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'सम्मान दुनिया की सबसे खतरनाक चीज है'

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अपने देश ने दुनिया को बहुत कुछ दिया. जीरो दिया. दशमलव दिया. मसाले दिए. गांधी से लेकर सुंदर पिचाई तक दिए. सुंदर को नहीं जानते तो गूगल करो. गूगल के CEO हैं वो. नासा में सबसे ज्यादा वैज्ञानिक इंडिया के हैं. लेकिन गुरू एक जगह आकर हम अटक जाते हैं.

कोई भी ऐरा गैरा मुंह खोल कर पूछ देता है. कि दुनिया के महान दार्शनिकों का नाम बताओ. अपना पढ़ा हुआ उगलने लगोगे. प्लेटो, रूसो, सुकरात, अरस्तू से नास्त्रेदमस तक. लेकिन अपने देश के दार्शनिक का नाम याद नहीं आता. ओशो का नाम नहीं लेते. काहे कि उनकी ‘संभोग से समाधि तक’ पढ़ी थी स्कूल की क्लास में छिपाकर. तब ये भी पढ़ा दिया गया था कि ये सब अश्लील होता है. वो दिमाग में घुसा है. इसलिए ओशो खारिज.

अब बताते हैं और बड़े दार्शनिक के बारे में. जिद्दू कृष्णमूर्ति. 12 मई, यानी आज ही के दिन 1895 में पैदा हुए थे. तेलुगू फैमिली में. इनके पापा जिद्दू नारायणिया ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन में थे. मम्मी संजीवम्मा के बहुत करीब थे. लेकिन किस्मत का खेल देखो. 10 साल के थे तो मां दुनिया छोड़ गई. धर्म, मेडिटेशन, प्यार, रिश्ते, सेक्स, समाज, दुनियादारी से मौत तक हर चीज में इतनी गजब की थ्योरी दी है कि सब कुछ सीखने समझने लायक. इनमें से कुछ खास चीजों पर उनके जो विचार थे वो पढ़ो. हम आसान भाषा में बता रहे हैं.

1: प्यार और सम्मान:

आदर सम्मान दुनिया की सबसे नकारा और बेकार चीज है. ये तमाम बुराइयों को छिपाता है. असली नैतिकता वहां होती है जहां प्रेम होता है. जहां प्यार हो, वहां कुछ भी करो. वो मोरली करेक्ट होगा.

2: दुख:

हमारे यहां परंपरा है दुख में सुख भोगने की. माने सुख को कंपल्सरी बताया गया. वेस्टर्न कल्चर में भी ये आम है और अपने देश में भी. वो बताते हैं कि दुख तकलीफ आपको झेलना ही होगा. शारीरिक और मानसिक भी. तब जाकर जिंदगी सफल होगी. कोई ये नहीं बताता कि दुख अनिवार्य नहीं है. बल्कि ये जिंदगी का सत्यानाश करने के लिए होता है. ये किसी भी तरह हमारी पर्सनैलिटी डेवलप नहीं करता.

3: पसंद नापसंद:

किसी चीज को चुनना या पसंद करना जजमेंटल होने की निशानी है. कभी कभी चीजों को देखो तो पसंद या नापसंद का खयाल मत लाओ. बस देखो. जब आप किसी भी चीज के बारे में झट से राय बना लेने या सेलेक्ट-रिजेक्ट करने की मानसिकता से छूट जाएंगे. तब जाकर बनोगे एक कायदे का कंप्लीट इंसान.

4: रिश्ते:

रिश्ते होते हैं आईने की तरह. जिनमें आदमी खुद को देखता है. अपनी असलियत दिखती है रिश्तों में. दुनिया की कोई भी चीज ऐसी नहीं है जो किसी से जुड़ी न हो. वो जिससे जुड़ी होती है उससे रिश्ता होता है. रिश्तों से भागना पॉसिबल नहीं. इन्हीं रिश्तों में हम अपने रिएक्शन, गुस्सा, डर, तनाव, अकेलापन और तकलीफ देखते हैं.

5: मौत:

अपने आसपास देखो. चिड़िया को देखो. क्या लगता है कि वो कभी मरने के बारे में कभी सोचती होगी? पेड़ से गिरती पीली पत्ती को देखो. क्या वो मरने से डरती है? नहीं डरती भाईसाब. वो जीने में बिजी होती है. चिड़िया अपना घोसला बनाने में, बच्चों को चुगाने में लगी रहती है. हमेशा उड़ती रहती है. उनको ये सोचने की फुरसत ही नहीं कि “आगे क्या होगा.”

इसका हिसाब केवल इंसान रखता है. वो कभी जी नहीं पाता. मौत का डर उसे जीने नहीं देता. जब तक वो मरने के बारे में सोचना नहीं छोड़ता, जी नहीं सकता.


 

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