Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

क्या पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि भाजपा EVM हैक कर के गुजरात चुनाव जीती?

758
शेयर्स

‘EVM’ और ‘हैकिंग.’ ये दोनों शब्द इतनी बार साथ लिखे जा चुके हैं कि अब तो फोन का ऑटोकरेक्ट भी EVM टाइप करने पर अगला शब्द ‘हैकिंग’ सजेस्ट कर देता है. ये तब है, जब कुछ भी साबित नहीं हुआ है. लेकिन फेक न्यूज़ चलाने वालों को भी पेट भरना होता है, इसलिए वो जब जी में आए, वहां ईवीएम हैकिंग की खबर चला देते हैं. गुजरात चुनाव के पहले चरण में दिनभर ईवीएम हैकिंग के दावे किए जाते रहे. एक और बम इधर इन दिनों भी गिरा है, एक पूर्व चुनाव आयोग का नाम नत्थी कर के.

गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए, तब ये कहा जाने लगा कि भाजपा ने EVM हैक कर के चुनाव जीते हैं. लेकिन हार्दिक पटेल के बयान को सीरियसली लिया नहीं जा रहा था. शायद इसलिए पूर्व चुनाव आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति का नाम लगाकर यही दावा किया जाने लगा. कम से कम एक वेबसाइट ने ये खबर चलाई. उसके बाद एक हिंदी अखबार ने इसे छाप भी दिया.

डेलीग्राफ पर ये खबर अब भी लगी हुई है.
डेलीग्राफ पर ये खबर अब भी लगी हुई है.

21 दिसंबर, 2017 को The Dailygraph ने लिखा,

”पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने यह कह कर सनसनी फैला दी है कि उत्तर प्रदेश उत्तराखंड गुजरात और हिमाचल प्रदेश का चुनाव सिर्फ और सिर्फ बीजेपी नें ईवीएम हेकिंग की वजह से जीता है.

कांग्रेस और समूचे विपक्ष को ईवीएम पर खुलकर विरोध और आदोलन तब तक करना चाहिए जब तक मोदी सरकार ईवीएम बैन कर बैलेट पेपर्स से चुनाव की घोषणा न कर दे.”

फिर यही खबर एक हिंदी अखबार ने छापी. किसने, ये फिलहाल हम नहीं जानते.

एक हिंदी अखबार ने डेलीग्राफ की खबर को जैसा का तैसा छापा, बिना टाइपो ठीक किए.
एक हिंदी अखबार ने डेलीग्राफ की खबर को जैसा का तैसा छापा, बिना टाइपो ठीक किए.

तो सच क्या है?

जो सच है, वो चार बिंदुओं में आपके सामने प्रस्तुत है-

#1. एक बात जो सत्रह आने (सोलह से एक ज़्यादा, कॉन्फिडेंस पर गौर करें) सही है, वो ये कि The Dailygraph और इस गुमनाम अखबार के पास ढंग के सब एडिटर नहीं हैं जो एक ठीक-ठाक कॉपी लिख सकें और बिना गलती पब्लिश कर सकें.

#2. दूसरी बात ये कि कृष्णमूर्ति फरवरी 2004 से मई 2005 तक देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे हैं. अगर उन्होंने गुजरात और हिमाचल चुनाव में EVM हैकिंग बारे में कुछ कहा होता वो सारे अखबारों की लीड स्टोरी बनती. लेकिन कृष्णमूर्ति का ये बयान इंटरनेट पर दूर-दूर तक नहीं मिलता. सिर्फ एक वेबसाइट ने इसे रिपोर्ट किया और एक नामालूम अखबार ने बिना एडिट किए उसे छाप दिया.

टीएस कृष्णमूर्ति ने गुजरात चुनाव के वोट गिनती के दिन ही बयान देकर EVM की तरफदारी की थी.
टीएस कृष्णमूर्ति ने गुजरात चुनाव के वोट गिनती के दिन ही बयान देकर EVM की तरफदारी की थी.

#3. तीसरी बात ये कि ऑल्ट न्यूज़ नाम की वेबसाइट ने इस बारे में कृष्णमू्र्ति से बात की थी. कृष्णमूर्ति ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया,

‘ये गलत है. मैंने गुजरात चुनाव में EVM के प्रयोग के बारे में कभी अपनी राय नहीं दी. मैंने EVM का बचाव ही किया है. मुझे EVM पर कोई संदेह नहीं.”

#4. अब चौथी बात पर आइए. गुजरात चुनाव के नतीजे आए थे 18 दिसंबर, 2017 को. इसी दिन कृष्णमूर्ति का एक बयान देशभर की न्यूज़ वेबसाइट्स पर छपा था. इसमें उन्होंने कहा कि गुजरात और हिमाचल चुनाव में असल विजेता EVM हैं और अब उन पर संदेह बंद होना चाहिए. ये बात कहने वाला शख्स भला इसका ठीक उलटा बयान क्यों देगा, और अगर देगा, तो मीडिया से बच कैसे जाएगा?

कृष्णमूर्ति चुनाव प्रक्रिया में सुधार को लेकर लगातार अपनी बात रखते रहते हैं.
कृष्णमूर्ति चुनाव प्रक्रिया में सुधार को लेकर लगातार अपनी बात रखते रहते हैं.

बयान देते रहते हैं कृष्णमूर्ति, लेकिन तरीके के

कृष्णमूर्ति चुनाव प्रक्रिया को लेकर बयान देते रहते हैं. उन्होंने 8 जनवरी, 2018 को उन्होंने कहा कि अगर एक सीट पर नोटा (NOTA) पर पड़े मतों की संख्या जीतने वाले कैंडिडेट की विनिंग मार्जिन (जीतने वाले प्रत्याशी और दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी के बीच मतों का अंतर) से ज़्यादा हो तो दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत में चल रहे ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम’ (जिसमें सबसे ज़्यादा मतों वाला प्रत्याशी जीत जाता है, न्यूनतम वोट की कोई बंदिश नहीं होती और हारने वाले कैंडिडेट के हाथ कुछ नहीं आता) को बदलने का वक्त आ गया है और जीतने वाले कैंडिडेट पर कम से कम 33.33 % वोट की अनिवार्यता लागू करनी चाहिए.

लेकिन EVM हैकिंग से जुड़ा कोई बयान उन्होंने नहीं दिया, यही सच है.


ये भी पढ़ेंः

ईवीएम में गड़बड़ी पर इलेक्शन कमीशन ने क्या सच में ये लेटर जारी किया था?

गुजरात चुनाव के पहले ही दिन EVM मशीनों के हैक होने का सच ये है

EVM में गड़बड़ी के इल्ज़ामों का ‘भेड़िया आया भेड़िया आया’ में बदल जाना खतरनाक है

ईवीएम का रोना रोने वालो… बैलेट से चुनाव में भी BJP ही आगे है, समझो कैसे

6 सुबूत जो दिखाते हैं कि ईवीएम हैक नहीं हो सकती!

 Video: समझिए रैंकिग पर्सेंटेज और पर्संटाइल का फर्क होता क्या है?

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
Ex Chief Election Commissioner T S Krishnamurthy’s alleged statement about EVM hacking leading to BJP’s win in Gujarat polls is a hoax

10 नंबरी

सिद्धारमैया से पहले वो कौन से नेता थे, जो मुख्यमंत्री रहते अपना चुनाव हार गए

शीला दीक्षित तो याद ही होंगी. तीन बार की मुख्यमंत्री और अरविंद केजरीवाल ने फुल स्टॉप लगा दिया था.

'रेस 3' का ट्रेलर देखकर लगता है, ये 'टाइगर ज़िंदा है' से एक कदम आगे की फिल्म है

इतना एक्शन तो सलमान ने जिंदगी में नहीं किया होगा. यकीन न हो तो ट्रेलर देख लो!

कर्नाटक चुनाव 2018: क्या कुछ करके दिखा पाए मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों के बच्चे

शिमोगा की सोराब सीट पर तो सगे भाई एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे, जिनके पिता मुख्यमंत्री रहे हैं.

'गो गोवा गॉन' वाले कृष्णा डीके की वेब सीरीज, 'द फैमिली मैन' की 6 खास बातें

अक्षय खन्ना को करना था लीड रोल, मगर इस सबसे जरूरी वजह से आया मनोज बाजपेयी के हिस्से.

'आज फ़िर जीने की तमन्ना है', एक गीत, सात लोग और नौ किस्से

जिस गाने को लिखनेवाले ने इस अल्बम के लिए रेगुलर से कई गुना ज़्यादा पैसे मांग लिए थे.

जिसके नाम पर सलमान का नाम 'टाइगर' पड़ा, उसका रोल अर्जुन कपूर करने जा रहे हैं

सलमान को जिस एजेंट के रोल में देखा था, पढ़िए उस असली 'टाइगर' की कहानी कितनी खतरनाक थी.

जॉन अब्राहम की 'परमाणु' उस मिशन पर बनी है जो करने से अमेरिका ने इंडिया को मना किया था

वो काम जिसे करने के बाद पूरी दुनिया इंडिया से नाराज़ हो गई थी.

'सम्मान दुनिया की सबसे खतरनाक चीज है'

आज भारत के बड़े दार्शनिक जिद्दू कृष्णमूर्ति का हैप्पी बड्डे है. आदमी के पैदा होने से मरने के बाद तक की हर स्थिति पर उन्होंने कुछ न कुछ लिखा है.

IPL में वो 5 मौके जब हमारे इन बल्लेबाजों ने मैदान पर धुआं निकाल दिया था

भारतीय बल्लेबाजों के टॉप 5 शतक देख लीजिए.