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कोरोना की जिन वैक्सीनों ने उम्मीद जगाई है, वो अभी किस स्टेज में हैं?

इस समय कोरोना वायरस अगर थानोस है, तो वैक्सीन एवेंजर्स हैं. लेकिन अभी एवेंजर्स की तलाश जारी है. थानोस अभी ज़िंदा है. दुनिया की उम्मीद भी कि वो मरेगा एक दिन. दुनियाभर में कोरोना वायरस की काट ढूंढने की रेस लगी है. अलग-अलग वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है. ख़बरें आती हैं कि कहीं कुछ बढ़िया हो रहा है, तो मानव मन और उसकी आंखों में चमक बढ़ जाती है. ‘न्यू नॉर्मल’ की आज की स्थिति से निपटने का यही सहारा है. वायरस को उसका एंटीडोट ही मारेगा.

दर्जनों बायोटेक कंपनियां वैक्सीन ट्रायल के लिए दुनियाभर में सक्रिय हैं. सरकारें तो लगी ही हैं. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, WHO का कहना है कि 23 वैक्सीन कैंडिडेट क्लिनिकल ट्रायल के स्तर पर हैं. वहीं, 140 वैक्सीन प्रीक्लिनिकल स्टेज में हैं. वैक्सीन कैंडिडेट मतलब ये कतार में हैं कि ये सब कुछ ठीक कर देंगी. लेकिन पहले वैक्सीन को प्रयोग के कई चरणों से गुज़रना होता है. चूहों, गिनी पिग पर प्रयोग होता है. इसके बाद इंसानों पर, जिसे ह्यूमन ट्रायल कहते हैं. इन सबमें समय लगता है. कई वैक्सीन कैंडिडेट का ह्यूमन ट्रायल चल रहा है. इसके लिए लोग वॉलंटियर करते हैं कि हम पर प्रयोग किया जाए. उनका रजिस्ट्रेशन होता है. ये ट्रायल तीन फेज में होते हैं.

कुछ वैक्सीन पहले और दूसरे फेज में हैं. कुछ का तीसरा फेज शुरू होने वाला है. फोटो: India Today
कुछ वैक्सीन पहले और दूसरे फेज में हैं. कुछ का तीसरा फेज शुरू होने वाला है. फोटो: India Today

पहले फेज के ट्रायल से पता चलता है कि वैक्सीन कितनी सुरक्षित है और क्या ये वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बना पा रही है. मतलब क्या प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर पा रही है. इससे ये भी पता चलता है कि अगले स्टेज में वैक्सीन का कितना डोज दिया जाए. लेकिन पहले फेज से ये पता नहीं चलता कि वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडीज शरीर में कितनी देर तक टिकती हैं? इसमें कम प्रतिभागी भी होते हैं.

दूसरे फेज में प्रतिभागियों की उम्र का दायरा बढ़ाया जाता है. देखा जाता है कि क्या वैक्सीन बूढ़ों और बच्चों में भी असर कर रही है.

तीसरे फेज में बड़ा ग्रुप ट्रायल में हिस्सा लेता है. इससे पता चलता है कि एक बड़ी जनसंख्या को संक्रमित होने से रोकने में वैक्सीन कितनी कारगर है. और अगर सब ठीक रहा, तो क्या उसे सब पर लागू किया जा सकता है.

इस समय दो वैक्सीन कैंडिडेट दौड़ में फिलहाल सबसे आगे बताई जा रही हैं. अमेरिका की बायोटेक कंपनी मॉडर्ना (Moderna) की वैक्सीन और ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन. इनमें मॉडर्ना की वैक्सीन का तीसरा फेज शुरू होने वाला है. ऑक्सफर्ड की वैक्सीन का तीसरा फेज दुनिया के कुछ हिस्सों में शुरू ही हुआ है.

कई वैक्सीन कैंडिडेट में से कुछ के बारे में हम बात करेंगे. इन्हें ख़बरों में भी जगह मिलती रही है. ये वैक्सीन कैंडिडेट किस स्टेज पर हैं? उनके नाम क्या हैं? ताज़ा अपडेट क्या हैं? कहां ज़्यादा उम्मीद दिख रही है?

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निर्माता: Moderna

वैक्सीन का नाम: mRNA-1273

ट्रीविया:

– मॉडर्ना पहली कंपनी थी, जिसने कोविड-19 को लेकर ह्यूमन ट्रायल शुरू किया. 16 मार्च से इसका पहले फेज का ट्रायल शुरू हुआ.

– नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शन डिजीजेज के साथ मिलकर मॉडर्ना कंपनी काम कर रही है.

– ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में छपा है कि इस वैक्सीन कैंडिडेट ने शुरुआती 45 लोगों ने अच्छा असर दिखाया है. इनमें वायरस को लेकर अच्छी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई.

– 27 जुलाई से ट्रायल का तीसरा फेज बड़े स्तर पर शुरू होगा. जिसमें 30,000 लोग हिस्सा लेंगे. दो हफ्ते पहले ही पहले फेज के ट्रायल के नतीजे आए.

– ये वैक्सीन mRNA तकनीक पर आधारित है. इसमें वैक्सीन की मदद से मानव कोशिकाओं को जेनेटिक निर्देश मिलता है कि वो वायरस से लड़ने के लिए प्रोटीन विकसित करें.

– पहले फेज में 25 भागीदारों को 25 माइक्रोग्राम, 15 को 100 माइक्रोग्राम और 15 को 250 माइक्रोग्राम के डोज दिए गए. दूसरा डोज एक महीने बाद दिया गया. पाया गया कि दूसरे डोज में 250 माइक्रोग्राम वाले ग्रुप में प्रतिक्रिया हो रही है. हालांकि कुछ साइड इफेक्ट भी नज़र आए. जैसे- थकान, सिरदर्द, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द.

मॉडर्ना की वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल 27 जुलाई से शुरू होंगे. फोटो: India Today
मॉडर्ना की वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल 27 जुलाई से शुरू होंगे. फोटो: India Today

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निर्माता: AstraZaneca

वैक्सीन का नाम: ChAdOx 1 nCOV-19

ट्रीविया:

–  ये ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी वाली वैक्सीन ही है, जिसे वहां के एक्सपर्ट AstraZaneca बायोटेक कंपनी के साथ मिलकर बना रहे हैं.

– ये वैक्सीन कैंडिडेट इंग्लैंड में दूसरे और तीसरे फेज में है.

– इस वैक्सीन में भी कोविड-19 को लेकर शरीर में प्रोटीन इंजेक्ट किया जाता है, ताकि वायरस के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़े.

– अप्रैल में पहले फेज के ट्रायल में 1,102 भागीदारों को चुना गया. 22 मई को ऑक्सफर्ड ने बताया कि 1,000 लोगों पर टीके का ट्रायल हो चुका है. फॉलोअप का इंतज़ार है.

– 27 जून को ब्राज़ील ने ऑक्सफर्ड के इस वैक्सीन कैंडिडेट का फेज 3 ट्रायल शुरू किया. इसमें 5,000 लोगों के हिस्सा लेने का टारगेट रखा गया है. ये ट्रायल साउथ अफ्रीका में भी होंगे.

ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन की काफी चर्चा है. फोटो: Oxford
ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन की काफी चर्चा है. फोटो: Oxford

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निर्माता: Pfizer और BioNTech

वैक्सीन का नाम: BNT162b1 और BNT162b2

ट्रीविया:

– ये भी मॉडर्ना की तरह mRNA तकनीक पर काम कर रही है. ये पहले और दूसरे ट्रायल फेज में है.

– Pfizer ने 17 मार्च को वैक्सीन बनाने के बारे में घोषणा की थी. 23 अप्रैल को 200 लोगों के साथ जर्मनी में ट्रायल शुरू हुआ. 5 मई तक अमेरिका में ट्रायल के दौरान 360 मरीजों ने इस वैक्सीन की डोज लेनी शुरू की.

– अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इसकी प्रक्रिया को फास्ट टैक करने की इजाज़त दे दी है.

– जुलाई की शुरुआत में दोनों कंपनियों ने कहा कि शुरुआती स्तर पर वैक्सीन को 24 स्वस्थ लोगों पर प्रयोग किया गयाा. 28 दिनों बाद उनमें अच्छे स्तर पर एंटीबॉडीज विकसित हो गए.

– कंपनियों का कहना है कि अप्रूवल मिलने के बाद वो महीने के अंत तक 30,000 लोगों के साथ ट्रायल शुरू करेंगे.

Pfizer अमेरिका की फार्मास्युटिकल कंपनी है. फोटो: Wikimedia
Pfizer अमेरिका की फार्मास्युटिकल कंपनी है. फोटो: Wikimedia

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निर्माता: भारत बायोटेक

वैक्सीन का नाम: Covaxin

ट्रीविया: 

– भारत में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी के साथ मिलकर हैदराबाद की भारत बायोटेक कंपनी ने ये वैक्सीन बनाई है.

– इसने पहले फेज का ह्यूमन ट्रायल शुरू कर दिया है. पीटीआई के मुताबिक, ICMR ने मंगलवार, 14 जुलाई को कहा कि देशभर में 1,000 वॉलंटियर्स के साथ ये प्रक्रिया शुरू हो गई है.

– ICMR ने 15 अगस्त तक वैक्सीन लॉन्च करने की डेडलाइन दी है, जिस पर सवाल भी उठे कि इतने कम समय में ह्यूमन ट्रायल असंभव है.

– ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने दो वैक्सीन को ह्यूमन ट्रायल की इजाज़त दी है. एक भारत बायोटेक और दूसरी Zydus Cadila की वैक्सीन. दोनों को पहले और दूसरे फेज के ट्रायल को लेकर इजाज़त दी गई.

इस दवा को 15 अगस्त तक लॉन्च करने के लिए ICMR डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने पत्र लिखा था, जिसका कई डॉक्टरों ने विरोध किया था.
इस दवा को 15 अगस्त तक लॉन्च करने के लिए ICMR डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने पत्र लिखा था, जिसका कई डॉक्टरों ने विरोध किया था. फोटो: भारत बायोटेक

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निर्माता: Gilead Sciences

वैक्सीन का नाम: रेमडेसिविर (Remdisivir)

ट्रीविया:

– इस वैक्सीन की भी चर्चा काफी हो चुकी है. इसके नतीजे सकारात्मक आए हैं.

– 1 मई को इसे अमेरिका में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से इमरजेंसी हालत में इस्तेमाल करने की इजाज़त मिली.

– चीन में भी दो क्लिनिकल ट्रायल में इसका इस्तेमाल किया गया.

– इस वैक्सीन की ब्लैक मार्केटिंग की भी खबरें आ चुकी हैं. हालांकि इस वैक्सीन के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल को लेकर एक्सपर्ट चिंता जता चुके हैं.

इस दवा को इमरजेंसी की हालत में इस्तेमाल करने की छूट है. फोटो: India Today
इस दवा को इमरजेंसी की हालत में इस्तेमाल करने की छूट है. फोटो: India Today

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निर्माता: Gamaleya Scientific Research Institute of Epidemiology and Microbiology

वैक्सीन का नाम: Gam-COVID-Vac Lyo

ट्रीविया:

– रूस की रशियन डिफेंस मिलिट्री के साथ इसे विकसित किया जा रहा है.

– 38 लोगों पर पहले फेज का ट्रायल खत्म हो गया है.

– इस वैक्सीन को लेकर लोगों में भ्रम भी फैला. रूस की न्यूज एजेंसी Tass ने बताया कि रिसर्च पूरा हो गया और साबित हुआ कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है. बताया गया कि सेचेनोव यूनिवर्सिटी ने टेस्ट पूरे कर लिए हैं. भारत में भी रूस के दूतावास ने ये खबर ट्वीट की.

– खबर में ये नहीं बताया गया था कि ये पहले चरण का ह्यूमन ट्रायल था. अभी दो चरण बाकी हैं.

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निर्माता: Inovio Pharmaceuticals

वैक्सीन का नाम: IN0-4800

ट्रीविया:

– पेंसिलवेनिया की इस कंपनी की वैक्सीन केंडिडेट पहले और दूसरे फेज में है. शुरुआत के अंतरिम नतीजों में इसके सकारात्मक नतीजे मिले हैं.

– मई में इस वैक्सीन ने चूहों और गिनी पिग में ट्रायल में जो नतीजे दिए, उनमें वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बन रही थीं.

– पहले और दूसरे फेज में 40 स्वस्थ वयस्क वॉलंटियर्स (18 से 50 साल की उम्र) ने ट्रायल में हिस्सा लिया. उन्हें चार हफ्तों अंतर पर वैक्सीन की अलग-अलग डोज दी गई.

– जून महीने में 34 से 36 लोगों में वायरस के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता विकसित होती देखी गई.

45 लोगों पर किए गए प्रयोग में 34-36 लोगों ने प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली थी. सांकेतिक फोटो: India Today
40 लोगों पर किए गए प्रयोग में 34-36 लोगों ने प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली थी. सांकेतिक फोटो: India Today

इसके अलावा चीन की फार्मास्युटिकल कंपनी Sinovac Biotech ने ब्राज़ील की Butantan के साथ पार्टनरशिप की है. CoronaVac के निर्माण के लिए. कंपनी ने जुलाई की शुरुआत में घोषणा की कि इस वैक्सीन को ब्राजील की रेगुलेटरी एजेंसी से फेज 3 ट्रायल के लिए मंजूरी दे दी गई है. इस ट्रायल में 9,000 हेल्थकेयर प्रोफेशनल को शामिल किया जाएगा. इस महीने ही इसके लिए रजिस्ट्रेशन होंगे.

इसके अलावा कैंसिनो बायोलॉजिकल इंक., कैडिला हेल्थकेयर, ओसाका यूनिवर्सिटी/AnGes/Takara Bio, Novavax, Fosum Pharma, वुहान इंस्टीट्यट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स/Sinopharm भी वैक्सीन की रेस में शामिल हैं.


साइंसवाला: कोरोना की वैक्सीन जल्दी से क्यों नहीं बना सकते?

 

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