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जानिए कैसे खरीदते हैं यूट्यूब पर वीडियो के व्यूज़

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पिछले दिनों बादशाह का एक म्यूज़िक वीडियो रिलीज़ हुआ था. गाने का नाम था- ‘पागल’. इस गाने के नाम फिलहाल एक दिन में सबसे ज़्यादा बार देखे जाने का रिकॉर्ड है. 11 जुलाई को सोनी म्यूज़िक के यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ किए जाने के अगले 24 घंटे में इस गाने को 75 मिलियन यानी 07 करोड़ 50 लाख बार यूट्यूब पर देखा गया है. इससे पहले ये रिकॉर्ड कोरियन बैंड बीटीएस के अप्रैल, 2019 में आए गाने ‘बॉय विद लव’ के नाम था. इस वीडियो को शुरुआती 24 घंटे में यूट्यूब पर 07 करोड़ 46 लाख बार देखा गया था. आंकड़ों के लिहाज से तो बादशाह दुनिया के पहले आर्टिस्ट बने, जिनका कॉन्टेंट इतने कम समय में साढ़े 7 करोड़ बार देखा गया. गाना कैसा था? क्या था? वो आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

ध्यान देने वाली बात ये है कि इतने बड़े अचीवमेंट के बावजूद बादशाह को गूगल (जिसका हिस्सा यूट्यूब भी है) ने वो नहीं दिया, जो ‘बॉयज़ विद लव’, ‘मी’ और ‘थैंक यू नेक्स्ट’ जैसे गानों के क्रिएटर्स को दिया गया. क्या नहीं दिया? बधाई! गूगल और उसके साथ काम करने वाली तमाम वेबसाइट्स ने बीटीएस, टेलर स्विफ्ट और अरियाना ग्रैंड को उनके गानों की सफलता के लिए बधाई दी थी. लेकिन इतने तगड़े अचीवमेंट के बावजूद बादशाह इस मामले में अनलकी रहे. इसके बारे में हालांकि आधिकारिक रूप से गूगल या यूट्यूब ने तो अब तक कुछ नहीं कहा है. लेकिन इंडस्ट्री में बादशाह और सोनी म्यूज़िक के कंपटिटर्स के बीच दो बातें चल रही हैं, जिसका यूट्यूब और बादशाह इस रिकॉर्ड से काफी लेना-देना है. पहले बादशाह का वो गाना देख लीजिए:

क्या कहना है इंडस्ट्री का?

बादशाह के इस वीडियो के बारे में लोग दो बातें कह रहे हैं. पहली, बादशाह ने अपने इस गाने के व्यूज़ खरीदे हैं. दूसरी, बादशाह और उनकी टीम ने यूट्यूब और गूगल से ऐड खरीदे हैं. ऐड खरीदने से मतलब ये कि यूट्यूब पर कोई भी वीडियो शुरू होने से पहले जो ऐड आता है, उसमें वो गाना दिखाई देगा. अगर वो वीडियो ‘स्किप ऐड’ का ऑप्शन आने के कुछ सेकंड बाद तक भी स्क्रीन पर देखा गया, तो उसे यूट्यूब एक व्यू की तरह देखता है. और इस एक व्यू को भी गाने के टोटल व्यू में जोड़ दिया जाता है. सौदा तो फायदे का है!

यूट्यूब व्यू खरीदते कैसे हैं?

यूट्यूब व्यू खरीदने से मतलब है ‘पैसे दे दो, व्यूज़ ले लो’. दुनियाभर में हज़ारों ऐसी कंपनियां हैं, जो आपको पैसे के बदले यूट्यूब व्यूज़ देने का वादा करती हैं. और ये तकनीकी रूप से इल्लीगल नहीं है. बस यूट्यूब के नियमों के खिलाफ है. वो भी तब जब यूट्यूब पकड़ ले. और यूट्यूब को कैसे चकमा देना है, यही इन कंपनियों का बिज़नेस आइडिया है. यूट्यूब व्यूज़ खरीदने के लिए बस आपको इतना करना है कि एक अच्छी कंपनी के वेबसाइट पर जाना है. कितने व्यूज़ चाहिए वो भरना है और पेमेंट कर के निकल जाना है. बाकी कंपनी देख लेगी.

इंडिया में बैठे-बैठे आप किसी भी देश की कंपनी से व्यूज़ खरीद सकते हैं.
इंडिया में बैठे-बैठे आप किसी भी देश की कंपनी से व्यूज़ खरीद सकते हैं.

ये ‘अच्छी’ कंपनियां कौन सी हैं?

इस धंधे में ‘अच्छी’ कंपनियां उन्हें माना जाता है, जो यूट्यूब के नियमों के रडार में आए बिना वीडियोज़ के व्यू बढ़ा देती है. इनमें से ज़्यादातर कंपनियों की वेबसाइट ‘मनी बैक गारंटी’ और ‘हाई रिटेंशन व्यूज़’ की सुविधा देना का दावा करती हैं.

# मनी बैक गारंटी– इसका मतलब ये है कि आपने जिस कंपनी को पैसे दे दिए, उसने तय समय पर आपकी मांग के मुताबिक व्यूज़ दे दिए. इन कंपनियों का कॉन्फिडेंस इतने हाई-लेवल का होता है कि ये कंपनियां कहती हैं कि काम नहीं हुआ तो पैसे वापस.

# हाई रिटेंशन व्यूज़– इसका मतलब होता है कि वीडियो पर क्लिक भर करके बंद नहीं किया जाएगा, उन्हें ठीक-ठाक ड्यूरेशन में देखा भी जाएगा. जिन वीडियोज़ को ज़्यादा देर तक देखा जाएगा उन्हें यूट्यूब के लिहाज़ से बेहतर कॉन्टेंट माना जाता है. और बेहतर कॉन्टेंट का सीधा मतलब होता है, फायदा होने का बेहतर मौके. जिस वीडियो पर भारी मात्रा में क्लिक हो रहा है लेकिन उसे देखा नहीं जा रहा, उन पर यूट्यूब की खास नज़र होती है.

इसके अलावा इन कंपनियों के अबाउट अस सेक्शन में उनसे जुड़ी जानकारी होती हैं. गूगल पर उनके रिव्यूज़ होते हैं. उनसे कॉन्टैक्ट भी किया जा सकता है. बाकी यूट्यूब व्यूज़ बेचने वाली टॉप पांच कंपनियों के नाम ये हैं:

1) DEVUMI 
2) Buy Views 
3) Marketing Heaven 
4) 500 VIEWS
5) Social Shop

जो वेबसाइट्स आपको ऊपर बताई गई फैसिलिटी नहीं देती हैं, उन्हें व्यूज़ खरीद-फरोख्त के बिज़नेस में फर्जी माना जाता है. ये आपको व्यूज़ तो देंगी, लेकिन सेफ तरीके से नहीं देंगी. अचानक और अजीबोगरीब तरीके से बढ़ते व्यू से यूट्यूब को आपके वीडियो के नंबर्स पर शक हो जाएगा. और आपके पकड़े जाने पर वीडियो और चैनल दोनों का नुकसान हो जाएगा. अब आप पूछेंगे कि ये कंपनियां व्यूज़ बढ़ाती कैसे हैं. आज कल जितने भी व्यूज़, फॉलोवर्स और सब्सक्राइबर्स का झोल चल रहा है, उसमें बॉट्स की मदद ली जाती है.

अब ये बॉट क्या चीज़ है?

बॉट बना है रोबोट से. इस संदर्भ में बॉट एक ऐसा रोबोट है, जो आपके व्यूज़ बढ़ाता है. कैसे? एक ऑनलाइन प्रोग्राम की मदद से. इस प्रोग्राम को एक काम बता दिया जाए, तो ये बार-बार करता रहता है. या इसे आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से भी डिज़ाइन करवा सकते हैं. आपके फेसबुक की फीड के जुगाड़ से लेकर यूट्यूब पर आपके पसंद के वीडियो रिकमेंड करने और फूड डिलिवरी ऐप्स पर कस्टमर केयर के नाम पर चैट करने वाले तक बॉट्स ही हैं. मशहूर अमेरिकी मैग्ज़ीन द अलटांटिक में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी, 2017 में इंटरनेट पर 52% ट्रैफिक बॉट्स की वजह से होता है. यानी जो कुछ भी ऑनलाइन हो रहा है, उसमें इंसानों से ज़्यादा बॉट्स का योगदान है. हमने ऊपर आपको सेफ तरह से व्यूज़ खरीदने की बात बताई थी. जैसे नकल के लिए अकल चाहिए होती है, वैसे ही ‘सेफ’ पेड व्यूज़ के लिए चाहिए होती है लोकेशन और डेमोग्राफी. मिसाल के लिए अगर आपने एक हिंदी गाना बनाया है, तो उसे ज़्यादातर ऐसे लोग देखना पसंद करेंगे, जो हिंदी समझते हों. और ऐसे लोग सबसे ज़्यादा भारत में मिलेंगे. या उन देशों में मिलेंगे जहां हिंदी समझने वाले लोग बसे हुए हैं. तो एक ‘अच्छी’ पेड व्यू कंपनी इस गाने के व्यूज़ भारत से ही लाकर देगी. भारत के अलावा सिर्फ उन्हीं देशों से व्यूज़ मिलेंगे, जहां हिंदी भाषी लोग बसे हैं. इसी तरह व्यूअर की उम्र और बैकग्राउंड को ध्यान में रखकर भी पेड व्यूज़ बेचे जाते हैं. ये सब यूट्यूब के अलगॉरिदम को ये बताने के लिए होता है कि उस पर डला कॉन्टेंट एक जीता-जागता इंसान देख रहा है, जिसका बैकग्राउंड है, भाषा है, और दुनिया में कोई ठिकाना है.

बॉट्स की मदद से किसी भी वीडियो के कितने भी व्यूज़ बढ़ाए जा सकते हैं. बस पैसे देने हैं.
बॉट्स की मदद से किसी भी वीडियो के कितने भी व्यूज़ बढ़ाए जा सकते हैं. बस पैसे देने हैं.

बॉट्स और यूट्यूब व्यूज़ का क्या कनेक्शन है?

बहुत तगड़ा. जब आप किसी कंपनी से व्यूज़ खरीदते हैं, तो उस वीडियो को बैठकर कोई इंसान नहीं, ये बॉट्स ही देख रहे होते हैं. बॉट्स ही आपके व्यूज़ बढ़ाते हैं, जिसके बाद आप छाती-फुलाए इंफ्लूएंसर बने फिरते हैं. बॉट्स दो तरह के होते हैं. गुड बॉट्स और बैड बॉट्स. जिन्होंने बॉट्स डिज़ाइन करवाए हैं, उनके लिए कोई भी बॉट बैड नहीं होता क्योंकि वो उसे अपने हिसाब से बनवाते हैं. जैसे कोई बॉट अगर आपके वीडियोज़ देखकर व्यूज़ बढ़ा रहा हैं, वो आपके लिए गुड हैं, लेकिन यूट्यूब के लिए दिक्कत का सबब यानी बैड बॉट है. द अटलांटिक की उसी रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन 52 % बॉट्स में से 23 % गुड बॉट्स हैं बाकी 29 % बैड की कैटेगरी में आते हैं. कहने का मतलब आपकी वेबसाइट पर आ रहा, हर तीसरा यूज़र बैड बॉट है. जो आपके पोस्ट्स पर गालियां लिखता है. जो आपका नाम और ईमेल एड्रेस चुरा लेता है, ताकि साइबर कंपनियां उसका (गलत) इस्तेमाल कर सकें.

अगर आपको लगता है कि आपके सारे व्यूज़ इंसानी हैं, तो आपको इस गफलत से काफी तेजी से निकलने की ज़रूरत है.
अगर आपको लगता है कि आपके सारे व्यूज़ इंसानी हैं, तो आपको इस गफलत से काफी तेजी से निकलने की ज़रूरत है.

यूट्यूब इन बॉट्स का कुछ करता क्यों नहीं?

इसका जवाब देना बड़ा मुश्किल है. यूट्यूब का बिज़नेस मॉडल बड़ा जटिल  है. लेकिन इसे ऐसे समझा जा सकता है कि एक व्यक्ति वीडियो अपलोड करता है. दूसरा व्यक्ति उस वीडियो को देखता है. और तीसरा व्यक्ति उस वीडियो में अपना विज्ञापन देता है. सारा खेल इस तीसरे व्यक्ति के लिए ही होता है. इससे आने वाले पैसे का एक हिस्सा यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने वाले को मिलता है. और इस पूरे खेल में यूट्यूब खाता है दलाली. तो टेक्निकली व्यूज़ कहीं से भी आए व्यक्ति से या बॉट से यूट्यूब को नुकसान नहीं होता है. क्योंकि ज़्यादा व्यूज़ मतलब ज़्यादा धंधा. और ज़्यादा धंधा मतलब ज़्यादा दलाली. लेकिन तमाम दूसरी कंपनियों की तरह यूट्यूब भी दावा करता है कि उसका बिज़नेस मॉडल एथिकल यानी नैतिक रूप से जायज़ है. तो बात मुनाफे और नैतिकता के बीच में कहीं फंसी हुई है. यूट्यूब पर कौन सा कॉन्टेंट ‘हिट’ करता है और कौन सा नहीं इसे लेकर कई बार यूट्यूब के अलगॉरिदम पर सवाल उठाए गए हैं. अब तक यूट्यूब खुले तौर पर बॉट्स और पेड व्यूज़ के समर्थन में खड़ा दिखाई नहीं दिया है.

फिर तो पकड़े जाने का पंगा नहीं है?

कई बार यूट्यूब पर डले वीडियोज़ के व्यूज़ में इंसानों से ज़्यादा बॉट्स के व्यूज़ होते है. इस चक्कर में यूट्यूब का अलगॉरिदम गड़बड़ा जाता है और वो रियल व्यूज़ को फर्जी और बॉट व्यूज़ को असली मानने लगता है. इन फर्जी वीडियो व्यूज़ का व्यापार कोई डार्क वेब में नहीं चल रहा. व्यूज़ बेचने वाली कंपनियां खुले में वेबसाइट्स पर अपना ऐड देती है और लोगों से उनकी सर्विस इस्तेमाल करने को कहती हैं. और लोग करते हैं. लेकिन ये प्रैक्टिस है तो अनैतिक ही. और इस अनैतिक काम को करते हुए पकड़े जान की संभावनाएं भी भरपूर हैं. जैसे आपने किसी ऐसी-वैसी कंपनी से व्यूज़ खरीद लिए. वो आपको बॉट्स की मदद से व्यू तो दे देगी. लेकिन उसकी लोकेशन आड़ी-तिरछी होगी. आप बैठे इंडिया में तमिल भाषा में वीडियो अपलोड कर रहे हैं, उसका हफ्तेभर में सबसे ज़्यादा व्यू अंगोला से आ रहा है. और दूसरे नंबर पर है बंगाल. यानी आपको वीडियो वो लोग देख रहे हैं, जिन्हें उस गाने की भाषा भी समझ नहीं आती. इस बात पर किसी के भी कान खड़े हो जाएंगे, फिर यूट्यूब तो इसी काम के लिए बैठा है. अपनी सर्विस पॉलिसी के उल्लंघन पर यूट्यूब कार्रवाई करता है. वीडियो ब्लॉक होने से लेकर, चैनल तक बंद हो सकता है.

कौन लोग खरीदते हैं ये वीडियो व्यूज़?

वो लोग जिन्होंने अभी-अभी अपना यूट्यूब वीडियो बनाने का काम शुरू किया है. अगर उनके वीडियोज़ के व्यूज़ ज़्यादा होंगे, तो लोग उसी विषय पर बने पुराने और दूसरे भरोसेमंद वीडियोज को छोड़कर उनका वीडियो देखेंगे. लेकिन इससे लॉन्ग टर्म में बहुत नुकसान भी है क्योंकि आपकी अपनी ऑडियंस कभी नहीं बन पाएगी. आप जीवन भर व्यूज़ तो नहीं खरीद सकते. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज़्यादा फेक व्यूज़ म्यूज़िक इंडस्ट्री से जुड़े लोग ही खरीदते हैं. इनके बाद नंबर आता है सेलेब्रिटीज़, मार्केटिंग एजेंसियां और फिर पॉलिटिक पार्टीज़ या उनसे जुड़े ग्रुप.


वीडियो देखें: क्या है नेटफ्लिक्स जो टीवी को वैसे ही निगल जाएगा, जैसे टीवी रेडियो को खा गया!

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