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कैसे मरे दुनिया के महान लोग

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इन लोगों ने दुनिया को सोचने के लिए कुछ कायदे का दिया. बताया कि खाने, निपटने और सोने से ज्यादा भी आदमी काम कर सकता है. जो कुछ किया वह लीक से हट कर था इसलिए दुनिया में पहचान बना पाए. इनकी जिंदगी का तो सबको पता ही होगा. कितने तीर मारे और बहुत कुछ जीता. लेकिन मौत किस तरह की नसीब हुई यह जानना और भी दिलचस्प है-

पश्चिमी फिलॉसफी के पापा सुकरात

ये साहब अरस्तू के गुरु प्लेटो के भी गुरू थे. यह भी बड़े वाले फिलास्फर थे और ऐसी ऐसी दमदार बातें बताईं कि एथेंस का यूथ हो गया इनका फैन. प्लेटो ने अपनी एक किताब में सीक्रेट लिखा है. कि एथेंस की तब की सरकार उनकी इस पॉपुलर्टी से जल भुन गई थी. इन पर युवाओं को भड़काने का अभियोग चला. फिर जहर देकर मारने का फरमान सुना दिया. अब भाई गवरमेंट से बड़ा गुंडा तो कोई है नहीं. डाल दिया जेल में उनको और इस बीच कोर्ट का ड्रामा चलता रहा. उसके बाद जेल में ही उनको हाई पॉवर का जहर देकर मार दिया गया.

सिकंदर के गुरू जी अरस्तू

दो हजार साल से ज्यादा हुए, मतलब 384 साल ईसा के पहले आज के ग्रीस में पैदा हुए अरस्तू. फिर एथेंस में बने प्लेटो के चेले. ऐसा गजब का तेज दिमाग कि सामने दिखने वाली हर चीज के बारे में कुछ न कुछ ज्ञान की बात बताई. मैथ और इंजिनियरिंग से लेकर खगोल, धरती विज्ञान, समाज और दर्शन हर चीज में बंदे की दिलचस्पी थी. अब दिमाग की भी लिमिटेड क्षमता होती है. औकात से ज्यादा यूज करते गए और 322 ईसा पूर्व ब्रेन हैमरेज उनकी मौत का कारण बना.

फेसबुक विचारक चाणक्य

चाणक्य से बड़ा पॉलिटिकल पर्सन इतिहास में कोई हुआ ही नहीं. अब तो लोग अपने कोट्स उनके नाम से बेचने लगे हैं. लेकिन हाथ भले सिर्फ पॉलिटिक्स में आजमाया हो, दिमाग हर बात में लगाया चाणक्य ने. उनके साथ भी जिंदगी के आखिरी दिनों में कुछ खास अच्छा नहीं हुआ. चंद्रगुप्त का बेटा बिंदुसार राजा बना तो उसका एक मंत्री था सुबंधु. उसकी कुछ पर्सनल खुन्नस थी चाणक्य से. उसने राजा को बताया कि तुम्हारी मां की डेथ इनकी वजह से हुई. राजा ने नर्सों से कंफर्म किया और फिर उनका पारा गरम, बिना पूरा मामला जाने. जब चाणक्य को पता लगा कि राजा उनसे गुस्सा हो गए हैं तो वो घर बार छोड़ कर निकल गए जंगल. खाना पीना भी छोड़ दिया. बिंदुसार को हकीकत का पता लगा तो वो शर्मिंदा हुए और उनको मनाने गए. लेकिन वो माने नहीं और वहीं भूखे प्यासे घूमते हुए देह छोड़ दी.

लड़ाई देख इमोशनल हुए सम्राट अशोक

40 साल तक मजे से शासन किया लेकिन इतना बड़ा साम्राज्य हासिल करना आसान नहीं था. बहुत मार काट और तबाही के बाद इतना बड़ा अम्पायर खड़ा किया था. लेकिन अचानक दिमाग की बत्ती जली. इस सच्चाई का ज्ञान भी हुआ कि मार काट में कुछ रखा नहीं है. उसके बाद लड़ाई झगड़े बंद करके बुद्धिस्ट हो गए. बताते हैं कि लम्बे समय तक अपना राजपाट संभालने के बाद चले गए जंगल. पूरी तरह से संन्यासी बन कर. फिर वहीं रह कर कुछ समय बाद उनकी डेथ हो गई.

जब गया था दुनिया से दोनों हाथ खाली थे, सिकंदर

सिकंदर को विश्व विजेता कहा जाता है. क्योंकि बहुत ही कम उम्र में उसने धरती के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था. कहते हैं वह जब भारत में घुसा तो उसका सामना हुआ राजा पोरस से. पोरस ने तगड़ी लड़ाई की लेकिन उसके एक घर के भेदी आंभी ने पासा पलट दिया. पोरस फंस गए तो सिकंदर ने पूछा तुम्हारे साथ क्या व्यवहार किया जाए? पोरस भी भौकाल में बोल पड़े कि जो एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है. सिकंदर खुश हो गया और उसका राज वापस कर दिया और बन गया उसका बेस्ट फ्रेंड. सिकंदर का भी बड़ा ट्रेजिक अंत हुआ. सिर्फ 32 साल की उम्र में एल्कोहल के ओवरडोज फिर उसके बाद आए बुखार ने उसको खत्म कर दिया. कहा तो ये भी जाता है कि मरते वक्त उसने दोनों हथेलियां फैला दी थी कि देख लो दुनिया वालों, सब कुछ हासिल कर लेने के बाद भी सिकंदर खाली हाथ जा रहा है.

सलीम के पापा अकबर

अकबर मुगल साम्राज्य का सबसे फेमस बादशाह था. इतिहास में दर्ज है कि उसने अपने टाइम पर पब्लिक को धार्मिक आजादी दे रखी थी. प्रजा की हेल्प के लिए हमेशा तैयार रहता था. अपनी जिंदगी में तो साहब ने खूब नाम कमाया. लड़ाइयां जीती. अपना राज्य बढ़ाया. लेकिन आखिरी समय में एक छोटे से दुश्मन ने काम तमाम कर दिया. अक्टूबर सन 1605 में जब जिल्लेइलाही 63 साल के थे तब उनको पेंचिश की बीमारी लग गई. 3 हफ्ते पूरे होते होते वक्त आ ही गया.

ऐतिहासिक चाचा चौधरी बीरबल

अकबर बीरबल के चटपटे किस्से बच्चों से बूढ़ों तक को गुदगुदाते, सिखाते हैं. दिमाग की कसरत इतनी कि बादशाह अकबर हमेशा उनसे मजे लेने के मूड में रहते थे. सीरियस प्रॉब्लम झटका देती तो भी सबसे पहले याद आते बीरबल. राज काज के काम में रुकावट आए तो बीरबल हाजिर. इतने काम के आदमी थे लेकिन अकबर ने उनको किया मिसयूज. जब सिंधु नदी पर अफगान कबीलों ने कर दिया मुगल सल्तनत के खिलाफ विद्रोह. सेनापति जैन खां कोका के साथ लगाकर अकबर ने भेज दिया उनको लड़ने. सेनापति की उनसे रंजिश थी तो वो अपनी टुकड़ी लेकर लड़ने लगे. दिमाग तो खूब था लेकिन वार की प्रैक्टिस नहीं थी. लड़ते हुए मारे गए. अफसोस ये कि लाश तक नहीं मिली अंतिम संस्कार के लिए. बादशाह ने दो दिन खाना नही खाया.

ढोंग की पुंगी बजाने वाले कबीर दास

कबीर दास अपने जमाने के क्रांतिकारी कवि थे. लिखना पढ़ना आता नही था लेकिन जो बोल गए वो सुन के आज भी लोगों के कान में बसे कीटाणु डोल उठते हैं. सारी जिंदगी सड़ी परंपराओं की खाल खींचते रहे. पाखंडियों की राह का रोड़ा बने रहे. जिद्दी भी बड़े वाले थे. सबको पता था कि काशी में मरने वाले को स्वर्ग मिलता है. वह अड़ गए कि वहीं मर कर स्वर्ग पाना है तो मेरा किया धरा किस काम का. और चले गए मगहर मरने के टाइम. वहां अपने आखिरी दिन बिताए. मरने के बाद हिंदू मुसलमान दोनों उनको अपने अपने तरीके से विदा करने लगे. कहने लगे कि नहीं भाई ये हमारा था. वो कहें नहीं भाई हमारा था.

मोनालिसा फेम लियोनार्डो दा विंसी

इतनी खूबियां एक ही दिमाग में कैसे समा सकती हैं ये सोचने वाली बात है. बिना स्कूल गए आर्टिस्ट, इंजीनियर, गणितज्ञ, वैज्ञानिक और भी पता नहीं क्या क्या थे. चाहे हेलिकॉप्टर का डिजायन हो या सीक्रेट स्माइल वाली मोनालिसा की पेंटिंग, हर फन में हाथ बड़ा सॉलिड चला है. जिंदगी के आखिरी दिनों में बेचारे पैरालाइज्ड हो गए थे. पूरा दाहिना हिस्सा नहीं काम कर रहा था. काफी समय जिंदगी मौत के बीच झूलने के बाद 2 मई 1519 को 67 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए.

टाटा टी से पहले उठो, जागो कहने वाले स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद को हिन्दुत्व को नए तरीके से लोगों के सामने रखने के कारण हीरो माना जाता है. शिकागो में 1893 में हुआ तमाम धर्म वालों का सम्मेलन. उसमें जो भाषण उन्होंने शुरू किया “बहनों और भाइयों” से, वह तो एपिक बन गया. लोग अब तक मिसालें देते हैं. लेकिन ज्यादा दिन जिए नहीं. दिल की बीमारी थी. 39 साल की उम्र में 4 जुलाई 1902 को आखिरी हार्ट अटैक का झटका पड़ा और हमेशा के लिए आंखे मूंद लीं.

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