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कोरोना से जुड़ी आठ अफवाहें, जिनको लोगों ने बिना सोचे-समझे, धड़ल्ले से शेयर किया

बिहार में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें बताया गया कि एक गाय महिला में बदल गई. उसने कहा- मैं कोरोना माता हूं. मेरी पूजा करो. आशीर्वाद लो. मैं अपने-आप चली जाऊंगी. इसके बाद झुंड बनाकर महिलाएं निकल पड़ीं. पूजा करने के लिए. उसके बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिसमें महिलाएं यही कहानी सुना रही थीं.

जब से कोरोना वायरस के मामले आने शुरू हुए हैं, तब से ही इससे जुड़ी कोई न कोई अफवाह फ़ैल रही है. कभी इसके इलाज के लिए किसी दवा का नाम वायरल कर दिया जाता है, तो कभी इसके खत्म होने की भविष्यवाणी के वीडियो वॉट्सऐप पर तैरते मिलते हैं. ऐसे में कुछ अफवाहें ऐसी हैं, जो पिछले कुछ महीनों में खूब फैलीं. लेकिन इनका कोई तार्किक या वैज्ञानिक आधार नहीं था.

जैसे राजस्थान के घास भैरू की सवारी निकलना. राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में इन लोकदेवता की बड़ी ‘मानकारी’ (महत्व) होती है. वैसे तो उनकी आड़ी-तिरछी प्रतिमा या  शिला साल भर गांव के बाहर पड़ी रहती है. लेकिन गांव वालों को जब कोई आपदा पास आती महसूस होती है. ये घास भैरू की सवारी निकाल देते हैं.ऐसी ही घास भैरू की सवारी 24 मार्च को श्योपुर जिले के चौपना गांव में निकली. कोरोना वायरस को भगाने के लिए. क्योंकि गांव वालों का मानना है कि घास भैरू महामारी को दूर रखते हैं. दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक़ पूरा गांव सड़कों पर उतर आया. रास्ते भर रोक-रोक कर उनकी पूजा अर्चना हुई, नारियल चढ़ाए गए. गांव के लोगों ने पूरे गांव का चक्कर लगाया. और सोशल डिस्टेंसिंग नाम की कोई चीज नज़र नहीं आई.

Ghas Bheru
घास भैरव /भैरू की तस्वीर. (तस्वीर: फेसबुक)

इसी तरह उत्तराखंड में अफवाह उड़ी कि माता के आशीर्वाद से घरों के आंगन में कोयले निकल रहे हैं. उनका टीका लगाने से कोरोना का प्रकोप कम हो जाएगा. जौनपुर में फैलाया गया कि छोटे बच्चों को कोरोना से बचाना है, तो उन्हें मिठाई खिलाई जाए. बिहार में ही दावे किए गए कि अगर घर के पुरुषों को लौंग और कपूर को पुड़िया में रखकर बांध दिया जाए तो उन्हें कोरोना वायरस का ख़तरा नहीं होगा.उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के कुछ इलाकों में ये अफवाह फ़ैली कि नीम के पेड़ के नीचे शाम के समय दिया जलाकर रख आने से कोरोना वायरस नहीं फैलता है.

इन सभी अफवाहों में उपाय बताए गए, कि इनसे कोरोना ख़त्म हो जाएगा, या इससे बचाव हो जाएगा. मार्च के अंत से ही ये फैलनी शुरू हो गई थीं. मुख्यतया गांवों और छोटे कस्बों से शुरू हुईं. लेकिन फायदा न होना था, न हुआ. लोगों को धुकधुकी और लग गई. पुलिस या प्रशासन को इन अफवाहों को रोकने के लिए अलग से प्रयास करने पड़े. लेकिन ऐसी भी कई अफवाहें थीं, जो गांवों शहरों से निकलकर सोशल मीडिया पर ख़बरों का हिस्सा बन गईं. भयंकर वायरल हुईं.‘कोरोना माई’ की खबर की तरह ही ये रहीं कोरोना से जुड़ी कुछ और अफवाहें. जिन्हें लोगों ने ताबड़तोड़ शेयर किया:

(1)

सोशल मीडिया पर कोरोना से बचाव का एक मैसेज वायरल हुआ. इसमें दावा किया गया कि अपने दाएं पैर के अंगूठे के नाखून पर हल्दी का लेप लगाने से कोरोना भारत से समाप्त हो जाएगा. वायरल मैसेज में कहा गया कि ऐसा अजमेर के एक अस्पताल में पैदा हुई बच्ची ने जन्म लेते ही बताया और उसके फौरन बाद मर गई. उसके साथ कुछ तस्वीरें भी लगाई गईं. पूरा मामला आप यहां पढ़ सकते हैं

Baby Haldi
वायरल मैसेज का एक स्क्रीनशॉट

हमारी पड़ताल में मृत बच्चे की तस्वीर दिखाकर, हल्दी के लेप को कोरोना से बचाव का तरीका बताता दावा पूरी तरह झूठ साबित हुआ. इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है. जिस बच्चे की तस्वीर थी, उसकी डिलीवरी करवाने वाले डॉक्टर सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि बच्चा असामान्य था और मृत पैदा हुआ था. बच्चे में दिमाग का हिस्सा विकसित नहीं हुआ था और न्यूरल ट्यूब में भी डिफेक्ट था. बच्चे के पैदा होते ही बोलने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

(2)

वायरल मैसेजेस में दावा किया गया कि भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने आज से सदियों पहले कोरोना वायरस के बारे में लिख दिया था. नास्त्रेदमस 16वीं शताब्दी में फ्रांस में हुए थे. ऐसी मान्यता है कि उन्होंने अपनी किताब ‘Les Propheties’ में आने वाले समय की सभी बड़ी भविष्यवाणियां कर दी थीं. इस किताब में उनकी चौपाइयां (चार पंक्तियों की कविताएं) दर्ज हैं.

Nastredamus
वायरल मैसेज का एक स्क्रीनशॉट

हमने इस किताब की पड़ताल की. लेकिन इसमें कहीं भी 2020 में नोवेल कोरोना वायरस के फैलने के बारे में नहीं लिखा था. हमें कोरोना वायरस महामारी शुरू होने से पहले की ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट भी नहीं मिली, जिसमें नास्त्रेदमस की वायरल हो रही भविष्यवाणी के बारे में लिखा गया हो. ये कथित भविष्यवाणी संक्रमण के विकराल होने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. ये बिल्कुल झूठी जानकारी है. पूरी जानकारी आपको यहां मिल जाएगी.

(3)

ऐसे ही एक वायरल मैसेज में कोरोना वायरस के इलाज का नुस्खा बताया गया. इसमें दावा किया गया कि अगर नींबू और बाइकार्बोनेट यानी बेकिंग सोडा को मिलाकर गर्म-गर्म पीएं, तो वायरस खत्म हो जाएगा. दावा था कि ऐसा ही इजराइल में किया गया, इसलिए वहां से कोई मौत का मामला सामने नहीं आया. इस मैसेज को पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. हमारी पड़ताल में ये दावा ग़लत निकला.

Israel No Death
वायरल मैसेज का एक स्क्रीनशॉट

इजराइल में कोरोना वायरस के करीब तीन हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं और कई लोगों की मौत हो चुकी है. बात की जाए बेकिंग सोडा और नींबू की, तो ये हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है. डाइजेस्टिव सिस्टम के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को बेहतर करता है. पर ये घरेलू उपाय है. और वैसे भी अगर किसी को बेकिंग सोडा और नींबू की सही मात्रा न मालूम हो, तो वो नुकसान भी करता है. कोरोना वायरस के लिए अभी तक कोई इलाज नहीं ढूंढा जा सका है. वैक्सीन और दवा के लिए लगातार रिसर्च चल रही है.

(4)

एक किताब का पन्ना खूब वायरल हुआ. उसकी इमेज जहां-तहां शेयर की गई. इसके साथ चल रहे दावे के अनुसार, एक अमेरिकी लेखक हुए डीन कूंट्ज़. उन्होंने 1981 में ही कोरोना वायरस की भविष्यवाणी कर दी थी. दावा ये भी कि चीन ने वुहान के बाहर एक लैब में इस वायरस का निर्माण किया. हमारी पड़ताल में पता चला कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा पूरी तरह से सत्य नहीं है.

Eye Of Darkness
वायरल मैसेज का एक स्क्रीनशॉट

ये दावा सच है कि डीन कूंट्ज़ ने अपनी किताब “The Eyes of Darkness” में ‘वुहान-400’ नामक काल्पनिक वायरस के बारे में लिखा है. लेकिन ये अभी तक साबित नहीं हो पाया है कि कोविड-19 वायरस को चीन की लैब में तैयार किया गया था. ‘वुहान-400’ वायरस का संक्रमण नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण से काफी अलग है. नोवेल कोरोना वायरस की मृत्यु दर उपन्यास में लिखे ‘वुहान-400’ से होने वाली मौतों की दर से काफी कम है. पूरी जानकारी के लिए आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

(5)

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद थालियां और घंटियां बजाने की बात कही, तो उसके पीछे मकसद ये था कि हैल्थ वर्कर्स और अन्य सेवाओं के लोगों का हौसला बढ़े. लेकिन सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज में कहा गया कि थालियों और घंटियों की आवाज़ से कोरोना वायरस मर जाएगा. इसकी सच्चाई जानने के लिए वायरलॉजिस्ट डॉक्टर दिलीप से बात की गई.

Thaali Ghanti
वायरल मैसेज का एक स्क्रीनशॉट

उन्होंने बताया कि स्टील की थाली और घंटियों की आवाज़ से वायरस मर जाएगा, इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. हां, अल्ट्रासाउंड के ज़रिए बैक्टीरिया सेल्स को डिसरप्ट किया जाता है. लेकिन ये अल्ट्रासॉनिक वेव्स होती हैं. और इनसे एक स्पेसिफिक फ्रीक्वेंसी निकालने के लिए नपी-तुली मशीन की ज़रूरत होती है. सेल डिसरप्ट करने वाले इन एक्सपेरिमेंट के दौरान फ्रीक्वेंसी इतनी ज़्यादा होती है कि हम अपने कान खुले नहीं छोड़ सकते. क्योंकि इन फ्रीक्वेंसी से हमारे कान खराब हो जाएंगे और वायरस में इन फ्रीक्वेंसी से ज़्यादा कुछ नहीं होता. पूरी जानकारी के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.

(6)

वॉट्सऐप पर वायरल हुए एक मैसेज में कोरोना वायरस के अलग-अलग टाइप के इलाज के बारे में बताया गया. दावा किया गया कि गर्मी से कोरोना वायरस मर जाता है. साथ ही ये भी लिखा गया कि ये मैसेज अपोलो अस्पताल, दिल्ली के डॉ. ए. धांति और बिहार राज्य स्वास्थ्य विभाग के डॉ. रमेश सिंह की तरफ़ से मिला है. मैसेज में लिखा गया था कि दिन में दो बार लहसुन का सेवन करें. हल्दी, अनार, पपीता, ग्रीन टी इत्यादि का सेवन करें. इससे कोरोना का प्रभाव 90 फीसद कम हो जाएगा.

25 Tips Corona
वायरल मैसेज का एक स्क्रीनशॉट

हमारी पड़ताल में ये दावा ग़लत निकला. इंटरनेट पर कुछ कीवर्ड्स से ढूंढने पर हमें ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट मिली. इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हवाले से कोरोना वायरस पर तापमान के प्रभाव की ख़बर है. इसमें कहा गया है कि तापमान के बढ़ने से कोरोना वायरस के मरने की बात मानने के कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं हैं. इसका संक्रमण किसी भी तरह के इलाके में हो सकता है. इसके अलावा WHO और भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय की और से Covid-19 से जुड़ी सही जानकारी प्रसारित की जा रही है.

(7)

कोरोना को लेकर आंकड़े भी तोड़-मरोड़ कर पेश किए जा रहे हैं. ऐसा ही आंकड़ों वाला एक दावा जर्मनी की हैमबर्ग यूनिवर्सिटी के नाम पर किया गया और इसे वायरल किया गया. फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सऐप पर. इसमें बताया गया कि 2020 के शुरुआती दो महीनों में कोरोना वायरस के मुकाब़ले साधारण जुक़ाम, मलेरिया, आत्महत्या, सड़क हादसे, HIV, शराब और धूम्रपान और कैंसर से ज़्यादा मौतें हुई.

Hamburg Uni Fake Data
वायरल मैसेज का एक स्क्रीनशॉट

हमारी पड़ताल में पता चला कि हैमबर्ग यूनिवर्सिटी ने इस तरह का कोई डेटा जारी नहीं किया है. इस पोस्ट के कमेंट बॉक्स में कुछ लोगों ने ख़बर की सत्यता पर शक जताया था. खासतौर पर साधारण जुक़ाम से दो महीनों में 70 हज़ार मौतें होने के दावे पर. इस पूरे पोस्ट में कोई भी लिंक ऐसा नहीं दिया गया, जिससे दावा सच साबित होता हो. सिर्फ हैमबर्ग यूनिवर्सिटी का नाम लिखा गया था. हमने हैमबर्ग यूनिवर्सिटी से संपर्क किया. हैमबर्ग यूनिवर्सिटी के ‘कम्यूनिकेशन और पब्लिक रिलेशन विभाग‘ ने ऐसा कोई भी डेटा जारी करने से इनकार किया. पूरी जानकारी के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.

(8)

इसी तरह एक और वायरल पोस्ट में ये दावा किया गया कि दोनों नथुनों में सरसों का तेल लगाने से कोरोना से बचाव हो जाएगा. भारत सरकार की ओर से जारी होने वाली सूचनाओं की नोडल एजेंसी- प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो(PIB) ने ट्विटर पर इस वायरल दावे को झूठ बताया है.

Sarson Ka Tel
वायरल मैसेज का एक स्क्रीनशॉट

सरसों के तेल से कोरोना वायरस मरने के पर PIB ने कहा,

“कोरोना वायरस का कोई उपचार अभी उपलब्ध नहीं है. किसी भी प्रकार के तेल से इस वायरस को नष्ट नहीं किया जा सकता है. कृपया भ्रामक संदेशों के झांसे में न आएं. घर के अंदर रहें और खुद को सुरक्षित रखें.”

सरसों के तेल से कोरोना वायरस के इलाज की बातों से पहले कई और दावे भी किए जा रहे थे. जैसे कि 10 सेकंड तक सांस रोकने से या गर्म पानी और सिरके के गरारे करने से कोरोना वायरस का इलाज हो जाएगा वगैरह-वगैरह. इन सभी दावों को सरकार की ओर से PIB ने पहले ही खारिज कर दिया है.

अगर आपके पास भी ऐसी कोई अफवाह सोशल मीडिया के ज़रिए पहुंचती है, तो आप हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.


वीडियो: कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ये दवा काम कैसे करेगी?

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