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दूरदर्शन के वो 5 धाकड़ जासूसी सीरियल, जिन्होंने एक ज़माने में दुनिया को हिला डाला

आज दूरदर्शन का 61वां बर्थडे है. आज ही के दिन 15 सितंबर 1959 में दिल्ली से इसकी शुरुआत हुई थी. अपनी जवानी में यानी अस्सी-नब्बे के दशक में इसने हमारा खूब मनोरंजन किया. मगर जैसे ही सीनियर सिटीज़न होने की दहलीज़ लांघी तो मार्केट में नए कॉम्पटीटर (नेटफ्लिक्स, एमेजॉन और दूसरे OTT प्लैटफॉर्म्स) आ धमके. आज भले ही एंटरटेनमेंट के मैदान में कई सारे OTT प्लेटफॉर्म्स हों, मगर कुछ लोगों के दिल की धड़कन अब भी दूरदर्शन में बसती है.

आजकल तो लोग टीवी को ईडियट बॉक्स बुलाते हैं, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. एक समय था, जब एक ही टीवी के सामने पूरा-पूरा मोहल्ला बैठता था. जब दूरदर्शन पर ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ देखने से पहले लोग टीवी की आरती उतारा करते थे.

सुबह 4 बजे उठकर भारत-पाकिस्तान का मैच देखने की फीलिंग ही अलग थी. दूरदर्शन के शोज़ इतने शानदार थे कि कोरोना काल में कुछ शोज़ को दोबारा टेलिकास्ट किया गया था.

हर किसी के लिए शोज़ हैं बाबा

दूरदर्शन की खास बात ये थी कि वो अपने दर्शकों की पसंद का पूरा-पूरा ख्याल रखता था. संगीत पसंद करने वालों के लिए ‘चित्रहार’ और ‘रंगोली’ था तो सुपरहीरो देखने वालों के लिए ‘शक्तिमान’ या ‘कैप्टम व्योम’.

किसानों की समस्या ‘कृषि दर्शन’ हल करता था तो बच्चों के लिए जंगल बुक था. घर-परिवार के लिए भी हल्के-फुल्के कॉमेडी शो थे. ‘देख भाई देख’ और ‘हम पांच’ जैसे.

क्राइम-थ्रिलर और डिटेक्टिव जैसे जॉनर को पसंद करने वालों के लिए भी दूरदर्शन कई कार्यक्रम लाया था. आज बात उन्हीं जासूसी सीरियल्स की, जिसमें पेचीदा से पेचीदा केस डिटेक्टिव आसानी से हल कर लेते थे. वो शोज़, जिनके सामने सीआईडी या एजेंट राघव जैसे शोज़ धरे के धरे रह जाएं. ये इतने धांसू शोज़ थे कि इनके कुछ डायलॉग उस ज़माने के तकियाकलाम बन गए. तो चलिए शुरू करते हैं जासूसी सफर का ये सिलसिला…

पर रुको, रुको ज़रा…अब दूरदर्शन की बात हो रही है और इसे देखे बिना आगे बढ़ गए तो कतई नाइंसाफी होगी

ये है दूरदर्शन चैनल का सबसे पहला लोगो और उसका थीम म्यूज़िक. समय के साथ लोगो में कई परिवर्तन आए. मगर ट्यून यही रही. जिसके बजने पर आज भी दिल में गुदगुदी होने लगती है.

#1.

शो का नाम- करमचंद
कब आता था – 1985 में
कलाकार – पंकज कपूर, सुष्मिता मुखर्जी, अर्चना पूरन सिंह और सुचेता खन्ना.
डायरेक्टर – पंकज पराशर

दूरदर्शन का जासूसी शो करमचंद.
दूरदर्शन का जासूसी शो करमचंद.

इसे दूरदर्शन का पहला डिटेक्टिव शो भी कहा जा सकता है. ‘ब्योमकेश बाबू’ तो बाद में आए. उनसे पहले कत्ल और किडनैंपिंग के केस सुलझाने डिटेक्टिव करमचंद आ गए थे, जो अपने घोडे़ से तेज़ दौड़ने वाले दिमाग से सारे केस सॉल्व कर डालते थे. करमचंद अपने समय के सबसे कूल डिटेक्टिव थे. जो चेस खेलते थे और जेब से गाजर निकालकर खाते थे. अपनी असिस्टेंट को ‘शटअप किटी’ बोलने वाले इस डिटेक्टिव ने लोगों के अंदर खलबली पैदा कर दी थी. पहला सीज़न लोगों को इतना पसंद आया कि इसका दूसरा सीज़न भी मेकर्स ले आए.

#2.

शो का नाम – तहकीकात
कब आता था – 1994 में
कलाकार-विजय आनंद, सौरभ शुक्ला, अनूप सोनी
डायरेक्टर-विजय आनंद, शेखर कपूर, करन राज़दान

‘जब-जब दुनिया में जुर्म होता है, कत्ल होता है, खून होता है, जो रात के साए में पलता है, दिन के उजाले में चलता है, तब-तब शुरू होती है तहकीकात…’

सैम डिसिल्वा, जो सूट-बूट पहनकर, काली टोपी लगाकर चुटकियों में कत्ल का केस सॉल्व करता था. जिसके साथ था गोपीचंद. इन दोनों जासूसों के दिमाग जुर्म को दूर से ही सूंघ लेते थे. सिल्वा की अक्लमंदी आरोपियों को कटघरे में खड़ा कर देती थी. इस शो में विजय आनंद का चश्मा खूब छाया. लोगों को उनका स्वैग आज भी याद है.

#3.

शो का नाम – ब्योमकेश बक्शी
कब आता था – 1993-1997
कलाकार थे-रजित कपूर, केके रैना, सुकन्या कुलकर्णी
डायरेक्टर – बासु चटर्जी

जासूसी शो की जब-जब बात होगी, ब्योमकेश बक्शी सीरियल का नाम हर बार लिया जाएगा. इसी शो कोशरलक होम्स’ का इंडियन वर्जन भी माना जाता है. 90 के दशक का ये डिटेक्टिव शो आज भी लोगों को याद है. ब्योमकेश बाबू और अजीत की जोड़ी को लोगों ने खूब पसंद किया. रजित कपूर का ये डिटेक्टिव शो क्राइम डिटेक्शन सीरीज़ शरदिंदु बंदोपाध्याय के नॉवेल पर बेस्ड था.

अपराधियों के बीच जाकर उनको ढूंढना हो या सिर्फ एक सुराग से खूनी का पता लगाना, ये काम सिर्फ ब्योमकेश बक्शी ही कर सकते थे. सालों बाद 2015 में ब्योमकेश बक्शी फिल्म भी बनीं, जिसमें जासूस का किरदार निभाया था एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने.

#4.

शो का नाम – सुराग – द क्लू
कब आता था – 1999
कलाकार थे- सुदेश बैरी
डायरेक्टर – गौतम अधिकारी

इस समय पर लोगों को मंडे का इंतज़ार होता था. क्यों? क्योंकि हर मंडे की रात इंस्पेक्टर भरत आया करते थे. सीआईडी इंस्पेक्टर के किरदार में ऐक्टर सुदेश बैरी जब भी एंट्री लेते थे तो ऑडियंस बिस्तर से जाग उठती थी. अपनी जिप्सी से उतरकर सबूत जुटाना हो या इंस्पेक्टर श्रीवास्तव को बुलाकर सबूत के बारे में बातें करना. भले ही सुदेश बैरी ने इसके बाद कई टीवी शोज़ और फिल्मों में काम किया, मगर ‘सुराग- द क्लू’ की बात ही कुछ और थी.

#5.

शो का नाम- जासूस विजय
कब आता था – 2002
कलाकार थे – आदिल हुसैन, ओम पुरी, फरहान खान

सीरीयल जासूस विजय का एक दृश्य.
सीरियल जासूस विजय का एक दृश्य.

इस शो के आते-आते हमने 21वीं सदी में कदम रख लिया था. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट ने दूरदर्शन के साथ मिलकर ये शो बनाया था, जो टीवी पर करीब चार साल चला. जासूसी शो में ‘जासूस विजय’ को कैसे भूल सकते हैं. ये वही शो है, जिसके जरिए केस सुलझाने के अलावा एचआईवी और एड्स के प्रति जागरुकता भी फैलाई जाती थी. पॉपुलर ऐक्टर आदिल हुसैन ने इस सीरियल में जासूस विजय की भूमिका निभाई थी.


वीडियो:

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