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दीपिका से पहले ये फिल्में और सुपरस्टार्स एसिड अटैक का दर्द हमें महसूस करवा चुके हैं

दीपिका पादुकोण की मेघना गुलज़ार डायरेक्टेड फिल्म ‘छपाक’ का ट्रेलर आया है. एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की लाइफ पर बेस्ड है. ट्रेलर काफी हार्ड हिटिंग है. और अगर फिल्मी पहलू पर गौर करें, तो मेक अप और लुक वगैरह भी ऑन पॉइंट लग रहे हैं. इन्हीं वजहों से हर ओर फिल्म की  तारीफ हो रही है. भले ही फुल फ्लेज्ड एसिड अटैक पर बनने वाली ‘छपाक’ पहली फिल्म हो. लेकिन पहले भी बनी कुछ फिल्मों में लड़कियों पर एसिड फेंकने की घटनाएं प्लॉट का अहम हिस्सा रही हैं. वहीं कुछ फिल्मों के नाम में तो तेज़ाब था लेकिन फिल्म में कहीं इस इशू का कोई ज़िक्र नहीं था. हम ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में आपको नीचे बता रहे हैं.

# उयरे (2019)– मलयालम भाषा की फिल्म, जिसके नाम का मतलब है ऊंचाई. ये पल्लवी नाम की एक लड़की की कहानी है, जो पायलट बनना चाहती है. वो ट्रेनिंग लेने मुंबई जाती है. उसका एक पजेसिव बॉयफ्रेंड है. वो उससे कहता है कि वो ट्रेनिंग वगैरह छोड़कर उसके पास आ जाए. मना करने पर दबाव बनाने लगता है. दोस्तों के सामने बद्तमीज़ी करने लगता है. इसके बाद पल्लवी उससे ब्रेक अप कर लेती है. इसका बदला लेने के लिए वो पल्लवी के चेहरे पर तेज़ाब फेंक देता है. इससे पल्लवी का चेहरा एक साइड से जल जाता है. उसकी एक आंख से दिखना बंद हो जाता है. उसे पायलट बनने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है. वो अपना मामला कोर्ट में लेकर जाती है और साथ में पायलट बनने के सपने के लिए लड़ती है. इस फिल्म में पल्लवी का रोल पार्वती ने किया था. उन्होंने इरफान खान के साथ ‘करीब करीब सिंगल’ से 2018 में अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था. पिछले दिनों विजय देवरकोंडा के सामने ही उनकी फिल्म को मिसोजिनिस्ट कहने की वजह से चर्चा में थीं. इस फिल्म को मनु अशोकन ने डायरेक्ट किया था. ये उनकी डेब्यू फिल्म थी.

# अकीरा (2016)– ‘ग़जनी’ फेम ए.आर. मुरुगादॉस की हिंदी फिल्म. फिल्म का नाम उसके मेन कैरेक्टर के नाम पर है. कहानी अकीरा नाम की एक लड़की की है, जो कुछ गुंडों को एक लड़की के ऊपर एसिड फेंकते देख लेती है. उसकी गवाही की वजह से गुंडे पकड़े जाते हैं. गुंडे बदला लेने के लिए उसके चेहरे पर चाकू से कट मार देते हैं. इसके बाद अकीरा के पापा उसे सेल्फ डिफेंस की कोचिंग दिलाना शुरू कर देते हैं. एक दिन कोचिंग से घर लौटते वक्त वही गुंडे अकीरा के ऊपर एसिड अटैक करने की कोशिश करते हैं लेकिन एसिड उल्टा उनके ऊपर ही गिर जाता है. गुंडे पुलिस के सामने विक्टिम प्ले करते हैं कि अकीरा ने उनके ऊपर तेज़ाब फेंका है. इस आरोप में अकीरा को गिरफ्तार कर जुवेनाइल जेल में डाल दिया जाता है. आगे की कहानी में बहुत सारा एक्शन और क्रांति है लेकिन एसिड नहीं. फिल्म में अकीरा का रोल सोनाक्षी सिन्हा ने किया था. उनके साथ फिल्म में अनुराग कश्यप (फिल्ममेकर) और राय लक्ष्मी जैसे एक्टर्स ने काम किया था.

# बिग ब्रदर (2007)– सनी देओल की एंग्री यंग मैन जॉनर वाली फिल्म. दिल्ली में देव शर्मा नाम का एक लड़का अपने परिवार के साथ रहता है. सबकुछ सही चल रहा था कि देश के होम मिनिस्टर का बेटा उसकी बहन के ऊपर एसिड फेंक देता है. अब परिवार के पास दिल्ली छोड़कर जाने के अलावा कोई और चारा नहीं बचता. सब लोग मुंबई चले जाते है. और नई आइडेंटिटी के साथ रहने लगते हैं. लेकिन फिर देव (जो कि मुंबई में देवधर गांधी बन चुका) से उसकी मां इस घटना का बदला लेने के लिए कहती है. वो चाहती है देश में जो कुछ भी गलत हो रहा है, उसका बेटा उसे ठीक कर दे. बेटा निकलता है और गलत काम करने वाले लोगों को जान से मारने लगता है. एक विजिलांते ड्रामा फिल्म थी. हालांकि इस फिल्म का कॉन्सेप्ट इस कहावत पर बेस्ड लगता है कि लोहे को लोहा ही काटता है, जो इस फिल्म को कई पैमानों पर खराब कर देता है. फिल्म में सनी देओल के साथ प्रियंका चोपड़ा और फरीदा जलाल ने काम किया था. इस फिल्म को डायरेक्ट किया था गुड्डू धनोवा ने, जिन्होंने सनी को लेकर 1997 में ‘ज़िद्दी’ बनाई थी.

# गंगाजल (2003)– प्रकाश झा की पुलिसिया फिल्म, जो 1979-80 में भागलपुर (बिहार) में हुए अंखफोड़वा कांड (Bhagalpur Blindings) से प्रेरित थी. अंखफोड़वा कांड वो घटना थी, जिसमें पुलिसवालों ने जेल में 31 कैदियों की आंखों में तेजाब डाल दिया था. बिहार के तेजपुर नाम के फिक्शनल जिले में घटने वाली ये एक ईमानदार पुलिसवाले की कहानी है. अमित कुमार तेजपुर आते हैं पुलिस-क्रिमिनल-पॉलिटिक्स के नेक्सस की चक्की में पिसने लगते हैं. ज़ाहिर तौर पर इस फिल्म में आंखों में तेज़ाब डालने वाली घटना भी दिखाई गई थी. यहां तेज़ाब का ज़िक्र ‘गंगाजल’ नाम से किया गया था. हालांकि फिल्म में इस घटना को काफी हद तक जस्टिफाई भी कर दिया गया था. एक और सीन है, जब कुछ गुंडे किसी और पर एसिड अटैक करने जा रहे होते हैं और रास्ते में अमित कुमार की वाइफ की गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है. वो बाहर गिर जाती हैं और तेज़ाब की कुछ बूंदें उनके शरीर पर पड़ जाती हैं. फिल्म में अजय देवगन ने अमित कुमार और ग्रेसी सिंह (लगान फेम) ने उनकी पत्नी का रोल किया था. जिन अफसरों ने कैदियों पर ‘गंगाजल’ डाला था, उनके किरदार निभाए थे मुकेश तिवारी (गोलमाल के वसूली भाई), अनूप सोनी (क्राइम पेट्रोल), अयूब खान (दिल चाहता है) और चेतन पंडित (राजनीति) ने.

ये तो हो गईं वो फिल्में जिनमें एसिड अटैक कहानी का बड़ा हिस्सा था. लेकिन एसिड के नाम पर ‘एसिड फैक्ट्री’ और ‘तेज़ाब’ जैसी फिल्में भी बनी हैं, जिनका तेज़ाब या एसिड के किसी पर फेंके जाने से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन एक प्रोजेक्ट ऐसा था, जो बनता तो बड़ा दिलचस्प रहता. कंगना की बहन रंगोली चंदेल की बायोपिक. कॉलेज में एक लड़के ने प्रपोज़ल ठुकराए दिए जाने के बाद, रंगोली पर एसिड फेंक दिया था. साथ ही उन लड़कों ने कंगना को भी बुरी तरह से पीटा. इस अटैक में रंगोली के फेस का आधा हिस्सा जल गया था. उस साइड वाले आंख और कान भी खराब हो गए थे. रेटिना ट्रांसप्लांट करवाने के बाद आंख तो ठीक हो गई. लेकिन कान की हालत अब भी वही बनी हुई है. रंगोली के चेहरे की 54 सर्जरी हुई है. तो कंगना चाहती थीं कि वो अपनी बहन की बायोपिक बनाएं, जिसमें वो खुद काम करें. लेकिन रंगोली ने इसके लिए मना कर दिया और प्रोजेक्ट डिब्बाबंद हो गया. हालांकि ‘छपाक’ का ट्रेलर आने के बाद रंगोली ने ट्वीट कर फिल्म और इसे बनाने की पीछे की मंशा की तारीफ की. ट्वीट यहां देखिए:


नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2017 में आई डेटा के मुताबिक उस साल देशभर में कुल 252 एसिड अटैक हुए. 60 मामलों के साथ इस लिस्ट को उत्तर प्रदेश ने टॉप किया था. दूसरे नंबर था वेस्ट बंगाल, जहां तेज़ाब फेंकने के 54 मामले रिपोर्ट किए गए. 17 केस के साथ तीसरे नंबर पर रही दिल्ली और चौथा रैंक मिला था केरल को, जिनके यहां एसिड से हुए हमले के कुल 13 मामले दर्ज किए गए. यहीं पर सीन में आते हैं दीपिका पादुकोण और शाहरुख खान जैसे पब्लिक फिगर. दीपिका के लिए ‘छपाक’ में काम करना एक अच्छी शुरुआत है. सबसे पहली बात तो दीपिका के नाम पर ये फिल्म देखी जाएगी. और जितने लोग देखेंगे, उनमें तेजाब फेंकने जैसी चीज़ को लेकर जागरुकता आएगी. दीपिका को रेगुलर बॉलीवुड हीरोइन प्ले करने से फुर्सत मिलेगी. साथ ही ये चीज़ दूसरे एक्टर्स को भी ऐसे मसलों को छूने के लिए एनकरेज करेगी. और जहां तक शाहरुख खान के कॉन्ट्रिब्यूशन की बात है, तो वो मीर फाउंडेशन नाम का एक चैरिटी ऑर्गनाइजेशन चलाते हैं. ये संस्थान एसिड अटैक सर्वाइवर का इलाज करवाती है. उन्हें रिहैबिलिटेट करने में मदद करती है. उन्हें उनके पांव पर खड़ा करती है. मतलब उनकी ज़िंदगी को नॉर्मल बनाने की हरसंभव कोशिश करती है. अभी हाल ही में शाहरुख मीर फाउंडेशन पहुंचकर एसिड अटैक पीड़ितों से मिले थे और उनकी बेहतरी के बारे में बात की थी-

ये तो हो गई इंडिया की बात, अब पाकिस्तान की बात करते हैं. कोई कुछ अच्छा करे, तो उसे अप्रीशिएट करना चाहिए. 2012 में पाकिस्तान में एक डॉक्यूमेंट्री बनी. नाम ‘सेविंग फेस’. इसे डायरेक्ट किया था शर्मिन ओबेद चिनॉय ने. ये डॉक्यूमेंट्री, एसिड अटैक सर्वाइवर फाखरा यूनूस की लाइफ से प्रेरित थी. फाखरा ने डॉक्यूमेंट्री रिलीज़ होने के साल यानी 2012 में आत्महत्या कर ली. ‘सेविंग फेस’ को 2012 ऑस्कर (अकैडमी अवॉर्ड्स) और एमी अवॉर्ड्स में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री (शॉर्ट सब्जेक्ट) का अवॉर्ड मिला था. शर्मिन वो पहली पाकिस्तानी हैं, जिन्हें ऑस्कर मिला है. अगर समय हो, तो वो डॉक्यूमेंट्री आप यहां देख सकते हैं:


वीडियो देखें: जानिए छपाक ट्रेलर की पांच दिलचस्प बातें 

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