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CVC रिपोर्ट की वो 10 बातें, जिनकी वजह से हटाए गए आलोक वर्मा

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आलोक वर्मा को एक बार फिर से सीबीआई के डायरेक्टर पद से हटा दिया गया है. अब उन्हें डीजी फायर सर्विस बना दिया गया है. और ये फैसला सेलेक्शन कमिटी का है, जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे. पीएम मोदी और जस्टिस सीकरी आलोक वर्मा को डायरेक्टर पद से हटाने के पक्ष में थे, जबकि खड़गे इसका विरोध कर रहे थे. आखिर में फैसला 2-1 से हुआ और सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा को उनके पद से हटा दिया गया.

सेलेक्शन कमिटी में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी (बाएं), पीएम मोदी (बीच में) और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (दाएं) शामिल थे.
सेलेक्शन कमिटी में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी (बाएं), पीएम मोदी (बीच में) और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (दाएं) शामिल थे.

और ये सब हुआ एक रिपोर्ट की वजह से. ये रिपोर्ट सीवीसी की है, जिसे हिंदी में कहते हैं केंद्रीय सतर्कता आयोग. केंद्रीय सतर्कता आयोग ने आलोक वर्मा को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है. इसमें सीवीसी की ओर से आलोक वर्मा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

1. आलोक वर्मा पर मोइन कुरैशी केस में सतीश बाबू साना से 2 करोड़ रुपये घूस लेने का आरोप है. इसकी जांच होनी चाहिए.

2. सीवीसी के मुताबिक अगर आलोक वर्मा के खिलाफ जांच हो और क्रिमिनल मुकदमा चलाया जाए, तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी.

3. आईआरसीटीसी केस में लालू प्रसाद यादव के घर की तलाशी होनी थी. आरोप है कि आलोक वर्मा ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक को निर्देश जारी कर छापेमारी से रोक दिया था. आलोक वर्मा को इन आरोपों पर कमीशन के सामने 14 सितंबर 2018 को जवाब देना था. तीन नोटिस जारी होने के बाद भी आलोक वर्मा कमीशन के सामने नहीं आए.

4. सीवीसी के मुताबिक इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि आलोक वर्मा कई और मामलों में शामिल रहे हैं. इसलिए वो सीबीआई निदेशक के पद पर बने रहने लायक नहीं हैं.

सीबीआई के नंबर एक आलोक वर्मा (बाएं) और नंबर दो राकेश अस्थाना (दाएं) के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए, जिसके बाद झगड़ा सबके सामने आ गया.

5. आलोक वर्मा ने कोर्ट में कहा था कि उन्हें अपनी बात कहने का वक्त नहीं दिया गया. सीवीसी की रिपोर्ट के मुताबिक आलोक वर्मा का ये कहना गलत है.

6. सीबीआई ने हैदराबाद के सतीश बाबू साना की शिकायत पर एक केस दर्ज किया है. सीबीआई को आरोपी की गिरफ्तारी करनी थी, लेकिन आलोक वर्मा ने गिरफ्तारी की इजाजत नहीं दी.

7. सीवीसी का मानना है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा जांच में मदद नहीं कर रहे हैं. वो कोई फाइल भी नहीं दे रहे हैं. सीवीसी का मानना है कि आलोक वर्मा ने जानबूझकर सीवीसी के काम में रोड़ा अटकाया है.

8. सीबीआई के अंदर झगड़ा काफी बढ़ गया है. इससे जांच एजेंसी की गरिमा को भी नुकसान हुआ है. सीबीआई के अधिकारी एक दूसरे खिलाफ आरोप लगा रहे हैं. इसका असर सीबीआई के दूसरे अधिकारियों पर भी पड़ा है.

9. दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (DSPE Act) का सेक्शन- 4 (1) सीवीसी को सीबीआई की निगरानी करने का अधिकार देता है. इसके अलावा CVC एक्ट का सेक्शन 8 (1) (a) और (b) भी सीवीसी को सीबीआई के काम देखभाल की इज़ाजत देता है. भ्रष्टाचार कानून के तहत आलोक वर्मा के खिलाफ केस दर्ज हैं और कई मामलों की जांच बाकी है. ऐसे में उनको डायरेक्टर पद की शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

10. सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीबीआई में आपातकाल जैसे हालात पैदा होने के कारण यह रिपोर्ट दी गई है. इस रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने के पहले नेचुरल जस्टिस यानी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किया जाए.


 

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CBI : 10 things to Know about CVC report that led to Ex CBI chief Alok Verma’s ouster

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