के लिए कि इसे मैं देखता हूं. और फिर बीबीसी बंद नहीं हुआ.

अब ये बात कितनी सही है, कितनी गलत, इसके बारे में कोई सबूत नहीं है. लेकिन किंवदंतियां भी उनके साथ ही जुड़ती हैं जिनका कद एक निश्चित सीमा से बड़ा हो. भारत में उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला थीं लीला सेठ. विक्रम उनके ही बेटे हैं. हालांकि जयपुर में भी उनका एक ठिया है लेकिन वो ब्रिटेन के नागरिक हो चुके हैं. कभी-कभी इंडिया आते हैं तो विवाद खड़े हो जाते हैं. कभी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में श्रोताओं के सामने वाइन पीने को लेकर, कभी ‘370 के विरोध का समर्थन’ करने के लेकर.

विक्रम सेठ के तीन नॉवेल. लेफ्ट से- 'गोल्डन गेट', 'अ सूटेबल बॉय', 'एन इक्वल म्यूज़िक'.
विक्रम सेठ के तीन नॉवेल. लेफ्ट से- ‘गोल्डन गेट’, ‘अ सूटेबल बॉय’, ‘एन इक्वल म्यूज़िक’.

चलते-चलते आपको ये भी बता दें कि विक्रम ‘अ सूटेबल बॉय’ के सिक्वल पर काम कर रहे हैं. ये प्रोजेक्ट पूरा भी हो जाता लेकिन नहीं हुआ. विक्रम ने बताया कि जब-

मेरा संगीतकार बॉयफ्रेंड फिलिप होनोरे के साथ जुड़ा एक लंबा रिश्ता टूटने लगा तो मैं एक ‘अंधेरे/बुरे समय’ में चला गया. और इसके चलते ‘अ सूटेबल बॉय’ का सिक्वल नहीं लिख पाया.

अब देखना ये है कि अंत में लोग क्या याद रखेंगे. विक्रम की ‘लार्जर देन लाइफ’ कही जानी वाली ये नॉवेल, खुद विक्रम, मीरा नायर का स्क्रीन अडैप्टेशन या फिर ये सब कुछ और इसके साथ-साथ बहुत कुछ?


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