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2021 की वो 12 नन्हीं, प्यारी फिल्में जो आपकी वॉचलिस्ट पर होनी ही चाहिए

कोरोना महामारी के लिहाज़ से भले ही 2021 को 2020 का वर्ज़न 2.0 कहा जाए, लेकिन सिनेमा के लिहाज़ से ऐसा कहना गलत होगा. इस साल हमने ‘मास्टर’ और ‘सूर्यवंशी’ जैसी बड़ी फिल्में देखीं, जिन्होंने साउथ और नॉर्थ बेल्ट में थिएटर्स को रिवाइव करने का काम किया. ’83’ और ‘सारपट्टा परमबरै’ जैसी असरदार स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्में देखीं. ‘कर्णन’ और ‘जय भीम’ जैसी सशक्त सोशल फिल्में देखीं. इन सभी फिल्मों में एक बात कॉमन थी, ये स्केल और रिचनेस के मामले में ये विशाल फिल्में थीं. जिसका एक असर ये हुआ कि इस साल आई कई छोटी-छोटी जेम्स को इन्होंने ढंक दिया.

हम उन्हीं लिटिल जेम्स के बारे में बताएंगे. 2021 की ऐसी नन्हीं फ़िल्में  जो उस्ताद निकलीं.

#1. रामप्रसाद की तेहरवी (हिंदी)

राइटर – डायरेक्टर: सीमा पाहवा

2
गुज़रे हुए शख्स से किसी को कोई मतलब नहीं.

कुछ साल पहले मेरे परिवार में एक बुजुर्ग का देहांत हो गया. उनके निवास स्थान पर पहुंचकर पाया कि पूरा परिवार जमा है. कुछ ऐसे लोग भी जिन्हें मैं पहली बार देख रहा था. इतने सारे लोग, लेकिन किसी को भी गुज़रे हुए शख्स से कोई सरोकार नहीं. सबका ध्यान अपनी ही हंसी-ठिठोली में था. इस साल यही सीन एक फिल्म में देखने को मिला. लखनऊ वाले रामप्रसाद नहीं रहे. उनके पैतृक घर में सारा कुनबा जमा हो जाता है, और उनकी तेहरवी तक जो ड्रामा घटता है, वही ‘रामप्रसाद की तेहरवी’ को इस लिस्ट में शामिल करता है.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स, जियो सिनेमा


#2. थिरिके (मलयालम)

डायरेक्टर्स: जॉर्ज कोरा, सैम ज़ेवियर
राइटर: जॉर्ज कोरा

1
फिल्म आपसे किसी भी तरह की दया की उम्मीद नहीं करती.

दो भाई हैं, थॉमस और इस्मु. थॉमस डाउन सिंड्रोम का पेशेंट है. इस किरदार को निभाने वाले गोपी कृष्णन खुद डाउन सिंड्रोम के पेशेंट है. ये फिल्म किसी भी तरह से ये उम्मीद नहीं रखती कि आप थॉमस के प्रति कोई दया दिखाएं, या उसे बेचारा समझें. बल्कि ये दो भाइयों के आपसी बॉन्ड की कहानी है, जो आपको ऐसा महसूस करवाती है मानो कोई अदृश्य होकर प्यारी सी झप्पी दे रहा हो.

कहां देखें: नीस्ट्रीम


#3. बिरियानी (मलयालम)

डायरेक्टर – राइटर: साजिन बाबू

Poster
‘बिरियानी’ का पोस्टर.

2021 में ही आई ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ में किचन को पितृसत्तात्मकता यानी पेट्रियार्की के रूपक की तरह इस्तेमाल किया गया. ‘बिरियानी’ फिल्म में चावल की खुशबूदार डिश का पर्पज़ भी कुछ ऐसा ही है. ये दिखाती है कि इंसान कैसे किसी दूसरे को बस मांस के टुकड़े की तरह देखते हैं, अपनी ज़रूरत पूरी हुई नहीं कि फेंक दिया. फिल्म की सेंट्रल कैरेक्टर ख़दीजा को भी ऐसे ही ट्रीट किया जाता है. वो ख़दीजा, जिसकी खोखली आंखें डराती हैं, वो आंखें जो सबकी जरूरतें पूरी कर-कर के थक चुकी हैं.


#4. मील पत्थर (हिंदी-पंजाबी)

डायरेक्टर: आइवन आयर
राइटर्स: आइवन आयर, नील मणिकांत

1
यहां अकेलापन एक किरदार की तरह महसूस होता है.

‘सोनी’ जैसी प्रशंसित फिल्म के डायरेक्टर आइवन आयर ने ‘मील पत्थर’ डायरेक्ट की है. ये फ़िल्म दुनियाभर के फिल्म फेस्टिवल्स में घूमने के बाद नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई. फिल्म का कैमरा हमें एक ट्रक ड्राइवर के साथ सफर पर ले चलता है, ऐसे सफर पर जिसकी शायद कोई मंज़िल नहीं. उसकी ज़िंदगी में पैंठ मार चुका अकेलापन देख डर लगता है. ‘उड़ता पंजाब’ और ‘केसरी’ में काम कर चुके सुविन्दर विकी ने फिल्म में ट्रक ड्राइवर का रोल निभाया है.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स


#5. पगलैट (हिंदी)

डायरेक्टर – राइटर: उमेश बिष्ट

2
सान्या के करियर की बेस्ट परफॉरमेंसेज़ में से एक.

कुछ ही महीने हुए थे संध्या की शादी को कि पति की डेथ हो गई. अत्यंत दुख की बात है, लेकिन समस्या है कि यहां दुख ही गायब है. संध्या को पति की मौत पर रोना नहीं आ रहा, बाकी उसके आसपास के लोग इतने आंसू बहा रहे हैं जैसे कोई कोटा पूरा करना हो. संध्या का दुख बाहर क्यों नहीं आ रहा, इस चक्कर में हर तरह का जुगाड़ अपनाया जाता है. लेकिन शायद उसके पीछे की वजह जानने में कोई इंट्रेस्टेड नहीं. सान्या मल्होत्रा ने संध्या का किरदार निभाया, और उनकी परफॉरमेंस फिल्म की हाइलाइट साबित हुई.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स


#6. सिनेमा बंडी (तेलुगु)

डायरेक्टर: प्रवीण कांड्रेगुला
राइटर्स: प्रवीण कांड्रेगुला, कृष्णा प्रत्युषा, वरुण वारिंगनती

2
सिनेमा के नाम एक लव लेटर.

एक गांव में सेट सिम्पल-सी कहानी. जहां गणपति ऑटो चलाते हैं. एक दिन अपने ऑटो में मिलता है महंगा कैमरा. उसे लेकर गांव के फोटोग्राफर वीरबाबू के पास जाते हैं, और यहीं से शुरू होता है दोनों का साथ मिलकर फिल्म बनाने का सफर. ये तो हमने आपको दो लाइन वाला प्लॉट बता दिया. बाकी फिल्म का ह्यूमर इंजॉय करने के लिए आप खुद फिल्म देखिए, वो ह्यूमर जिसकी जड़ें हमारी आम ज़िंदगी से निकली हैं. ‘सिनेमा बंडी’ सिनेमा के नाम एक प्रेम पत्र है, जिसे प्रोड्यूस किया है ‘द फैमिली मैन’ के क्रिएटर्स राज और डीके ने.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स


#7. सारा’ज़ (मलयालम)

डायरेक्टर: ज़्यूड एंथनी
राइटर: अक्षय हरीश

Poster
‘कुंबालंगी नाइट्स’ वाली एना बेन लीड रोल में हैं.

लिस्ट पर जो अगला नाम है, उसका वास्ता भी फिल्म और फिल्ममेकिंग से है, पर पूरी तरह नहीं. सारा नाम की लड़की एक फिल्म डायरेक्टर बनना चाहती है, कुछ ऐसा करना चाहती है जिससे लोग उसे याद रखें. वो अभी शादी और बच्चों के फेर में नहीं पड़ना चाहती. ऐसे में बड़ी दुविधा सामने आती है, जब पता चलता है कि वो प्रेग्नेंट है. यहां कहानी बदलती है और ऑडियंस से सीधा सवाल पूछती है, कि क्या एक औरत का अपने शरीर पर अधिकार है? फिल्म में ‘कुंबालंगी नाइट्स’ और ‘हेलेन’ वाली एना बेन ने सारा का सशक्त किरदार निभाया है.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#8. ऑपरेशन जावा (मलयालम)

डायरेक्टर – राइटर: तरुण मूर्ति

2
दो इंजीनियर जिन्हें जॉब नहीं मिल रही.

इस लिस्ट में फ़ील गुड फिल्मों के नाम तो काफी आ गए, अब बारी है एक थ्रिलर की. दो दोस्त हैं, बी. टेक कर चुके हैं लेकिन हाथ में जॉब नहीं. फिर एक नौकरी मिलती है जहां पुलिस के साथ मिलकर काम करते हैं. इस दौरान उन्हें तीन केसेज़ पर काम करने का मौका मिलता है, फिर ऐसी जांच चलती है जो एंड तक आपका अटेंशन बंटने नहीं देती. बस जब आप उस एंड तक पहुंचेंगे, तो अपना सिर पकड़ कर एक सवाल पूछेंगे, कि भाई यहां चल क्या रहा था.

कहां देखें: ज़ी5


#9. जिन्ने जम्मे सारे निकम्मे (पंजाबी)

डायरेक्टर: कैनी छाबड़ा
राइटर: नरेश कथुरिया

Poster
फिल्म का पोस्टर.

कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की जिनकी इच्छा है एक बेटी को जन्म देने की. क्यों? क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके चार बेटे किसी काम के नहीं, और उनकी कद्र नहीं करते. ये कहानी ‘बधाई हो’ के बाद के युग में घटती है, फिर भी चारों बेटे ये हज़म नहीं कर सकते. ये कहानी कैसे खत्म होती है, वो आप गैस कर लेते हैं. लेकिन उन इवेंट्स तक पहुंचने के दौरान क्या-कुछ घटता है, वही इस कॉमेडी फिल्म को उसके हिस्से का ड्रामा देता है.

कहां देखें: ज़ी5


#10. नांदी (तेलुगु)

डायरेक्टर – राइटर: विजय कंकामेडला

Poster
‘नांदी’ को हिंदी में भी बनाया जा रहा है.

सूर्या को एक हाई प्रोफाइल मर्डर केस में झूठे आरोप लगाकर फंसा दिया जाता है. उसके बाद उसे सालों तक जेल में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है. एक वकील उसका केस लड़ने के लिए आगे आती है. सूर्या अब सच तक पहुंचना चाहता है, वैसे भी सब कुछ खोने के बाद उसके लिए सच से ज़रूरी कोई दूसरी चीज़ नहीं. ‘नांदी’ को क्रिटिकल फ्रंट पर इतनी सराहना मिली कि अब उसका हिंदी रीमेक भी आने वाला है.

कहां देखें: आहा वीडियो


#11. आरकरियम (मलयालम)

डायरेक्टर: सानू जॉन वर्गीस
राइटर्स: सानू जॉन वर्गीस, अरुण जनार्दनन, राजेश रवि

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कोरोना काल में लगे लॉकडाउन की कहानी.

फिल्म का सेंट्रल पॉइंट है एक कपल, जो केरल के अपने होमटाउन में शिफ्ट होते हैं. कुछ दिन बीतते हैं कि देशभर में लॉकडाउन लगा दिया जाता है. लॉकडाउन का ज़िक्र हुआ तो समझ जाइए कि ये कहानी कौन से पीरियड में सेट है. फिल्म के टाइटल ‘आरकरियम’ का मतलब है कौन जाने. फिल्म खत्म होने तक हमें इस कौन जाने का जवाब तो मिल जाता है, लेकिन बदले में दोगुने सवाल हमारी आंखों में झांक रहे होते हैं, जिनके जवाब तक हम कभी नहीं पहुंचते.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#12. फोटो प्रेम (मराठी)

डायरेक्टर्स: गायत्री पाटिल, आदित्य राठी
राइटर: आदित्य राठी

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इस फ़ील गुड फिल्म को आप अमेज़न प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं.

हम सब को लाइफ के किसी-न-किसी पॉइंट पर एक सवाल आता है, कि हमारे जाने के बाद हमें कैसे याद रखा जाएगा. हमने जैसा दूसरों को महसूस करवाया, क्या उसके आधार पर हमारी छवि बनाई जाएगी. या फिर हम जैसे दिखते थे, उसके आधार पर. यही सवाल फिल्म में नीना कुलकर्णी के किरदार को भी आता है, जबकि उनके पास तो अपना एक फोटो तक नहीं. लगता है कि आने वाली पीढ़ियां उन्हें कैसे याद रखेंगी. कैमरा को देखकर भागने वालीं ये बुजुर्ग औरत अब किसी भी तरह अपनी सुंदर-सी फोटो खिंचवाना चाहती हैं. बस इतनी सी बात है, या शायद नहीं, क्योंकि एक परफेक्ट फोटो लेने के दरमियान जो घटनाएं घटती हैं, वो आपको ठहरकर सोचने पर मजबूर करती हैं.

इस लिस्ट में एक और नाम जुड़ सकता था, अगर वो फिल्म अपनी तय डेट पर रिलीज़ हो पाती तो. 03 दिसम्बर को नेटफ्लिक्स पर ‘कोबाल्ट ब्लू’ रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन अभी तक नहीं हुई और न ही नेटफ्लिक्स ने कोई अपडेट दिया. सचिन कुंडलकर ने फिल्म के लिए 2006 में इसी नाम से छपे अपने नॉवेल को अडैप्ट किया है.


वीडियो: 83, सारपट्टा परमबरै और खो-खो जैसी खेल से जुड़ी इस साल की शानदार फिल्में

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