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कोई भी अपने बेटों के नाम ऐसे नहीं रखता जैसे इस हीरा कारोबारी बाबू वघाणी ने रखे हैं

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रावण, दुर्योधन और मृत्यु. भारतीय समाज में बुराई के पर्याय. दशहरे के पर्व पर बाक़ायदा रावण का पुतला फूंकते हैं. मां-बाप अपने बच्चों का नाम रावण या दुर्योधन नहीं रखते. इन्हें बुरा मानते हैं. लेकिन गुजरात के सूरत में रहने वाले बाबू वघाणी इन सब बातों में यकीन नहीं रखते. वो इसे अंधविश्वास करार देते हैं. इसलिए लिए उन्होंने अपने बेटों का नाम रखा है रावण और दुर्योधन. और घर का नाम रखा है मृत्यु.

बाबू वघाणी आठवीं पास हैं. लेकिन बताते हैं कि पढ़ने की ललक होने की वजह से उन्होंने लाओ-सू, कन्फ़्यूशियस, मूसा, शिंतो, मुहम्मद, जीजस, महावीर, बुद्ध समेत सभी बड़े दार्शनिकों को पढ़ा है. काफी साल पहले जब उनके बड़े बेटे का जन्म हुआ तो उन्होंने नाम रखा- रावण. कई लोगों ने नाक-भौं सिकौडीं, लेकिन बाबू नहीं पलटे. क़रीब 40 साल पहले जब उनके छोटे बेटे का जन्म हुआ तो उन्होंने नाम रखा दुर्योधन. वघाणी को पौराणिक पात्रों का नाम रखने में किसी भी तरह की बुराई नज़र नहीं आती. बाबू इतने में ही नहीं थमें. उन्होंने जब घर बनाया तो उसका नाम रखा- मृत्यु

1965 में भावनगर से सूरत आने वाले बाबू वघाणी हीरा व्यापारी हैं. उन्होंने हीरे पॉलिश करने से करियर की शुरूआत की थी. आज उनका खुद का व्यापार है. बाबू कहते हैं,

‘लोगों को रावण का पुतला जलाने के बजाय धर्म से जुड़े अंधविश्वासों को जलाना चाहिए. अंधविश्वास के लिए मेरे जीवन में कोई जगह नहीं है. इसे मैं बचपन से ही समझता हूं. लोगों को अंधविश्वास के खिलाफ संदेश देने के लिए ही अपने बच्चों और घर का नाम ऐसा रखा है.’

बाबू वघाणी की पत्नी लबूबेन वघाणी खुद को खुशकिस्मत मानती हैं. टीओआई से बातचीत में उन्होंने कहा-

‘मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरे पति भी मेरी जैसे समझ रखते हैं. मेरे माता-पिता ने कभी व्रत वगैरह नहीं रखे, तो मैंने भी नहीं रखे. न उन्होंने कभी पूजा की, न मैंने की. यही बात शादी के बाद चली. जब हमारे बड़े बेटे की एडमिशन के लिए स्कूल गए तो वहां टीचर हैरत में थे. लेकिन हम अपनी बात पर अड़े रहे और बेटे का नाम रावण ही रखा. मेरे बेटों की शादी में किसी तरह की दिक्कत नहीं आई.’

बाबू और लबूबेन के बेटे भी माता-पिता की राह पर हैं. वो भी रावण या दुर्योधन बुलाए जाने पर बुरा नहीं मनाते हैं. 40 साल के छोटे बेटे दुर्योधन का कहना है कि अपने ई-मेल और तमाम तरह के कागज़ात में वो दुर्योधन शब्द का इस्तेमताल करते हैं. उनके बड़े भाई रावण भी ऐसा ही करते हैं.


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