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कौन हैं वो पांच जज, जो 10 जनवरी से अयोध्या मामले की सुनवाई करेंगे?

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अयोध्या मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ करेगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली ये पीठ 10 जनवरी, 2019 से इस मामले की नियमित सुनवाई होगी. हम आपको उन पांच जजों के बारे में बता रहे हैं, जो इस मामले की सुनवाई करेंगे.

1. जस्टिस रंजन गोगोई

2 अक्टूबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायर हो जाएंगे. 3 अक्टूबर को जस्टिस रंजन गोगोई CJI पद की शपथ लेंगे.
जस्टिस रंजन गोगोई  3अक्टूबर, 2018 को चीफ जस्टिस बने थे.

जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस हैं. जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद 3 अक्टूबर, 2018 को जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने. ये पहला मौका था, जब कोई नॉर्थ ईस्ट से देश का चीफ जस्टिस बना था. जस्टिस रंजन गोगोई के पिता केशव गोगोई कांग्रेस पार्टी से असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. जस्टिस रंजन गोगोई के नाम बड़े-बड़े फैसले हैं.

# असम में जो एनआरसी रजिस्टर बना है, उसकी सुनवाई का जिम्मा जस्टिस रंजन गोगोई के पास ही था.

# 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकारी फंड से जारी विज्ञापनों में सिर्फ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की तस्वीर होगी. इस फैसले को देने वाली बेंच में जस्टिस रंजन गोगोई शामिल थे.

# मार्च 2015 में जस्टिस गोगोई और जस्टिस नरीमन की बेंच ने फैसला दिया कि जाट समुदाय को पिछड़ा स्टेटस नहीं दिया जा सकता.

# जनवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने उस वक्त के चीफ जस्टिस रहे जस्टिस दीपक मिश्रा के कामकाज से नाराज होकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इन चार जजों में जस्टिस रंजन गोगोई भी थे.

# जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चुनिंदा जजों में थे, जिन्होंने अपनी संपत्ति घोषित की थी और बताया था कि उनके पास एक भी कार नहीं है.
2. जस्टिस शरद अरविंद बोबडे

जस्टिस शरद अरविंद बोबडे भारत के अगले चीफ जस्टिस बनेंगे.
जस्टिस शरद अरविंद बोबडे भारत के अगले चीफ जस्टिस बनेंगे.

जस्टिस शरद अरविंद बोबडे इस बेंच के वो दूसरे जज हैं, जो अयोध्या मामले की सुनवाई करेंगे. जस्टिस बोबडे मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के बाद जस्टिस बोबडे ही सबसे वरिष्ठ जज हैं और जस्टिस गोगोई की रिटायरमेंट के बाद जस्टिस बोबडे की देश के अगले चीफ जस्टिस बन सकते हैं. जस्टिस शरद अरविंद बोबडे के नाम देश के कुछ बड़े फैसले हैं.

# जस्टिस शरद उस बेंच का हिस्सा थे, जिसने आदेश दिया कि आधार कार्ड न रखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को सरकारी फायदों से वंचित नहीं किया जा सकता.

# जब सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तो कॉन्फ्रेंस के बाद बार काउंसिल ने जस्टिस चेलमेश्वर से बात करने के लिए जस्टिस बोबडे से ही बात की थी.

# मई, 2018 में जब कर्नाटक में चुनाव हुए और किसी को बहुमत नहीं मिला, तो राज्यपाल ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए बुलाया. कांग्रेस इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची. रात 2 बजे से सुनवाई शुरू हुई और फैसला येदियुरप्पा के पक्ष में आया. येदियुरप्पा के पक्ष में फैसला देने वाली बेंच में शामिल थे जस्टिस बोबडे.

# सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर बैन को लेकर जो फैसला दिया था, उस फैसले वाली बेंच में शामिल थे जस्टिस बोबडे.

# कर्नाटक की लेखिका मेट महादेवी की किताब बसावा वाचना देवी पर कर्नाटक सरकार ने बैन लगा दिया था. मेट महादेवी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, जहां उनकी याचिका खारिज़ हो गई. याचिका खारिज़ करने वाले जजों की बेंच में जस्टिस बोबडे भी शामिल थे.

3. जस्टिस नूथलापती वेंकट रमन्ना

जस्टिस एनवी रमन्ना सुप्रीम कोर्ट की उस संवैधानिक पीठ का हिस्सा हैं, जो अयोध्या मामले पर सुनवाई करेगी.
जस्टिस एनवी रमन्ना सुप्रीम कोर्ट की उस संवैधानिक पीठ का हिस्सा हैं, जो अयोध्या मामले पर सुनवाई करेगी.

जस्टिस एनवी रमन्ना सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बनने से पहले दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस शरद अरविंद बोबडे के बाद जस्टिस एनवी रमन्ना ही सबसे वरिष्ठ जज हैं. जस्टिस बोबडे के बाद जस्टिस एनवी रमन्ना ही अगले चीफ जस्टिस बनेंगे. आंध्र प्रदेश के रहने वाले एनवी रमन्ना केंद्र सरकार और रेलवे के अलावा कई सरकारी संगठनों में पैनल काउंसल का काम कर चुके हैं. जस्टिस एनवी रमन्ना के कुछ अहम फैसले हैं-

# जस्टिस रमन्ना वाली बेंच ने फैसला दिया था कि एक संयुक्त परिवार में महिला कुछ खास स्थितियों में मैनेजर हो सकती है, लेकिन वो कर्ता नहीं हो सकती.

# जस्टिस एनवी रमन्ना की बेंच ने फैसला दिया था कि मंदिरों में अर्चकों की नियुक्ति मंदिरों के नियम, जिन्हें अगमास कहते हैं, के हिसाब से होगी. हालांकि ये सारी नियुक्तियां संविधान के दायरे में ही होंगी.

# किसी कंपनी पर जुर्माना लगाने वाला फैसला देते हुए जस्टिस एनवी रमन्ना की बेंच ने कहा था कि जुर्माने की रकम कंपनी के टर्नओवर के हिसाब से होगी.

4. जस्टिस यूयू ललित

जस्टिस यूयू ललित वकील परिवार से ताल्लुक रखते हैं.

मुंबई के रहने वाले जस्टिस उदय यू ललित वकीलों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता जस्टिस यू.आर. ललित एक क्रिमिनल लॉयर थे, जिन्हें बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया. जस्टिस यूयू ललित ने देश के कई हाई कोर्ट में बड़े-बड़े मुकदमों की पैरवी की है. इनमें सबसे बड़ा और हाई प्रोफाइल मुकदमा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का था, जिनपर सोहराबुद्दीन में फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगे थे. इसके अलावा जस्टिस यूयू ललित ने गुजरात में हुई तुलसीराम प्रजापति के मुठभेड़ में अमित शाह का नाम सामने आने के बाद उनका बचाव किया था. इसके अलावा जस्टिस यूयू ललित ही वो वकील थे, जिन्होंने ब्लैक बक और चिंकारा मारने के मामले में फिल्म अभिनेता सलमान खान का राजस्थान हाई कोर्ट में बचाव किया था. जब तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह की उम्र पर विवाद चल रहा था, तो यूयू ललित ही जनरल वीके सिंह के वकील थे. इतने बड़े-बड़े केसों की पैरवी करने वाले यूयू ललित ने देश के सबसे बड़े घोटाले कहे जाने वाले 1.76 लाख करोड़ रुपये के टूजी घोटाले में बतौर स्पेशल प्रोसिक्यूटर पैरवी की थी. उनके कुछ अहम फैसले हैं-

# जस्टिय यूयू ललित उस बेंच का हिस्सा थे, जिन्होंने तीन तलाक पर फैसला दिया था और इसे असंवैधानिक ठहराया था.

# जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने ही एससी-एसटी ऐक्ट पर फैसला दिया था, जिसके बाद पूरे देश में हंगामा हो गया था.

# जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने ही महिलाओं के उत्पीड़न के लिए बनी आईपीसी की धारा 498 A के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला दिया था.

# जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने ही हिंदू मैरिज ऐक्ट पर आदेश दिया था कि अगर रजामंदी से तलाक के केस में समझौते की गुंजाइश न हो, तो छह महीने का कूलिंग पीरियड खत्म हो सकता है.

5. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने इलाहाबाद हाई कोर्ट और बाम्बे हाई कोर्ट में रहते हुए भी कई अहम फैसले दिए हैं.
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने इलाहाबाद हाई कोर्ट और बाम्बे हाई कोर्ट में रहते हुए भी कई अहम फैसले दिए हैं.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस रह चुके हैं. उनके पिता जस्टिस यशवंत विष्णु चंद्रचूड देश के 16वें और अब तक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले चीफ जस्टिस रहे हैं. हॉर्वर्ड लॉ स्कूल, येल लॉ स्कूल , यूनिवर्सिटी ऑफ ऑस्ट्रेलिया और यूनिवर्सिटी ऑफ विट वाटर्सरैंड, दक्षिण अफ्रीका में गेस्ट लेक्चरर रह चुके हैं. जस्टिस चंद्रचूड के कुछ अहम फैसले ये हैं-

# बॉम्बे हाई कोर्ट का जज रहते हुए जस्टिस चंद्रचूड ने एक फिल्म की स्क्रीनिंग पर लगी सरकारी रोक के खिलाफ फैसला सुनाया था और कहा था कि सिविल सोसायटी में गवर्नेंस को असहमति की अभिव्यक्ति से बढ़ना चाहिए.

# समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने का फैसला जिस बेंच ने सुनाया था, उसमें डीवाई चंद्रचूड भी शामिल थे.

# 9 मार्च, 2018 को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की खंडपीठ ने कहा था कि अगर कोई बीमार आदमी चाहता है कि वो अब और जिंदा न रहे, तो उसे मरने का पूरा अधिकार है. इस फैसले में इच्छा मृत्यु की वसीयत (लिविंग विल) को स्वीकार किया गया था और जस्टिस चंद्रचूड इस बेंच का हिस्सा थे.

# सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के जाने का जो अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने दिया था, उस फैसले वाले बेंच में भी जस्टिस चंद्रचूड थे.

# अर्बन नक्सल और भीमाकोरेगांव वाले मामले की सुनवाई के लिए बनी बेंच में भी जस्टिस डीवाई चंद्रचूड थे. इन फैसलों के दौरान जस्टिस चंद्रचूड ने असहमति को जीवंत लोकतंत्र का सिंबल बताया था.


 

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