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BJP नेताओं ने ऐसा क्या ट्वीट कर दिया कि लोग 'डेली गार्डियन' और 'ऑस्ट्रेलिया टुडे' को याद करने लगे

8 मई, 2021. इस दिन भारत में एक आर्टिकल ख़ूब चर्चा में था. मेडिकल जगत के प्रतिष्ठित जर्नल ‘द लैंसेट’ ने मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की थी. जर्नल ने अपने संपादकीय में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कोरोना महामारी से निपटने की बजाय ट्विटर पर आलोचनाओं को दबाने में व्यस्त है. इस लेख में चुनावी रैलियों और धार्मिक आयोजनों की अनुमति देने के लिए भी सरकार को लताड़ा गया था.

अब ‘द लैंसेट’ के संपादकीय के जवाब में 17 मई को एक और आर्टिकल लिखा गया. इसे लिखा है, टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई में डिप्टी डायरेक्टर प्रफ़ेसर पंकज चतुर्वेदी ने. अपने ब्लॉग पर. उनके ब्लॉग का नाम है. ‘प्रो. पंकज चतुर्वेदी थॉट्स’. आर्टिकल का टाइटल है,

The editorial in the Lancet regarding India’s fight against covid is biased and misguided – a detailed rebuttal.

‘कोविड के ख़िलाफ़ भारत की जंग के संबंध में ‘द लैंसेट’ का संपादकीय पक्षपाती और दिशाहीन है – एक विस्तृत खंडन’

इस ब्लॉग का लिंक बीजेपी नेताओं की वॉल पर चमक रहा है.
इस ब्लॉग का लिंक बीजेपी नेताओं की वॉल पर चमक रहा है.

(आर्काइव लिंक)

सत्तापक्ष ने इसे पकड़ लिया है. डूबते को तिनके का सहारा वाली बात है. कोरोना से निपटने के इंतजामों को लेकर देश-दुनिया में आलोचनाओं से जूझ रही मोदी सरकार इस आर्टिकल के सहारे अब आलोचकों पर निशाना साध रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन समेत कई बीजेपी नेताओं ने ये आर्टिकल शेयर किया है. डॉ. हर्षवर्धन ने आर्टिकल के साथ ट्वीट किया,

8 मई को द लैंसेट में ‘इंडियाज़ कोविड-19 इमरजेंसी’ शीर्षक से छपे असंतुलित संपादकीय का निष्पक्ष खंडन. जब भारत में कोरोना संकट काफी गहरा है, ऐसे में लैंसेट जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका को निष्पक्ष रहना चाहिए था.

(आर्काइव लिंक)

अकेले डॉ. हर्षवर्धन ही नहीं बल्कि निर्मला सीतारामन, अनुराग ठाकुर, हरदीप सिंह पुरी, अमित मालवीय समेत कई दिग्गज बीजेपी नेताओं ने भी ये आर्टिकल शेयर किया. कुल मिलाकर, ये कोशिश की गई कि सरकार की बिगड़ी छवि को सुधारा जाए.

बीजेपी नेताओं ने अपने ट्विटर हैंडल्स पर इस आर्टिकल को शेयर किया है.
बीजेपी नेताओं ने अपने ट्विटर हैंडल्स पर इस आर्टिकल को शेयर किया है.

लेकिन ट्विटर की जनता ने इस कोशिश की पूरी पड़ताल कर दी. एक यूजर ने लिखा कि-

भारत के स्वास्थ्य मंत्री एक प्रतिष्ठित जर्नल का जवाब किसी दूसरे व्यक्ति के ब्लॉग पर लिखे ब्लॉग पोस्ट से दे रहे हैं. ये भारत के लिए शर्म की बात है.

(आर्काइव लिंक)

दूसरे यूजर ने लिखा,

जब भारत के स्वास्थ्य मंत्री लैंसेट के शोधपरक संपादकीय का जवाब किसी ऐसे ब्लॉग से देते हैं, जिसके थम्नेल में बिल्ली की तस्वीर लगी हो, तब देश के साथ-साथ देश के हेल्थ मिनिस्टर की कुशलता को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं.

(आर्काइव लिंक)

कई लोगों ने कहा कि अगर खंडन करना ही था तो सीधे लैंसेट में क्यों नहीं छपवा लेते? कइयों ने डॉ. हर्षवर्धन पर भारत की छवि खराब करने का आरोप भी लगा दिया. कई यूजर्स ने तंज कसा कि इस आर्टिकल को ‘द डेली गार्डियन’ और ‘ऑस्ट्रेलिया टुडे’ में छपवाना चाहिए था.

मशहूर ब्रिटिश अख़बार ‘द गार्डियन’ के नाम से मिलता-जुलता एक अख़बार है ‘द डेली गार्डियन’. पिछले दिनों इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढेर सारी बड़ाई छपी थी. उसमें लिखा था कि प्रधानमंत्री मोदी कोरोना को लेकर दिन-रात काम कर रहे हैं, लेकिन लोगों को ये सब नहीं दिखाई दे रहा है. सोशल मीडिया पर लोगों ने नकल की कोशिश और प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए जबरदस्त खिंचाई की थी.

डेली गार्डियन और ऑस्ट्रेलिया टुडे को लेकर लल्लनटॉप पर छपी ख़बर पढ़िए-

– PM मोदी की तारीफ करने वाले ‘द डेली गार्डियन’ की खुली पोल, लोगों ने स्टाफ पर मीम्स बना दिए/

– ‘डेली गार्डियन’ के बाद सरकार को डिफेंड करने आई ‘ऑस्ट्रेलिया टुडे’ के बारे में क्या पता चला?


वीडियो: नरेंद्र मोदी की तारीफ वाले द डेली गार्डियन पर ये वायरल मीम्स देख हंसके लोट रही जनता

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