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फिल्म रिव्यू- बंटी और बबली 2

2005 में आई फिल्म ‘बंटी और बबली’ का सीक्वल ‘बंटी और बबली 2’ सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है. ओरिजिनल फिल्म में राकेश और विम्मी नाम के दो लोगों की कहानी दिखाई गई थी. इन दोनों को ही उनकी फैमिली कन्वेंशनल लाइफ जीने के लिए प्रेशराइज़ कर रही थी. मगर उन्हें लाइफ में कुछ अलग करना था. सो उन्होंने लोगों को ठगना शुरू कर दिया. क्योंकि इसमें उन्हें मज़ा आ रहा था. सबकुछ सही चल रहा था मगर फिर उन दोनों को प्रेम हो गया. बच्चा हो गया. बच्चे की खातिर उन्होंने खुद को ठगी के बिज़नेस से अलग कर लिया.

‘बंटी और बबली 2’ की कहानी ओरिजिनल फिल्म के खत्म होने के 16 साल बाद शुरू होती है. क्योंकि अचानक से उत्तर प्रदेश में लोगों के साथ फिर से ठगी होने लगी है. अंदाज़, मिजाज़ और बिल्ला सबकुछ बिल्कुल बंटी-बबली स्टाइल. ऐसे में पुलिस सीधे पहुंचती है राकेश त्रिवेदी और विम्मी सलूजा के लखनऊ वाले आवास पर. दशरथ सिंह के रिटायर होने के बाद इस केस को संभाल रहे हैं जटायू सिंह. जटायू को शक कम भरोसा ज़्यादा है कि ये सब बंटी और बबली का ही किया धरा है. मगर चेन ऑफ इवेंट्स के बाद उन्हें रियलाइज़ होता है कि इस बदनाम जोड़ी के नाम पर ठगी कोई और कर रहा है. ऐसे में वो ओरिजिनल बंटी-बबली से फर्जी बंटी-बबली को पकड़ने में मदद लेते हैं. फिल्म की बेसिक स्टोरी इतनी ही है.

'बंटी और बबली 2' की स्क्रिप्ट सुनने के बाद सैफ अली खान और रानी मुखर्जी.
‘बंटी और बबली 2’ की स्क्रिप्ट सुनने के बाद सैफ अली खान और रानी मुखर्जी.

‘बंटी और बबली 2’ को देखने के दौरान ही ये लगने लगता है कि ये सिर्फ ओरिजिनल फिल्म की सफलता को कैश करने के मक़सद से बनाई गई है. क्योंकि इसमें कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जो पहली फिल्म से बेहतर या नई हो. यहां तक कि सोनिया और कुणाल यानी नए जेनरेशन के बंटी-बबली के ठगी के धंधे में आने की वजह भी राकेश और विम्मी जैसी है है. इस फिल्म का फर्स्ट हाफ ये एस्टैब्लिश करने में खर्च होता है कि नए बंटी-बबली भी काफी बढ़िया ठग हैं. फिल्म बीच-बीच में आपके ऊपर ओरिजिनल फिल्म के रेफरेंसेज़ फेंकती रहती है. ये ऐसी चीज़ है, जो ऑर्गैनिक तरीके से फिल्म में आनी चाहिए थी. मगर ये अधिकतर मौकों पर ठूंसा हुआ सा फील देती है. मानों फिल्म आपसे कह रही हो, याद है पिछली फिल्म में भी ये हुआ था. यही दिक्कत वाला मसला है. जो पहली फिल्म में हुआ था अगर हमें वही देखना होता, तो हम 2005 वाली बंटी और बबली देख लेते. नई फिल्म की क्या ज़रूरत थी.

फिल्म की दोनों नई एंट्रीज़ कॉन हैं. इन दोनों के नाम हैं कुणाल और सोनिया.
फिल्म की दोनों नई एंट्रीज़ कॉन हैं. इन दोनों के नाम हैं कुणाल और सोनिया.

‘बंटी और बबली 2’ में जिन दो नए किरदारों की एंट्री हुई है. वो हैं इंजीनियरिंग पास आउट कुणाल और सोनिया. फिल्म इन्हें किसी तरह की कोई बैकस्टोरी देने का जहमत नहीं उठाती. उन्हें इसलिए कास्ट गया लगता ताकि फिल्म को थोड़ा मिलेनियल फील दिया जा सके. सिद्धांत चतुर्वेदी ने अपनी पिछली फिल्मों में जैसी परफॉरमेंस दी है, उसके बाद उन्हें ऐसे प्रोजेक्ट में देखना थोड़ा डिस-अपॉइंटिंग है. क्योंकि यहां उन्हें फैनबॉयिश बिहेव करने के अलावा कुछ नहीं है. Gen-Z बबली बनी हैं डेब्यूतांत शरवरी वाग. शरवरी अपनी पहली फिल्म के लिहाज़ से काफी कॉन्फिडेंट लगती हैं. उन्हें देखकर ये नहीं लगता कि वो कुछ ऐसा करने की कोशिश कर रही हैं, जो वो पहली बार कर रही हैं. ओरिजिनल फिल्म में राकेश त्रिवेदी यानी बंटी का रोल अभिषेक बच्चन ने किया था. इस फिल्म में उनकी जगह सैफ अली खान को कास्ट किया गया है. सैफ अली खान यूपी वाले लहज़े में बात करते हुए थोड़े ऑकवर्ड और अन-कंफर्टेबल लगते हैं. ये फिल्म रानी मुखर्जी ओन करती हैं. वो खूब लाउड और ओवर द टॉप हैं. मगर यही उस कैरेक्टर की सबसे खास बात है. इसीलिए वो फनी लगती हैं. उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानों ‘बंटी और बबली’ फ्रैंचाइज़ को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी उन्हीं के कंधे पर है.

नए बंटी और बबली को पकड़ने के लिए पुलिस की मदद को पहुंचते ओरिजिनल बंटी-बबली उर्फ राकेश और विम्मी.
नए बंटी और बबली को पकड़ने के लिए पुलिस की मदद को पहुंचते ओरिजिनल बंटी-बबली उर्फ राकेश और विम्मी.

‘बंटी और बबली 2’ ओवरऑल एक ऐवरेज फिल्म है और बिलो ऐवरेज सीक्वल. ये फिल्म अपने होने को जस्टिफाई नहीं कर पाती. यही इसकी सबसे बड़ी कमी है. कोई भी फिल्म ढेर सारे लोगों की मेहनत और खूब सारा पैसा खर्च करके बनती है. हर फिल्म का एक मक़सद होता है. कोई फिल्म एक कहानी कहना चाहती है. कोई सोशल मैसेज देना चाहती है. कोई फिल्म खालिस एंटरटेनमेंट के लिए बनाई जाती है. मगर ‘बंटी और बबली 2’ को देखकर ऐसा लगता है कि ये ओरिजिनल फिल्म की पॉपुलैरिटी के दम पर पैसे कमाने के मक़सद से बनाई गई है. सिनेमा एक आर्ट फॉर्म है. पैसा-वैसा सेकंड्री चीज़ है. मगर जब तक पैसा नहीं आएगा, अगली फिल्म नहीं बन पाएगी. इसका मतलब ये नहीं कि पैसे की वजह से आर्ट फॉर्म को बैकसीट पर बिठा दिया जाए. मगर ‘बंटी और बबली 2’ देखकर यही भाव महसूस होता है.

फिल्म के सेकंड हाफ में ऑलमोस्ट रेस वाले लुक में सैफ अली खान. बस उनके कैरेक्टर नाम रणवीर की बजाय राकेश है.
फिल्म के सेकंड हाफ में ऑलमोस्ट रेस वाले लुक में सैफ अली खान. बस उनके कैरेक्टर नाम रणवीर की बजाय राकेश है.

हालांकि अगर आप ओरिजिनल फिल्म की कॉलबैक वैल्यू की वजह से ‘बंटी और बबली 2’ देखना चाहते हैं, तो आपके लिए ओरिजिनल फिल्म देख लेना ही बेहतर ऑप्शन होगा. थिएटर्स में जनता की वापसी का मोह एक तरफ है. मगर इसका मतलब ये नहीं कि आप कुछ भी बनाएं और पब्लिक को इमोशन ब्लैकमेल करके थिएटर्स में लाएं.


वीडियो देखें: फिल्म रिव्यू- कुरूप

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