Submit your post

Follow Us

बाहुबली जैसी फिल्म बना ले, बॉलीवुड में इतना दम नहीं है

दरअसल तेलुगू में बनी बाहुबली-2 की जबरदस्त कामयाबी के बाद सभी यही सवाल पूछ रहे हैं–क्या बॉलीवुड भी बाहुबली जैसा कुछ बना सकता है? भारत में सिनेमा की ऑफिशियल भाषा हिंदी है. और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री यानी कि बॉलीवुड को हम भारत के फिल्म इंडस्ट्री का प्रतिनिधि मानते हैं. कोई भी और भाषा में बनी फिल्म को हम ‘क्षेत्रीय फिल्म’ का दर्जा दे देते हैं. यह नाइंसाफी उन अंग्रेजी चैनलों की देन है जिनका हेडक्वार्टर साउथ इंडिया में नहीं है.

इसलिए बाहुबली की जबरदस्त सफलता के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि- क्या मुंबई फिल्म इंडस्ट्री अपने पैसे और पावर के दम पर बाहुबली जैसा कुछ बना पाएगी? जवाब है नहीं. इसके और भी कई कारण हैं. बात सिर्फ टैलेंट की नहीं है. बॉलीवुड के पास जबरदस्त टैलेंट और टेक्नीशियन हैं. लेकिन तब भी बॉलीवुड बाहुबली जैसा कुछ नहीं बना सकती. इसके कारण ये हैं:

1. बॉलीवुड इतना खर्च नहीं कर सकता

बाहुबली-1 और 2 बनाने की पूरी लगात 430 करोड़ थी. आपको याद रखना चाहिए कि एसएस राजमौली ने हमेशा ही कहा था कि बाहुबली को ज्यादा से ज्यादा थियेटर में रिलीज करना चाहते हैं. मतलब उनका ऑडियंस सिर्फ साउथ इंडिया ही नहीं बल्कि पूरा देश था. फिर भी उन्होंने देश के बाकी हिस्सों से फिल्म स्टार को नहीं लिया. सिर्फ तमिल और तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री से लोगों को चुना. राजमौली को बाहुबली की स्टोरी और विजुअल्स पर पूरा भरोसा था. बॉलीवुड में एक फिल्म कितनी दूर तक जाएगी यह फिल्म के स्टार तय करते हैं. बॉलीवुड की सबसे मंहगी फिल्म जैसे ‘प्रेम रतन धन पायो’ (175 करोड़), ‘धूम-3’ (175 करोड़), ‘दिलवाले’ (165 करोड़) कटेंट के मामले में बेहद कमजोर हैं. इस फिल्म का ज्यादातर बजट एक्टर के फीस में चला जाता है. अब दूसरे मुद्दे पर आते हैं.

2. एक्टर की सैलेरी और ईगो

बाहुबली-2 के साउंड डिजाइनर पीएम सतीश ने हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस को एक इंटरव्यू दिया था. उन्होंने कहा था कि बाहुबली जैसी फिल्म तेलुगू इंडस्ट्री में बना पा रही है क्योंकि यहां पैसे प्रोडक्शन में खर्च होते है न कि चंद सितारों की फीस पर. अगर बॉलीवुड के किसी फिल्म का बजट 600 करोड़ है और इसमें से 100 करोड़ भी प्रोडक्शन पर खर्च कर दिया तो समझ लेना किस्मत अच्छी है. अगर कटेंट को महत्व दिया जा रहा है तो ज्यादातर पैसे उसी को दिए जाएंगे. बॉलीवुड में खान, रोशन, कपूर या कुमार अपनी सैलेरी को नहीं छोड़ सकते हैं. सैलेरी तो छोड़िए अपनी जिंदगी का 5 साल एक प्रोजेक्ट को दे दें, ऐसा भी नहीं हो सकता. ये मत भूलिए कि प्रभाष ने 5 साल तक कोई भी फिल्म साइन नहीं की थी.

prabhas

3. बॉलीवुड सिनेमा में धर्म से जुड़ी इमैजिनेशन की कमी

कार्ल मार्क्स ने कहा था कि धर्म जनता के लिए अफीम है. कितना सही कहा था. बाहुबली की दोनों ही फिल्में हिंदू धर्म के ग्रंथ महाभारत और कहानी अमर चित्र कथा से काफी हद तक प्रेरित हैं. बाहुबली-2 में धर्म से जुड़ी चीजें तो और भी ज्यादा है. तेलुगू, कन्नड़ और तमिल मसाला फिल्मों में यह बात तो और आम है. ऐसे में ये बिल्कुल भी हैरानी की बात नहीं है कि हिंदू बहुल देश में बाहुबली जैसी फिल्म को बहुत पसंद किया जा रहा है,

बॉलीवुड सिनेमा धीरे-धीरे कुछ ज्यादा सेक्युलर हो गया है. आज की फिल्म धर्म से जुड़ी नहीं होती है. इसलिए वे धर्म ग्रंथों से कहानियां लेने से भी डरते हैं. राजनीति और सरकार जैसी फिल्में महाभारत से कुछ हद तक प्रेरित हों भी जाएं तो उसकी कहानियां मसाले से दूर ही होती हैं. इसी वजह से बॉलीवुड फिल्में साउथ इंडिया में ज्यादा नहीं चलती है.

4. बड़े कॉन्सेप्ट वाली फिल्में बॉलीवुड में नहीं चलीं 

साउथ इंडिया में बड़े कॉन्सेप्ट और विजुअल इफेक्ट्स वाली ज्यादातर फिल्में ठीक-ठाक चली हैं. शंकर एनथिरन की ‘रोबोट’, राजमौली की पुरानी फिल्में ‘ईगा’, ‘मगधीरा’ और ‘रूद्रमादेवी’, सबने पैसे कमाए हैं. ऐसी फिल्मों मे ही राजमौली और प्रड्यूसर शौबू यारलागड्डा को बाहुबली जैसी फिल्म को बनाने की हिम्मत दी. लेकिन बॉलीवुड में ऐसी फिल्में नहीं चलती हैं. पिछले साल की ‘मोहनजोदारो’ या अमुराग कश्यप की ‘बॉम्बे वेलवेट’ इसके प्रमाण हैं. शाहरुख खान की बदौलत उनकी फिल्म ‘रा-वन’ ने पैसे कमाए थे. लेकिन ऐसा कुछ कमाल नहीं कर पाई जिसकी उम्मीद थी. ‘लव स्टोरी 2050’ तो बर्बाद ही हो गई, ‘क्रिश’ में विजुअल इफैक्ट्स को लेकर ऐसा कुछ भी नहीं जिसकी चर्चा की जाए.

ra-one

5. बॉलीवुड के पास राजमौली जैसा कोई नहीं है

राजमौली ने पूरी जिंदगी फिल्में बनाई हैं, जिसे शायद बाहुबली बनाने की तैयारी मान सकते हैं. उन्होंने सबसे पहले ‘मगधीरा’ बनाया यह देखने के लिए धर्म से जुड़ी कहानियों में किसी को दिलचस्पी है या नहीं. वो फिल्म हिट रही. उसके बाद इन्होंने ‘ईगा’ बनाई. एक सांइस फिक्शन, जिससे यह पता चले कि भारत की ऑडियंस कितना विजुअल इफैक्ट्स समझ सकती है. वो फिल्म भी चल गई. तब जाकर उन्होंने अपनी सारी ताकत लगाकर बाहुबली बनाई और ये जुआ भी सफल हो गया. बॉलीवुड में ऐसे विजन का कोई है ही नहीं. जिसने सिर्फ विजुअल इफैक्ट्स से बनने वाली फिल्मों पर काम किया हो. हॉलीवुड में जेम्स कैमरोन, पीटर जैक्सन और गुइलीर्मों देल तोरो जैसे फिल्मकार हैं. लेकिन बॉलीवुड ऐसा कोई नहीं हैं. बॉलीवुड में सबसे अच्छे फिल्मकार छोटे स्केल की फिल्में बनाते हैं. विजुअल एपिक बनाना बॉलीवुड के बूते की बात नहीं है.


ये भी पढ़ें:

बाहुबली-3 भी बनेगी, ये रही जानकारियां

ये मैसेज शेयर करने से पहले सच जान लो

‘बाहुबली-2’ के नाम एक और रिकॉर्ड जुड़ गया

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

क्या तनिष्क के बायकॉट से कंपनी को 2700 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया?

क्या तनिष्क के बायकॉट से कंपनी को 2700 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया?

पहले ही नाच पड़ने वाले पूरा सच जानकर खिसिया जाएंगे.

ये गेम आस्तीन का सांप ढूंढना सिखा रहा है और लोग इसमें जमकर पिले पड़े हैं!

ये गेम आस्तीन का सांप ढूंढना सिखा रहा है और लोग इसमें जमकर पिले पड़े हैं!

पॉलिटिक्स और डिप्लोमेसी वाला खेल है Among Us.

फिल्म रिव्यू- कार्गो

फिल्म रिव्यू- कार्गो

कभी भी कुछ भी हमेशा के लिए नहीं खत्म होता है. कहीं न कहीं, कुछ न कुछ तो बच ही जाता है, हमेशा.

फिल्म रिव्यू: सी यू सून

फिल्म रिव्यू: सी यू सून

बढ़िया परफॉरमेंसेज़ से लैस मजबूत साइबर थ्रिलर,

फिल्म रिव्यू- सड़क 2

फिल्म रिव्यू- सड़क 2

जानिए कैसी है संजय दत्त, आलिया भट्ट स्टारर महेश भट्ट की कमबैक फिल्म.

वेब सीरीज़ रिव्यू- फ्लेश

वेब सीरीज़ रिव्यू- फ्लेश

एक बार इस सीरीज़ को देखना शुरू करने के बाद मजबूत क्लिफ हैंगर्स की वजह से इसे एक-दो एपिसोड के बाद बंद कर पाना मुश्किल हो जाता है.

फिल्म रिव्यू- क्लास ऑफ 83

फिल्म रिव्यू- क्लास ऑफ 83

एक खतरनाक मगर एंटरटेनिंग कॉप फिल्म.

बाबा बने बॉबी देओल की नई सीरीज़ 'आश्रम' से हिंदुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं!

बाबा बने बॉबी देओल की नई सीरीज़ 'आश्रम' से हिंदुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं!

आज ट्रेलर आया और कुछ लोग ट्रेलर पर भड़क गए हैं.

करोड़ों का चूना लगाने वाले हर्षद मेहता पर बनी सीरीज़ का टीज़र उतना ही धांसू है, जितने उसके कारनामे थे

करोड़ों का चूना लगाने वाले हर्षद मेहता पर बनी सीरीज़ का टीज़र उतना ही धांसू है, जितने उसके कारनामे थे

कद्दावर डायरेक्टर हंसल मेहता बनायेंगे ये वेब सीरीज़, सो लोगों की उम्मीदें आसमानी हो गई हैं.

फिल्म रिव्यू- खुदा हाफिज़

फिल्म रिव्यू- खुदा हाफिज़

विद्युत जामवाल की पिछली फिल्मों से अलग मगर एक कॉमर्शियल बॉलीवुड फिल्म.