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कान 2021 में स्क्रीन होने वाली वो 16 फिल्में, जिनको लेकर सारी दुनिया उत्सुक है

सिनेमा प्रेमियों का तीर्थ यानी कान फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) शुरू हो चुका है. वो फेस्टिवल जहां अपनी फिल्म स्क्रीन करना हर डायरेक्टर का ख्वाब होता है. ये फेस्टिवल हर साल फ़्रांस में होता है. सिनेमा प्रेमियों के लिए एफिल टावर से भी ज्यादा ऊंचे कान फिल्म फेस्टिवल के मायने हैं. ट्रेडिशनली  ये फेस्टिवल हर साल मई में होता है. 12 दिनों के लिए. लेकिन कोरोना महामारी के चलते 2020 में इस फेस्ट को कैंसिल करना पड़ा था.

अब 2021 में ये फिर लौटा है. 74वां कान फिल्म फेस्टिवल 06 जुलाई से शुरू हो चुका है. 17 जुलाई तक चलेगा. इसी मौके पर हम लेकर आए हैं अपनी कान स्पेशल सीरीज़. जहां हम फेस्टिवल से जुड़ी इंस्ट्रेस्टिंग स्टोरीज़, किस्से, मेमोरेबल मूमेंट्स आपको बताते रहेंगे. आज बात करेंगे कान 2021 में स्क्रीन की जाने वाली कुछ कमाल की फिल्मों के बारे में. जिन्हें लेकर फिल्म सर्किट में तगड़ा बज़ बना हुआ है.


#1 द फ्रेंच डिस्पैच

डायरेक्टर: वेस एंडरसन

लैंग्वेज: इंग्लिश

सिनेमा एक विज़ुअल मीडियम है. आज के समय में इस लाइन को सबसे ज्यादा सार्थक करने वाले डायरेक्टर हैं वेस एंडरसन. जिनका सिनेमा अपने चित्रों की बोली बोलता है. कसी हुई फ्रेमिंग. वो सिमेट्रिकल कॉम्पोज़िशन. उनकी किसी भी फिल्म को आंख बंद कर कहीं भी पॉज़ कर लीजिए. फ्रेम देखकर पहचान जाएंगे कि ये वेस एंडरसन की फिल्म है. अपने दो दशक लंबे करियर में करीब 10 फीचर फिल्में डायरेक्ट करने वाले वेस एंडरसन का इंडिया से भी जुड़ा एक कनेक्शन है. जिसकी शुरुआत होती है मार्टिन स्कॉरसेज़ी से.

The French Dispatch 1
फिल्म पिछले साल रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन कोरोना ने सारे प्लान चौपट कर दिए.

मार्टिन स्कॉरसेज़ी. दिग्गज डायरेक्टर. मार्टिन हमेशा से ही सत्यजीत रे के सिनेमा के कायल रहे हैं. बताया जाता है कि रे को ऑनरेरी ऑस्कर दिलाने के लिए भी पहल मार्टिन ने ही की थी. एक बार मार्टिन ने वेस एंडरसन को अपने घर बुलाया. और सत्यजीत रे की पहली फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ दिखाई. इस फिल्म का वेस पर बहुत गहरा असर हुआ. वेस ने रे का सिनेमा स्टडी करना शुरू किया. उनकी फिल्मोग्राफी एक्सप्लोर करना शुरू किया. रे के सिनेमा और इंडिया से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पांचवीं फीचर फिल्म बनाने का फैसला लिया. फिल्म थी 2007 में आई ‘द दार्जिलिंग लिमिटेड’. कहानी थी तीन भाइयों की जो अपनी मां को ढूंढने के लिए इंडिया आते हैं. फिल्म में कई पॉइंट्स पर रे की फिल्म ‘चारुलता’ से चारुज़ थीम म्यूज़िक का इस्तेमाल हुआ. साथ ही बताया जाता है कि फिल्म में इस्तेमाल किए गए ट्रेन सीक्वेंस की प्रेरणा रे की फिल्म ‘नायक’ से ली गई थी.

अब वेस की अगली फिल्म ‘द फ्रेंच डिस्पैच’ कान में स्क्रीन होने जा रही है. कहानी 20वीं सदी में स्थित एक काल्पनिक मैगज़ीन के पत्रकारों के नाम है. एडिटर-इन-चीफ की डेथ हो जाती है. मैगज़ीन बंद होने वाली है. लेकिन बंद होने से पहले उसका आखिरी एडिशन छपना बाकी है. ऐसे में एडिटोरियल स्टाफ एक फैसला लेता है. मैगज़ीन के 10 साल के पूरे इतिहास में से तीन बेस्ट स्टोरीज़ को चुनकर फिर से छापने का. एक स्टोरी थी उस आर्टिस्ट की जिसे उम्रकैद हो जाती है. दूसरी स्टूडेंट्स द्वारा किए गए दंगों की और तीसरी एक किडनैपिंग की. फिल्म की कास्ट भी एक बड़ी वजह है कि क्यों इस फिल्म का बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है. टिल्डा स्विंडन, एड्रियान ब्रूडी, लिया सेदु, बिल मरी, ओवेन विल्सन, फ्रांसेस मैकडोरमंड जैसे मंझे हुए कलाकार कास्ट का हिस्सा हैं.


#2. अ हीरो

डायरेक्टर: असगर फरहादी

लैंग्वेज : पर्शियन

इससे पहले असगर तीन बार कान फिल्म फेस्टिवल में कम्पीट कर चुके हैं. 2013 में अपनी डेब्यू फ्रेंच फिल्म ‘द पास्ट’ से. 2016 में ‘द सेल्समैन’ से. और 2018 में ‘एवरीबडी नोज़’ से. उनकी फिल्में ‘अ सेपरेशन’ और ‘द सेल्समैन’ अकैडमी अवॉर्ड्स भी जीत चुकी हैं. ‘अ हीरो’ की कहानी को पूरी तरह सीक्रेट रखा गया है. बस इतना बताया गया है कि ये फिल्म ऑडियंस पर ‘अ सेपरेशन’ जैसा इम्पैक्ट डालेगी. कहानी चाहे कुछ भी हो लेकिन तीन एलिमेंट्स ऐसे हैं जो असगर फरहादी की फिल्म में अपनी जगह ढूंढ ही लेते हैं. सस्पेंस, ड्रामा और इमोशन. इनकी फिल्मों का सस्पेंस मेनस्ट्रीम सिनेमा जैसा नहीं. जहां टिक-टिक घड़ी चलेगी और धम से कुछ होगा. ये अपनी ऑडियंस को स्लो बर्न देते हैं. ऑडियंस को पता होता है कि उनके साथ क्या हो रहा है. कहानी कैसे चल रही है. फिर भी ये जानने को बेचैन रहते हैं कि ये कहानी खत्म कैसे होगी.

Asghar Farhadi Movies
वर्ल्ड सिनेमा देखना शुरू करना चाहते हैं तो असगर फरहादी की फिल्मों से शुरू कीजिए.

#3. थ्री फ्लोर्स

डायरेक्टर: नान्नी मोरेत्ती

लैंग्वेज : इटालियन

सिगमंड फ्रॉइड. ऑस्ट्रियन न्यूरोलॉजिस्ट थे. कंट्रोवर्शियल किस्म के. फ्रॉइड ने साइकोअनैलिसिस का भी ईजाद किया था. साइकोलॉजी की फील्ड में उनके काम को आज भी पढ़ा जाता है. फ्रॉइड ने मन की तीन अवस्थाओं को कॉन्शियस, सब कॉन्शियस और अनकॉन्शियस के खांचे में बांटा. उनके अनुसार मन की ये तीन अवस्थाएं जुड़ी है पर्सनैलिटी के तीन पहलुओं से. ईड, ईगो और सुपरईगो से. ईड काम करता है अचेतन यानी अनकॉन्शियस स्टेट में. फ्रॉइड के अनुसार इंसान अपनी जिन डार्क इच्छाओं को दबाता है. जो पूरी नहीं होती. वो ईड स्टेट में आती है. अगला है ईगो. ईगो यानी अहम. आप खुद को क्या मानते हैं. खुद के प्रति कितने जागरुक हैं. ऐसी बातों से बनती है ये स्टेट. ईगो कॉन्शियस स्टेट यानी चेतन मन का पार्ट है. सुपर ईगो काम करता है मोरेलिटी के प्रिंसिपल पर. ये नैतिक मूल्यों पर और आपके अपने आदर्शों पर चलता है. मतलब एकदम आदर्शवादी किस्म का स्टेट. वहीं, ईगो को हम वास्तविक स्टेट कह सकते हैं. जो सुपर ईगो और ईड के बीच में डील करता है.

Three Floors 2
सिगमंड फ्रॉइड के सिद्धांतों पर आधारित है फिल्म का प्लॉट.

फ्रॉइड और उसके सिद्धांतों की ब्रीफ स्टोरी इसलिए बताई क्योंकि ‘थ्री फ्लोर्स’ इसी साइकोलॉजी पर आधारित है. कहानी है इस्राइली शहर की एक बिल्डिंग में रहने वाले तीन अलग-अलग परिवारों की. जिन्हें फ्रॉइड के तीन पर्सनैलिटी टाइप्स से दर्शाया गया है. फिल्म को डायरेक्ट किया है नान्नी मोरेत्ती ने. जिनकी 2001 में आई फिल्म ‘द संस रूम’ ने कान फेस्टिवल में पाम दॉर जीता था.


#4. बैनेदेता

डायरेक्टर: पॉल वरहोवन

लैंग्वेज : फ्रेंच और डच

पॉल वरहोवन. डच फिल्ममेकर हैं. कंट्रोवर्शियल किस्म के. अपने 40 साल से ज्यादा लंबे फिल्मी करियर में ‘रोबोकॉप’, ‘टोटल रिकॉल’, ‘बेसिक इंसटिंक्ट’, ‘ऐली’ और ‘हॉलो मैन’ जैसी फिल्में बना चुके हैं. जब भी उनकी फिल्म रिलीज़ होती है तो क्रिटिक्स दो पक्षों में बंट जाते हैं. कुछ उनपर स्त्री-विरोधी होने का लेबल लगते हैं. तो कुछ मानते हैं कि वो सेडिस्ट हैं. सेडिस्ट यानी ऐसा इंसान जो दूसरों की पीड़ा में अपनी खुशी ढूंढता हो. बावजूद ऐसी बातों के उनकी फिल्में फेस्टिवल्स में पसंद की जाती रही हैं. अवॉर्ड्स जीतती हैं.

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अपने सिनेमा की बदौलत पॉल वरहोवन हमेशा कंट्रोवर्सी में रहे हैं.

कान में प्रीमियर होने वाली उनकी फिल्म ‘बैनेदेता’ एक नन की बायोपिक है. नाम था बैनेदेता कार्लिनी. बैनेदेता एक लेस्बियन नन थीं. फिल्म की कहानी 17वीं शताब्दी में सेट है. बैनेदेता हाल ही में नन बनी हैं और इटली का एक कॉनवेंट जॉइन करती हैं. जहां उन्हें एक दूसरी नन से प्यार हो जाता है. उस दौर में ऐसे विचारों का तो कतई स्वागत नही था. इसलिए इसके बाद बैनेदेता के साथ जो होता है, वही पूरी फिल्म की कहानी है.


#5. बर्गमन आइलैंड

डायरेक्टर: मिया हैंसन लव

लैंग्वेज : इंग्लिश

इंगमार बर्गमन. वर्ल्ड सिनेमा के महान डायरेक्टर. मौत को भी एक किरदार देकर सदा के लिए जीवंत बनाने वाले डायरेक्टर. दुनियाभर के महान डायरेक्टर्स पर उनके काम का प्रभाव रहा है. बर्गमन स्वीडन के फोरा आइलैंड पर रहते थे. उसी आइलैंड पर उनका देहांत भी हुआ था. उस आइलैंड से उनके जुड़ाव की झलक उनके सिनेमा में भी मिलती है. उन्होंने अपनी फिल्म ‘पर्सोना’, ‘थ्रू अ ग्लास डार्कली’, ‘द पैशन ऑफ ऐना’ और ‘सीन्स फ्रॉम अ मैरिज’ उसी आइलैंड पर शूट भी की हैं. ‘बर्गमन आइलैंड’ इसी आइलैंड को बैकड्रॉप बनाकर रची गई कहानी है. एक फिल्ममेकिंग कपल बर्गमन के इस आइलैंड पर आते हैं. ताकि उन्हें लिखने की प्रेरणा मिल सके.

Bergman Island Movie
बर्गमन ने कितनी ही कहानियां अपने आइलैंड के इर्द-गिर्द बुनी.

हालांकि, धीरे-धीरे रियलिटी और फिक्शन की लाइन धुंधली पड़ने लगती है. जिसका सीधा असर उनके रिलेशनशिप पर पड़ने लगता है. मिया हैंसन की फिल्म ‘फादर ऑफ माई चिल्ड्रन’ ने कान फेस्टिवल 2009 में स्पेशल जूरी प्राइज़ भी जीता था. ‘बर्गमन आइलैंड’ कान के सबसे सर्वोच्च पुरस्कार ‘पाम दॉर’ के लिए भी कम्पीट कर रही है.


#6. लेज़ ओलंपियाड

डायरेक्टर: जैक ओडियार्ड

लैंग्वेज : फ्रेंच

2015 में एक फिल्म आई थी. ‘दीपन’. कहानी थी तीन श्रीलंकन रेफ्यूजीज़ की. फिल्म ने उस साल का पाम दॉर अपने नाम किया था. जैक ओडियार्ड ही उस फिल्म के डायरेक्टर थे. 2009 में आई जैक की फिल्म ‘अ प्रोफेट’ भी अकैडमी अवॉर्ड्स में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म की श्रेणी में नॉमिनेट हुई थी. अब जैक ‘लेज़ ओलंपियाड’ ला रहे हैं. जिसका इंग्लिश टाइटल है – Paris, 13th District. जैक के अलावा एक और वजह से इस फिल्म को लेकर फेस्टिवल सर्किट में हाइप बनी हुई है. वो है इसकी को-राइटर सेलिन सियामा. जिनकी डायरेक्ट की गई क्रिटिकली अक्लेम्ड फिल्म ‘पोर्ट्रेट ऑफ अ लेडी ऑन फायर’ को कौन भूला है भला! ‘लेज़ ओलंपियाड’ की कहानी को लेकर ज्यादा डिटेल रिलीज़ नहीं की गई हैं. बस इतना पता चल पाया है कि फिल्म न्यू यॉर्क के कार्टूनिस्ट एड्रियन टॉमिन के ग्राफिक नॉवल ‘किलिंग एंड डायिंग’ पर बेस्ड है. वैराइटी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कहानी 21वीं सदी में सेट एक लव स्टोरी है. जहां कुछ यंगस्टर्स प्यार और उससे उपजने वाली फीलिंग्स के कॉन्सेप्ट को समझने की कोशिश कर रहे हैं.

Jack Audiar
बताया जा रहा है कि जैक की ये फिल्म एक खूबसूरत सी लव स्टोरी है जो प्यार के कॉन्सेप्ट को समझने की कोशिश करती है.

#7. कम्पार्टमेंट नंबर 6

डायरेक्टर: यूहो कॉसमैन

लैंग्वेज : रशियन, फीनिश

सेम नाम से लिखे नॉवल पर बेस्ड है ये फिल्म. सोवियत संघ खत्म होने को है. इस सारे कोलाहल के बीच कहानी खुलती है एक औरत से. जो अपने टूटे हुए रिलेशनशिप से दूर भाग रही है. शांति चाहती है. अकेलेपन की तलाश में है. इसी के चलते ट्रेन के खाली कम्पार्टमेंट में चढ़ जाती है. लगा था कि यहां उसे कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा. लेकिन उसे कम्पार्टमेंट में मिलता है एक आदमी. ये शख्स उस औरत के बिल्कुल विपरीत है. बड़बोला है. बिना सोचे कुछ भी बोलने लगता है.

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सोवियत संघ के खत्म होने की घटना को बैकड्रॉप बनाया गया है.

महिला उससे पहले तो परेशान होने लगती है. लेकिन धीरे-धीरे दोनों में एक अजीब किस्म का बॉन्ड डिवेलप होने लगता है. ये फिल्म उनके इसी बॉन्ड की कहानी बताती है. फिल्म के डायरेक्टर यूहो पहले भी कान में कम्पीट कर चुके हैं. साल 2016 में. उनकी फिल्म ‘द हैप्पीएस्ट डे इन द लाइफ ऑफ ऑली मैकी’ ने कान के अ सर्टेन रिगार्ड सेक्शन में कम्पीट किया था और जीती भी.


#8. फ्लैग डे

डायरेक्टर: शॉन पैन

लैंग्वेज : इंग्लिश

जेनिफर वोगल ने एक किताब लिखी थी. अपने पिता पर. नाम था ‘फ्लिम फ्लैम मैन’. ये फिल्म उसी बुक पर आधारित है. कहानी है जेनिफर के पिता जॉन वोगल की. एक ठग जो दोहरी ज़िंदगी जी रहा था. लेकिन उसकी बेटी अधिकांश ज़िंदगी अपने पिता के इस सच से दूर रही. सच सामने आया जब 52 साल की उम्र में जॉन को अरेस्ट किया गया. करीब 20 मिलियन अमेरिकन डॉलर्स की राशि के नकली नोट छापने के आरोप में. जेनिफर को ये जानकारी एक अखबार से मिली. जिस पिता के साथ बचपन से रह रही थी, उसके सबसे बड़े सच की जानकारी उसे एक अखबार से मिली. लेकिन जॉन शुरू से क्रिमिनल था. कभी बैंक लूटने के जुर्म में, तो कभी किसी की हत्या करने की कोशिश में उसके खिलाफ कार्रवाई होती रही थी. जब जॉन पुलिस से भाग रहा था, तो जेनिफर पर क्या बीत रही थी. उसका वही अनुभव इस फिल्म के जरिए दिखाने की कोशिश की गई है. मशहूर एक्टर शॉन पैन ये फिल्म डायरेक्ट कर रहे हैं, और वे ही फिल्म में जॉन का किरदार निभा रहे हैं. शॉन इससे पहले 2007 में आई क्रिटिकली अक्लेम्ड फिल्म ‘इनटू द वाइल्ड’ भी डायरेक्ट कर चुके हैं.

Into The Wild
‘इनटू द वाइल्ड’ के डायरेक्टर शॉन पैन ने ही ‘फ्लैग डे’ भी बनाई है.

#9. नाइट्रैम

डायरेक्टर: जस्टिन कर्जेल

लैंग्वेज : इंग्लिश

साल 1996. तारीख 28 अप्रैल. वो दिन जिसने ऑस्ट्रेलिया को दहलाकर रख दिया. तस्मानिया में मार्टिन ब्रायंट नाम के शख्स ने उस सुबह अंधाधुन फाइरिंग शुरू कर दी. देखते ही देखते उसने मात्र 15 सेकंड्स में 12 जानें ले ली. जब तक मार्टिन को पकड़ा गया, उसके हाथ 35 मृत लोगों के खून से सने थे. हिरासत में लिए जाने के बाद मार्टिन ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया. जिसके बाद उसे 35 बार उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई. वो भी बिना किसी परोल के. ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में 28 अप्रैल का वो दिन पोर्ट आर्थर नरसंहार के नाम से जाना जाता है.

Nitram Movie
ऑस्ट्रेलियन इतिहास के सबसे भयानक शूटआउट पर बेस्ड है फिल्म.

उन निर्मम हत्याओं के ठीक 12 दिन बाद तब के प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड ने बड़े गन रिफॉर्म लाने का ऐलान किया. उससे पहले तक ऑस्ट्रेलिया में गन को एक जरूरत के सामान की तरह ट्रीट किया जाता था. जस्टिन कर्जेल की फिल्म ‘नाइट्रैम’ उसी मैसेकर पर बेस्ड है. फिल्म को लेकर बवाल भी काफी मचा हुआ है. लोगों को आशंका है कि फिल्म के ज़रिए लोगों के पुराने घाव फिर से खुल जाएंगे. हालांकि, विवादों के बीच मेकर्स ने कहा है कि वो फिल्म में मार्टिन का नाम तक इस्तेमाल नहीं करेंगे. लेकिन ये भी सच है कि फिल्म के टाइटल की स्पेलिंग इंग्लिश वर्ड मार्टिन को उलटा करके बनाई गई है.


#10. द स्टोरी ऑफ माइ वाइफ

डायरेक्टर: इलडिको एनयेडी

लैंग्वेज : जर्मन, हंगरियन और इटालियन

इलडिको की पिछली फिल्म ऑडियंस और क्रिटिक्स द्वारा खूब पसंद की गई थी. फिल्म थी ‘ऑन बॉडी एंड सोल’. जिस ने बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन बियर जीता. साथ ही अकैडमी अवॉर्ड के लिए भी नॉमिनेट हुई. ‘द स्टोरी ऑफ माइ वाइफ’ इसी नाम से लिखी 1942 में छपी किताब पर आधारित है. कहानी 1920 के दशक में सेट है. फिल्म का वन लाइनर है,

एक कैफे में बैठा जहाज का कप्तान अपने दोस्त से शर्त लगाता है कि कैफे में आने वाली पहली लड़की से वो शादी कर लेगा.

The Story Of My Wife 1
‘द स्टोरी ऑफ माइ वाइफ’ का फर्स्ट लुक.

सुनने में बड़ा फिल्मी लगता है. लेकिन उस कप्तान की कहानी फिल्मी मोड नहीं लेती. आगे जो होता है, वो बड़ा दिलचस्प है. क्योंकि एक लड़की कैफे में आती जरूर है. फिल्म में उस कैफे वाली लड़की का रोल निभाया है लिया सेदु ने. बतौर एक्टर, सेदु 2013 में आई अपनी फिल्म ‘ब्लू इज़ द वार्मेस्ट कलर’ के लिए पाम दॉर जीत चुकी हैं.


#11. लिंगुई

डायरेक्टर: महमत सालेह हारून

लैंग्वेज : फ्रेंच

सेंट्रल अफ्रीका में एक देश है. चैड. 1980 के दशक में वहां सिविल वॉर शुरू हुआ. जिस वजह से यहां के कई नागरिक देश छोड़ गए. इन्हीं में से एक था – महमत सालेह हारून. चैड के पहले फीचर फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर. महमत ने अप, क्लोज़ एंड पर्सनल लेवल पर मानव अधिकारों का दमन होते हुए देखा था. इसलिए यही आब्ज़र्वेशन उनके सिनेमा की नींव भी बना. 1982 से हारून फ़्रांस में रह रहे हैं. फिर भी उनकी अधिकतर फिल्मों की कहानी चैड में ही सेट थी. 2013 में उनकी फिल्म ‘ग्रिगरिस’ ने कान फेस्टिवल में पाम दॉर के लिए कम्पीट किया था. अब हारून फिर से कान लौट रहे हैं. अपनी फिल्म ‘लिंगुई’ के जरिए.

Lingui
हरून भले ही फ़्रांस में शिफ्ट हो गए, लकें उनकी कहानियां और उनके किरदार चैड में ही सेट होते हैं.

कहानी है अमीना और उसकी 15 वर्षीय बेटी मारिया की. अमीना को पता चलता है कि उसकी बेटी प्रेग्नेंट है. अबॉर्शन करवाना चाहती है, ताकि बदनामी से बच सके. लेकिन चैड में अबॉर्शन गैरकानूनी भी है और अनैतिक भी. अमीना इसी कश्मकश में फंसी है. आंतरिक और सामाजिक मतभेद से कैसे ऊपर उठ पाएगी, यही कहानी बताती है ‘लिंगुई’.


#12. एनेट

डायरेक्टर: लिओस करैस्क

लैंग्वेज : इंग्लिश

फ्रेंच डायरेक्टर लिओस करैस्क ‘एनेट’ के जरिए अंग्रेजी भाषी फिल्मों में अपना डेब्यू करने जा रहे हैं. इससे पहले उनकी फिल्म ‘होली मोटर्स’ भी कान आई थी. 2012 में. जहां फिल्म ने पाम दॉर के लिए कम्पीट किया था. अकैडमी अवॉर्ड नॉमिनी एडम ड्राइवर और अकैडमी अवॉर्ड विनर एक्ट्रेस मारियान कोटियार्ड ‘एनेट’ में लीड रोल निभा रहे हैं. कहानी है एक कपल की. पति स्टैंड अप कॉमेडियन है. और पत्नी एक सिंगर. दोनों अपनी-अपनी फील्ड में सफल हैं. लेकिन इनकी दुनिया बदल जाती है जब इनकी बेटी पैदा होती है. नाम है एनेट. यहां से कहानी एक डार्क टर्न लेती है. आगे दोनों के साथ क्या-कुछ घटता है और इससे उनके रिश्ते पर क्या असर पड़ता है, यही फिल्म का प्लॉट है.

Cannes Movies
ऊपर से लव स्टोरी लगने वाली ये कहानी बेहद डार्क है.

अमेज़न स्टूडियोज़ ने फिल्म के डिजिटल राइट्स खरीद लिए हैं. इसका मतलब ये है कि फिल्म 20 अगस्त, 2021 से अमेज़न प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम की जा सकेगी.


#13. एवरीथिंग वेंट फाइन

डायरेक्टर: फ्रैंसो ओज़ों

लैंग्वेज : फ्रेंच

मार्टिन स्कॉरसेज़ी ने कहा है कि सबसे ज्यादा पर्सनल ही सबसे ज्यादा क्रिएटिव होता है. ये बात ‘पैरासाइट’ वाले बॉन्ग जून हो ने भी अपनी ऑस्कर स्पीच में दोहराई थी. फ्रेंच डायरेक्टर ओज़ों ने भी अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर एक फिल्म बनाई. फिल्म थी 2003 में आई ‘स्विमिंग पूल’. जिसे क्रिटिक्स की पूरी सराहना मिली. ओज़ों मानते हैं कि उनकी फिल्में सेक्शुएलिटी जैसे सब्जेक्ट को पूरी संवेदनशीलता के साथ ट्रीट करती हैं. उनकी पिछली दो फिल्में, ‘यंग एंड ब्यूटीफुल’ और ‘द न्यू गर्लफ्रेंड’ इस बात का सुबूत भी हैं. ‘यंग एंड ब्यूटीफुल’ ने 2013 के कान फेस्टिवल में पाम दॉर के लिए भी कम्पीट किया था. हालांकि, ओज़ों की अगली फिल्म के लिए कहना मुश्किल है कि ये सेक्शुएलिटी जैसे टॉपिक पर बात करती है या नहीं. कम से कम सतही तौर पर तो नहीं. लेकिन ये कहानी पर्सनल जरूर है.

Swimming Pool
सेक्शुएलिटी जैसे सब्जेक्ट को सेंसिटिविटी के साथ कैसे हैंडल किया जाता है, वो बाकी डायरेक्टर्स को ओज़ों से सीखना चाहिए.

फ्रेंच लेखिका इमैनुअल बर्नहाईम ने ‘एवरीथिंग वेंट वेल’ के नाम से एक नॉवल लिखा था. अपने पिता आंद्रे और अपने रिलेशनशिप पर. 85 साल के आंद्रे को हार्ट अटैक आता है. आधा शरीर लकवाग्रस्त पड़ जाता है. आंद्रे अपनी बेटी इमैनुअल को बुलाते हैं. और एक इच्छा जाहिर करते हैं. इस दुनिया को छोड़ने की. चाहते हैं कि उनकी बेटी मरने में उनकी मदद करे. ये पल इमैनुअल को अपने पिता के साथ रहे जीवन भर के रिश्ते पर रिफ्लेक्ट करने पर मजबूर कर देता है. पिता की मर्जी मानती है या नहीं, इसी धुरी पर पूरी कहानी घूमती है. ओज़ों ने इमैनुअल के नॉवल को ही अपनी फिल्म के लिए अडैप्ट किया है.


#14. कैसाब्लांका बीट्स

डायरेक्टर: नबिल अयूश

लैंग्वेज : अरेबिक

लिस्ट में अगला नाम है ‘कैसाब्लांका बीट्स’. ‘कैसाब्लांका’ सुनते ही इसी नाम से बनी 1942 की हॉलीवुड क्लासिक फिल्म याद आती है. इंगरिड बर्गमन और हम्फ़्री बोगार्त वाली. खैर, उस फिल्म का ‘कैसाब्लांका बीट्स’ से कोई वास्ता नहीं. कान में स्क्रीन की जाने वाली ये फिल्म सेट है मोरक्को के शहर कैसाब्लांका में. डायरेक्ट किया है नबिल अयूश ने. जो मजबूत, सशक्त महिलाओं को परदे पर उतारने का सपना लिए फिल्में बनाते हैं. 2015 में नबिल की एक फिल्म आई थी. ‘मच लव्ड’. फिल्म की प्रोमोशन के दौरान नबिल इंटरव्यूज़ दे रहे थे. ऐसे ही एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि आपकी फिल्म ‘मच लव्ड’ चार प्रॉस्टिटयूट्स की कहानी है. नबिल ने सवाल पूछने वाले को झट से करेक्ट किया. कहा,

मेरी कहानी चार प्रॉस्टिटयूट्स की नहीं. बल्कि, चार महिलाओं की है जो पेशे से प्रॉस्टिटयूट्स हैं. दोनों बातों में फर्क है.

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नबिल कोशिश करते हैं कि स्क्रीन पर मजबूत महिलाओं के संघर्ष, उनकी कहानियां दिखा सकें.

इस एक स्टेटमेंट से आप अंदाज़ा लगा लीजिए नबिल के सिनेमा का. वैसे ‘मच लव्ड’ को आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं. रही बात उनकी नई फिल्म ‘कैसाब्लांका बीट्स’ की, तो उसकी कहानी का मुख्य किरदार है एक फीमेल रैपर. जो समाज की परंपराओं और एक लड़की से रखे जाने वाली उम्मीदों के बोझ का भार हिप हॉप के जरिए हल्का करना चाहती है.


#15. टाइटैन

डायरेक्टर: जूलिया डुकॉरनो

लैंग्वेज : फ्रेंच और बेल्जियन

2016 में एक हॉरर फिल्म आई थी. ‘रॉ’. कहानी थी एक शाकाहारी लड़की की जो पहली बार मांस चखती है. धीरे-धीरे मांस की तलब होने लगती है. आगे जो कुछ करती है, वो किसी हॉरर से कम नहीं होता. फिल्म 2016 के कान फेस्टिवल में प्रेमियर हुई थी. डायरेक्ट किया था जूलिया डुकॉरनो ने. अब जूलिया अपनी फिल्म ‘टाइटैन’ से फिर कान फेस्ट में लौट रही हैं. कहानी खुलती है एयरपोर्ट से. जहां एक लड़के की गिरफ्तारी होती है. जो बताता है कि उसका नाम एड्रियन है. वो बच्चा जो 10 साल पहले लापता हो गया था. ये खबर एड्रियन के पिता तक भी पहुंचती है. जो उसे घर ले आते हैं. इस घटना के कुछ दिन बाद उनके इलाके में मर्डर होना शुरू हो जाते हैं. उन मर्डर्स का एड्रियन से क्या कनेक्शन है, ये गुत्थी फिल्म सुलझाएगी.

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जूलिया की फिल्म ‘रॉ’, जिसे देख वक्त कितने लोगों को घिन्न आने लगी थी.

#16. मेमोरिया

डायरेक्टर: एपिचापॉन्ग विरासेदाकुल

लैंग्वेज : विभिन्न

थाई डायरेक्टर एपिचापॉन्ग की पहली फिल्म जो उन्होंने थायलैंड से बाहर जाकर शूट की है. फिल्म सेट है कोलंबिया में. लीड रोल में हैं टिल्डा स्विनटन. जो बनी हैं जेसिका. जेसिका अपने फार्म पर काम करती हैं. एक समस्या से जूझ रही है. रात को सो नहीं पाती. हर आधी रात को धम सी आवाज सुनाई देती है. इस बीच जेसिका को पता चलता है कि उसकी बहन बीमार है. बहन दूसरे शहर में रहती है. अब वो अपनी बहन से मिलने निकल पड़ती हैं. रास्ते में कुछ लोगों से मुलाकात होती है. जिन में से एक एगनेस. एक पुरातत्ववेत्ता. अपने एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. और दूसरा है हर्नन. इन दोनों से मिलने के बाद जेसिका का नजरिया बदलने लगता है. अपनी लाइफ की ओर. अपनी समस्याओं की ओर. ऐसा लगता है कि सब पानी जैसा साफ हो गया है. कोई दुविधा नही बची.

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लीड रोल में हैं टिल्डा स्विंटन.

ऊपर बताई गई ये 16 फिल्में पाम दॉर के लिए कम्पीट कर रही हैं. इनमें से कौन जीतेगी, इसका फैसला डायरेक्टर स्पाइक ली की अध्यक्षता वाली जूरी करेगी. जीते कोई भी, लेकिन उससे फिल्म सर्कल्स में इन फिल्मों के इर्द-गिर्द बने हाइप में कोई कमी नहीं आने वाली.


वीडियो: कान फिल्म फेस्टिवल 2021 में जाने वाली ये 10 फिल्में ‘मस्ट वॉच’ हैं!

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वेब सीरीज़ रिव्यू: द एम्पायर

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जिस शो की वजह से सस्ते आईटी ट्रोल्स को ओवरटाइम शिफ्ट में काम करना पड़ा, वो आखिर है कैसा?

दो महान वैज्ञानिकों की कहानी है 'रॉकेट बॉयज़', जिनका पूरा जीवन हम भारतीयों के लिए प्रेरणास्त्रोत है

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जानिए इस शो के बारे में सबकुछ.

फिल्म रिव्यू- चेहरे

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कैसी है अमिताभ बच्चन, इमरान हाशमी और रिया चक्रवर्ती स्टारर फिल्म 'चेहरे'?

‘मुंबई डायरीज़' ट्रेलर रिव्यू: 26/11 की भयानक रात को डॉक्टर्स के नज़रिए से दिखाने वाली सीरीज़

‘मुंबई डायरीज़' ट्रेलर रिव्यू: 26/11 की भयानक रात को डॉक्टर्स के नज़रिए से दिखाने वाली सीरीज़

स्पेशल इवेंट 'साहस को सलाम' में महाराष्ट्र के कैबिनेट मिनिस्टर आदित्य ठाकरे ने ट्रेलर लॉन्च किया.

वेब सीरीज़ रिव्यू: कार्टेल

वेब सीरीज़ रिव्यू: कार्टेल

क्या 'कार्टेल' में कुछ नया देखने को मिला या एक बार सेम ओल्ड गैंगस्टर स्टफ ने पका दिया?

मूवी रिव्यू: 200 हल्ला हो

मूवी रिव्यू: 200 हल्ला हो

उस सच्ची घटना पर आधारित फिल्म, जहां 200 औरतों ने एक आदमी को कोर्ट में घुस कर मार डाला.

नेटफ्लिक्स की नई सीरीज़ का ट्रेलर कैसा है, जिसमें हथौड़ा त्यागी पुतले से प्यार कर रहे हैं

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तीन दिग्गज डायरेक्टर अपनी-अपनी कहानियां एक सीरीज़ में लेकर आ रहे हैं.

शॉर्ट फ़िल्म रिव्यू: नियति चक्र

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टाइम ट्रेवल पर बनी ये शॉर्ट फ़िल्म कैसी है?

फिल्म रिव्यू- बेल बॉटम

फिल्म रिव्यू- बेल बॉटम

'बेल बॉटम' की सबसे अच्छी बात ये लगती है कि ये अक्षय कुमार ब्रांड ऑफ लाउड देशभक्ति सिनेमा नहीं बनती.