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उन पांच बाबाओं की कुंडली, जिन्हें मामाजी ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया है

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मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है. शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट में 20 मंत्री हैं और 11 राज्यमंत्री. एक मंत्री शिवराज. तो कुल 32. इन सबको जनता ने 2013 में चुना था. लेकिन राज्य का सरकारी अमला इनके अलावा 93 और ‘मंत्रियों’ की खातिरदारी करता है. ये वो लोग हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश शासन ने कैबिनेट मंत्री या राज्यमंत्री का दर्जा दिया है. 93 का ये आंकड़ा 03 अप्रैल, 2018 तक 88 था. फिर राज्य सरकार का एक आदेश आया, जिसके तहत पांच बाबाओं – नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, पंडित योगेंद्र महंत, भैयूजी महाराज और कम्प्यूटर बाबा – को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया. इस ऐलान के बाद से बवाल रुकने का नाम नहीं ले रहा है. कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा घोटाला यात्रा पर पर्दा डालने के लिए ये ऐलान किया है.

जब से पांच बाबाओं के नाम का ऐलान हुआ है, उनके नाम के इर्द-गिर्द गज़ब की दिलचस्पी रही है. कम्प्यूटर बाबा टेक-सैवी हैं, तो यूट्यूब पर मिल गए. टीवी वालों को बाइट भी दे दी. लेकिन बाकी चार नामों के बारे में ज़्यादा जानकारी का अभाव था. ‘दी लल्लनटॉप’ आपको इन पांचों के बारे में तफसील से बताएगा. पढ़िए –

बाबाओं की वो मीटिंग जिसने सरकार के कान खड़े कर दिए

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार धर्मगुरुओं और बाबाओं से खुद को दूर रखने में खास दिलचस्पी नहीं लेती. मध्य प्रदेश विधानसभा के एक सभागार में मुनि श्री तरुणसागर के कड़वे वचन का एक खास आयोजन हो चुका है, जिसमें राज्यभर से विधायक शामिल हुए थे. माने एमपी में बाबाओं को सीरियसली लिया जाता है. ऐसे में 28 मार्च को इंदौर के गोम्मटगिरी में एक आश्रम में एक मीटिंग बैठी. मीटिंग के अंत में संकल्प लिया गया कि 1 अप्रैल से 15 मई तक नर्मदा घोटाला यात्रा निकाली जाएगी. ये यात्रा 45 दिनों में मध्य प्रदेश के 45 ज़िलों तक पहुंचेगी और लोगों को बताएगी कि कैसे शिवराज सरकार ने लोगों से नर्मदा संरक्षण के नाम पर किस तरह झूठ बोला है. इल्ज़ाम लगा कि मध्य प्रदेश सरकार ने 2 जुलाई, 2017 को नर्मदा किनारे 6 करोड़ 63 लाख पेड़ लगाने का जो दावा किया है, वो झूठा है. इस यात्रा के आयोजक होने वाले थे पंडित योगेंद्र महंत और यात्रा में सबसे आगे चलने वाले थे कम्प्यूटर बाबा. ‘संत समाज’ भोपाल में वल्लभ भवन पर भी धरना देने वाला था. वल्लभ भवन मध्य प्रदेश सरकार के सचिवालय का नाम है.

मध्यप्रदेश सरकार ने इस आदेश के तहत बाबाओं को राज्यमंत्री बनाया है.
मध्य प्रदेश सरकार ने इस आदेश के तहत बाबाओं को राज्यमंत्री बनाया है.

31 मार्च को सरकार ने ऐलान किया कि नर्मदा संरक्षण के लिए जो विशेष कमेटी बनी है, उसमें पांच बाबाओं को शामिल किया जाएगा. ये पांच बाबा थे नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, पंडित योगेंद्र महंत, भैयूजी महाराज और कम्प्यूटर बाबा. इन पांच में से दो – पंडित योगेंद्र महंत और कम्प्यूटर बाबा – इंदौर में हुई उस मीटिंग में शामिल थे.

इसी दिन कम्प्यूटर बाबा और कुछ दूसरे संत भोपाल स्थित सीएम हाउस में शिवराज सिंह से भी मिले. अगले दिन नर्मदा घोटाला यात्रा शुरू होनी थी, लेकिन ज़्यादा हरकत नज़र नहीं आई. 3 अप्रैल को बाबाओं को राज्यमंत्री बना दिया गया. नर्मदा घोटाला यात्रा अब रद्द है. कोई यात्रा हुई भी, तो वो ‘जन-जागरूकता’ यात्रा होगी.

कंप्यूटर बाबा. कभी शिवराज को कोसते थे, आज पसंद करते हैं.
कंप्यूटर बाबा. कभी शिवराज को कोसते थे, आज पसंद करते हैं. (फोटोःपीटीआई)

1. कम्प्यूटर बाबा

अपने नाम के आगे ‘महामंडलेश्वर’ लगाने वाले कम्प्यूटर बाबा 54 बसंत देख चुके हैं. इनके बारे में ज़्यादातर बातें ‘बताया जाता है’ की शैली में ही मालूम चलती हैं. इनका असल नाम नामदेव दास त्यागी है और रहने वाले ये बरेला के हैं. बरेला एक कस्बा है, जो जबलपुर में पड़ता है. आज से तकरीबन 26 साल पहले ये बनारस जाकर साधु हो गए. उन्हीं दिनों देश में कम्प्यूटर की आमद हुई थी तो एक कम्प्यूटर इनके मठ में भी लिया गया. इस कम्प्यूटर को चलाना मठ में सिर्फ इन्हें ही आता था. मठ के गुरु ने अपने बाद मठ की कमान इनके हाथ में सौंप दी थी. तभी से लोग इन्हें कम्प्यूटर बाबा के नाम से जानने लगे. ये मठ बनारस में आज भी है.

कम्प्यूटर बाबा कहते हैं कि उनका दिमाग कम्प्यूटर की तरह तेज़ है. बाबा हमेशा एक लैपटॉप लिए नज़र आते हैं. साथ में मोबाइल और इंटरनेट के लिए डॉन्गल भी रहता है. लेकिन बाबा का एक और प्यार है – हेलीकॉप्टर. ये 2013 में हुए कुंभ मेले में हेलिकॉप्टर उतारने की अनुमति मांग चुके हैं.

शिवराज सिंह चौहान के साथ कम्प्यूटर बाबा.
शिवराज सिंह चौहान के साथ कम्प्यूटर बाबा. साथ में योगेंद्र महंत भी हैं.

15 दिसंबर, 2015 को उज्जैन के रामघाट पर एक विशेष क्षिप्रा आरती हुई थी. इसे संत समाज ने सिंहस्थ का शंखनाद बताया था. माने इस दिन से सिंहस्थ की आध्यात्मिक गतिविधियां शुरू हुई थीं. इस दिन भी रामघाट पर कंप्यूटर बाबा एक मंच लगाकर जमे हुए थे. जब आरती हुई, तब भी पुष्पवर्षा हुई थी. हेलिकॉप्टर से.

मई 2017 में बरेला में मां कनकेश्वरी देवी अमृत महोत्सव हुआ था. कम्प्यूटर बाबा इसका न्योता देने के लिए 24 गांवों में हेलिकॉप्टर से ही गए थे. इसके लिए उन्होंने बाकायदा कलेक्टर ऑफिस से लेकर एयर ट्रैफिक कंट्रोल तक से इजाज़त ली थी.

कंप्यूटर बाबा इंदौर के दिगंबर अखाड़े से ताल्लुक रखते हैं. तब से फरवरी 2016 में आचार्य परिषद मध्य प्रदेश और षट्दर्शन साधु मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था. वजह बताई उज्जैन में बहने वाली क्षिप्रा (सिंहस्थ इसी नदी के किनारे होता है) में गंदगी और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा ‘संत समाज की उपेक्षा.’ इस धरने के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए ये स्टील का डिब्बा लेकर चंदा मांगते नज़र आते थे. ज़्यादातर नर्मदा से लगे ज़िलों में.

कंप्यूटर बाबा की कार. इसपर अब 'राज्यमंत्री दर्जाप्राप्त' का स्टिकर लग गया है.
कंप्यूटर बाबा की गाड़ी. इस पर अब ‘राज्यमंत्री दर्जाप्राप्त’ का स्टिकर लग गया है.

कंप्यूटर बाबा चुनावी राजनीति से दूरी में विश्वास नहीं रखते. 2014 में वो आम आदमी पार्टी से टिकट की आस लगाए हुए थे. तब वो राज्य सरकार, संघ और भगवा संगठनों को पानी पी-पीकर कोसते थे. कहते थे कि इन्होंने संत समाज के शोषण के अलावा कुछ नहीं किया है. लेकिन इन्हें टिकट नहीं मिला. फिर कम्प्यूटर बाबा शिवराज कैबिनेट में मंत्री रामपाल के करीबी हो गए. रामपाल के क्षेत्र उदयपुरा में बाबा नर्मदा के किनारे एक आश्रम भी बनवा रहे हैं.

कम्प्यूटर बाबा को राज्यमंत्री का दर्जा अब मिला है लेकिन उनके टशन में कभी कोई कमी नहीं थी. जब हेलिकॉप्टर में उड़ नहीं रहे होते, वो सफेद रंग की सफारी से चलते हैं. इस पर लाल रंग की नेम प्लेट पर लिखा होता है – महामंडलेश्वर कम्प्यूटर बाबा. अब इस सफारी पर ‘राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त’ का स्टीकर लग गया है. अब ये गाड़ी मध्य प्रदेश की सीमा में कहीं भी टोल टैक्स नहीं देगी.

(कम्प्यूटर बाबा 3 अप्रैल से पहले की सारी टेंप फाइलें डिलीट कर चुके हैं और उनका ऑपरेटिंग सिस्टम बदल चुका है, इसी के साथ बदली है उनकी ऑपरेटिंग लैंग्वेज :P)

2. नर्मदानंद महाराज

नर्मदानंद महाराज का डिंडौरी में आश्रम है. नर्मदा डिंडौरी से होकर बहती है. नर्मदानंद महाराज को मंत्री बनाए जाने से पहले ज़्यादा लोग नहीं जानते थे. लेकिन सरकार के ऐलान के बाद उनपर मीडिया में विस्तृत कवरेज हुई है. दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नर्मदानंद रेलवे के रिकॉर्ड में दृष्टिहीन हैं. 2009 में एक सरकारी जिला अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उन्हें दृष्टिहीन होने का सर्टिफिकेट मिला था. इस आधार पर वो रियायती पास पर ट्रेन में चलते थे.

नर्मदानंद के पास गरीबी रेखा वाला राशन कार्ड भी है. अपनी आंखों के सवाल पर उन्होंने सफाई में कहा,

‘मेरी आंखें 89 फीसदी खराब थीं. 2014 तक रियायती पास पर चलता था, लेकिन नंगे पांव नर्मदा परिक्रमा शुरू की तो आंखों की रोशनी लौट आई. अब रियायत नहीं लेता हूं.’

नर्मदानंद फिलहाल अपने समर्थकों के साथ नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं, जो 11 अप्रैल को ओंकारेश्वर में खत्म होगी.

भैयूजी महाराज भाजपा नेताओं के खासी करीबी हैं. (फोटोःफेसबुक)
भैयूजी महाराज भाजपा नेताओं के खासी करीबी हैं. (फोटोःफेसबुक)

भैयूजी महाराज

भैयूजी महाराज का ताल्लुक शुजालपुर के एक ज़मींदार परिवार से है. एक वक्त उन्होंने सियाराम सूटिंग्स के विज्ञापन में भी काम किया था. फिर संत हो गए. भैयूजी महाराज की पकड़ पश्चिम मध्य प्रदेश के उन इलाकों में है, जो महाराष्ट्र से लगे हुए हैं – माने इंदौर के आस-पास का इलाका. भैयूजी महाराज इलाके में जाने-पहचाने चेहरे हैं और भागवत वगैरह करते रहते हैं जिनमें नेता नज़र आ जाते हैं. भैयूजी महाराज एक गृहस्थ संत हैं. उन्होंने दूसरी शादी भी की है. भैयूजी भाजपा के काफी करीबी माने जाते हैं. और सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं, महाराष्ट्र में भी. वहां के भाजपा नेताओं के यहां इनका आना-जाना लगा रहता है. जब से भैयूजी महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने की घोषणा हुई, उनकी वो तस्वीर खूब शेयर हुई, जिसमें वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नज़र आ रहे हैं. राष्ट्रपति रहते हुए प्रतिभा पाटील जब इंदौर आई थीं, तो भैयूजी महाराज को मिलने बुला लिया था. क्योंकि प्रोटोकॉल के चलते वो खुद नहीं जा सकती थीं.

दिल्ली में जनलोकपाल के वक्त जब अन्ना हज़ारे को अनशन तोड़ने के लिए मनाने की कोशिश हो रही थी, भैयूजी महाराज उस कवायद का हिस्सा थे. पिछले साल अगस्त में मेधा पाटकर नर्मदा डूब पीड़ितों को लेकर जल सत्याग्रह पर बैठ गई थीं. मेधा को मनाने के लिए भी मध्य प्रदेश सरकार ने भैयूजी महाराज को ही भेजा था. सरकार के ऐलान की जिस तरह भद्द पिटी है, उसने भैयूजी महाराज को डैमेज कंट्रोल मोड में डाल दिया है. उन्होंने कह दिया कि वो किसी की भावना आहत नहीं करना चाहते और इसीलिए वो अपने नए दर्जे के साथ आने वाली किसी भी सुविधा का लाभ नहीं लेंगे. वैसे उन्हें किसी सुविधा की ज़रूरत है भी नहीं. वो ढेरों ट्रस्ट चलाते हैं जिनका काम समाजसेवा बताया जाता है. कहीं के लिए निकलते हैं, तो सफेद कारों का लंबा काफिला साथ चलता है.

अहमदाबाद में नरेंद्र मोदी का सद्भावना उपवास भैयूजी महाराज ने ही संपन्न कराया था.
अहमदाबाद में नरेंद्र मोदी का सद्भावना उपवास भैयूजी महाराज ने ही संपन्न कराया था.

पंडित योगेंद्र महंत

पंडित योगेंद्र महंत राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने से पहले तक शिवराज सरकार के कट्टर विरोधी माने जाते थे. वो सोशल मीडिया पर शिवराज सरकार के खिलाफ लिख भी रहे थे. कम्प्यूटर बाबा जिस नर्मदा घोटाला यात्रा की अगुआई करने वाले थे, ये उसके संयोजक होने वाले थे. लेकिन अब यात्रा रद्द है और योगेंद्र महंत ने शिवराज को पसंद कर लिया है.

योगेंद्र महंत. साथ में हैं कंप्यूटर बाबा. (फोटोः फेसबुक)
योगेंद्र महंत. साथ में हैं कंप्यूटर बाबा. (फोटोः फेसबुक)

हरिहरानंद महाराज

हरिहरानंद उत्तर प्रदेश के एकरसानंद आश्रम से संबद्ध हैं. फिलहाल वो नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के एक आश्रम से जुड़े हुए हैं. उनके बारे में ज़्यादा जानकारी का फिलहाल इंतज़ार है.

क्या-क्या मिलेगा इन बाबाओं को?

अब इन सभी को 7,500 रुपए मासिक भत्ते के साथ-साथ 1,000 किलोमीटर तक का डीज़ल, 15,000 रुपए मकान का किराया, 3000 रुपए सत्कार भत्ता और सरकारी खर्च पर पीए और अन्य स्टाफ मिलेगा. ये जहां भी जाएंगे, राज्य सरकार के प्रोटोकॉल के मुताबिक इनकी आवभगत होगी.

स्वामि हरिहरानंद.
स्वामि हरिहरानंद.

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