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फिल्म रिव्यू: कमांडो 3

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इस वीकेंड विद्युत जामवाल की ‘कमांडो 3’ थिएटर्स में लगी है. सीरीज़ की पिछली दो फिल्मों में वो प्यार और ब्लैक मनी के मामले से जूझ रहे थे. यहां बात देश की है. हमला होने वाला था, आतंकवादियों ने एकदम गायतोंडे स्टाइल में बोल दिया था 30 दिन में बहुत बड़ा हमला होने वाला है. बचा सकता है, तो बचा ले अपने इंडिया को. मतलब मेरे कहे से ज़्यादा ड्रमैटिक तरीके से ये सीन्स फिल्म में है. लेकिन इन सीन्स की ज़रूरत कब पड़ती है, ये आप फिल्म की कहानी पढ़कर समझ जाएंगे.

फिल्म की कहानी

मुंबई में पुलिस ने तीन लड़कों को गाय काटते हुए पकड़ा. इंटरोगेशन के बाद पता चला कि ये लोग इंडिया में अमेरिका के 9\11 की तर्ज पर कुछ करने वाले हैं. 9\11 कीवर्ड को डीकोड करके सीक्रेट एजेंसियां ये पता लगाती हैं कि इस बार दीवाली 11 नवंबर को पड़ रही है. मतलब हमला दीवाली पर होगा. इंडिया से इस मामले के मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए 2 ऑफिसर लंदन जाते हैं. ये दो ऑफिसर वही हैं, जिन्होंने आपने ‘कमांडो 2’ में देखा था. भावना रेड्डी और करणवीर सिंह डोगरा. लंदन में ब्रिटेन इंटेलिजेंस की भारतीय मूल की मल्लिका सूद भी इन्हें जॉइन करेंगे. और ये लोग मिलकर बुराक अंसारी नाम के आतंकवादी को पकड़ेंगे. बुराक अंसारी, जो कि अपनी कट्टर आइडियोलॉजी की वजह पर्सनल लाइफ में परेशान है. अपनी पत्नी से अलग हो गया और बच्चे की कस्टडी भी ले ली. करणवीर बुराक को मारे, इससे पहले बुराक उसे मार देना चाहता है. अब कौन किसे मार पाता है? यही फिल्म की कहानी है, जो आपने फिल्म देखने से पहले ही प्रेडिक्ट कर ली.

 फिल्म के एक सीन में आमने-सामने खड़े करणवीर डोगरा और बुराक अंसारी.
फिल्म के एक सीन में आमने-सामने खड़े करणवीर डोगरा और बुराक अंसारी.

बिजली से फुर्तीले विद्युत जामवाल का कमाल

‘कमांडो’ सीरीज़ की शुरुआत ही विद्युत जामवाल के साथ ही हुई थी. वो तीसरी बार कमांडो बने हैं. सबको पता है कि वो ‘कमांडो’ नाम की फिल्म में अपनी एक्टिंग एबिलिटी की वजह से नहीं हैं. वो उस काम में बेस्ट हैं, जिस काम के लिए उन्हें फिल्म में लिया गया है. जबरदस्त एक्शन. अगर आप इस फिल्म में विद्युत को फाइट करते हुए देखेंगे, तो टाइगर श्रॉफ के लिए आपके मुंह से अनायास ही ‘किड्स’ जैसा विशेषण फूट पड़ेगा. फिल्म के क्लाइमैक्स में दो चाकूबाजों से विद्युत लड़ रहे थे. और मतलब क्या ही लड़ रहे थे. एक्शन सीन्स से भरी इस फिल्म में ये सीन अलग लेवल पे स्टैंड आउट होता है.

ये सब देख रहे हैं आप!.
ये सब देख रहे हैं आप! ऐसे धांसू सीन्स फिल्म में बहुत हैं. 

भावना रेड्डी के रोल में हैं अदा शर्मा. ‘कमांडो 2’ में भी थीं. वो इस फिल्म की कॉमिक रिलीफ हैं. उन्हें एक्शन करने का मौका तो मिला है, लेकिन एक्टिंग करने का नहीं. दूसरी एक्ट्रेस हैं अंगीरा धर. ‘लव पर स्वेयर फुट’ और ‘बैंग बाजा बारात’ जैसी वेब फिल्म और सीरीज़ में काम कर चुकी हैं. उनके हिस्से भी थोड़ा सा एक्शन आता है, दो चार डायलॉग्स. उनके पास तो कॉमेडी वाला स्कोप भी नहीं था. ये फिल्म बेसिकली दो ही लोगों के बारे में है. बुराक यानी गुलशन देवैया और अपने कमांडो विद्युत. गुलशन देवैया की ‘रामलीला’ के बाद शायद ये पहली ही मेनस्ट्रीम फिल्म है. इससे पहले उन्होंने जो काम किया है, वो बहुत सारे लोगों को नहीं पता होगी. शायद उन्हें लोगों को ‘शैतान’ तक लाने के लिए ‘कमांडो 3’ की ज़रूरत पड़ रही है. खैर, गुलशन का कैरेक्टर इस फिल्म में रेगुलर हिंदी फिल्म विलेन जैसा है. उसे वो थोड़ा और रेगुलर बना देते हैं. अपनी आवाज़ के आरोह-अवरोह और स्लो पेस से. ‘इससे पहले कि वो मुझ तक पहुंचे, उसे खत्म कर दो.’ अब सोचिए कि ये डायलॉग गुलशन देवैया जैसा एक्टर बोल रहा है. फिल्म में राजेश तैलंग भी हैं, जो करण के हैंडलर हैं. उन्हें फिल्म में आप हर कुछ मिनट के बाद कुछ सेकंड के लिए देख लेते हैं.

फिल्म के दो अलग-अलग सीन्स में अंगीरा धर और अदा शर्मा.
फिल्म के दो अलग-अलग सीन्स में अंगीरा धर और अदा शर्मा.

फिल्म की बुरी बातें

‘कमांडो 3’ की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इस फिल्म को मसालेदार बनाने के लिए बहुत सारे ऐसे मसाले इस्तेमाल किए गए हैं, जिन्हें जनता आज के समय में हर मुद्दे  के ऊपर छिड़क देना चाहती है. जैसे हिंदु-मुस्लिम, गाय का कटना, देश भक्ति का दिखावा जैसी तमाम चीज़ें इसमें शामिल हैं. ये सस्ते रास्ते थे, जिन्हें सफलता का फॉर्मूला मानकर इस्तेमाल करने के बावजूद फिल्म खो जाती है. ऊपर से आज कल अक्षय कुमार और जॉन अब्राहम की फिल्मों से इंस्पायर होकर ये लोग बात भी उसी तरीके से करने लगे हैं. ऐसे भारी डायलॉग्स, जिसके नीचे सुनने वाला दबकर मर जाए. ‘मैं जज़्बाती नहीं भारतवादी हूं’. भला ऐसे भी कोई बात करता है क्या! फिल्म में दो ही गाने (थैंक गॉड) हैं, जिनके लिए फिल्म में जगह तो नहीं ही थी. लेकिन हैं. एक अपबीट हिप हॉप ट्रैक है ‘तेरा बाप आया’. बैकग्राउंड में ही बजता है. जिसे घर आकर ढूंढ़कर सुना जा सकता है. क्योंकि ट्रेंड में है. दूसरा एक मेलोड्रमैटिक से ट्रैक है, जिसकी हुकलाइन तक नहीं याद आ रही. जो याद नहीं आ रहा, उसे भूल जाते हैं. आपको ढूंढ़ना पड़े, उससे अच्छा ‘बाप आया’ गाना आप यहीं देख लीजिए:

अच्छी बात

अगर फिल्म में कुछ देखने लायक है, तो विद्युत का एक्शन. मतलब वो फाइट सीन्स कैसे करते हैं, इससे ज़्यादा दिलचस्प सवाल है ये है कि वो इतनी सफाई से कैसे करते हैं. आप उनकी सारी गलतियां उनका एक फाइट सीन देखकर माफ कर सकते हैं. ऑब्वियसली, इसमें एक्टिंग को नहीं गिन रहे. एक्टिंग के लिए कोई माफी नहीं. अगर हमारे का कहे का यकीन नहीं, तो आप फिल्म के ट्रेलर में उनके एक्शन का नमूना देख सकते हैं:

फिल्म का विलेन. ना आज का, ना कल का!

फिल्म के साथ मेन दिक्कत ये है कि वो बुराक के प्रेज़ेंट पर बहुत फोकस करती है लेकिन उसकी बैकस्टोरी का कहीं कोई ज़िक्र नहीं है. एक आदमी है, जो मर्डर करते समय अपने बच्चे से आंख खोले रखने के लिए कहता है. उसकी क्या कहानी रही होगी, ये बड़ा दिलचस्प सवाल था. लेकिन फिल्म में इसका जवाब ही नहीं है. ये चीज़ जब-जब बुराक स्क्रीन पर आता है, हर बार खलती है.

फिल्म के एक सीन में क्रेज़ी विलन बुराक अंसारी यानी गुलशन देवैया.
फिल्म के एक सीन में क्रेज़ी विलन बुराक अंसारी यानी गुलशन देवैया.

ओवरऑल एक्सपीरियंस

अगर ओवरऑल एक्सपीरियंस की बात है, तो ये नहीं कहा जा सकता है, ये मस्ट वॉच है, या आपने ऐसा कुछ पहले नहीं देखा होगा. लेकिन ऐसा भी नहीं होता कि आप पक जाएं. फिल्म के साथ बहुत एंगेज नहीं होते मगर साथ में बने रहते हैं. लेकिन फिल्म देशभक्ति वाला लीक पकड़ने के साथ आपको खो देती है. फिल्म आखिरी हिस्से में थोड़ी खिंची हुई सी लगती है. हां, शुद्ध एक्शन में दिलचस्पी है, तो सौदा बुरा नहीं है. हालांकि हमारे कहने से क्या होगा, वैसे भी मंथ एंड चल रहा हैं.

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