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वो छह कमाल के रैपर, जिन्होंने हनी-बादशाह और 'गली बॉय' से बहुत पहले क्रांति कर दी थी

देसी-हिप हॉप. RAP. यानी Rhythm and Poetry. आजकल हिंदुस्तान में हिप-हॉप का ठीक-ठाक क्रेज़ है. इस हिप हॉप लहर का क्रेडिट जाता है ज़ोया अख्तर की फ़िल्म ‘गली बॉय’ को. जिसमें रणवीर सिंह रैपर के अवतार में दिखे. इस फ़िल्म के बाद इंडिया का अंडरग्राउंड हिप-हॉप सीन मैप पर आ गया. कुछ अच्छे रैपर भी दुनिया की नज़र में आए, जो बेमिसाल हैं. कुछ ‘जैक एंड जिल’ करने वालों की भी गाड़ी चल पड़ी. लेकिन इस आंधी से पहले भी एक तूफ़ान आया था रैप का. वो तूफ़ान लाए थे यो यो हनी सिंह. कोई माने या ना माने हनी सिंह ही वो इंसान है, जिसने ‘रैप’ का चस्का बॉलीवुड को लगाया. इस चस्के की बदौलत बाकी रैपर्स का रास्ता खुला बॉलीवुड में. हालांकि हनी रैपर नहीं हैं. रैपर वो होता है जो रैप लिरिक्स खुद लिखता है. हनी के ज्यादातर गाने दूसरों के लिखे हुए हैं. लेकिन उनका फ्लो और माइक थ्रो बिल्कुल रैपरों वाला है.

हनी सिंह की ‘इंटरनेशनल विलेजर’ अल्बम का हिट ट्रैक ‘अंग्रेजी बीट’ जब सैफ अली खान ने अपनी गाड़ी में सुना, तो उन्हें बहुत अच्छा लगा. इतना कि अपनी फिल्म ‘कॉकटेल’ के लिए 70 लाख में खरीद लिया. फिर एक ओरिजनल गाना भी करवाया ‘मैं शराबी’. यहीं से हनी सिंह और रैप का बॉलीवुड में जन्म हुआ. ऐसा हुआ कि शाहरुख, सलमान, अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार जैसे सितारे अपनी फिल्मों में ना सिर्फ हनी सिंह का रैप लेते थे, बल्कि म्यूज़िक वीडियो में भी हनी सिंह लगता ही था. हनी के बाद बादशाह और बादशाह के बाद रफ्तार. इन माफ़िया मुंडीरों ने अलग-अलग वक़्त पर बॉलीवुड को अपने गानों पर खूब थिरकाया. लेकिन इनसे पहले बहुत पहले इंडिया में ‘रैप’ आ चुका था. लोगों ने सुना भी खूब. बस ये नहीं पता था जो सुन रहे हैं वो रैप है. आज आपको ऐसे ही कुछ रैपर्स के बारे में याद दिलाते हैं.

# बाबा सहगल

रैपिंग के साथ साथ बाबा ने कई फिल्मों में एक्टिंग भी की है.
रैपिंग के साथ साथ बाबा ने कई फिल्मों में एक्टिंग भी की है.

हरजीत सिंह सहगल AKA बाबा सहगल. इंडिया का पहला रैप स्टार. 1990 में बाबा का पहला अल्बम आया ‘दिलरुबा’, लेकिन चला नहीं. उसके अगले साल आया ‘अलीबाबा’. ये भी नहीं चला. उस वक़्त पॉप कल्चर इंडिया में सक्रिय नहीं हुआ था. 1992 में एम टीवी  इंडिया में आया. लोगों की वर्ल्ड म्यूज़िक से पहचान हुई. इसी साल बाबा सहगल का अल्बम आया ‘ठंडा ठंडा पानी’. जिसके पॉपुलर ट्रैक ‘दिल धड़के’ में थीं पूजा बेदी. ये एल्बम आया और इंडिया में छा गया. 50 लाख से ऊपर कैसेट्स बिकीं. ये इंडिया का पहला हिट रैप अल्बम था.

बाबा इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट थे, कभी बॉलीवुड के पीछे नहीं भागे. लेकिन 1994 में अनु मलिक के बोलने पर फ़िल्म में गाने को रेडी हो गए. फ़िल्म थी ‘मैडम 420’. गाना निकला ‘आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा’. ऐसा निकला कि बाबा की निकल पड़ी. ये गाना हर जगह चार्टबस्टर था. लेकिन फिर दौर बदला. धीरे-धीरे बाबा ओझल होते गए. तमिल-तेलुगु फिल्मों में विलन बन गए. बीच मे बिग बॉस भी कर लिया. सालों बाद इंडिया में एक बार रैप कल्चर फिर लौटा. बड़े ज़ोरदार तरीके से. बाबा सहगल ने भी अपना यूट्यूब चैनल खोल लिया. कुछ ‘चिकन फ्राइड राइस’ और ‘जिम जाया करो’ जैसे गाने निकाले, जो थोड़े बहुत चल भी रहे हैं. बाबा पहले रैप स्टार हैं. लेकिन ये भी कटुसत्य है कि बाबा सहगल के रैप के लिरिक्स उतने स्ट्रांग नहीं होते थे. जबकि इस वक्त तो शब्दों की ज्वाला जलाने वाले रैपर हैं. बहरहाल जो भी हो, ये फैक्ट कोई नहीं छीन सकता कि बाबा सहगल ही इंडिया में रैप लाये थे.

# देवांग पटेल

देवांग की अंग्रेज़ी गानों की गुजराती पैरोडी गुजरात में काफ़ी लोकप्रिय हैं.
देवांग की अंग्रेज़ी गानों की गुजराती पैरोडी गुजरात में काफ़ी लोकप्रिय हैं.

1995 में गोविंदा की फ़िल्म आई थी ‘द गैम्बलर’. फ़िल्म गोविंदा की कॉमेडी के बलबूते चल भी गई. इसी फिल्म में दो रैप सॉंग्स थे ‘मेरी मर्ज़ी’ और ‘स्टॉप दैट’. फ्री स्टाइल रैप थे. रैपर थे देवांग पटेल. इनका गुजरात में बड़ा नाम है. अंग्रेज़ी और हिंदी गानों का गुजराती में पैरोडी भी निकालते रहते हैं. देवांग के ये दो गाने बहुत पॉपुलर हुए. दोनों गानों में गोविंदा का डांस भी जबर है. एकदम सीटीमार टाइप. इनका केस भी हनी सिंह जैसा ही है. रैप डिलीवरी इन्होंने की है लेकिन लिखा विनय दवे ने हैं. लेकिन आज भी ये ट्रैक्स कहीं बजते हैं, तो सब डब्बू अंकल बन जाते हैं. क्योंकि गोविंदा तो कोई बन नहीं सकता. अब ये मत पूछना कौन डब्बू अंकल.

# जावेद जाफ़री

डांसिंग, रैपिंग, एक्टिंग, वॉइस एक्टिंग जैसे अनेकों हुनर से लैस हैं जावेद .
डांसिंग, रैपिंग, एक्टिंग, वॉइस एक्टिंग जैसे अनेकों हुनर से लैस हैं जावेद .

वो इंसान जिसकी नसों में खून से ज़्यादा टैलेंट है. उसी में एक टैलेंट बहता है रैप का. वो भी ऐसा वैसा नहीं ज़बरदस्त वाला. 1998 में फ़िल्म आयी थी ‘बॉम्बे बॉयज़’. समय से आगे की फ़िल्म थी कई लेवल्स पर. इसी फिल्म में जावेद का कैमियो था एक रैप सांग में. जिसका नाम था ‘मुमभाई’. फ़िल्म की तरह ये ट्रैक भी समय से आगे का था. गाना खूब चला भी. पूरा रैप जावेद जाफ़री का था. यानी राइटिंग एंड डिलीवरी दोनों.

2014 में जावेद नेतागिरी में उतरे. 2014 के लोकसभा चुनाव में लखनऊ से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए. चुनाव लड़ने से पहले जेजे ने एक रैप सॉंग रिलीज़ किया था. जिसका नाम था ‘मेरा भारत महान…एग्जैक्टली’. ये देश के हालात पर डिस रैप था. जिसमे वो 2005 में आई ‘सलाम नमस्ते’ के क्रोकोडाइल डंडी अवतार में थे.

# हार्ड कौर

'जॉनी गद्दार', 'सिंह इज़ किंग' जैसी कई फिल्मों में हार्ड कौर ने रैप किया है.
‘जॉनी गद्दार’, ‘सिंह इज़ किंग’ जैसी कई फिल्मों में हार्ड कौर ने रैप किया है.

कानपुर में जन्मी तरन कौर ढिल्लों जो UK जाकर हार्ड कौर बन गई. गली बॉय में एक डायलॉग है ‘लाइफ में सब कम्फर्टेबल होते, तो रैप कौन बनाता’. बात शत प्रतिशत सच है. हार्ड कौर की लाइफ में भी कम्फर्ट नाम की चीज़ कई सारी परेशानियों से जूझने के बाद ही मिली.

साल 2007 में रिलीज़ हुई ‘जॉनी गद्दार’ के गाने ‘मूव योर बॉडी’ से हार्ड कौर मैप पर आईं. हम तो सुबह 6 बजे की ट्यूशन जाने से पहले इनका ‘मूव योर बॉडी’ भजन की तरह सुनते थे. गाना बंपर हिट हुआ और धीरे-धीरे हार्ड कौर की डिमांड बढ़ती गई. इसके बाद ‘मैं टल्ली’, ‘चार बज गए’ जैसे कई गाने भी ज़बरदस्त हिट हुए. लेकिन पूरे गाने हिट हुए. हार्ड कौर का रैप नहीं. हार्ड कौर को लोगों ने सिंगर की तरह जाना, रैपर की तरह नहीं. इसका मेन कारण रही भाषा. हार्ड कौर ने ज़्यादातर रैप इंग्लिश और पंजाबी में किए. शायद इस वजह से ही वो पॉप-स्टार ज़्यादा रहीं, रैपर कम. फिर यो यो साब आ गए और जो देसी एलिमेंट हार्ड कौर समझ नहीं पाईं, वो हनी ने समझ लिया और क्रांति मचा दी. हार्ड कौर हनी से चिढ़ी भी. सलमान के बिग बॉस में जाकर बोल दिया ‘यो यो करने से रैपर नही बनते हैं, मैं नही पहचानती ऐसे रैपरों को’. जो भी हो हार्ड कौर का छोटा ही सही लेकिन दौर तो था.

# बोहेमिया

फ़िल्म स्टार अक्षय कुमार बोहेमिया के काफ़ी अच्छे दोस्त हैं .
फ़िल्म स्टार अक्षय कुमार बोहेमिया के काफ़ी अच्छे दोस्त हैं .

रॉजर डेविड AKA बोहेमिया. देसी हिप-हॉप, असली देसी हिप-हॉप को बोहेमिया ने ही जन्म दिया है. ‘असली’ यहां कीवर्ड है. आज के जितने भी टॉप रैपर्स हैं, सब एक बात कॉमन बोलते हैं कि वो बोहेमिया को देखकर हिंदी या पंजाबी में रैप करना सीखें हैं. बोहेमिया का जन्म पाकिस्तान के पेशावर में हुआ. वहीं स्कूल में पढ़े. 13 साल की उम्र में उनकी फैमिली अमेरिका शिफ्ट हो गयी. कुछ सालों बाद अमेरिका में उनके कज़िन ने एक इंग्लिश रैपर से उन्हें इंट्रोड्यूस कराया .उस वक़्त बोहेमिया की इंग्लिश कच्ची थी. लेकिन हिप-हॉप को वो समझ गए. पंजाबी में ही रैप लिखने लगे. अपनी कहानी लिख डाली रैप फॉर्म में. यही रैप उनकी पहली अल्बम बनी ‘विच परदेसा दी’.

2006 में यूनिवर्सल म्यूज़िक ग्रुप के साथ डील साइन की. उनका गाना ‘पैसा नशा प्यार’ इंडिया से लेकर यूके तक चार्टबर्स्टर था. 2009 में अक्षय कुमार की ‘चांदनी चौक टू चाइना’ के टाइटल ट्रैक में रैप किया. पहली बार हिंदी में. कुछ महीनों बाद अक्षय की ही फिल्म ‘8×10 तस्वीर’ का भी टाइटल ट्रैक गाया. अक्षय कुमार से ऐसी दोस्ती हुई कि अक्षय की पहली फॉरेन फ़िल्म ‘ब्रेकअवे’ (स्पीडी सिंह) के लिए अपना गाना ‘संसार’ गिफ्ट के रूप में दे दिया. अक्षय के बोलने पर ‘देसी बोयज़’ के ‘सुबह होने न दे’ में भी रैप कर दिया. भई ऐसी ही नहीं कहते बोहेमिया द किंग.

# इश्क़ बैक्टर

2008 में इश्क़ के गाये कई ट्रैक्स ज़बरदस्त लोकप्रिय हुए थे .
2008 में इश्क़ के गाये कई ट्रैक्स ज़बरदस्त लोकप्रिय हुए थे .

इश्क़ का जन्म कैनडा में हुआ. वैसे ज़्यादातर बतौर प्लेबैक सिंगर एक्टिव हैं. लेकिन इंडिया में इनकी पहचान इनके दो रैप ट्रैक्स की वजह से हुई. पहला ‘ऐ हिप हॉपर’ जो कि इश्क़ ने सुनिधि चौहान के साथ निकाला. दूसरा ‘डाकू डैडी’ जिसके म्यूज़िक वीडियो में शक्ति कपूर थे. अगर आप नाइंटीज़ में पैदा हुए हैं, ये गाने आपके जीवन का हिस्सा ज़रूर रहे होंगे. दिन में पचास बार 9XM और MTV पर जो आते थे. इश्क़ के यही दो गाने फेमस हुए. इन्ही गानों की वजह से ही उनको पहचान मिली. लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ यही दो गाने गाए हैं.

इश्क़ ने फिल्मों में भी कई गाने गाए हैं. शुरुआत हुई 2005 में आई बॉबी देओल की फ़िल्म ‘बरसात’ से. इसके बाद ‘बेशर्म’, ‘गॉड तुस्सी ग्रेट’हो’ जैसी दर्जनों फिल्मों में गाया हैं. इश्क़ चैनल वी में वीजे भी रह चुके हैं. सोनी के रियलिटी शो ‘इस जंगल से मुझे बचाओ’ में भी शिरकत की थी. इश्क़ मुंबई के धारावी में ‘आफ्टर स्कूल ऑफ हिप-हॉप’ भी चलाते हैं. जहां वो स्लम्स के बच्चों को हिप-हॉप म्यूज़िक सिखाते हैं. साल भर पहले उन्होंने धारावी के बच्चों के साथ ‘नाच ना शाने’ नाम से एक म्यूज़िक वीडियो भी रिलीज़ किया था, जो कि खूब चला भी.

 

ये थे कुछ लोग जो हनी-बादशाह से सालों पहले आए. आज वक़्त बदल चुका है. गली बॉय ने काफी हद तक असली हिप-हॉप से हिंदुस्तान को मिलवा दिया है. कई अच्छे कलाकारों को आज प्लेटफॉर्म और ऑडियंस मिल गयी है. हिप-हॉप आज गांव की गली से लेकर शहरों के क्लब्स तक हर जगह बज रहा है. बहुत लोगों को लगता है ये आसान है कोई भी कर सकता है लेकिन रैप का मतलब सिर्फ राइम करना नहीं है.

‘सब रैपर ही बनते है कमरे में

जब तक रैपर नहीं आता है कमरे में’


ये स्टोरी दी लल्लनटॉप में इंटर्नशिप कर रहे शुभम ने लिखी है.


वीडियो: मनोज बाजपेयी का गाया यह भोजपुरी रैप इतना वायरल क्यों हो रहा है?

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